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International Womens day 2026: डॉक्टर मिताली खोड़ियार छक्कू से फैला रही जागरूकता, बच्चों को मोबाइल से दूर करना लक्ष्य

Womens day 2026 रायपुर की शिक्षिका मिताली खोड़ियार अपनी विंट्रो डॉल के माध्यम से बच्चों को खेल-खेल में पढ़ाने का काम भी कर रही हैं.

Mitali Khodiyar
मिताली खोड़ियार (ETV Bharat Chhattisgarh)
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By ETV Bharat Chhattisgarh Team

Published : March 4, 2026 at 2:26 PM IST

8 Min Read
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रितेश कुमार तंबोली,संवाददाता

रायपुर : रायपुर के ब्राइटन इंटरनेशनल स्कूल की हिंदी टीचर डॉक्टर मिताली खोड़ियार ने शिक्षा और कला के क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. स्कूल में बच्चों को शिक्षा देने के साथ ही उन्होंने कठपुतली कला के माध्यम से लोगों को जागरुक करने का काम किया है. डॉ मिताली खोड़ियार छत्तीसगढ़ की पहली महिला वेंट्रिलोक्विस्ट के रूप में जानी जाती हैं.

विदेशी लोगों को सिखाती हैं हिंदी

डॉ मिताली खोड़ियार सिर्फ बच्चों को पढ़ाने का ही काम नहीं करती.बल्कि वो विदेशी लोगों को भी ऑनलाइन माध्यम से हिंदी भाषा भी सिखाती हैं. डॉक्टर मिताली बताती है कि विदेश के लोग भारत के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते हैं. डॉक्टर मिताली खोड़ियार की कुछ कृतियों का लंदन रेडियो में प्रसारण भी हुआ है.

मिताली खोड़ियार से खास बात (ETV Bharat Chhattisgarh)

बच्चों को मोबाइल की लत से रखना चाहती हैं दूर

डॉ मिताली की माने तो मौजूदा समय में बच्चे लंबे समय तक मोबाइल में लगे रहते हैं. उनके मोबाइल की इस लत को छुड़ाने के लिए भी यह कला कारगर साबित हो रही है. बच्चे भी इस कला के माध्यम से पढ़ाई करते हैं. उन्हें मोबाइल से छुटकारा भी मिल सकता है. कठपुतली की यह कला विदेश में ज्यादा चलन में है. अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर शिक्षा और अपनी कला को लेकर डॉक्टर मिताली खोड़ियार ने ईटीवी भारत से क्या कुछ शेयर किया, आइए जानते हैं.


कला और शिक्षा के क्षेत्र में आप कितने सालों से काम कर रहे हैं ?


जवाब : डॉक्टर मिताली खोड़ियार ने कहा कि मैं शिक्षा के क्षेत्र में 20 साल से कम कर रही हूं. मैं एक टीचर हूं विदेशियों को हिंदी भाषा की शिक्षा भी दे रही हूं. विदेश में रहने वाले बहुत से लोग हैं, जिनका सामना भारतीयों से होता है. होटल इंडस्ट्री में काम करने वाले के साथ ही कुछ ब्लॉगर और फिल्म मेकर जो चाहते हैं कि हिंदी में उनके कार्यों का प्रचार प्रसार हो इसमें भी मैं मदद करती हूंं. बहुत से विदेशी यूट्यूबर हैं जो भारत आते हैं और भारत के लोगों के बारे में जानना चाहते हैं, बात करना चाहते हैं, मिलना चाहते हैं. विदेशी भारतीय संस्कृति के प्रति बड़े जागरूक हैं. ऐसी में विदेशी हिंदी सीखना चाहते हैं. मैं पिछले 8 सालों से इस क्षेत्र से जुड़ी हूं और मैं स्कूल में हिंदी की टीचर हूं.

लोगों को कला के प्रति कैसे और किस तरह से जागरूक कर रहे हैं ?



जवाब : मेरा मुख्य उद्देश्य है कि जो बच्चे मोबाइल चलाते हैं, उन्हें इस लत से बाहर निकालना. मैंने देखा कि जब मैं पढ़ती थी तो बच्चे कहानी बहुत ध्यान से सुनते थे. मोबाइल चलाने वाले बच्चों से जब मैंने पूछा तो पता चला कि 5 से 6 घंटे बच्चे मोबाइल देखते हैं. बच्चों को कहानी सुनना भी अच्छा लगता है. ऐसे में मुझे लगा कि जरूर इस काम को करना चाहिए. कहानी और कला के क्षेत्र में तो मैंने नॉर्थ अमेरिका की बहुत ही अच्छी स्टोरी टेलिंग है. उनसे मैंने स्टोरी टेलिंग सीखी. मैं उनसे ऑफलाइन सीखी हूं. इसके लिए बकायदा उन्होंने मुझे प्रमाण पत्र भी दिया. स्टोरी टेलिंग की बारीकियां सीखने के बाद मैंने अपने पपेट के माध्यम से गांव की स्कूल के बच्चों को स्टोरी टेलिंग सिखाऊंगी. इसके साथ ही बच्चों को नैतिक शिक्षा दूंगी. जिससे बच्चे मोबाइल संस्कृति से बाहर निकाल सके बच्चों में कल्पनाशीलता कम हो गई है वह फिर से आए.


आपके पास एक विंट्रो डॉल है, जिसका नाम आपने बड़े प्यार से छक्कू रखा है क्यों ?


जवाब : इस डॉल का नाम मैंने छक्कू इसलिए रखा है क्योंकि यह मेरे बचपन का नाम है. मैं गुड़िया के माध्यम से अपना बचपन देखना चाहती हूं.

इस कला के माध्यम से आप लोगों को कैसे शिक्षा और प्रेरणा देती है ?



जवाब : जब मैं स्टोरी टेलिंग करती हूं तब मैं भी कहानी कहती हूं. मेरे साथ छक्कू भी कहानी कहती है. छक्कू बच्चों को मोबाइल से दूर रहने की सलाह देती है. बच्चे जो हैं कई बार माता-पिता की बात भी नहीं सुनते, कई बार बच्चे शिक्षक की भी बात नहीं सुनते, लेकिन वह गुड़िया जिसे बचपन से खेल रहे हैं. जब यह बात गुड़िया कहती है तो बच्चे पूरा विश्वास करते हैं. ऐसे में मुझे लगता है कि लोग छक्कू की बात ज्यादा मानते हैं.



इस कला को अपने कब और कैसे सीखा इसके माध्यम से लोगों को कैसे जागरूक कर रहे हैं ?


जवाब : अपनी कला के बारे में उन्होंने बताया कि इस कला की शुरुआत ऑनलाइन टीचिंग के दौरान हुई थी. बच्चे जो हैं म्यूट करके चले जाते थे. पूरा स्कूल परेशान था कि क्या किया जाए. एक दिन बच्चों को मैं पढ़ा रही थी मैंने सोचा बच्चों के लिए ऐसा क्या किया जाए, जिससे बच्चे अट्रैक्ट हो.फिर एक छोटे से पर्स में मैंने आंख और नाक बनाया, ऐसा करके बच्चों को पढ़ाया. बच्चे आने लगे और बड़े ध्यान से देखने लगे. इस बात को स्कूल की प्रिंसिपल मैडम ऑब्जर्व कर रही थी. प्रिंसिपल ने मुझे बुलाकर कहा कि आपकी क्लास बहुत अच्छी थी. उन्होंने कहा कि जो पपेट का सहारा लिया और प्रैक्टिस शुरू की. अभी भी मेरा प्रैक्टिस और अभ्यास जारी है. इसके बाद मैंने एक पपेट मंगाया और इसका होना भी जरूरी था. इस पपेट को डॉ मिताली ने अमेरिका से मंगाया है. हम दोनों मिलकर बच्चों के लिए काम कर रहे हैं.

आपकी कुछ कृतियां भी हैं जो विदेशी रेडियो में प्रसारित हुए हैं ?

जवाब :वह लगभग तीन चार साल पहले प्रसारित हुई थी, जो मिक्स क्लाउड लंदन रेडियो है. उनके द्वारा कहानियां मंगवाई जाती थी. इसकी जानकारी मुझे वेबसाइट के माध्यम से मिली थी. उन्होंने कहा कि अगर आपकी कहानी अच्छी होगी तो हम चूज करेंगे. इसके बाद मैंने अपनी कहानी भेजी जो छत्तीसगढ़ के जंगलों की कहानी है. उसे मैं भेजी उन्होंने स्वीकार किया और वह प्रसारित भी हुई थी.

कठपुतली कला छत्तीसगढ़ में आपके अलावा और कितने लोग हैं जो इस कला में माहिर है ?


जवाब : कठपुतली कला छोटी-छोटी कठपुतली के माध्यम से लोग सिखाते हैं. राजस्थान में जो रस्सी वाली कठपुतली होती है, जिसे हम हमेशा देखते हैं. लेकिन यह वेंट्रो डॉल वाली कला विदेश में ज्यादा प्रचलित है. छत्तीसगढ़ में कोई नहीं है. मैंने खोजने की बहुत कोशिश की. यह भी एक कठपुतली कला का प्रकार है. मैंने खोजा तो मुझे पता चला की वेंट्रिलोकोविजम है, जो विदेशों में ज्यादा प्रचलित है. यह एक जादुई कला से संबंधित है. पहले जो जादूगर थे वो लोग यही सब मनोरंजन के लिए किया करते थे. छत्तीसगढ़ में भी इस कला की शुरुआत होनी चाहिए.



कठपुतली कला में किस तरह से आवाज निकली जाती है और कितनी परेशानी होती है ?



जवाब : इसमें परेशानी तो होती है क्योंकि हम उसमें अपने गले से आवाज निकालते हैं. इसमें हम अपनी होंठ नहीं हिलाते ऐसा लगता है कि हम नहीं बोल रहे हैं. कठपुतली पूरी तरह से निर्जीव है. इसे हमें जिंदा करना पड़ता है. कठपुतली जब भी बोलती है हमें पूरी तरह सामंजस्य से बनाना होता है. हम क्या बोल रहे हैं. कठपुतली हाथ कैसे हिलाती है तो यह बहुत कठिन काम है. इस कला में पारंगत होने के लिए हमें चार से पांच घंटे की प्रैक्टिस जरूरी है.


8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाएगा. पहले महिलाओं के लिए उतनी स्वतंत्रता नहीं थी इसे आप किस रूप में देखते हैं ?


जवाब : सबसे पहले महिला बोल्ड हो जाएं. साहस कीजिए पढ़ने का. साहस कीजिए गलत को गलत बोलने का. साहस कीजिए अपनी कला को दिखाने का. साहस कीजिए जो जितना साहसी होगा उसकी किस्मत उतनी बेहतरीन होगी.


छत्तीसगढ़ के लिए क्या कहना चाहेगी आपकी छक्कू ?


जवाब :छत्तीसगढ़ खूब आगे बढ़े. लोग खूब पढ़े लिखे. छत्तीसगढ़ धरती स्वर्ग बन जाए. मुझे बहुत पसंद है. आई लव छत्तीसगढ़.

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