बेटा-बहू IPS, बेटी PCS, फिर भी किताब बेचते हैं 64 साल के अनिल कुमार
कौन हैं बिहार के अनिल कुमार जिनके बच्चे बड़े अधिकारी हैं, लेकिन वह खुद पिछले 40 सालों से किताब बेच रहे हैं. पढ़ें

Published : November 26, 2025 at 2:08 PM IST
रिपोर्ट: बृजम पांडे
पटना: कहते हैं यदि कोई सपना पूरा ना हो पाए तो उन सपनों को अपने बच्चों की आंखों में देखने की तमन्ना हर पिता की होती है और अगर बच्चे उसे साकार कर दे तो उस पिता के लिए उससे बड़ा गर्व और कुछ नहीं हो सकता है. कुछ ऐसा ही सपना नालंदा के रहने वाले अनिल कुमार (64) ने देखा था. जब वह पटना आए तो उन्होंने सिविल सर्विस की तैयारी करके आईएएस या आईपीएस बनने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली.
अनिल कुमार बनना चाहते थे अधिकारी : खेतिहर मजदूर किसान के पुत्र अनिल कुमार कई दफा यूपीएससी और कई दफा बीपीएससी एग्जाम में बैठे, लेकिन लाख कोशिशों को बाद भी परीक्षा में उतीर्ण नहीं हो सके. इसके बाद उन्होंने एक छोटी सी किताब की दुकान खोली. यह दुकान सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले छात्रों के किताबों की थी. पटना के सैदपुर हॉस्टल के पास मोइनुल हक स्टेडियम के पीछे अनिल कुमार ने कुमार बुक सेंटर के नाम से किताब की दुकान खोली थी.
ऐसे शुरू की किताब की दुकान: इस किताब की दुकान के खुलने का किस्सा भी अजीब था. अनिल कुमार के पास उतने पैसे नहीं थे कि वह एक छोटी सी गुमटी में इस दुकान को खोल पाए. आसपास के कुछ मित्रों ने 2000 की पूंजी इकट्ठा करके उन्हें दी. तब कुमार बुक सेंटर की स्थापना हो पायी. अनिल कुमार बताते हैं कि उनके पास इतने पैसे नहीं थे कि वह दुकान खोल पाए तो कुछ-कुछ लोगों ने पांच-पांच सौ देकर मेरी पूंजी बनाई थी, तब जाकर यह दुकान शुरू हुआ था.

गुमटी में थी दुकान: कुमार बुक सेंटर पर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले छात्रों का लगातार भीड़ बढ़ने लगी. अनिल कुमार का उन छात्रों को देखकर उत्साह भी काफी बढ़ने लगा. धीरे-धीरे गुमटी से यह किताब की दुकान बन गई. उसके बाद आसपास के इलाके में प्रतियोगी परीक्षा के लिए एक जानी-मानी किताब की दुकान बन गई.
"मुझे पता था कि किन-किन स्तर पर परीक्षा की तैयारी की जाती है तो छात्रों को गाइड भी करते थे कि किस तरीके से आप तैयारी करेंगे. किस स्तर की तैयारी के लिए कौन सी किताब की जरूरत होगी, यह उन बच्चों को बताते थे. दुकान खोलने के लिए पहली बार 2000 पूंजी लगी थी, वह भी चार-पांच लोगों ने दी थी. मेरे बाबूजी खेतीहर मजदूर थे इसलिए मैंने प्रतियोगिता परीक्षा की किताबों की दुकान खोलने का निर्णय लिया, ताकि बच्चों को तैयारी करने में दिक्कत न हो."- अनिल कुमार, कुमार बुक सेंटर के मालिक

40 साल से चला रहे सेंटर : 1986 में पटना में स्थापित की गई कुमार बुक सेंटर आज 40 वर्षों से अनवरत प्रतियोगी किताब, एनसीईआरटी की किताबें बेच रहा है. बीच में एक ऐसा मोड़ आया कि बच्चों को पढ़ाने के लिए अनिल कुमार को दिल्ली जाना पड़ा. ऐसे में अनिल कुमार ने किताबों से प्रेम नहीं छोड़ा. दिल्ली जाकर भी अनिल कुमार ने कुमार बुक सेंटर की स्थापना कर दी.
नीतीश कुमार भी यहीं से लेते हैं किताब: दिल्ली के मुखर्जी नगर में छोटी सी दुकान शुरू हुई और फिर धीरे-धीरे पटना की तरह वह भी बड़ी दुकान बन गई. दावा किया जाता है कि दिल्ली में यदि बच्चे आईएएस-आईपीएस की तैयारी करनी जाते हैं तो कुमार बुक सेंटर उनका फेवरेट दुकान होता है. जहां हिंदी अंग्रेजी में प्रतियोगी परीक्षाओं की पूरी रेंज की किताब मिल जाती है. यहां तक कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी इस दुकान से किताब लेते हैं.

बेटा-बहू DIG बेटी PCS: वक्त के साथ अनिल कुमार ने जो सपना अपने बच्चों की आंखों में डाला था, वह भी पूरा हुआ. 2011 में अनिल कुमार के पुत्र आशीष भारती ने यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली और वह आईपीएस बन गए. इसके बाद उनकी बेटी अनीशा भारती ने पीसीएस की परीक्षा पास कर ली और वह भी अधिकारी बन गई. अब यह सिलसिला ऐसा आगे बढ़ा की अनिल कुमार की बहू स्वपना गौतम मेश्राम भी आईपीएस हैं और दामाद मोहित कुमार भी एलाइड ऑफिसर हैं.

KBC नाम से फेमस दुकान: अब तो पटना की दुकान पटना के बीचो-बीच सबसे वीआईपी बोरिंग कैनाल रोड में खुल चुकी है. केबीसी के नाम से इस किताब की दुकान की ख्याति काफी बढ़ चुकी है. अब अनिल कुमार ने यूपीएससी- बीपीएससी की तैयारी करने वाले बच्चों के लिए ऑनलाइन क्लासेस की भी व्यवस्था कर दी है. इस किताब की दुकान को एक संस्थान का नाम दे दिया गया है.
अधिकारियों की फेवरेट बुक सेंटर: केबीसी आईएएस अकादमी के नाम से प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चे इसे जानते हैं. इस दुकान की किताबों को पढ़कर दर्जनों आईएएस आईपीएस और पीसीएस के अधिकारी बन चुके हैं. कई आईएएस-आईपीएस फुर्सत मिलते हैं इस दुकान पर अपनी फेवरेट किताब को ढूंढने पहुंच जाते हैं. अपनी फेवरेट किताब को ढूंढने के लिए गया के ज्वाइंट कमिश्नर सत्य प्रकाश नारायण पहुंच गए.

"यह दुकान मेरे लिए सबसे महत्वपूर्ण है. यह मंदिर की तरह है. इस दुकान की नींव रखने में मेरे भैया ने भी काफी हेल्प किया था. मैं यहां की किताबों को पढ़कर बीएससी की परीक्षा पास की और आज मैं गया में जॉइंट कमिश्नर हूं. जब मैं यहां आता हूं तो फिर से पढ़ने का मन करता है. मैं आज अपने बच्चों के लिए यहां किताब लेने पहुंचा हूं."- सत्य प्रकाश नारायण, ज्वाइंट कमिश्नर,गया
"मैं बीपीएससी की तैयारी कर रहा हूं. मैं इस सेंटर में बराबर आता हूं. मैं यहीं आता हूं."- चंदन कुमार, प्रतियोगिता परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी
प्रतियोगी परीक्षा की किताबों की है भरमार : अनिल कुमार के इस दुकान में हाथ बंटाने के लिए उनके भांजा प्रमोद कुमार भी रहते हैं. प्रमोद कुमार बताते हैं कि लगभग 4000 किताबें उनकी दुकान में है और ढाई हजार से 3000 किताबें तो अलग-अलग वैरायटी की है.
"अलग-अलग सब्जेक्ट के किताबे हैं. पटना में इससे बड़ा बुक स्टोर कहीं नहीं है. स्टेशनरी और अच्छे मैटेरियल्स के लिए बड़े-बड़े फोटो स्टेट की मशीन भी लगी है."- प्रमोद कुमार, अनिल कुमार के भांजे

डीआईजी बेटे की होती है क्लास: कुमार बुक सेंटर ऑनलाइन ऑफलाइन प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए क्लास भी मुहैया करता है. जिसे खुद अनिल कुमार के आईपीएस पुत्र जो अब बेगूसराय में डीआईजी हैं, वह इसके संरक्षक हैं. जब भी छुट्टी मिलती है तो वह भी अपने सेंटर पर जाकर बच्चों को पढ़ते हैं, गाइडलाइंस देते हैं. इसके अलावा अलग-अलग आईएएस आईपीएस जो इस दुकान से किताबें पढ़ कर अधिकारी बने हैं, वह भी आकर समय-समय पर क्लास लेते हैं और प्रतियोगी परीक्षा में शामिल छात्रों को गाइडलाइंस देते हैं.
दुकान नहीं... पैशन: जब अनिल कुमार से यह पूछा गया कि अब आपके बच्चे पढ़ लिखकर अधिकारी बन गए फिर भी यह किताब की दुकान क्यों चलाते हैं? तो उन्होंने कहा कि यह मेरा पैशन है. इस दुकान को मैंने पाला पोसा है. इसी ने मुझे इस मुकाम पर पहुंचाया है. मेरे बच्चे भी इसी दुकान से किताबों को पढ़कर बढ़े हैं और सैकड़ों बच्चे आज भी इस दुकान पर आते हैं.
दिल्ली बुक सेंटर संभालता है छोटा बेटा: अनिल कुमार कहते हैं कि अभ्यर्थियों के सपने को देखकर कि वह कल आईएएस या आईपीएस बनेंगे, मुझे खुशी होती है. उन्हें देखकर मुझे बहुत अच्छा लगता है. इसलिए मैं इस किताब की दुकान को अनवरत चलाता हूं और आगे भी चलता रहूंगा. अब कुमार बुक सेंटर की दो ब्रांच है. एक पटना के बोरिंग रोड में और एक दिल्ली के मुखर्जी नगर में. दिल्ली की दुकान को अनिल कुमार के छोटे पुत्र चलाते हैं. पटना की दुकान को अनिल कुमार खुद संचालित करते हैं.
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