नर्मदा तीरे 2000 नारियल पेड़ों का कोस्टल साम्राज्य, मीठे पानी का कोकोनट स्वाद करेगा राज
जबलपुर के किसान ने 10 साल में हजारों नारियल वृक्ष उगाए. नर्मदा के मीठे पानी वाले इलाके का लाजवाब स्वाद कोकोनट में समाया.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : December 26, 2025 at 8:56 PM IST
|Updated : December 27, 2025 at 1:11 PM IST
रिपोर्ट: विश्वजीत सिंह राजपूत
जबलपुर: नारियल की खेती समुद्र किनारे के इलाकों में की जाती है लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जबलपुर के एक किसान ने अपने खेत में 2000 नारियल के पेड़ लगाए थे जो अब भरपूर उत्पादन दे रहे हैं. किसान हर साल लाखों रुपए का नारियल बेच रहे हैं. जबलपुर के प्रगतिशील किसान अनिल पचौरी का कहना है कि यह खेती किसानों को करोड़पति बना सकती है. उन्होंने इसका सफल प्रयोग किया है. जबलपुर के अनिल पचौरी एक प्रगतिशील किसान परिवार से ताल्लुक रखते हैं. इनका परिवार खेती में नए-नए प्रयोग करता रहता है.
'दक्षिण भारत में देखी नारियल किसानों की समृद्धि'
किसान अनिल पचौरी ने बताया कि "वे आज से लगभग 10 साल पहले दक्षिण भारत घूमने गए थे, यहां उन्होंने नारियल की खेती करने वाले किसानों से मुलाकात की थी. वहां हमने उनकी समृद्धि देखी थी, पक्के मकान लग्जरी गाड़ियां देखकर यह एहसास हो गया था कि इनकी खेती में अच्छा मुनाफा है."

उन्होंने बताया कि "नारियल की खेती उत्तर भारत में खासतौर पर मध्य प्रदेश में कोई नहीं करता. शौक के लिए लोग नारियल के पेड़ जरुर लगाते हैं लेकिन इसे खेती के रूप में कोई नहीं अपनाता. इसलिए इस खेती को कैसे किया जाता है यह जानकारी भी किसी के पास नहीं थी."

'दक्षिण भारत से लाए 3 अलग-अलग वैरायटी के पौधे'
किसान अनिल पचौरी का कहना है कि "मैं कई दिनों तक दक्षिण भारत में उन्हीं किसानों के साथ रहा, उनसे खेती सीखी और इसके बाद 3 अलग-अलग वैरायटी के देसी किस्म के नारियल के पौधे लेकर मैं जबलपुर आया. आज से 8 साल पहले नारियल के 2000 पेड़ लगाए थे. इसके लिए जबलपुर के लम्हेटा घाट के पास जमीन खरीदी थी. यहां उस समय बिजली नहीं थी इसलिए सोलर ऊर्जा का सिस्टम लगाया था. बीते 8 सालों से भी लगातार इन पौधों की देखभाल कर रहे थे. पिछले 2 सालों से उनका उत्पादन शुरू हो गया है."

'48 रुपए प्रति नग के हिसाब से बेचा'
अनिल पचौरी बताते हैं कि "उन्होंने कई वैरायटी लगाई थी, इनमें k-48 और गोदावरी गंगा वैरायटी सफल है. इनमें उत्पादन आ रहा है. कुछ वैरायटी ऐसी भी हैं जो मध्य प्रदेश के वातावरण में बिल्कुल भी नहीं फलती फूलती. मार्च के महीने में उनकी फसल पककर तैयार हो जाती है. इस नारियल का उपयोग नारियल पानी के लिए किया जाता है. पूरा नारियल फार्म से ही बिक जाता है. पिछले साल 48 रुपया प्रति नग के हिसाब से नारियल बेचा था."
उन्होंने बताया कि "एक पेड़ से डेढ़ सौ से 200 फल मिल जाते हैं और यदि 48 रुपए का रेट मिलता है तो अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है. नारियल का पेड़ केवल नारियल के फल ही नहीं देता बल्कि इससे अच्छा कामपोस्ट तैयार करने के लिए कुछ छाल निकलती है जिसका इस्तेमाल करके कोकोपीट बनाया जाता है.

'नारियल के साथ आम की खेती फायदेमंद'
नारियल का पेड़ 8 साल में फसल देता है लेकिन 2 पेड़ों के बीच की दूरी 15 फीट की होती है. इसलिए इसके बीच में इंटरक्रॉपिंग करके किसान दूसरी फसले भी ले सकता है. अनिल पचोरी ने नारियल के बगीचे में ही आम का बगीचा भी लगाया हुआ है. उनका कहना है कि "मध्य प्रदेश में आम के बागान तेज हवाओं की वजह से नष्ट हो जाते हैं लेकिन नारियल के बीच में होने की वजह से तेज हवाएं आम को प्रभावित नहीं कर पातीं, इसलिए इस बगीचे में आम पूरी तरह सफल है."

सरकार दे रही नारियल पौधों पर अनुदान
नारियल की खेती में पानी बहुत अधिक लगता है. इसलिए इसे केवल ज्यादा पानी वाले इलाकों में ही उगाया जा सकता है. अनिल पचौरी का कहना है कि "अब नारियल का पौधा 1800 रुपए में मिलता है लेकिन सरकार भी अब इस पौधे पर 900 रुपए तक का अनुदान दे रही है. इसलिए यदि नए किसान इस खेती को अपनाते हैं तो अनुदान की वजह से उनकी लागत आधी हो जाएगी."

अनिल पचौरी का बागान देखने के लिए पहुंचे आलोक तिवारी का कहना है कि "जो प्रयोग अनिल पचौरी ने किया है वह उसे दोहराना चाहेंगे और वे भी 1 एकड़ में नारियल का बगीचा लगाएंगे. नारियल के पेड़ की उम्र 60 से 70 साल होती है. ऐसा कहा जाता है कि एक बार नारियल लगाने के बाद उससे 2 पीढ़िया उत्पादन ले सकते हैं."
- नारियल जैसे दिखने वाले पेड़ से निकलते हैं फल, शौक के साथ भरता है जेब
- संभाल कर रखें कोकोनट का खोल, छप्परफाड़ होगी कमाई, भर जायेगा खजाना
'किसानों को करना चाहिए नवाचार'
रिटायर्ड कृषि विस्तार अधिकारी रजनीश दुबे का कहना है कि "वे इस बगीचे से पहले से जुड़े हुए हैं और उन्होंने इस बगीचे को बढ़ते हुए देखा है. कृषि विभाग इसकी रिकमेंडेशन नहीं देगा लेकिन यहां पर नारियल की खेती का सफल प्रयोग किया गया है. परंपरागत खेती लोगों को उतना फायदा नहीं दे रही, इसलिए लोगों को इन नवाचारों को अपनाना चाहिए."
अनिल पचौरी का कहना है कि "वह दिन दूर नहीं जब मैं इन्हीं 2 हजार पेड़ों से साल का 1 करोड़ रूपया कमाऊंगा. नर्मदा किनारे की आबो हवा नारियल की खेती के लिए बहुत अच्छी है. यहां का नारियल बेहद स्वादिष्ट है, इसलिए जिन किसानों के पास पर्याप्त पानी है, उन्हें नारियल की खेती करनी चाहिए."

