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रियल लाइफ का 'इकबाल' है बिहार का छोटू, दोनों हाथ नहीं हैं, पर बल्लेबाजी शानदार

नालंदा के छोटू कुमार बिना हाथों के गर्दन-कंधे से बल्ला थामकर क्रिकेट में चौके-छक्के जड़ते हैं. आज उनकी जिंदादिली युवाओं को प्रेरित कर रही है.

DIVYANG CRICKETER CHHOTU KUMAR
दिव्यांग क्रिकेटर छोटू कुमार (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 9, 2026 at 3:28 PM IST

5 Min Read
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रिपोर्ट: मो. महमूद आलम

नालंदा: बिहार के नालंदा जिले के 18 वर्षीय छोटू कुमार ने साबित कर दिया है कि हुनर कभी किसी शारीरिक कमी का मोहताज नहीं होता. उनकी कहानी कुछ बॉलीवुड फिल्म इकबाल जैसी है, जहां एक मूक-बधिर लड़का, इकबाल भारतीय क्रिकेट टीम में खेलने के सपने देखता है. जन्म से दोनों हाथ न होने के बावजूद छोटू न केवल पैरों से लिखकर उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, बल्कि क्रिकेट के मैदान पर गर्दन और कंधे से बल्ला थामकर चौके-छक्के जड़ रहे हैं. उनकी यह जिंदादिली युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है.

दिव्यांगता को बनाया ताकत: गिरियक प्रखंड के मरकट्टा गांव निवासी पुदीन मांझी के पुत्र छोटू कुमार बचपन से ही क्रिकेट के शौकीन रहे. शुरुआत में दिव्यांगता के कारण टीमों में जगह नहीं मिलती थी, लेकिन छोटू ने हार नहीं मानी. घर के पास लकड़ी के बल्ले से अकेले प्रैक्टिस शुरू की और आज गर्दन व कंधे के बीच बल्ला फंसाकर ऐसे शॉट मारते हैं कि अनुभवी गेंदबाज भी हैरान रह जाते हैं.

छोटू कुमार की प्रेरणादायक कहानी (ETV Bharat)

क्रिकेट में अनोखी प्रतिभा: छोटू टेनिस और लेदर दोनों बॉल से खेलते हैं. नालंदा के अलावा लखीसराय और झारखंड तक मैच खेल चुके हैं. सामान्य खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करते हुए वे प्रति मैच 200 से 3000 रुपये तक फीस लेते हैं. उनकी बैटिंग देखकर विरोधी टीम के खिलाड़ी दंग रह जाते हैं.

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गर्दन-कंधे से बल्ला थामकर खेलते हैं क्रिकेट (ETV Bharat)

सचिन और आमिर प्रेरणा के स्रोत: छोटू भारतीय क्रिकेटर अभिषेक शर्मा और वेस्टइंडीज के निकोलस पूरन के फैन हैं, लेकिन असली प्रेरणा क्रिकेट के भगवान सचिन तेंदुलकर और जम्मू-कश्मीर के दिव्यांग क्रिकेटर आमिर हुसैन लोन से मिली. आमिर ने इंडियन स्ट्रीट प्रीमियर लीग (आईएसपीएल) के उद्घाटन मैच में सचिन की टीम का हिस्सा बनकर इतिहास रचा था.

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कौन हैं पैरा क्रिकेटर छोटू कुमार (ETV Bharat)

पैरों से लिखकर की पढ़ाई: छोटू सभी काम खुद करते हैं. पैरों की उंगलियों में पेन फंसाकर लिखते हैं. इसी हुनर से 2023 में मैट्रिक (290 अंक, 58%) और 2025 में इंटरमीडिएट (340 अंक, 68%) पास किया. वर्तमान में गिरियक के मां आशापुरी कॉलेज में बीए आर्ट्स पार्ट-1 के छात्र हैं.

वाहन चलाने में भी माहिर: किसी पर बोझ नहीं बनना चाहते छोटू. पैरों और कंधों के सहारे साइकिल, बाइक और ट्रैक्टर चलाते हैं. ट्रैक्टर से मिट्टी ढुलाई कर पढ़ाई का खर्च निकालते हैं. पांच भाई-बहनों में चौथे नंबर पर हैं और माता-पिता मजदूरी करते हैं.

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साइकल चलाते दिव्यांग क्रिकेटर छोटू कुमार (ETV Bharat)

छोटू को मिला परिवार का साथ: मां लालो देवी कहती हैं, "जन्म से हाथ नहीं थे, लेकिन हमने कभी बोझ नहीं समझा, आज यह सब खुद करता है." बिहार सरकार से दिव्यांग राहत कोष के तहत महज 1100 रुपये महीना मिलता है, जो जरूरतों के लिए नाकाफी है.

"जब इसका जन्म हुआ तो हाथ नहीं थे, लेकिन हमने इसे कभी बोझ नहीं समझा. आज यह सब कुछ खुद कर लेता है. छोटू को बिहार सरकार से दिव्यांग राहत कोष के तहत 1100 रुपये महीना मिलता है, जो जरूरतों और पढ़ाई के लिए काफी कम है. हम चाहते हैं कि सरकार उसे खेलने के लिए सहायता दे."-लालो देवी, मां

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मां लालो देवी (ETV Bharat)

सरकारी मदद की गुहार: छोटू कहते हैं, "अगर सरकार खेल संसाधन और आर्थिक मदद बढ़ाए, तो मैं आमिर हुसैन लोन की तरह पैरा क्रिकेट में भारत का नाम रोशन कर सकता हूं." गांव में तंज सुनने के बावजूद सीनियर रौशन कुमार के प्रोत्साहन से आगे बढ़े.

"गांव के लोग मुझे देखकर तंज कसते हैं, लेकिन मेरे सीनियर रौशन कुमार ने मुझे काफी प्रोत्साहित किया. आज मैं सामान्य लड़कों के साथ मैच खेलता हूं. मेरे हाथ नहीं हैं तो क्या हुआ, मेरे हौसले सलामत हैं. मैं पढ़ाई के साथ-साथ क्रिकेट में अपना करियर बनाना चाहता हूं."-छोटू कुमार, दिव्यांग खिलाड़ी

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दिव्यांग क्रिकेटर छोटू कुमार (ETV Bharat)

हौसलों की उड़ान: छोटू का कहना है, "हाथ नहीं हैं तो क्या, हौसले तो सलामत हैं. पढ़ाई के साथ क्रिकेट में करियर बनाना चाहता हूं." उनकी कहानी साबित करती है कि बुलंद इरादों से कोई भी मंजिल हासिल की जा सकती है.

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क्या है डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट (ETV Bharat)

क्या है डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट: पैरा क्रिकेट, जिसे दिव्यांग क्रिकेट भी कहा जाता है, शारीरिक रूप से दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए क्रिकेट का विशेष रूप है, जिसमें दृष्टिहीनता, बधिरता, शारीरिक विकलांगता और व्हीलचेयर कैटेगरी शामिल है. भारत में इसे डिफरेंटली एबल्ड क्रिकेट काउंसिल ऑफ इंडिया (DCCI) संचालित करता है, जो BCCI के समर्थन से 2021 में स्थापित छत्र संगठन है. 2025 में पैरालंपिक कमिटी ऑफ इंडिया (PCI) से इसे मान्यता प्राप्त हुई. नियम सामान्य क्रिकेट जैसे ही होते हैं, लेकिन दिव्यांगता के अनुसार अनुकूलित किए जाते हैं, जैसे आमिर हुसैन लोन जैसे खिलाड़ी जो बिना हाथों के पैर और कंधे से खेलते हैं. यह खेल दिव्यांग एथलीटों को राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करता है.

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