अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में हैंडमेड उत्पादों से सुर्खियों में गुजराती दंपति, ₹25 हजार से ₹10 लाख तक का सफर
मंडी सरस मेले में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे, गुजरात से आए स्वयं सहायता समूह चलाने वाले दंपति. प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं तारीफ.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 19, 2026 at 1:42 PM IST
|Updated : February 19, 2026 at 2:50 PM IST
मंडी: इन दिनों छोटी काशी मंडी में अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव 2026 की रौनक देखते ही बन रही है. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में देश के विभिन्न राज्यों से भारी संख्या में लोग आए दिन मंडी पहुंच रहे हैं. मंडी की इंदिरा मार्केट में सजा सरस मेला न केवल ग्रामीण उत्पादों की खुशबू बिखेर रहा है, बल्कि आत्मनिर्भर भारत की मजबूत तस्वीर भी पेश कर रहा है. इस मेले में गुजरात से आए एक पति-पत्नी का जोड़ा अपनी मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास से हर किसी का ध्यान खींच रहा है.
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में सजा सरस मेला
अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव के उपलक्ष्य में मंडी के इंदिरा मार्केट में 16 से 25 फरवरी तक सरस मेले का आयोजन किया जा रहा है. इस मेले में हिमाचल प्रदेश सहित देश के करीब 14 राज्यों की भागीदारी है. हिमाचल के सभी 12 जिलों और मंडी जिला के सभी 14 विकास खंडों के स्वयं सहायता समूह इसमें शामिल हैं. मेले में कुल 96 स्टॉल लगाए गए हैं, जिनमें से 15 स्टॉल स्थानीय व्यंजनों को समर्पित हैं, जबकि अन्य स्टॉलों पर हैंडलूम, हस्तशिल्प, फूड प्रोसेसिंग और ग्रामीण उत्पादों की भरमार देखने को मिल रही है.
सरस मेले में आत्मनिर्भरता की मिसाल पेश कर रहे गुजराती दंपति
इस सरस मेले में गुजरात के सुरेंद्रनगर जिले से आए श्री कृष्णा सेल्फ हेल्प ग्रुप का स्टॉल लोगों को खासा आकर्षित कर रहा है. पूनम बेन इस समूह की अगुवाई कर रही हैं, जो अपने पति मकबाना नारायण भाई और बेटी के साथ यहां पहुंची हैं. उनके स्टॉल पर हैंडमेड बैग, बेडशीट, दीवान सेट, पोटली, टेबल क्लॉथ सहित कई अनोखे उत्पाद मौजूद हैं, जो पूरी तरह हाथ से तैयार किए गए हैं.

25 हजार से 10 लाख तक का सफर
कहते हैं अगर कुछ कर गुजरने की तमन्ना हो, तो इंसान सैकड़ों किलोमीटर का सफर भी तय कर लेता है. इस दंपति ने साल 2012 में सिर्फ 10 महिलाओं के साथ सरकारी योजनाओं के सहयोग से 25 हजार रुपए का ऋण लेकर अपने काम की शुरुआत की थी. मेहनत और लगन रंग लाई और यह राशि पहले 1 लाख, फिर 5 लाख रुपए तक पहुंच गई. अब 10 लाख रुपए का लोन दे रहे हैं. आज यह समूह करीब 40 से अधिक महिलाओं को रोजगार दे रहा है और कई परिवारों की आजीविका का साधन बन चुका है.

महिला सशक्तिकरण योजनाओं से महिलाओं को बड़ा सहारा
पूनम बेन कहती हैं, "केंद्र सरकार, खासकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाई जा रही महिला सशक्तिकरण योजनाओं से महिलाओं को बड़ा सहारा मिला है. सरकारी मदद से महिलाएं घर बैठे काम कर रही हैं, जिससे न केवल घर की आमदनी बढ़ी है बल्कि बच्चों की पढ़ाई भी बेहतर हो पाई है. सरस मेले में हमारे उत्पादों को काफी पसंद किया जा रहा है. यह हमारे लिए बहुत अच्छी बात है. हिमाचल का वातावरण तो अच्छा है ही, साथ ही मंडी की जनता ने हमें भरपूर प्यार दिया है और यहां उनके उत्पादों की अच्छी बिक्री हो रही है."

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी कर चुके हैं तारीफ
वहीं, पूनम बेन के पति मकबाना नारायण भाई का कहना है कि, हमारे पास जो हैंडमेड उत्पाद मौजूद हैं वो देश के किसी और कोने में आसानी से नहीं मिलते. उन्होंने बताया कि वर्ष 2013 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब सूरत के एक मेले में उनसे मुलाकात हुई थी और उन्होंने उनके काम की सराहना की थी. मकबाना नारायण भाई कहते हैं, "शुरुआती दौर में काम करना कठिन था, लेकिन अब सरकार की सहयोग से हमारा काम काफी अच्छा चल रहा है. आज इस समूह से जुड़कर कई बहनें अपना परिवार बखूबी चला रही हैं."

गुजराती स्वयं सहायता समूह को मिल रहा मंडी की जनता का प्यार
वहीं, सरस मेले में घूमने आईं स्थानीय निवासी शैलजा कहती हैं, "गुजरात से आए इस पति-पत्नी के जोड़े के उत्पाद बेहद आकर्षक और उपयोगी हैं. खासकर पोटली जिसका इस्तेमाल पूजा-पाठ और शादियों में किया जा सकता है. इन्होंने प्रोडेक्ट में जो धागे लगाए हैं वो भी बहुत स्पेश है. नवरात्रि के लिए भी पोटली बहुत अच्छा रहेगा, इसमें पूजा का सामान और पैसे भी डाल सकते हैं."

सरस मेले से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती
उपायुक्त मंडी अपूर्व देवगन ने कहा कि, "सरस मेला स्वयं सहायता समूहों को बाजार से जोड़ने की दिशा में एक सार्थक प्रयास है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल रही है. अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में लगने वाला सरस मेला न सिर्फ खरीदारी का केंद्र है, बल्कि आत्मनिर्भरता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण भारत की मेहनत की एक जीवंत मिसाल भी है जहां सपने, हुनर और मेहनत एक साथ नजर आते हैं. इस साल भी सरस मेले में इसके उदाहरण उभरकर सामने आ रहे हैं."

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