भागीरथपुरा में डेथ इन क्यू, एक और महिला की डेथ, दावा 15 मौतों का पुष्टि सिर्फ 8 की
इंदौर के भागीरथपुरा में मौत कहर बनकर दौड़ रही है. 24 घंटे में दो मौतों से दहशत बढ़ी. अभी भी 45 लोगों की हालत गंभीर.

By ETV Bharat Madhya Pradesh Team
Published : January 2, 2026 at 1:07 PM IST
|Updated : January 2, 2026 at 1:15 PM IST
इंदौर : देश के सबसे स्वच्छ शहर का लगातार 7 बार अवार्ड जीतने वाले इंदौर के नाम पर ऐसा कलंक लगा, जिसे धोने में सालों लग जाएंगे. इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से एक सप्ताह के अंदर 15 लोग मौत का शिकार हो चुके हैं. हालांकि प्रशासन अभी 8 मौतों की ही पुष्टि कर रहा है.
जहरीला पानी पीने से 200 से अधिक लोग अभी भी अस्पतालों में भर्ती हैं. इनमें से 45 लोग आईसीयू में भहैं. भागीरथपुरा में मौतों का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है. शुक्रवार सुबह एक और महिला की मौत हो गई.
उल्टी-दस्त के मरीज नहीं हो रहे कम
इंदौर के भागीरथपुरा में लगातार हो रही मौतों से दहशत का आलम है. अभी भी इलाके से लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित होकर अस्पतालों में भर्ती हो रहे हैं, पूरे मोहल्ले में कोई ऐसा घर नहीं है, जहां लोग उल्टी-दस्त से पीड़ित न हों. स्वास्थ्य विभाग की टीमें बीते 3 दिन से डेरा डाले हुए हैं. लेकिन लोगों के बीमार होने का सिलसिला नहीं रुक रहा. प्रशासन की ओर से सीएचएमओ और क्षेत्रीय पार्षद ने भी अब तक केवल 8 मौतों की पुष्टि की है.

60 वर्षीय महिला की अस्पताल में मौत
मृतका के भतीजे चंद्रशेखर ने बताया " दूषित पानी पीने के कारण जब लोग लगातार बीमार होने लगे तो स्वास्थ्य विभाग की टीम उनके घर पर पहुंची. इस दौरान 60 वर्षीय गीताबाई उनके बेटे और भतीजे उल्टी-दस्त से पीड़ित मिले. उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया. इलाज के दौरान उनकी चाची गीताबाई की मौत हो गई. गीताबाई को भी उल्टी-दस्त लगातार हो रहे थे. उन पर किसी दवा का कोई असर नहीं हुआ."

हालांकि महिला का बेटा और भतीजा अस्पताल से इलाज कराकर घर लौट चुके हैं. इंदौर के भागीरथपुरा में मेडिकल कॉलेज की रिपोर्ट में भी दूषित पानी पीने के पाइपलाइन में मिलने की पुष्टि हो चुकी है.
भागीरथपुरा में दहशत के बीच लोग गुस्से में
भागीरथपुरा में दहशत के बीच लोगों में सरकार के साथ ही नगर निगम प्रशासन के खिलाफ भारी रोष देखा जा रहा है. लोगों का कहना है "बीते 6 माह से गंदे पानी की सप्लाई की शिकायतें की जा रही हैं लेकिन किसी ने कोई सुनवाई नहीं की." गुरुवार को नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को भी दोपहिया से दौरे के दौरान लोगों के गुस्से का शिकार होना पड़ा था.
लोगों ने मदद राशि के चेक लेने से इंकार कर दिया. लोगों में इस बात को लेकर और रोष है कि सरकार ने भले ही फ्री इलाज करने की घोषणा की हो लेकिन निजी अस्पतालों ने मरीजों को भर्ती करने से इनकार कर दिया. साथ ही जो राशि पीड़ित परिजनों से अस्पताल में जमा कराई गई, उसे रिफंड नहीं किया गया.

सरकार ने हाई कोर्ट में स्टेटस रिपोर्ट दी
वहीं, इंदौर में गंदे पानी से मौत के मामले में सरकार ने अपनी स्टेटस रिपोर्ट भी हाईकोर्ट में पेश कर दी है. शुक्रवार को इस पर सुनवाई होनी है. रिपोर्ट में बताया गया है कि गंदे पानी से अब तक सिर्फ 4 मौतें हुई हैं.
CMHO डॉ. माधव हसानी का कहना है "सैंपल की जांच रिपोर्ट में साफतौर पर पुष्टि हुई है कि दूषित पानी पीने से ही लोग बीमार पड़े और उनकी जान गई." वहीं, कलेक्टर शिवम वर्मा का कहना है "डिटेल्ड रिपोर्ट का इंतजार है. मेडिकल कॉलेज में कल्चर टेस्ट भी किया जा रहा है. इसकी रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहना ठीक होगा."
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मानवाधिकार आयोग ने भी मांगी डिटेल रिपोर्ट
नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी माना "भागीरथपुरा के पेयजल में सीवेज का पानी मिलने से हालात बिगड़े." विजयवर्गीय का कहना है "मुझे लगता है कि चौकी के पास जो लीकेज वाली जगह है, वहीं इसकी सबसे प्रमुख आशंका है." दूसरी तरफ, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मध्य प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर 2 सप्ताह के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

