इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ खाल तस्करी का बड़ा खुलासा, 7 गिरफ्तार 3 खालें बरामद, पांच बाघों के शिकार की जांच तेज
जांच में चौंकाने वाला तथ्य यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र पुलिस का एक कांस्टेबल है, जो राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित है.

By ETV Bharat Chhattisgarh Team
Published : July 6, 2026 at 10:40 PM IST
बीजापुर: इंडियन टाइगर लैंडस्केप में शामिल इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ की खाल तस्करी का बड़ा मामला उजागर हुआ है. संयुक्त कार्रवाई में अब तक 7 आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है. जांच के दौरान 3 बाघों की खाल बरामद होने की पुष्टि हुई है, जबकि पूछताछ में कथित रूप से 5 बाघों के शिकार और उनकी खालों के सौदे की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है. हालांकि अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि अतिरिक्त दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही की जाएगी.
इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघ की खाल की तस्करी का खुलासा
संयुक्त कार्रवाई में इंद्रावती टाइगर रिजर्व, वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WCCB), राज्य स्तरीय फ्लाइंग स्क्वॉड, महाराष्ट्र वन विभाग, पुलिस, पश्चिम भानुप्रतापपुर वन मंडल तथा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व की ने छत्तीसगढ़-महाराष्ट्र सीमा से लगे क्षेत्रों में की. शुरुआत में 2 बाघों की खाल बरामद हुई थी. इसके बाद आरोपियों से मिली जानकारी के आधार पर लगातार छापेमारी की गई, जिसमें तीसरी खाल भी बरामद होने की जानकारी सामने आई.
जांच अभी जारी है और फिलहाल अतिरिक्त संख्या या अन्य बरामदगी पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा: संदीप बलगा, इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक
प्रारंभिक पूछताछ में तीन खालों की बरामदगी और सात आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है. आरोपियों ने कथित रूप से इंद्रावती क्षेत्र में फंदा लगाकर बाघों के शिकार की बात स्वीकार की है. बरामद खालों को अब वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वे इंद्रावती टाइगर रिजर्व के बाघों की हैं या किसी अन्य क्षेत्र की: अरुण पांडे , प्रधान मुख्य वन संरक्षक
महाराष्ट्र पुलिस का 1 कांस्टेबल तस्करी में शामिल
जांच में सबसे चौंकाने वाला तथ्य यह है कि गिरफ्तार आरोपियों में महाराष्ट्र पुलिस का 1 कांस्टेबल भी शामिल है, जिसे पहले राष्ट्रपति पुलिस वीरता पदक से सम्मानित किया जा चुका है. एक होमगार्ड जवान की गिरफ्तारी भी हुई है. आरोपियों के ठिकानों से पेंगोलिन के शल्क मिलने की जानकारी ने आशंका बढ़ा दी है कि यह गिरोह केवल बाघों तक सीमित नहीं था, बल्कि अन्य संरक्षित वन्यजीवों की तस्करी में भी शामिल हो सकता है.
जब्त बाघ के खालों की जांच जारी
इंद्रावती टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक संदीप बलगा ने आधिकारिक रूप से जब्त खालों की पुष्टि करते हुए कहा, ''जांच अभी जारी है और फिलहाल अतिरिक्त संख्या या अन्य बरामदगी पर टिप्पणी करना उचित नहीं होगा''. वहीं प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण पांडे ने कहा, ''प्रारंभिक पूछताछ में तीन खालों की बरामदगी और सात आरोपियों की गिरफ्तारी की पुष्टि हुई है. आरोपियों ने कथित रूप से इंद्रावती क्षेत्र में फंदा लगाकर बाघों के शिकार की बात स्वीकार की है. बरामद खालों को अब वैज्ञानिक परीक्षण के लिए भेजा जाएगा, जिससे यह स्पष्ट हो सके कि वे इंद्रावती टाइगर रिजर्व के बाघों की हैं या किसी अन्य क्षेत्र की.''
टाइगर कॉरिडोर पर शिकारियों की नजर
इंद्रावती टाइगर रिजर्व पहले से ही बाघों की वास्तविक संख्या को लेकर चुनौती का सामना कर रहा है. यदि वैज्ञानिक जांच में यह साबित होता है कि बरामद खालें इंद्रावती के बाघों की हैं, तो यह वन्यजीव संरक्षण व्यवस्था के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा. वन अधिकारियों के अनुसार इंद्रावती, महाराष्ट्र और तेलंगाना का सीमावर्ती क्षेत्र लंबे समय से टाइगर कॉरिडोर रहा है. हाल के वर्षों में सुरक्षा बलों की बढ़ती मौजूदगी और नक्सली प्रभाव में कमी के बाद वन्यजीव अपराधों पर भी निगरानी बढ़ाई गई है, जिसके चलते समय रहते खुफिया सूचना मिली और यह बड़ी कार्रवाई संभव हो सकी.
अंतरराज्यीय शिकारी एवं तस्करी नेटवर्क का खुलासा
वन विभाग ने स्पष्ट किया है कि अभियान अभी जारी है. कई संदिग्धों की तलाश की जा रही है और पूरे अंतरराज्यीय शिकारी एवं तस्करी नेटवर्क का खुलासा करने के लिए लगातार दबिश दी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि वैज्ञानिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और आरोपियों से पूछताछ के आधार पर ही शिकार की वास्तविक संख्या, घटनास्थलों और पूरे नेटवर्क की अंतिम पुष्टि की जाएगी. फिलहाल यह मामला केवल बाघों की खाल तस्करी तक सीमित नहीं, बल्कि देश के सबसे महत्वपूर्ण टाइगर लैंडस्केप की सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण तंत्र की विश्वसनीयता की भी बड़ी परीक्षा बन गया है.
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