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महाराष्ट्र : मेलघाट टाइगर रिजर्व में भेड़िये और जंगली कुत्ते एक साथ दिखे, शोध का विषय बना

मेलघाट में दो अलग-अलग प्रजातियों को आपस में साथ घूमते देखा गया है. इस घटना ने वन्यजीव शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचा है.

Wolves and wild dogs spotted together in Melghat Tiger Reserve
मेलघाट टाइगर रिजर्व में भेड़िये और जंगली कुत्ते एक साथ दिखे (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 28, 2026 at 1:36 PM IST

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अमरावती (महाराष्ट्र) : महाराष्ट्र के अमरावती जिले के मेलघाट टाइगर रिजर्व क्षेत्र में एक दुर्लभ घटना देखने ने वन्यजीव शोधकर्ताओं को आश्चर्यचकित कर दिया. यहां पर भारतीय धूसर भेड़िया और एशियाई जंगली कुत्ता की दो अलग-अलग प्रजातियों को शांतिपूर्वक एकसाथ घूमते हुए देखा गया.

दिलचस्प बात यह है कि पता चला कि भेड़ियों के इस समूह का नेतृत्व एक वयस्क मादा भेड़िया कर रही थी. यह दृश्य अमरावती के वन्यजीव शोधकर्ता और मानद वन्यजीव संरक्षक डॉ. सावन देशमुख ने मेलघाट के बफर जोन में देखा. यह समूह लगभग 40 मिनट तक बिना किसी आक्रामकता के एक साथ घूमता रहा.

परंपरा तोड़ने वाला व्यवहार - वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हालांकि भेड़िये और जंगली कुत्ते दोनों ही 'कैनीड' परिवार की प्रजातियां हैं, लेकिन उनके आवास और सामाजिक संरचनाएं भिन्न हैं. प्रोफेसर डॉ. सावन देशमुख ने 'ईटीवी भारत' को बताया कि भारतीय धूसर भेड़िया खुले जंगलों, घास के मैदानों और कृषि क्षेत्रों में पाया जाता है, जबकि जंगली कुत्ते घने पर्णपाती और सदाबहार जंगलों में पाए जाते हैं. ये प्रजातियां आमतौर पर एक-दूसरे से दूर रहती हैं. मेलघाट में इस तरह की अंतर-प्रजाति मित्रता पहली बार देखी गई है.

Wolf and wild dog walking together
भेड़िया और जंगली कुत्ता साथ में घूमते हुए (ETV Bharat)

इस अवलोकन की सबसे उल्लेखनीय बात यह है कि इसमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि मादा भेड़िया अपने झुंड का नेतृत्व कर रही है. आमतौर पर, भेड़ियों के झुंड में प्रमुख नर नेतृत्व करता है, जबकि जंगली कुत्तों के झुंड में मादा नेतृत्व करती है. हालांकि, यहां स्थिति पूरी तरह उलट है.

अधिक अध्ययन की आवश्यकता - प्रोफेसर डॉ. सावन देशमुख ने कहा, "मादा भेड़िये के नेतृत्व में जंगली कुत्तों का यह नया समूह बना हो सकता है या चार जंगली कुत्तों का एक झुंड अलग हो गया हो सकता है. प्रारंभिक अनुमान यह है कि समूह को मार्गदर्शन के लिए एक मादा भेड़िये का समर्थन प्राप्त रहा होगा. हालांकि, इसके पीछे का सटीक कारण समझने के लिए गहन अध्ययन की आवश्यकता है."

शोध की नई दिशा - प्रोफेसर डॉ. सावन देशमुख ने कहा कि मेलघाट की यह घटना महज जिज्ञासा का विषय नहीं है, बल्कि अंतर-प्रजाति व्यवहार के अध्ययन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है. संबंधित अवलोकनों का वैज्ञानिक रूप से विश्लेषण किया जा रहा है और इस पर एक शोध पत्र शीघ्र ही प्रकाशित होने की संभावना है.

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