अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स विरोधी दिवस: नशे ने उजाड़े परिवार, चंडीगढ़ PGI बना सहारा, मुफ्त में हो रहा मरीजों का इलाज
चंडीगढ़ पीजीआई का ड्रग डी-एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है.

Published : June 26, 2026 at 3:03 PM IST
चंडीगढ़: नशे का कारोबार अब सिर्फ पुलिस की केस डायरी का हिस्सा नहीं रहा, बल्कि ये हजारों परिवारों की बर्बादी, युवाओं के बिखरते भविष्य और समाज की संवेदनहीनता की कहानी बन चुका है. हर घटना ये सवाल छोड़ जाती है कि आखिर ये जहर युवाओं तक पहुंच कैसे रहा है? इसे रोकने की जिम्मेदारी किसकी है? फरीदाबाद और करनाल की घटनाएं पढ़कर शायद आप भी ये सब सोचने को मजबूर हो जाएंगे.
फरीदाबाद में पत्नी का सौदा: फरीदाबाद में नशे की लत को पूरा करने के लिए पति ने अपनी पत्नी का एक लाख रुपये में सौदा कर दिया. विरोध करने पर पति ने उसके साथ बेरहमी से मारपीट की. पत्नी के मुताबित नशे की लत के पूरा करने के लिए उसके पति ने उसके गहने तक बेच दिए. कुछ नहीं बचा तो उसका सौदा कर दिया. शिकायत दर्ज करने जब पत्नी थाने पहुंची, तो पुलिस ने ये कहकर लौटा दिया कि ये पारिवारिक मामला है. जब मीडिया ने दबाब बनाया, तब जाकर पुलिस अधिकारी कार्रवाई की बात कहते नजर आए.
नशे की लत को पूरा करने के लिए भाई की हत्या: करनाल में नशे की लत को पूरा करने के लिए युवक ने सगे भाई की हत्या कर दी. भाई ने पैसे देने से इंकार किया तो आरोपी ने गले पर कांच की बोतल से ताबड़तोड़ हमला किया. जिससे उसके भाई की मौत हो गई. फरीदाबाद और करनाल की ये घटनाएं एक ऐसे खतरे की चेतावनी हैं, जो आने वाली पीढ़ी के भविष्य पर हमला कर रही हैं. सवाल अब ये है कि ड्रग्स पर लगाम कैसे लगाई जाए. जिन्हें इसकी लत लग जाती है, क्या उनका इलाज संभव है?
ईटीवी भारत का 'भारत अगेंस्ट ड्रग्स' अभियान: ईटीवी भारत अपने 'भारत अगेंस्ट ड्रग्स' अभियान के तहत भारत के विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहा है और नशे की समस्या की व्यापकता को गहराई से दर्शा रहा है. हिमाचल प्रदेश से केरल, बिहार से महाराष्ट्र, असम से मध्य प्रदेश तक, कई राज्यों में किए गए जमीनी शोध से प्राप्त आंकड़े बताते हैं कि हमें अब जागने की जरूरत है. आंकड़ों के अनुसार, भारत में लगभग 37 करोड़ लोग किसी ना किसी रूप में नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं. इससे होने वाला आर्थिक नुकसान करोड़ों रुपये में है. जब परिवार में कोई व्यक्ति नशे का आदी हो जाता है, तो परिवार को उसे बचाने और उसकी लत का खर्च उठाने के लिए अपनी संपत्ति और गहने बेचने पड़ते हैं.
अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स विरोधी दिवस: आज नशीली दवाओं के दुरुपयोग और अवैध तस्करी के खिलाफ अंतर्राष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है. ड्रग्स पर लगाम लगाने समेत नशे की लत को छुड़वाने समेत कई मुद्दों पर ईटीवी भारत ने चंडीगढ़ पीजीआई की नशा मुक्ति विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी नायक से बातचीत की.
चंडीगढ़ पीजीआई का ड्रग डी-एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर: डॉक्टर शालिनी नायक ने बताया कि "चंडीगढ़ पीजीआई का ड्रग डी-एडिक्शन एंड ट्रीटमेंट सेंटर (DDTC) नशे की लत से जूझ रहे लोगों के लिए बड़ी उम्मीद बनकर सामने आया है. वर्ष 1978 में एक छोटे से साप्ताहिक क्लिनिक के रूप में शुरू हुआ ये केंद्र आज देश के प्रमुख नशामुक्ति और उपचार संस्थानों में शामिल है. नशा केवल व्यक्ति के स्वास्थ्य को ही नहीं, बल्कि उसके परिवार, सामाजिक जीवन और आर्थिक स्थिति को भी प्रभावित करता है. लंबे समय तक नशीले पदार्थों का सेवन मानसिक बीमारियों, गंभीर शारीरिक समस्याओं और कई बार अपराध की ओर भी धकेल सकता है."
5 राज्यों के मरीज करवा रहे इलाज: डॉक्टर शालिनी ने बताया कि "नशे की बढ़ती समस्या का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पीजीआई चंडीगढ़ के नशामुक्ति एवं उपचार केंद्र में केवल पंजाब और चंडीगढ़ ही नहीं, बल्कि हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और उत्तराखंड से लोग इलाज कराने पहुंच रहे हैं. पीजीआई के इस केंद्र में मरीजों को केवल दवाइयां ही नहीं दी जातीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक परामर्श, सामाजिक सहयोग, पुनर्वास, योग, मेडिटेशन और सपोर्ट ग्रुप जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं, ताकि वे दोबारा सामान्य जीवन की ओर लौट सकें."
लगातार बढ़ रही नशे के मरीजों की संख्या: चंडीगढ़ पीजीआई की डॉक्टर ने बताया कि "पिछले कुछ वर्षों में नशे की लत से जूझ रहे मरीजों की संख्या बढ़ी है, लेकिन समय पर इलाज और परिवार के सहयोग से इस लत से बाहर निकला जा सकता है. पिछले एक वर्ष के दौरान केंद्र में 34,323 ओपीडी परामर्श दर्ज किए गए. इनमें 3,500 से अधिक नए मरीज शामिल थे, जबकि करीब 40 हजार फॉलो-अप विजिट हुईं. इसके अलावा 20 बेड वाले वार्ड में 250 मरीजों को भर्ती कर इलाज दिया गया."
अलग-अलग तरह की लत के लिए अलग क्लीनिक: नशे के मरीजों की जरूरत को देखते हुए पीजीआई में कई विशेष क्लीनिक भी चलाए जा रहे हैं ओपिओइड की लत से जूझ रहे मरीजों के लिए ओपिओइड सब्स्टीट्यूशन थेरेपी (OST) क्लीनिक संचालित किया जाता है, जहां दवा के साथ-साथ ग्रुप काउंसलिंग भी कराई जाती है, ताकि मरीज दोबारा नशे की ओर ना लौटें.
- जो मरीज नशे के साथ मानसिक बीमारी से भी जूझ रहे हैं, उनके लिए ड्यूल डायग्नोसिस क्लीनिक की सुविधा उपलब्ध है. वहीं न्यूरोमॉड्यूलेशन क्लीनिक में आधुनिक तकनीकों की मदद से मरीजों में नशे की इच्छा कम करने और मानसिक स्थिति सुधारने का प्रयास किया जाता है.
- शराब की लत से पीड़ित और लीवर की बीमारी से जूझ रहे मरीजों के लिए पीजीआई के हेपेटोलॉजी विभाग के साथ मिलकर विशेष अल्कोहल यूज डिसऑर्डर क्लीनिक भी चलाया जा रहा है. यहां जांच, काउंसलिंग और जरूरत पड़ने पर इलाज की सुविधा एक ही जगह उपलब्ध कराई जाती है.
अब घर बैठे भी मिल रही सलाह: चंडीगढ़ पीजीआई ने नशामुक्ति सेवाओं को ऑनलाइन भी उपलब्ध कराया है. वर्ष 2020 से मरीज वीडियो कॉल के जरिए डॉक्टरों से परामर्श ले सकते हैं. फॉलो-अप, काउंसलिंग और इलाज की निगरानी भी ऑनलाइन की जा रही है. मरीजों को समय पर इलाज जारी रखने के लिए एसएमएस के जरिए रिमाइंडर भी भेजे जाते हैं.
सही इलाज, काउंसलिंग से हो सकता है इलाज: पीजीआई की नशामुक्ति विशेषज्ञ डॉक्टर शालिनी नायक ने बताया कि "नशे की लत एक बीमारी है, ना कि कोई आदत या चरित्र की कमजोरी. यदि किसी व्यक्ति में नशे की लत के लक्षण दिखाई दें, तो उसे छिपाने के बजाय जल्द से जल्द विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए. सही इलाज, काउंसलिंग और परिवार के सहयोग से मरीज सामान्य जीवन में लौट सकता है. हमने लोगों से अपील की कि नशे से दूर रहें और यदि परिवार या आसपास कोई व्यक्ति इस समस्या से जूझ रहा है, तो उसे उपचार के लिए प्रेरित करें. समाज का सहयोग और जागरूकता ही नशा मुक्त भारत की दिशा में सबसे बड़ा कदम है."
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