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पायलट बनने का सपना टूटा, अब किसानों के सपनों को दे रहीं उड़ान, बिहार की 'ड्रोन दीदी' रूपा कुमारी बनीं मिसाल!

रूपा कुमारी, बिहार के गया जिले की पहली 'ड्रोन दीदी' हैं. शादी के 18 साल बाद ड्रोन उड़ाना सीखा, खाद-बीज दुकान चलाई और आत्मनिर्भर बनीं.

DRONE DIDI RUPA KUMARI
ड्रोन दीदी रूपा कुमारी (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Bihar Team

Published : January 10, 2026 at 5:37 PM IST

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गया: बिहार के गया जिले के खिजरसराय प्रखंड अंतर्गत हेमारा गांव की रहने वाली रूपा कुमारी अब 'ड्रोन दीदी' के नाम से जानी जाती हैं. शादी के 18 साल बाद उन्होंने घर की चारदीवारी से बाहर निकलकर ड्रोन उड़ाना शुरू किया, जिसने न केवल उनकी आर्थिक स्थिति को मजबूत किया बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर भी बनाया. रूपा कहती हैं कि ड्रोन उड़ाने में उन्हें बेहद मजा आता है और अब वे खुद को किसी जहाज के पायलट से कम नहीं समझतीं.

बचपन का सपना और जिंदगी के बंधन: बचपन में रूपा आंगन से आसमान में उड़ते विमान को देखकर आश्चर्यचकित हो जाती थी. इंटर की पढ़ाई के दौरान उन्हें पायलट बनने का शौक हो गया, लेकिन गरीबी के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका. इंटर के बाद पढ़ाई रुक गई और कम उम्र में गांव की परंपरा के अनुसार शादी हो गई. शादी के बाद वे घरेलू जिम्मेदारियों में उलझ गईं और आंगन-चूल्हा तक सीमित रह गईं.

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जीविका से शुरू हुआ बदलाव का सफर: शादी के कुछ साल बाद रूपा जीविका दीदियों से जुड़ीं और बैंक मित्र के रूप में काम किया. तीन साल पहले तक उनकी घर की आर्थिक स्थिति बहुत खराब थी. पति खेतों में मजदूरी करते थे और एक कमाई पर पूरा परिवार निर्भर था. आर्थिक तंगी से तंग आकर उन्होंने कृषि उद्यमी योजना के तहत परीक्षा देकर खाद-बीज की दुकान चलाने का लाइसेंस लिया. इंटर तक की पढ़ाई होने से परीक्षा पास करना उनके लिए आसान रहा. यहीं से उनकी जिंदगी में असली बदलाव की शुरुआत हुई.

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ड्रोन ने रूपा की किस्मत बदल दी (ETV Bharat)

नमो ड्रोन दीदी योजना से मिली नई उड़ान: 2023 में रूपा को नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित किया गया. वे गया जिले की पहली ड्रोन दीदी बनी. इस योजना के तहत उन्हें हैदराबाद, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश सहित अन्य राज्यों में प्रशिक्षण दिया गया. प्रशिक्षण पूरा होने पर उन्हें लगभग 70 किलो वजन वाला ड्रोन प्रदान किया गया. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उनके इस कठिन सफर की सराहना भी की है.

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नमो ड्रोन दीदी योजना के तहत चयनित हुईं (ETV Bharat)

घर की जिम्मेदारियों के साथ चुनौतियां: रूपा की पांच बेटियां हैं, जिनमें सबसे छोटी मात्र चार साल की है. घर से बाहर निकलने पर गांव के कुछ संकीर्ण सोच वाले लोगों के ताने झेले, लेकिन पति मुकेश कुमार और परिवार के सहयोग से उन्होंने इन बातों को नजरअंदाज किया. उनका एकमात्र लक्ष्य था आत्मनिर्भर बनना और परिवार की स्थिति सुधारना.

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ड्रोन दीदी रूपा कुमारी (ETV Bharat)

आर्थिक मजबूती और बेटियों का भविष्य: गरीबी के कारण रूपा अपनी बेटियों की शिक्षा और शादी की चिंता में रहती थी. अब स्थिति बदल गई है. उनकी खाद-बीज की दुकान से हर महीने 50-60 हजार रुपये की कमाई होती है. अब तक उन्होंने 250 एकड़ से अधिक भूमि पर ड्रोन से कीटनाशक छिड़काव किया है. इससे किसानों का समय और पैसा दोनों बचता है.

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ड्रोन से मिली आर्थिक सहायता (ETV Bharat)

ड्रोन से छिड़काव- तेज, सस्ता और प्रभावी: रूपा एक एकड़ खेत में छिड़काव के लिए 300-400 रुपये चार्ज करती हैं. ड्रोन से मात्र 5 मिनट में एक एकड़ का काम हो जाता है. हाथ से छिड़काव करने में 3-4 घंटे लगते हैं, जबकि ड्रोन से एक घंटे में 10 एकड़ तक काम संभव है. रिमोट के स्क्रीन पर कैमरे से हर कोना देखकर वे सटीक छिड़काव करती हैं.

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ड्रोन से खेती हुई आसान (ETV Bharat)

धान के सीजन में 75 हजार की कमाई: धान के मौसम में उन्होंने 20-25 दिनों में 250 एकड़ पर छिड़काव कर लगभग 75 हजार रुपये कमाए. अभी गेहूं और सरसों का सीजन चल रहा है, जहां किसान लगातार संपर्क कर रहे हैं. वे विभिन्न प्रखंडों के अलावा नालंदा, जहानाबाद जैसे जिलों में भी काम करती हैं.

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250 एकड़ पर ड्रोन से छिड़काव (ETV Bharat)

परिवार का पूरा सहयोग: रूपा कहती हैं कि पति मुकेश कुमार ने उन्हें पूरा समर्थन दिया. शुरुआत में पति की सोच भी पारंपरिक थी, लेकिन अब वे दूसरों को अपनी पत्नी की मिसाल देते हैं. पति दुकान संभालने में मदद करते हैं और गांव के एक युवक को भी ड्रोन चलाना सिखाया है. बड़ी बेटी घर संभालती है और पढ़ाई जारी रख रही है.

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परिवार का पूरा सहयोग (ETV Bharat)

"महिलाओं में बदलाव आया है, गांव की भी कई महिलाएं अब खुद का रोजगार कर रही हैं, जिससे गांव में रहते हुए अच्छी कमाई भी हो रही है. घर में आर्थिक स्थिति में इस से सुधार हुआ है. समाज की महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सभी को आगे आने की जरूरत है, मैं खुद अब आत्मनिर्भर हूं और गांव की दूसरी महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में लगी हूं."-रूपा कुमारी, ड्रोन दीदी

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छिड़काव कर लगभग 75 हजार रुपये कमाए (ETV Bharat)

पहली बार हवाई जहाज पर सफर: ड्रोन ने रूपा को पहली बार हवाई जहाज पर बैठने का मौका दिया. हैदराबाद ट्रेनिंग के लिए जाते समय वे इतनी घबराईं कि दिन भर कुछ नहीं खाया. पहले तो उन्होंने जहाज को सिर्फ दूर से देखा था, लेकिन अब ड्रोन उड़ाकर वे खुद 'पायलट' बन चुकी हैं.

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5 मिनट में एक एकड़ का काम (ETV Bharat)

महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने का संदेश: रूपा अब गांव की अन्य महिलाओं को भी प्रेरित करती हैं. कई महिलाएं खुद का रोजगार शुरू कर रही हैं. वे कहती हैं कि समाज में महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए सबको प्रयास करना चाहिए. मुख्यमंत्री के हाथों सम्मानित होने के बाद उनकी पहचान अब 'ड्रोन दीदी' के रूप में है. जहां भी जाती हैं, लोग उन्हें इसी नाम से बुलाते हैं और फोटो खिंचवाते हैं.

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'ड्रोन दीदी' रूपा कुमारी (ETV Bharat)

नमो ड्रोन दीदी योजना क्या है?: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 2022 में शुरू की गई नमो ड्रोन दीदी योजना का उद्देश्य ग्रामीण महिलाओं को ड्रोन तकनीक से जोड़कर रोजगार देना और खेती को आधुनिक बनाना है. 21 दिनों की ट्रेनिंग के बाद महिलाएं पेशेवर ड्रोन पायलट बनती हैं.

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नमो ड्रोन दीदी योजना (ETV Bharat)

डीएम ने भी की ड्रोन दीदी की सराहना: जिला पदाधिकारी शशांक शुभंकर कहते हैं कि यह योजना महिलाओं के आत्मविश्वास और स्वावलंबन की जीती-जागती मिसाल है. रूपा जैसी महिलाएं इसे सफल बना रही हैं. रूपा कुमारी की कहानी बिहार की ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा है, जो दिखाती है कि तकनीक और इच्छाशक्ति से कोई भी बंधन टूट सकता है.

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शादी के 18 साल बाद ड्रोन उड़ाना सीखा (ETV Bharat)

"नमो ड्रोन दीदी योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा महिला सशक्तिकरण के लिए प्रारंभ की गई थी, ये योजना ग्रामीण महिलाओं के लिए एक मिसाल बन रही है, यह योजना महिलाओं को आधुनिक ड्रोन तकनीक से जोड़कर उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. रूपा जैसी महिला इस काम को करके आर्थिक रूप से भी मजबूत हो रही हैं, नमो ड्रोन दीदी के द्वारा खेतों की भी सूरत बदली है, यह तकनीक आत्मविश्वास और स्वावलंबन की मिसाल है."-शशांक शुभंकर, जिला पदाधिकारी, गया

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