मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ, वैश्विक अनुभवों, तकनीक, जागरूकता, समेत कई मुद्दों पर हुई चर्चा
रांची में मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई. भुवन किशोर झा की रिपोर्ट.


Published : September 2, 2026 at 4:34 PM IST
रांची : नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL) में मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता पंजी विषय पर बुधवार से दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन की शुरुआत हुई. उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे. वहीं इस अवसर पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल तथा सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर सहित कई शिक्षाविद्, शोधकर्ता एवं विषय विशेषज्ञ उपस्थित थे.
इस अवसर पर सम्मेलन पुस्तक एवं स्मारिका का भी विमोचन किया गया. गौरतलब है कि आईआईएम रांची, NUSRL रांची एवं सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर हैं. इस मौके पर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के रवि कुमार ने कहा कि मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची विषय पर आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का उद्देश्य वर्तमान में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से आगे बढ़कर मतदाता पंजीकरण के विषय पर व्यापक राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य में विमर्श करना है.
उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से संपर्क किया गया, जिसके फलस्वरूप 230 सार (Abstracts) प्राप्त हुए. स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति द्वारा इनमें से 80 सार को शॉर्टलिस्ट किया गया तथा अंततः 58 शोध-पत्रों का प्रकाशन एवं विचार-विमर्श के लिए चयन किया गया.
वैश्विक व्यवस्थाओं का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों में सक्रिय, स्वचालित एवं हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियां प्रचलित हैं तथा जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स एवं सतत अद्यतनीकरण जैसी व्यवस्थाओं का उपयोग बढ़ रहा है. भारत में मजबूत संवैधानिक एवं कानूनी ढांचा, व्यापक क्षेत्रीय सत्यापन तथा राजनीतिक दलों की सक्रिय भागीदारी की व्यवस्था है. इसका मूल उद्देश्य ऐसी शुद्ध और पारदर्शी मतदाता सूची सुनिश्चित करना है, जिसमें प्रत्येक पात्र नागरिक शामिल हो और कोई अपात्र व्यक्ति सम्मिलित न रहे.
के रवि कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि भारत मतदाता सूची प्रबंधन को अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए तकनीक, डेटाबेस आधारित सत्यापन एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का क्रमिक रूप से उपयोग कर रहा है, ताकि विसंगतियों की पहचान कर मतदाता अभिलेखों की शुद्धता में सुधार किया जा सके. इसके साथ ही पूरी प्रक्रिया क्षेत्रीय सत्यापन, राजनीतिक दलों एवं अन्य हितधारकों की सहभागिता, न्यायिक समीक्षा तथा भारत निर्वाचन आयोग के अधीक्षण, निर्देशन एवं नियंत्रण में संचालित होती है.

उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन विद्वानों, शोधकर्ताओं एवं निर्वाचन से जुड़े व्यावहारिक विशेषज्ञों को मतदाता पंजीकरण प्रणालियों का आलोचनात्मक अध्ययन करने तथा अंतरराष्ट्रीय अनुभवों से सीखने के लिए एक खुला अकादमिक मंच प्रदान करता है. चयनित 58 शोध-पत्रों तथा दो दिवसीय विचार-विमर्श से प्राप्त महत्वपूर्ण निष्कर्षों को संरक्षित करते हुए भौतिक एवं निःशुल्क डिजिटल स्वरूप में प्रकाशित किया जाएगा, जिससे भविष्य के शोध एवं निर्वाचन प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण ज्ञान-संसाधन तैयार हो सके.
“Voter Registration and Voter Registers 2026” अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची प्रबंधन में शुद्धता, समावेशन, सुगमता, पारदर्शिता एवं जवाबदेही जैसे सिद्धांतों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. उन्होंने कहा कि तकनीक का उपयोग कार्यकुशलता बढ़ाने के लिए होना चाहिए, लेकिन यह मानवीय विवेक एवं निर्णय का विकल्प नहीं बनना चाहिए. अंतिम लक्ष्य यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि कोई भी पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे, कोई अपात्र व्यक्ति इसमें शामिल न हो तथा प्रत्येक नागरिक विश्वास एवं भरोसे के साथ निर्वाचन प्रक्रिया में भाग ले सके.
सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने कहा कि शुद्ध एवं समावेशी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है, क्योंकि मतदान का अधिकार तभी सार्थक होता है जब प्रत्येक पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में सही रूप से दर्ज हो. डॉ. कुजूर ने डेटा की शुद्धता, प्राइवेसी, सुगमता, तकनीक एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग तथा निर्वाचन प्रणाली में जनविश्वास बनाए रखने से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों पर ध्यान आकर्षित किया.

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में होने वाला विचार-विमर्श मतदाता पंजीकरण एवं मतदाता सूची प्रबंधन को अधिक समावेशी, पारदर्शी, सुलभ एवं विश्वसनीय बनाने के लिए महत्वपूर्ण निष्कर्ष एवं व्यावहारिक सुझाव प्रदान करेगा.
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय के साथ विश्वविद्यालय की निकट साझेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि यह सहयोग अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को प्रभावी रूप से एक मंच पर लाता है. उन्होंने कहा कि भारत की विशाल निर्वाचन प्रक्रिया के संचालन के लिए व्यापक लॉजिस्टिक व्यवस्था एवं दक्ष पेशेवरों की आवश्यकता होती है वहीं उभरती तकनीकों एवं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग से निर्वाचन प्रबंधन के क्षेत्र में नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं.
उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकी सत्र की शुरुआत हुई जिसमें विशेषज्ञों ने अपने अपने राय रखे. इस सत्र की अध्यक्षता बिहार के पूर्व डीजीपी डीएन गौतम ने की. इस सत्र में बैंगलोर यूनिवर्सिटी के पूर्व प्राध्यापक प्रोफेसर संदीप शास्त्री दूरदर्शन नई दिल्ली के अतिरिक्त महानिदेशक चैतन्य प्रसाद, जादवपुर यूनिवर्सिटी कोलकाता के इंटरनेशनल रिलेशन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर ईशानी नस्कर, इग्नू नई दिल्ली के राजनीतिक शाश्त्र के सतीश कुमार सिंह, ओडिशा उत्कल युनिवर्सिटी के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ प्रतिमा सारंगी, जेएनयू के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ महेश देबाता और आईआईआईडीईएम नई दिल्ली के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ संजय शर्मा ने विचार व्यक्त किए.
यह भी पढ़ें:
झारखंड में SIR के बाद वोटर ड्राफ्ट रोल जारी, हजारीबाग के 2,80,141 मतदाता लिस्ट से बाहर

