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'धार्मिक भेदभाव के आधार पर मेडिकल कॉलेज बंद होते हैं तो भारत नहीं बन सकता विश्वगुरु': जावेद राणा

बुधवार को ईटीवी भारत को दिए विशेष साक्षात्कार जम्मू-कश्मीर के मंत्री ने केंद्र सरकार पर जोरदार हमला किया.

Vaishno Devi Medical College Shut
जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा. (ETV Bharat)
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By Moazum Mohammad

Published : January 9, 2026 at 2:59 PM IST

6 Min Read
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श्रीनगरः जम्मू-कश्मीर के मंत्री जावेद राणा ने कहा कि किसी मेडिकल कॉलेज को सिर्फ इसलिए बंद कर देना कि वहां एक विशेष धर्म के छात्र पढ़ते हैं, 'पाषाण युग' वाली मानसिकता का प्रतीक है. उन्होंने जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में स्थित वैष्णो देवी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस (MBBS) कोर्स को बंद करने के नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के हालिया फैसले पर गहरा दुख व्यक्त किया.

बुधवार को ईटीवी भारत को दिए एक विशेष साक्षात्कार में जल शक्ति, पर्यावरण और जनजातीय मामलों के मंत्री ने कहा कि यदि देश में ऐसी मानसिकता को बढ़ावा दिया गया, तो भारत कभी भी 'विश्वगुरु' बनने का अपना सपना पूरा नहीं कर सकता. भाजपा के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर कटाक्ष करते हुए राणा ने कहा कि देश का नेतृत्व "राष्ट्र को 1,000 साल पीछे ले जाने का लक्ष्य रखता है, जबकि विकसित देश भविष्य के 1,000 साल की योजना बना रहे हैं."

"हम भारत को 'विश्वगुरु' बनाना चाहते हैं, लेकिन हमारे देश के भीतर हालात ये हैं कि हमने एक प्रतिष्ठित कॉलेज को सिर्फ इसलिए बंद कर दिया क्योंकि आप नहीं चाहते कि वहां एक खास धर्म के लोग रहें. मेरे राजनीतिक करियर में यह पहली बार हो रहा है कि हम ऐसी स्थिति में पहुंच गए हैं. मैं देश के नेतृत्व से अपील करता हूं कि वे ऐसे कदमों से बचें जो हमारी एकता और संप्रभुता को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमारे देश की छवि खराब हो सकती है."- जावेद राणा, मंत्री, जम्मू-कश्मीर

क्या है मामला

नवंबर 2025 में बने दक्षिणपंथी संगठनों के समूह 'श्री माता वैष्णो देवी संघर्ष समिति' ने 42 कश्मीरी मुस्लिम छात्रों को दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भेजने के लिए दबाव डाला था. इन छात्रों का दाखिला लगभग तीन महीने पहले योग्यता आधारित प्रतियोगी परीक्षा NEET के माध्यम से इस कॉलेज में हुआ था. समिति ने तर्क दिया कि श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड, जिसने इस कॉलेज की स्थापना की है, उसे चढ़ावा हिंदू तीर्थयात्रियों से मिलता है और इसका उपयोग केवल हिंदुओं के लिए ही किया जाना चाहिए.

लेकिन 'श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस' (SMVDIME) अल्पसंख्यक संस्थान के रूप में पंजीकृत नहीं है और इसे जम्मू-कश्मीर सरकार से अनुदान (ग्रांट) मिलता है (सत्तारूढ़ नेशनल कॉन्फ्रेंस के अनुसार, पिछले दो वर्षों में 50 करोड़ रुपये से अधिक), जिस कारण यहां धर्म के आधार पर प्रवेश देना संभव नहीं है.

6 जनवरी (2026) को, नेशनल मेडिकल कमिशन (NMC) के 'मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड' (MARB) ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए इस संस्थान को 50 सीटों पर एमबीबीएस कोर्स चलाने के लिए दी गई अनुमति (LoP) वापस ले ली.

राणा ने अफसोस जताते हुए कहा-"माता वैष्णो देवी कॉलेज जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों को समुदाय, जाति और धर्म से ऊपर होना चाहिए. आप चाहते हैं कि संस्थान बेहतरीन डॉक्टर या इंजीनियर तैयार करे, न कि लड़ने के लिए पहलवान. अगर आप पहलवान पैदा करना चाहते हैं या ऐसे लोग जो देश में खुलेआम मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) कर रहे हैं, तो फिर कोई क्या ही कह सकता है? यह समाज के लिए बहुत हानिकारक है."

नेशनल कॉन्फ्रेंस के वरिष्ठ नेता, जो पीरपंजाल क्षेत्र के जम्मू पुंछ जिले के एक प्रमुख आदिवासी नेता भी हैं, ने कहा कि मेडिकल कॉलेज का बंद होना जम्मू-कश्मीर के लिए हानिकारक होगा.

उन्होंने कहा, "इसने 'गंगा-जमुनी तहजीब' (हिंदू-मुस्लिम की मिली-जुली संस्कृति) की ताकत को कमजोर कर दिया है. मेडिकल कॉलेज को बंद करने के फैसले के खिलाफ लोगों में भारी आक्रोश है. यह एक विशेष संगठन के कुछ लोगों की साजिश थी, जिनकी राजनीति मंदिर-मस्जिद, हिंदू-मुस्लिम और क्षेत्रीय भेदभाव के इर्द-गिर्द घूमती है."

जम्मू के लिए अलग राज्य की मांग पर नाराजगी

राणा ने कहा, "भारत सरकार को स्थिति बिगड़ने से पहले फैसला लेना चाहिए और लोगों से किए गए वादों को पूरा करना चाहिए. उन्हें जम्मू-कश्मीर के लोगों के लिए कानून-व्यवस्था, राज्य का दर्जा और अन्य विशेष शक्तियां बहाल करनी चाहिए ताकि कानून-व्यवस्था नियंत्रित रहे और ऐसी स्थिति पैदा न हो जो हमारे देश की एकता और संप्रभुता को चुनौती दे सके."

मंत्री ने कहा कि कुछ भारतीय जनता पार्टी नेताओं द्वारा जम्मू के लिए अलग राज्य की मांग किए जाने के बाद, जम्मू-कश्मीर के और अधिक बंटवारे के लिए माहौल बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा, "हमारे पास एक पूर्ण राज्य था. फिर, जम्मू-कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया गया और लद्दाख को अलग से केंद्र शासित प्रदेश बना दिया गया. अब आप जम्मू को भी अलग करना चाहते हैं. आप हमें कहां ले जाना चाहते हैं? ऐसा बयान नहीं आना चाहिए था."

जम्मू-कश्मीर को राज्य का दर्जा बहाल करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसमें देरी हुई है और केंद्र सरकार को उस जनादेश का सम्मान करना चाहिए जो जनता ने नेशनल कॉन्फ्रेंस को दिया है. आरक्षण विवाद पर राणा ने कहा कि जम्मू-कश्मीर सरकार ने सभी हितधारकों की "संतुष्टि" के लिए नीति को तर्कसंगत बना दिया है. उन्होंने आगे कहा, "फाइल उपराज्यपाल (LG) के पास है और मुझे उम्मीद है कि वे इसे जल्द ही मंजूरी दे देंगे."

वन अधिकार अधिनियम (FRA) के तहत लंबित दावों पर मंत्री ने कहा कि अब जनजातीय मामलों के विभाग को FRA के लिए नोडल विभाग बना दिया गया है. उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की सराहना करते हुए कहा कि जनजातीय मामलों के विभाग को FRA दावों से निपटने की जिम्मेदारी देना एक अच्छा कदम है. राणा ने आगे कहा, "हम ब्लॉक और जिला स्तर पर सेल (इकाइयां) स्थापित कर रहे हैं। अब FRA के मामलों का निपटारा सुचारू रूप से किया जाएगा."

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