INSPIRING STORY: विदेश की नौकरी छोड़ बिहार के अमेश विशाल बने किसान, ताइवान पिंक अमरूद से हुए मालामाल
अपने जुनून और हौसले से बिहार के अमेश विशाल ने खेती को नई दिशा दी. अमेश जर्मनी की अच्छी-खासी नौकरी छोड़कर किसानी से जुड़ गए.

Published : December 26, 2025 at 6:46 AM IST
रिपोर्ट: महमूद आलम
नालंदा: बिहार के नालंदा के इंजीनियर से स्मार्ट किसान बने अमेश विशाल बताते हैं कि "मुझे शुरू से ही एग्रीकल्चर के क्षेत्र में ही कुछ करना था. उसके बाद इंटीग्रेटेड एग्रीकल्चर मॉडल को जानने के लिए मैं कई राज्यों में भी गया. उसके बाद बीटेक कंप्लीट होते ही जर्मनी की एक कंपनी में मेरी नौकरी लग गई, लेकिन कोरोना के कारण मैंने ज्वाइन नहीं किया. 15 एकड़ जमीन में हॉर्टिकल्चर एग्रीकल्चर शुरू किया और आज मुझे अच्छा खासा मुनाफा हो रहा है."
छोड़ दी विदेश की अच्छी नौकरी: अक्सर युवा बीटेक (B.Tech) की डिग्री हाथ में आते ही मल्टीनेशनल कंपनियों और विदेशों की चकाचौंध की तरफ भागते हैं, लेकिन नालंदा जिले के युवा अमेश विशाल ने धारा के विपरीत बहकर एक मिसाल पेश की है. जर्मनी की कंपनी में 13 लाख रुपए सालाना का पैकेज और 'कंसल्टेंट ऑफिसर' की कुर्सी को ठुकराकर इस युवा ने अपने गांव की मिट्टी को चुना और आज यह इंजीनियर की-बोर्ड पर उंगलियां नचाने की बजाय खेतों में 'ताइवान पिंक अमरूद' उगा रहे हैं और लाखों का मुनाफा कमा रहे हैं.
कंप्यूटर साइंस में बीटेक: नालंदा मुख्यालय बिहारशरीफ से 45 किमी दूर सरमेरा प्रखंड के हुसेना गांव के 27 वर्षीय अमेश विशाल की आधुनिक खेती के तरीके ने इनकी किस्मत चमका दी है. जिन्होंने ईटीवी से बातचीत में बताया कि 2020 में मध्य प्रदेश के गुना से कंप्यूटर साइंस में बी-टेक पूरा किया. इसके बाद कैंपस सेलेक्शन के दौरान ही उन्हें जर्मनी की एक ओवरसीज ट्रैवल कंपनी में 13 लाख रुपए का सालाना पैकेज पर नौकरी मिली.

"तभी कोरोना और लॉकडाउन लग गया. मैंने उस वक्त परिवार के साथ रहने का फैसला किया और नौकरी ठुकरा कर गांव लौट आया. पिता त्रिवेणी प्रसाद पारंपरिक खेती के करते थे, मैंने सोचा क्यों न इसी में कुछ नया किया जाए."- अमेश कुमार, बीटेक किसान

'ताइवान पिंक अमरूद' की खेती: 2021 में खेती में उतरे अमेश ने लीक से हटकर सोचने की शुरुआत की. दूसरे राज्यों के दौरों के दौरान उन्हें 'ताइवान पिंक अमरूद' के बारे में पता चला. 2024 में उन्होंने प्रयोगात्मक तौर पर कुछ पौधे लगाए. जब रिजल्ट अच्छा मिला तो एक एकड़ में खेती शुरू कर दी. एक एकड़ में करीब 2.5 लाख रुपए की लागत आई. अब अमेश 40 एकड़ में खेती कर रहे हैं.

6 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा: वहीं, पहले ही सीजन में करीब 6 लाख रुपए का शुद्ध मुनाफा हुआ. यह अमरूद बिहार के बाजारों में हाथों-हाथ 45 से 50 रुपए प्रति किलो बिक रहा है. एक अमरूद का वजन 200 ग्राम से लेकर 450 ग्राम तक होता है.

'ड्रिप इरिगेशन' तकनीक से खेती: हुसेना गांव पटना और नालंदा का सीमावर्ती क्षेत्र है, जहां की 'बालसुन्दरी मिट्टी' बागवानी के लिए वरदान साबित हुई है. अमेश पूरी खेती 'ड्रिप इरिगेशन' तकनीक से करते हैं, जिससे पानी की बचत होती है.

ड्रिप इरिगेशन (बूंद-बूंद सिंचाई) पानी बचाने और फसल की पैदावार बढ़ाने की एक आधुनिक औऱ कुशल विधि है. इसमें पानी और उर्वरकों को पाइपलाइनों के माध्यम से सीधे पौधों की जड़ों तक, बूंद-बूंद करके पहुंचाया जाता है. इस तकनीक से पानी की बचत होती है. साथ ही खरपतवार कम उगते हैं और फसल को सही समय और सही मात्रा में पोषण मिलता है. इससे उपज में इजाफा होता है और खेती की लागत कम होती है.

15 साल तक फल देता है ये पेड़: अमरूद के अलावा वे शिमला मिर्च, पपीता, 3 तरह के बेर और नींबू भी उगा रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि अमरूद का एक पौधा 15 साल तक फल देता है, यानी एक बार की मेहनत और 15 साल तक मुनाफा होगा.

कई लोगों को दे रहे रोजगार: जो युवा कभी खुद नौकरी के लिए विदेश जाने वाला था, आज वह अपने गांव में 2 दर्जन (24) से अधिक लोगों को रोजगार दे रहा है. अमेश बिहार के उन बेरोजगार युवाओं के लिए एक नजीर हैं जो नौकरी के अभाव में हताश हो जाते हैं.

ताइवान पिंक अमरूद की खासियत: नालंदा के नूरसराय में स्थित उद्यान महाविद्यालय की फ्रूट एक्सपर्ट डॉ. दिव्या तिवारी इस अमरूद की खूबियां बताया कि ताइवान पिंक अमरूद में एंटी-ऑक्सीडेंट, विटामिन-सी, फाइबर और पोटेशियम भरपूर मात्रा में होता है. यह इम्यूनिटी बढ़ाता है, कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल करता है और फ्री रेडिकल्स से लड़ने में मदद करता है. इसकी खासियत यह है कि एक फल तीन सेब के बराबर फायदेमंद होता है. यह पाचन शक्ति बढ़ाता है और त्वचा (Skin) में चमक लाता है.

नालंदा के अमेश ने साबित कर दिया है कि अगर आधुनिक तकनीक और सही सोच के साथ खेती की जाए, तो यह किसी मल्टीनेशनल कंपनी की नौकरी से कम नहीं है. उनकी यह पहल बिहार के कृषि क्षेत्र में बदलाव की एक नई बयार है.
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