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जानिए! देश की पहली महिला रेडियोलाजिस्ट से लेकर AIIMS की डायरेक्टर बनने तक की डॉ. स्नेह भार्गवा की सफल दास्ताँ

Woman's Day 2026: डॉक्टर प्रोफेसर स्नेह भार्गवा को भारत में पहली सीटी स्कैन मशीन लाने के साथ मेडिकल फील्ड में बेमिसाल योगदान के लिए जाना जाता है.

एम्स की पहली महिला निदेशक रही डॉ. स्नेह भार्गवा की प्रेरणादायी कहानी
एम्स की पहली महिला निदेशक रही डॉ. स्नेह भार्गवा की प्रेरणादायी कहानी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Delhi Team

Published : March 3, 2026 at 10:17 PM IST

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Updated : March 4, 2026 at 1:59 PM IST

12 Min Read
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By- RAHUL CHAUHAN

नई दिल्ली: हर साल आठ मार्च को अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जाता है. इस दिन हम महिलाओं के अधिकारों और उनके संरक्षण की बात करते हैं, लेकिन कुछ महिलाएं ऐसी होती है. जिन्होंने अपने अप्रतिम कार्यों से अपनी जगह बनायी और उन्होंने अपनी पहचान खुद अपनी मेहनत के जरिए बनाई. यही नहीं आज हम उस दौर की बेमिसाल महिला शक्ति की बात करने जा रहे हैं, जिन्होंने जज्बे और मेहनत से रूढ़ियों और परंपराओं को तोड़ते हुए अपना मुकाम हासिल किया. जी हां हम बात कर रहे हैं दिल्ली एम्स की पहली महिला निदेशक रही पद्मश्री डॉक्टर प्रोफेसर स्नेह भार्गवा की.

डॉ. प्रोफेसर स्नेह भार्गवा मिसाल हैं ऐसी महिला शक्ति की, जिन्होंने उस जमाने में उच्च शिक्षा प्राप्त करके अपने आप को मेडिकल के फील्ड में स्थापित किया, जब लड़कियों की शिक्षा पर ही विशेष ध्यान नहीं दिया जाता था. लड़कियों को पढ़ाया नहीं जाता था. पंजाब के फिरोजपुर जिले में 23 जून, 1930 में जन्मी डॉक्टर स्नेह भार्गव ने ईटीवी भारत से विशेष बातचीत में बताया कि उनकी मां सिर्फ दसवीं पास थी. बाकी पूरा परिवार ज्यूडिशियल सर्विसेज में था. उनके दादा जज रहे थे और उनके पिताजी भी.

एम्स की पहली महिला निदेशक डॉ. प्रोफेसर स्नेह भार्गवा (ETV Bharat)

मां ने उच्च शिक्षा के लिए किया प्रेरित: डॉक्टर स्नेह अपने मां-बाप की पहली संतान थीं. उनकी मां खुद कम पढ़ी लिखी थी, लेकिन उनके अंदर बेटी को बहुत आगे तक पढ़ाने और कुछ बनाने की इच्छा थी. डॉ. स्नेह की मां 10वीं से आगे की खुद पढ़ाई करना चाहती थी. लेकिन, उनके मां-पिता ने उनकी आगे पढ़ाई नहीं कराई. जब वह 5 साल की हुईं तो उनके माता-पिता ने उन्हें डलहौजी (जो अब हिमाचल में है तब पंजाब में हुआ करता था) वहां के सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ने के लिए भेज दिया. वहां उनकी दसवीं तक की पढ़ाई हुई.

ज्युडिशियरी सर्विस में भेजना चाहता था परिवार: डॉक्टर स्नेह की दसवीं कक्षा में पढ़ाई के दौरान ही पिता का ट्रांसफर लाहौर हो गया क्योंकि लाहौर में भी सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल की एक ब्रांच थी, तो उन्होंने डलहौजी से वहां ट्रांसफर ले लिया. फिर उन्होंने अपनी आगे की पढ़ाई लाहौर से ही की. उस समय पर 12वीं कक्षा को एफएससी बोला जाता था. 10वीं पास करते-करते स्नेह भार्गवा ने तय कर लिया था कि उन्हें मेडिकल के फील्ड में जाना है.

डॉ. स्नेह भार्गवा का जीवन परिचय
डॉ. स्नेह भार्गवा का जीवन परिचय (ETV Bharat)

डॉक्टर स्नेह भार्गवा ने बताया,

मेरे माता-पिता मुझे भी जज बनाना चाहते थे. मां ने भी कहा कि तुम भी ज्यूडिशियरी की तैयारी करो तो मैंने उनको कहा कि इसके लिए अभी 2 साल का बीए और फिर 3 साल का एलएलबी करना पड़ेगा. इस तरह से 5 साल लगेंगे और अगर मैं एमबीबीएस करती हूं तो भी 5 साल में हो जाएगा. दोनों में समय उतना ही लगना है. इस बात पर मेरे माता पिता मुझे एमबीबीएस कराने के लिए राजी हो गए.

लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में दाखिला: उन्होंने बताया, बात 1948 की है तब तक भारत-पाकिस्तान का बंटवारा हो गया था. फिर एमबीबीएस में दाखिले के लिए एग्जाम दिया. उसमें मेरे पास दो चॉइस थी कि या तो मैं अमृतसर में या फिर दिल्ली में दाखिला लूं. मेरे पिता ने सुझाव दिया कि अमृतसर तो बॉर्डर सिटी है यहां भारत-पाकिस्तान में तनाव के चलते कोई ना कोई समस्या बनी रहेगी. इसलिए मुझे दिल्ली के लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज में दाखिला लेने के लिए कहा गया. लेडी हार्डिंग लड़कियों का ही कॉलेज था तो मुझे कोई कहीं समस्या नहीं हुई. बहुत अच्छे माहौल में मेरा एमबीबीएस पूरा हुआ. उसके बाद मैंने सोचा कि पीजी करना भी जरूरी है. मैंने पीजी के लिए रेडियोलोजी को चुना.

भारत में सुविधा ना होने पर जाना पड़ा विदेश: डॉ. स्नेह भार्गवा ने बताया कि जब मैंने रेडियोलॉजी में पीजी करने का निर्णय लिया तो मैंने इस बात का भी अध्ययन किया कि अपने देश में रेडियोलोजी से संबंधित पढ़ाई करने और प्रैक्टिकल के लिए यहां पर ना तकनीक है और न ही उस तरह की लेटेस्ट मशीनें हैं. इसलिए मैंने सोचा कि अगर यहां से रेडियोलॉजी की तो उसमें कोई कामयाबी नहीं मिलेगी. इसलिए मैं रेडियोलॉजी में पीजी के लिए विदेश चली गई और फिर मैंने विदेश से अपनी पीजी की पढ़ाई पूरी की.

डॉ.स्नेह भार्गवा का सम्मान और योगदान
डॉ.स्नेह भार्गवा का सम्मान और योगदान (ETV Bharat)

दिल्ली एम्स में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर नियुक्ति: उन्होंने बताया, रेडियोलॉजी से मेरी पीजी पूरी होने के बाद मैं जॉब की तलाश में जुट गई. 953 में मुझे दिल्ली एम्स में जॉब मिल गई, जहां असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर मेरी नियुक्ति हुई और फिर मैं काम में जुट गई. इस दौरान दिल्ली एम्स में खूब खुलकर काम करने का मौका मिला. धीरे-धीरे मैंने असिस्टेंट प्रोफेसर से एसोसिएट प्रोफेसर और फिर प्रोफेसर बन गई और मैंने पढ़ने पढ़ाने और नए बच्चों को मदद करना भी शुरू कर दिया.

पहली सीटी स्कैन मशीन लाने का श्रेय: डॉक्टर स्नेह भार्गवा ने बताया कि सन् 1895 में एक्स रे तकनीक की शुरुआत हुई थी. इसके बाद से पूरे इंडिया में एक्स-रे तकनीक ही चल रही थी. फिर 1911 में सीटी स्कैन की तकनीक आई तो उसको सीखने के लिए उसकी वर्कशॉप के लिए मैने विदेश आना-जाना शुरू किया. कई सारी वर्कशॉप करने के बाद मुझे सीटी स्कैन टेक्नोलॉजी की पूरी जानकारी हो गई. तब मैंने सरकार और एम्स प्रशासन से इस बात की डिमांड करनी शुरू की कि दूसरे देशों में सीटी स्कैन जैसी तकनीक आ गई है, जिससे और अच्छा डायग्नोसिस हो सकता है और मरीज को और अच्छा इलाज मिल सकता है. इसलिए हमें भी सीटी स्कैन मशीन एम्स में लगानी चाहिए. इसके लिए भी बड़ी मेहनत से व्यवस्था कराई, तब जाकर दिल्ली एम्स में साउथ ईस्ट एशिया की पहली सीटी स्केन मशीन लगाई गई. इसके बाद दिल्ली एम्स ने रेडियोलॉजी के फील्ड में नए-नए नवाचारों को अपनाया और दूसरे चिकित्सा संस्थानों ने भी हमसे सहायता ली.

इंदिरा गांधी के अंतिम पलों की गवाह रहीं डॉ.स्नेह भार्गवा
इंदिरा गांधी के अंतिम पलों की गवाह रहीं डॉ.स्नेह भार्गवा (ETV Bharat)

एम्स की पहली महिला निदेशक बनने का मौका: उन्होंने कहा, 31 अक्टूबर, 1984 को उनकी एम्स निदेशक के पद पर नियुक्ति की प्रक्रिया चल रही थी. उस समय अचानक तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को गोली लगने की खबर आई. उन्हें इलाज के लिए दिल्ली एम्स लाया गया. अचानक से एक व्यक्ति मेरे पास भागता हुआ आता है वह कहता है प्रधानमंत्री एम्स में आई हैं. मैं जाकर देखती हूं तो एक स्ट्रेचर पर इंदिरा गांधी की बॉडी पड़ी थी और उनको लगी गोलियों का कोई हिसाब नहीं था.

डायरेक्टर बनने के मसले पर विवाद: उन्होंने आगे कहा, इंदिरा गांधी की हत्या के बाद जो मेरे एम्स डायरेक्टर बनने के प्रतिद्वंदी थे उन्होंने और उनके लोगों की तरफ से चर्चा शुरू हुई कि अब मुझे एम्स की डायरेक्टर नहीं बनाया जाएगा क्योकि इंदिरा गांधी एक महिला थी तो उन्होंने महिला को एम्स की डायरेक्टर बनाने का निर्णय किया होगा. अब वह नहीं रही तो हो सकता है मुझे डायरेक्टर ना बनाया जाए. हो सकता है प्रधानमंत्री राजीव गांधी किसी पुरुष को ही एम्स का डायरेक्टर बनाएं. क्योंकि उन दिनों माना जाता था कि महिलाओं में प्रशासनिक क्षमता कम होती है. इसलिए एक महिला एम्स नहीं चला सकती.

रेडियोलॉजी टीचिंग, रिसर्च जैसे कामों को बढ़ावा: उन्होंने कहा, कई लोगों ने मुझे डायरेक्टर बनने के मामले में राजीव गांधी से मिलने की सलाह दी. मैं यह बात नहीं मानी. मैंने कहा कि मैं रेडियोलॉजी में प्रोफेसर हूं. विभाग की एचओडी हूं अगर मुझे निदेशक नहीं बनाया जाएगा तो प्रधानमंत्री की मर्जी है. मुझे बात करने की जरूरत नहीं है क्योंकि मुझे प्रोफेसर रेडियोलॉजी और एचओडी पद पर यहां काम करने में मुझे कोई दिक्कत नहीं है. हालांकि कुछ दिनों बाद मेरे एम्स के डायरेक्टर बनने का लेटर जारी कर दिया गया और फिर मैंने काम संभाल लिया. इसके बाद मैंने दिल्ली एम्स में कई बड़े काम किए. रेडियोलॉजी विभाग को मजबूत किया और टीचिंग, रिसर्च जैसे कामों को आगे बढ़ाया.

आज भी स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं डॉ. स्नेह भार्गवा
आज भी स्वास्थ्य क्षेत्र में सेवाएं दे रही हैं डॉ. स्नेह भार्गवा (ETV Bharat)

भारत सरकार ने पद्मश्री से किया सम्मानित: डॉक्टर स्नेह भार्गवा ने बताया, मैंने पूरी मेहनत और लग्न के साथ एम्स में सुधार करने के लिए काम किया. इसको देखते हुए भारत सरकार ने मुझे पद्मश्री सम्मान से सम्मानित किया. इससे मुझे और ज्यादा काम करने की प्रेरणा मिली और मैंने अपना बेस्ट एम्स को देने की कोशिश की. जीवन में हमेशा सीखते रहने की ललक आदमी को आगे बढ़ाती है. बता दें कि, डॉक्टर स्नेह भार्गवा के बाद आज तक भी किसी महिला को एम्स की डायरेक्टर बनने का मौका नहीं मिला है. डॉक्टर भार्गवा दिल्ली एम्स की अभी तक की एकमात्र महिला निदेशक रहने वाली महिला हैं.

सरकार के हेल्थ बजट को बताया बहुत कम: डॉक्टर स्नेह भार्गवा ने कहा कि मौजूदा समय में अगर हम मेडिकल सेक्टर की बात करें तो बहुत नई नई तकनीक आई हैं. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने भी हेल्थ सेक्टर में काफी क्रांतिकारी बदलाव किए हैं. पहले जांच करने के लिए मरीज को छू करके कई जगह देख करके जांच करनी पड़ती थी अब इस तरह की तकनीक मशीन भी आ गई है कि एक मरीज को बिना टच किए ही पूरा डायग्नोसिस किया जा सकता है. आज भारत दुनिया का सबसे बड़ी आबादी का देश है. उस हिसाब से केंद्र सरकार का हेल्थ के लिए दिया जाने वाला बजट बहुत कम है.

भारत में हेल्थ सेक्टर में सुधार के लिए काम की जरूरत: उन्होंने कहा, भारत में हेल्थ सेक्टर को सुधारने के लिए बहुत काम करने की जरूरत है. रेडियोलोजी के फील्ड में बड़े ही क्रांतिकारी परिवर्तन हुए हैं. सीटी स्कैन, एमआरआई और एक्सरे लेटेस्ट सुविधा भी इतनी उन्नत हो गई है कि बारीक से बारीक नस की भी सटीक जांच की जा सकती है. हमारे जमाने में तकनीक इतनी उन्नत नहीं थी तो ज्यादा मेहनत करनी पड़ती थी. अब तो डॉक्टर की कम मेहनत में मरीज को अच्छे इलाज मिल जाता है. मशीनों के साथ बहुत सारे काम हो जाते हैं. अब तो लेजर, लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी का जमाना है, जिसमें मरीज को छोटे-छोटे चीरे लगाकर ऑपरेशन हो जाता है. अस्पताल से जल्दी छुट्टी भी मिल जाती है.

हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में देश अभी बहुत पीछे: उन्होंने आगे कहा, मेडिकल के फील्ड में प्रोग्रेस तो बहुत हुई है, लेकिन हमारा देश अभी भी हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर के मामले में बहुत पीछे है. ग्रामीण क्षेत्रों में अभी तक ढंग के अस्पताल नहीं हैं. लोगों में अवेयरनेस की भी कमी है. कैंसर जैसी घातक बीमारी के बारे में लोगों को जानकारी नहीं है. वहीं जागरुकता की कमी होने की वजह से ही कैंसर का लास्ट स्टेज में पता चलता है, जिससे अधिकतर लोगों की मौत हो जाती है तो इन सब क्षेत्र में सरकार को काम करने की जरूरत है.

96 साल की उम्र में भी हैं एक्टिव: डॉ स्नेह भार्गवा अपना अनुभव स्टूडेंट को बांटने के लिए और अपनी सामाजिक जिम्मेदारी को समझते हुए आज भी सप्ताह में 2 दिन सीताराम भारतीय इंस्टिट्यूट में बच्चों को पढ़ाने जाती हैं, जबकि एक दिन वह दिल्ली एम्स में बच्चों को एम्स में मरीजों की जांच रिपोर्ट्स के रिसर्च और उसकी फाइंडिंग्स के बारे में बताने जाती हैं. कई पेचीदा केस स्टडी से बच्चों को किस तरह से सीख लेनी चाहिए वह यह भी उनको बताती हैं. डॉक्टर स्नेह भार्गवा ने अपने लिखने पढ़ने की ललक को अभी तक जिंदा रखा है. वह योग, प्राणायाम और अन्य एक्सरसाइज करके अपने आप को फिट रखे हुए हैं. अपने सभी दैनिक कार्य आज भी खुद से ही करती हैं.

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Last Updated : March 4, 2026 at 1:59 PM IST