डिजिटल होंगे रेल कर्मचारी, सर्विस रिकॉर्ड के लिए नहीं काटने होंगे चक्कर: तैयार हो रहा मास्टर ट्रेनर्स का पूल
भारतीय रेलवे अपने लाखों कर्मचारियों की सुविधा के लिए एक बड़ा डिजिटल बदलाव करने जा रहा है. चंचल मुखर्जी की रिपोर्ट.


Published : September 1, 2026 at 5:14 PM IST
नई दिल्लीः अब रेल कर्मचारियों को अपनी नौकरी से जुड़ी जानकारियों, ट्रांसफर और अन्य सेवाओं के लिए कागजी फाइलों या मैन्युअल प्रक्रियाओं पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा. रेलवे प्रशासन एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहा है जिससे डिजिटल सिस्टम का उपयोग करना बेहद आसान और सुलभ हो जाएगा, ताकि कर्मचारियों को काम के दौरान आने वाली हर छोटी-बड़ी तकनीकी दिक्कत से तुरंत राहत मिल सके.
क्या है नया प्लान
इसके लिए रेलवे हर विभाग में 'एचआरएमएस मास्टर ट्रेनर्स' का एक विशेष पूल बनाने का प्रस्ताव ला रहा है. इस योजना के तहत कर्मचारियों के लिए एक नियमित और सुनियोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाएगा. तैयारी यह है कि हर विभाग के भीतर ही ऐसे प्रशिक्षित कर्मचारी मौजूद रहें, जो अपने साथी कर्मचारियों को विभिन्न डिजिटल सेवाओं का उपयोग करने का सही तरीका सिखा सकें.
क्या कहते हैं रेलकर्मी
ये मास्टर ट्रेनर्स ऑन-ड्यूटी मार्गदर्शन करेंगे और ऑनलाइन सिस्टम को ऑपरेट करने में आने वाली सभी दिक्कतों को मौके पर ही दूर करेंगे, जिससे पूरी व्यवस्था पूरी तरह यूजर-फ्रेंडली बन सके. ईटीवी भारत से बात करते हुए रेलवे कर्मचारी नवीन कुमार ने कहा, "रेलवे प्रणालियों का आधुनिकीकरण कर्मचारियों के लिए बेहतर है क्योंकि इसने कर्मचारियों के लिए अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी देखना और उसे ट्रांसफर करना आसान बना दिया है, जिससे फाइलों पर निर्भरता कम हुई है."
कुमार ने पेपरलेस व्यवस्था के फायदे बताते हुए समझाया कि पहले की व्यवस्था में अक्सर तब मुश्किलें खड़ी हो जाती थीं जब भौतिक दस्तावेज खो जाते थे या इधर-उधर हो जाते थे. उदाहरण के लिए, यदि हावड़ा डिवीजन में काम करने वाले किसी कर्मचारी का अनुरोध पर दिल्ली डिवीजन में ट्रांसफर कर दिया जाता था, तो उनके सर्विस रिकॉर्ड को डाक द्वारा भेजा जाना पड़ता था या किसी अधिकारी द्वारा व्यक्तिगत रूप से लाना पड़ता था. यह प्रक्रिया बहुत समय लेने वाली थी और यदि दस्तावेज खो जाते थे, तो इससे काम में काफी देरी हो सकती थी.
उन्होंने अपनी बात जोड़ते हुए कहा- "हालांकि, इस आधुनिक व्यवस्था के तहत, जानकारी को रेलवे के आईपास (IPAS) सिस्टम के जरिए इलेक्ट्रॉनिक रूप से ट्रांसफर किया जाता है. संबंधित डिवीजन सीधे कर्मचारी की सेवा से जुड़े विवरणों को देख सकता है, जिससे रिकॉर्ड को भौतिक रूप से भेजने की जरूरत खत्म हो जाती है."
इसी तरह के विचार व्यक्त करते हुए, एक अन्य रेलवे कर्मचारी आलोक चंद्र प्रकाश ने ईटीवी भारत को बताया कि भारतीय रेलवे का आधुनिकीकरण केवल मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली (HRMS) के विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विभागीय रिकॉर्ड रखने और दैनिक कामकाज को आसान बनाने के लिए कई अन्य डिजिटल सिस्टम भी शुरू किए गए हैं. विभिन्न विभागों के पास अब रख-रखाव और कामकाज के रिकॉर्ड बनाए रखने के लिए अपने खुद के डिजिटल प्लेटफॉर्म हैं.
उदाहरण के लिए, सिग्नल से जुड़े रख-रखाव के रिकॉर्ड के लिए सिग्नल मेंटेनेंस मैनेजमेंट सिस्टम का उपयोग किया जाता है, जबकि ट्रैक के रख-रखाव की गतिविधियों को संभालने के लिए ट्रैक मेंटेनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (TMS) का उपयोग किया जाता है. इसी तरह, ट्रेनों और उनके संचालन की निगरानी के लिए भी सिस्टम विकसित किए गए हैं.
उन्होंने समझाया, "ट्रेनों से जुड़ा डेटा, जिसमें जीपीएस (GPS) और डेटा लॉगर्स के जरिए जुटाई गई जानकारी भी शामिल है, उसे संबंधित सिस्टम से जोड़ा जा सकता है. स्टेशन मास्टर बस एक ट्रेन नंबर दर्ज कर सकते हैं, जिसके बाद उस ट्रेन की पूरी जानकारी अपलोड हो जाती है और डिजिटल रूप से उपलब्ध हो जाती है."
उन्होंने बताया कि रेलवे नेटवर्क के सभी विभागों ने तेजी से अपने काम और रिकॉर्ड रखने की प्रक्रियाओं को ऑनलाइन कर दिया है. इस डिजिटलीकरण ने कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता को कम कर दिया है और जानकारी तक पहुंचना व उसकी निगरानी करना आसान बना दिया है. उन्होंने आगे कहा कि अतिरिक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों या समर्पित प्रशिक्षकों की शुरुआत को सकारात्मक रूप से देखा जाना चाहिए, क्योंकि कर्मचारियों को आधुनिक रेलवे प्रणालियों को सीखने और अपनाने के लिए अधिक अवसर प्रदान करने में कोई बुराई नहीं है.
यह पहल ऐसे समय में की जा रही है जब एचआरएमएस का लगातार विस्तार हो रहा है, जिसके तहत कर्मचारियों से जुड़ी सेवाओं, स्थापना मामलों और कैडर प्रबंधन मॉड्यूल के बढ़ते दायरे को शामिल किया जा रहा है. उम्मीद है कि यह कार्यक्रम सभी जोनल रेलवे और उत्पादन इकाइयों में लगातार क्षमता निर्माण तंत्र तैयार करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि कर्मचारी विभिन्न HRMS सेवाओं का प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकें.
रेलवे अधिकारियों ने बताया कि इस कार्यक्रम को पूरा करने वाले उम्मीदवारों को प्रमाणित एचआरएमएस मास्टर ट्रेनर्स के रूप में मान्यता दी जाएगी. ये ट्रेनर बाद में अपने-अपने रेलवे और उत्पादन इकाइयों के भीतर स्थानीय प्रशिक्षण कार्यक्रम और जागरूकता सत्र आयोजित करेंगे, जिससे कर्मचारियों को ऑनलाइन कामकाज को समझने और सिस्टम का उपयोग करने की उनकी क्षमता में सुधार करने में मदद मिलेगी.
रेलवे के लिए, प्रमाणित प्रशिक्षकों का एक नेटवर्क तैयार होने से देश भर में ऑनलाइन सेवाओं को एक समान तरीके से लागू करने और उनका उपयोग सुनिश्चित करने में मदद मिलने की उम्मीद है. इससे मानव संसाधन प्रशासन मजबूत होगा, डिजिटल सिस्टम का उपयोग करने में कर्मचारियों की क्षमता बढ़ेगी और नए एचआरएमएस मॉड्यूल व फीचर्स को आसानी से लॉन्च करने में मदद मिलेगी.
एक अन्य रेलवे कर्मचारी रमनिक शर्मा ने ईटीवी भारत को बताया कि नौकरी में शामिल होने से लेकर रिटायरमेंट तक, कर्मचारियों को अब इसी डिजिटल मोड का उपयोग करना होगा. उन्होंने कहा, "यह कर्मचारी के रेलवे से जुड़ने के समय से लेकर उनके रिटायर होने तक के लगभग हर चरण को कवर करता है. इसमें सेवा से जुड़े विभिन्न रिकॉर्ड और प्रक्रियाएं शामिल हैं जिन्हें पहले अलग-अलग सिस्टम या कागजी दस्तावेजों के जरिए संभाला जाता था."
उन्होंने कहा कि इस सिस्टम को सुचारू रूप से चलाने की कुंजी यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी इसका उपयोग करना समझें. यदि विभिन्न फीचर्स और प्रक्रियाओं पर उचित दिशानिर्देश और स्पष्ट निर्देश प्रदान किए जाएं, तो कर्मचारी इस प्लेटफॉर्म का अधिक प्रभावी ढंग से उपयोग कर सकेंगे.
इसे भी पढ़ेंः

