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रेलगाड़ी...छुक-छुक से 180KM/h स्पीड, सामान्य कोच से लग्जरी वंदेभारत तक; जानिए 173 साल में कितनी बदली ट्रेन

भारतीय रेलवे बदलाव-अपग्रेडेशन की राह पर है. कोयले-डीजल के बाद बिजली के इंजन लगे और अब हाईड्रोजन गैस से ट्रेन चलाने की तैयारी है.

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प्राचीनता से आधुनिकता की ओर बढ़ती भारतीय रेल की रोचक कहानी. (Photo Credit; ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 31, 2026 at 3:14 PM IST

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Updated : January 31, 2026 at 4:25 PM IST

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हैदराबाद: भारतीय रेल वर्तमान में 173 साल की हो गई है और आज पहले से भी ज्यादा जवान दिखती है. भाप इंजन यानी कोयले की आग में धधक कर छुक-छुक...करके चलने वाली रेलगाड़ी आज के आधुनिक युग में बिजली से फर्राटा भर रही है और 150 किमी/घंटे की स्पीड से लोगों को उनकी मंजिल तक पहुंचा रही है. यही नहीं लोगों को लग्जरी ट्रैवलिंग का फील भी दे रही है. जिसके एवज में यात्री साधारण ट्रेन से 20-30 फीसदी अधिक किराया भी दे रहे हैं.

कोयले से चली ट्रेन, डीजल-बिजली के बाद अब हाईड्रोजन से चलने को तैयार है. 1 फरवरी 2026 यानी कल रविवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण यूनियन बजट पेश करेंगी. उसमें रेल बजट भी समाहित होगा. जिसमें नई-नई योजनाएं होंगी. लेकिन, उसके पहले ETV Bharat आपको रेलवे के उस हसीन सफर के बारे में बताने जा रहा है, जिसमें ट्रेन कोयले की आग में धधक कर काला धुआं छोड़ते हुए छुक-छुक करते चली और लोगों की लाइफलाइन बनी. समय-समय पर हुए बड़े बदलावों ने कैसे उसे लग्जरी (Luxary) लुक दिया और खास लोगों की धड़कन बना दिया.

स्टीम इंजन की कहानी.
स्टीम इंजन की कहानी. (Photo Credit; ETV Bharat)

पहली ट्रेन...भाप इंजन से छुक-छुक कर चली: भारत में पहली ट्रेन भाप के इंजन वाली थी. कोयला जलाकर भाप जेनरेट की जाती थी. दुनिया में भाप इंजन ट्रेन की शुरुआत 19वीं सदी की शुरुआत में हुई, जिसका श्रेय मुख्य रूप से रिचर्ड ट्रेविथिक को जाता है, जिन्होंने इंग्लैंड में 1804 में पहला व्यावहारिक भाप इंजन बनाया. इसे व्यावसायिक सफलता 1829 में जॉर्ज स्टीफेंसन के 'रॉकेट' इंजन से मिली. भारत में पहली यात्री ट्रेन 16 अप्रैल 1853 को मुंबई से ठाणे के बीच तीन भाप इंजनों के साथ चली थी.

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काला धुआं उगलने वाली ट्रेन को 104 साल बाद मिला नया विकल्प: भारत में भाप इंजन यानी काला धुआं उगलने वाली रेलगाड़ी को करीब 104 साल बाद डीजल इंजन वाली ट्रेन के रूप में नया अवतार मिला. वैसे दुनिया में डीजल इंजन काफी पहले ही आ गया था. पहले डीजल इंजन का प्रोटोटाइप जर्मन इंजीनियर रुडोल्फ डीजल ने 1893 में बनाया था, लेकिन व्यावसायिक उपयोग 1930 के आसपास शुरू हुआ. भारत में डीजल इंजन की शुरुआत 1950 के आसपास हुई. 1957 में पहली मुख्य लाइन डीजल ट्रेन (WDM1) अमेरिका से मंगाई गई, जो भाप इंजन का तेज और कुशल विकल्प बनी.

इलेक्ट्रिक इंजन की कहानी.
इलेक्ट्रिक इंजन की कहानी. (Photo Credit; ETV Bharat)

इलेक्ट्रिक इंजन ट्रेन: सेंट्रल ऑर्गेनाइजेशन फॉर रेलवे इलेक्ट्रीफिकेशन (CORE) के अनुसार भारत में पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन 3 फरवरी 1925 को चली थी. यह ऐतिहासिक ट्रेन बॉम्बे (अब मुंबई) के विक्टोरिया टर्मिनस और कुर्ला हार्बर के बीच चलाई गई थी, जो 1500 वोल्ट डीसी (DC) सिस्टम पर थी. यह भारत और एशिया की पहली इलेक्ट्रिक ट्रेन सेवा थी.

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इस समय इलेक्ट्रिक इंजन को सवारी गाड़ी में प्रयोग नहीं किया जाता था. इसका प्रयोग सिर्फ शंटिंग के लिए होता था. बाद में 1957 के आसपास रेलवे ने 25 kV 50 Hz AC ट्रैक्शन को अपनाया और आधुनिक इलेक्ट्रिक इंजन को पटरी पर उतारा. यही तकनीक आज के इलेक्ट्रिक इंजनों में भी है.

राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन भारत की पहली लग्जरी ट्रेन.
राजधानी एक्सप्रेस ट्रेन भारत की पहली लग्जरी ट्रेन. (Photo Credit; ETV Bharat)

लग्जरी ट्रेन के रूप में मिली राजधानी एक्सप्रेस: भारत को पहली लग्जरी और पूरी तरह से एयर कंडीशन्ड (Fully AC) ट्रेन राजधानी एक्सप्रेस के रूप में 1 मार्च 1969 को मिली. इसका उद्देश्य लोगों को बेहतर देने के साथ देश की राजधानी को राज्यों की राजधानी से जोड़ना था. पहली ट्रेन नई दिल्ली और हावड़ा (कोलकाता) के बीच चली थी.

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यह भारतीय रेलवे की पहली पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) और हाई-स्पीड ट्रेन थी, जिसने दोनों शहरों के बीच की दूरी लगभग 17 घंटे 20 मिनट में पूरी कर यात्रा का समय 24 घंटे से कम कर दिया था. इस ट्रेन का किराया मार्ग, दूरी और श्रेणी (AC 1st, 2nd, 3rd) के आधार पर लगभग 1,500 से 8,000 रुपए से अधिक के बीच हो सकता है. थर्ड एसी (3A) का किराया आमतौर पर 2-3 हजार के बीच शुरू होता है.

शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन भारत की पहली कम दूरी की लग्जरी ट्रेन.
शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन भारत की पहली कम दूरी की लग्जरी ट्रेन. (Photo Credit; ETV Bharat)

जवाहर लाल नेहरू की 100वीं जयंती पर दौड़ी शताब्दी एक्सप्रेस: शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत 10 जुलाई, 1988 को रेल मंत्री माधवराव सिंधिया ने की थी. ट्रेन नई दिल्ली और झांसी के बीच चलाई गई थी, जिसे बाद में भोपाल तक बढ़ाया गया. प्रीमियम श्रेणि की इस ट्रेन को देश के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की जन्मशती यानी 100वीं जयंती के उपलक्ष्य में चलाया गया था.

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इसे चलाने का मुख्य उद्देश्य प्रमुख शहरों (मेट्रो शहरों) को तेज गति से जोड़ना और दिन के समय आरामदायक, वातानुकूलित (AC) यात्रा प्रदान करना था. शताब्दी ट्रेन कम दूरी (400-800 किमी) के लिए होती हैं, जो व्यावसायिक/पर्यटन यात्रियों के लिए उसी दिन वापसी (Same Day Return) की सुविधा देती हैं.

मध्यम वर्ग की लग्जरी ट्रेन हमसफर एक्सप्रेस.
मध्यम वर्ग की लग्जरी ट्रेन हमसफर एक्सप्रेस. (Photo Credit; ETV Bharat)

मध्यम वर्ग की प्रीमियम ट्रेन हमसफर: रेलवे ने 16 दिसंबर 2016 को पहली हमसफर एक्सप्रेस ट्रेन की शुरुआत गोरखपुर और आनंद विहार टर्मिनल (नई दिल्ली) के बीच की थी. यह प्रीमियम ट्रेन, पूरी तरह से 3-टियर एसी होती है जिसे मध्यम वर्ग के लिए आधुनिक सुविधाओं, जैसे सीसीटीवी, जीपीएस, आरामदायक बर्थ और भोजन की वैकल्पिक सुविधा के साथ लॉन्च की गई थी. इसका किराया रूट और दूरी के आधार पर बदलता रहता है. आमतौर पर यह 435 से 3125 रुपए के बीच हो सकता है. यह ट्रेन मुख्य रूप से 3AC और स्लीपर (कुछ ट्रेनों में) की सुविधा देती हैं.

तेजस एक्सप्रेस की विशेष बातें.
तेजस एक्सप्रेस की विशेष बातें. (Photo Credit; ETV Bharat)

तेजस...पहली प्राइवेट (कॉरपोरेट) ट्रेन: तेजस एक्सप्रेस, एक प्रीमियम, सेमी-हाई स्पीड (160 किमी/घंटा तक) और पूरी तरह से वातानुकूलित (AC) ट्रेन है. जिसे आईआरसीटीसी (IRCTC) ऑपरेट करता है. यह भारत की पहली कॉर्पोरेट ट्रेन है, जो वाई-फाई, एलसीडी स्क्रीन, स्वचालित दरवाजे और ऑन-बोर्ड खान-पान की विमान जैसी सुविधाएं देती है. पहली तेजस ट्रेन लखनऊ से दिल्ली के बीच 4 अक्टूबर 2019 को चली थी.

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इसके बाद दूसरी तेजस एक्सप्रेस अहमदाबाद-मुंबई के बीच 17 जनवरी 2020 से शुरू की गई. तेजस का किराया रूट के हिसाब से बदलता है. यह डायनामिक प्राइसिंग पर काम करता है. इसलिए तेजस का किराया शताब्दी ट्रेन से 20-30% ज्यादा होता है. मसलन, दिल्ली-लखनऊ रूट पर AC Chair Car का किराया भोजन के साथ लगभग 1125-1260 रुपए और Executive Chair Car का 2310 रुपए होता है.

वंदेभारत एक्सप्रेस की विशेष बातें.
वंदेभारत एक्सप्रेस की विशेष बातें. (Photo Credit; ETV Bharat)

वंदेभारत...स्वदेशी आधुनिक सेमी हाई-स्पीड ट्रेन: वंदे भारत एक्सप्रेस एक स्वदेशी, सेमी-हाई-स्पीड ट्रेन है. इसे 2019 में लॉन्च किया गया था, जिसे 'ट्रेन 18' भी कहते हैं. यह ट्रेन 160 किमी/घंटा तक की गति, आधुनिक सुविधाओं (वाई-फाई, सीसीटीवी, आरामदायक सीटें) और 'मेक इन इंडिया' के तहत ICF चेन्नई में बनाई गई. जो प्रमुख शहरों को तेज यात्रा प्रदान करती है. पहली ट्रेन 15 फरवरी 2019 को नई दिल्ली से वाराणसी के बीच चली थी.

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जनवरी 2026 में पहली स्लीपर वंदेभारत ट्रेन की भी शुरुआत हो गई है. जो हावड़ा से कामाख्या के लिए चल रही है. इसमें 3AC का किराया लगभग 2,300-2,400 रुपए, 2AC का 3,000-3,100 रुपए और 1AC का किराया 3,600-3,800 रुपए के बीच है. इसमें 400 किमी तक का न्यूनतम किराया 3AC के लिए 960 रुपए, 2AC के लिए 1,240 रुपए और 1AC के लिए 1,520 रुपए है.

अब हाईड्रोजन इंजन की ओर भारतीय रेलवे.
अब हाईड्रोजन इंजन की ओर भारतीय रेलवे. (Photo Credit; ETV Bharat)

न कोयला-डीजल, ना बिजली, अब हाईड्रोजन से दौड़ी ट्रेन: भारतीय रेलवे इस समय बदलाव और अपग्रेडेशन की राह पर है. कोयले और डीजल से निकलकर अब हाईड्रोजन फ्यूल सेल तकनीक (Green Hydrogen) की ओर भारतीय रेल बढ़ रही है. 'हाइड्रोजन फॉर हेरिटेज' पहल के तहत, देश की पहली हाईड्रोजन ट्रेन का परीक्षण 2025-26 में जींद-सोनीपत रूट पर शुरू किया गया. ये ट्रेन 140-150 किमी/घंटा की गति से चलेगी, जिनमें केवल पानी की भाप निकलेगी और शून्य कार्बन उत्सर्जन होगा. यह नई पीढ़ी की तकनीक है, जिसमें हाईड्रोजन और ऑक्सीजन से बिजली बनती है, जो पूरी तरह से इको-फ्रेंडली है.

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क्‍या होता है फ्यूल सेल: ये एक ऐसा डिवाइस है, जो केमिकल‍ रिएक्‍शन के जरिए हाईड्रोजन का इस्‍तेमाल बिजली बनाने के लिए करता है. इसके लिए ऑक्‍सीजन की जरूरत होती है और इस प्रक्रिया में इलेक्‍ट्रोलिसिस के कारण बाई प्रोडक्‍ट के रूप में पानी जेनरेट होता है. इस तरह पावर पर्याप्‍त मिल जाती है और प्रदूषण भी नहीं होता.

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Last Updated : January 31, 2026 at 4:25 PM IST