मराठा आरक्षण को लेकर मनोज जरांगे से जिला कलेक्टर ने कह दी ये बात
जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल और पुलिस अधीक्षक तेगबीर सिंह संधू ने मनोज जरांगे से मुलाकात की लेकिन बातचीत बेनतीजा रही.

Published : September 2, 2026 at 2:44 PM IST
जालना: मनोज जरांगे ने मराठा आरक्षण की मांग को लेकर अंतरवाली सराटी में एक बार फिर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिससे राज्य भर के प्रदर्शनकारियों में सरकार के खिलाफ फिर से गुस्सा भड़क गया है.
जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल और पुलिस अधीक्षक तेगबीर सिंह संधू ने मंगलवार देर रात मनोज जरांगे से मुलाकात की, लेकिन बातचीत बेनतीजा रही. जब जिला कलेक्टर ने जरांगे को सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में बताया, तो उन्होंने बार-बार कहा कि मौजूदा सरकार ने काबिल लोगों को भी आत्महत्या के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया है.
इस पर जिला कलेक्टर की प्रतिक्रिया ने वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया और विरोध प्रदर्शन वाले टेंट का माहौल पूरी तरह बदल गया. जालना के अंतरवाली सराटी में मराठा आरक्षण की मांग को लेकर भूख हड़ताल कर रहे मनोज जरांगे की तबीयत बिगड़ गई है.
इसलिए राज्य सरकार उन्हें विरोध प्रदर्शन वापस लेने के लिए मनाने की पूरी कोशिश कर रही है. इसी कोशिश के तहत जालना की जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल और पुलिस अधीक्षक तेगबीर सिंह संधू ने मंगलवार देर रात जरांगे से मुलाक़ात की. मुलाकात के दौरान, मित्तल ने मराठा आरक्षण को लेकर राज्य सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार से बताया. बातचीत के दौरान जरांगे कुछ निराश हो गए और जिला कलेक्टर से पूछा, 'क्या आप सरकार का पक्ष लेना चाहती हैं?'
इसके जवाब में आशिमा मित्तल ने कहा कि यह बस उनके काम का हिस्सा है. तब मनोज जरांगे ने कहा, 'सरकार की वजह से काबिल लोग भी आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं.' जरांगे ने इस मुद्दे पर प्रशासन और चुने हुए प्रतिनिधियों की आलोचना करने की बार-बार कोशिश की, लेकिन आशिमा मित्तल उनकी बातों का सही मतलब पूरी तरह नहीं समझ पाईं.
शायद उन्हें लगा कि जरांगे की बातें सीधे उन पर ही कही जा रही थी. इसलिए, उन्होंने यह कहकर वहां मौजूद लोगों को हैरान कर दिया, 'मनोज-जी, अगर कभी ऐसी नौबत आई कि मुझे अपनी ड्यूटी निभाते हुए आत्महत्या करनी पड़े, तो मैं इसके लिए भी तैयार हूँ.'
जिला कलेक्टर आशिमा मित्तल और पुलिस अधीक्षक तेगबीर सिंह संधू ने मंगलवार देर रात मनोज जरांगे की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल वाली जगह का दौरा किया. उन्होंने उनसे विरोध प्रदर्शन खत्म करने की अपील की. उन्होंने बताया कि राज्य भर में 309 लोगों ने मराठा आरक्षण की मांग के लिए अपनी जान दी है और सरकार ने उनके परिवारों को 10 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी है.
इसके अलावा सरकार 222 लोगों की सरकारी नौकरी की अर्जियों पर सकारात्मक रूप से विचार कर रही है. 58 लाख रिकॉर्ड से जुड़ी मांग पर तेजी से काम चल रहा है और लोगों के नाम ग्राम पंचायत स्तर पर जारी किए जाएंगे. उन्होंने बताया कि अगर जाति सत्यापन के दौरान कोई गड़बड़ी मिलती है या कोई सर्टिफिकेट रद्द किया जाता है, तो कमिश्नर के पास अपील की जा सकती है. कलेक्टर आशिमा मित्तल ने जरांगे पाटिल से भूख हड़ताल खत्म करने की अपील करते हुए कहा कि समुदाय को उनकी जरूरत है.

