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'हमें नहीं पता कि अगले पल क्या होने वाला है...', ईरान में फंसे भारतीय छात्रों ने पीएम मोदी को लिखा पत्र

तेहरान में मौजूद एक भारतीय छात्रा ने मिसाइल हमलों से हो रहे जोरदार धमाकों के बीच बेहद घबराए हुए स्वर में एक वीडियो रिकॉर्ड किया.

US attacks on Iran
तेल अवीव, इज़राइल में, शनिवार 28 फरवरी को मिसाइल के अलार्म के बाद शेल्टर में लोग. (AP)
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By Moazum Mohammad

Published : February 28, 2026 at 6:47 PM IST

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श्रीनगर: अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद वहां मौजूद भारतीय छात्रों में दहशत का माहौल है. छात्रों के एक संगठन ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर जल्द से जल्द वहां से सुरक्षित निकालने (Evacuation) की गुहार लगाई है.

तेहरान में मौजूद एक भारतीय छात्रा ने मिसाइल हमलों से हो रहे जोरदार धमाकों के बीच बेहद घबराए हुए स्वर में एक वीडियो रिकॉर्ड किया. उसने कहा, "हालात बहुत खराब और अनिश्चित हैं. हमें नहीं पता कि अगले पल क्या होने वाला है. कृपया स्थिति के और बिगड़ने का इंतज़ार न करें. हम बस जल्द से जल्द यहां से निकाले जाने की विनती करते हैं. कृपया हमारी मदद करें और हमें यहां से सुरक्षित बाहर निकालें."

जम्मू-कश्मीर की रहने वाली एक अन्य एमबीबीएस छात्रा, मेहक हुसैन ने बताया कि देश में सुबह से कई जगहों पर हुए धमाकों के बाद वे सभी भारी डर के साये में जी रहे हैं. ईरान की उर्मिया यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज की चौथी वर्ष की छात्रा ने भारत सरकार से मदद की गुहार लगाते हुए कहा,

"हमलों के कारण छात्रों में भारी डर और घबराहट फैल गई है. भारतीय दूतावास की एडवाइजरी के बावजूद, हमारी यूनिवर्सिटी ने परीक्षाओं का हवाला देते हुए हमें देश छोड़ने की अनुमति नहीं दी. हम यहां इसलिए रुके रहे क्योंकि हम अपने करियर के साथ खिलवाड़ नहीं कर सकते थे. अब हम सुरक्षित निकाले जाने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि हमें नहीं पता कि युद्ध रुकेगा या जारी रहेगा."

गौरतलब है कि 23 फरवरी को तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने छात्रों, तीर्थयात्रियों, व्यापारियों और पर्यटकों सहित सभी भारतीय नागरिकों को ईरान में बढ़ते तनाव और विरोध प्रदर्शनों के कारण व्यावसायिक उड़ानों सहित उपलब्ध साधनों का उपयोग करके बिना किसी देरी के ईरान छोड़ने की सलाह दी थी.

जम्मू-कश्मीर के 2,000 से अधिक छात्र ईरान में पढ़ रहे हैं, जिनमें से ज्यादातर एमबीबीएस (MBBS) के छात्र हैं. लेकिन ये छात्र बड़ी दुविधा में फंस गए थे क्योंकि 5 मार्च को उनकी बेहद महत्वपूर्ण राष्ट्रीय परीक्षाएं- 'उलूमपाया' (व्यापक बुनियादी विज्ञान परीक्षा) और प्री-इंटर्नशिप परीक्षा होनी थीं, और वहां के अधिकारियों ने इन्हें टालने से साफ इनकार कर दिया था.

ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद मोमिन खान ने बताया कि अधिकारियों ने अब इन परीक्षाओं को रद्द कर दिया है. उन्होंने प्रभावित भारतीय छात्रों को वहां से तुरंत सुरक्षित निकालने की मांग की है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे एक पत्र में जम्मू-कश्मीर छात्र संघ (JKSA) ने भारतीय छात्रों की सुरक्षा और उन्हें वहां से निकालने की मांग की है. JKSA के राष्ट्रीय संयोजक नासिर खुहामी ने कहा कि छात्र तेजी से अस्थिर होते सुरक्षा हालातों के बीच फंस गए हैं, जहां उनके आने-जाने और संचार पर पाबंदी है और आगे भी हमले होने का खतरा बना हुआ है.

उन्होंने केंद्र सरकार से भारतीय छात्रों के जीवन, सम्मान और उनके शैक्षणिक भविष्य की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने का आग्रह करते हुए कहा, "आपके (प्रधानमंत्री के) मार्गदर्शन में, भारत सरकार ने अपने त्वरित मानवीय कार्यों, रेस्क्यू मिशनों और विदेशों में भारतीयों की सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता के लिए दुनिया भर में सम्मान हासिल किया है... दुनिया भर में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि रहनी चाहिए."

ईरान में इंटरनेट ठप होने के कारण, हमले की खबर मिलते ही माता-पिता अपने बच्चों की कुशलता जानने और उनसे संपर्क करने के लिए बेचैन हो उठे. श्रीनगर के रहने वाले हैदर, की बेटी ईरान में पढ़ाई करती है. उन्होंने बताया कि कल उनकी आखिरी बार बात हुई थी और तब से संपर्क पूरी तरह टूटा हुआ है. उन्होंने बताया कि उनकी बेटी पिछले महीने ही भारत आई थी.

उन्होंने अपनी चिंता जताते हुए कहा, "वह केवल एक हफ्ते पहले ही वापस गई थी. अब जैसा कि हम सुन रहे हैं, स्थिति बहुत चिंताजनक है. हम बस यही चाहते हैं कि हमारे बच्चों को वहां से सुरक्षित निकाला जाए."

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