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ईरान-इजराइल जंग का असर खाड़ी देशों तक, कई भारतीय प्रवासी फंसे...हमले के कारण दहशत का माहौल

इजराइल का ईरान से भीषण जंग, युद्ध मिडिल ईस्ट तक फैलने से भारतीय प्रवासियों को सुरक्षा की चिंता

Indian Expats fear for safety as Iran war spreads to Middle East
2 मार्च, 2026 को राजधानी तेहरान पर मिलिट्री हमले के बाद धुएं का गुबार उठते हुए एक आदमी दूरबीन से देखते हुए (फाइल फोटो) (AFP)
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By Moazum Mohammad

Published : March 2, 2026 at 6:21 PM IST

5 Min Read
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श्रीनगर: ईरान जंग की आग में झुलस रहा है. अमेरिका और इजराइल तेहरान और कई अन्य शहरों पर ताबड़तोड़ हमले कर रहा है. वहीं ईरान भी मुंहतोड़ जवाब दे रहा है. हालांकि, इस जंग से भारतीय प्रवासियों को अपने लिए सुरक्षा की चिंता सताने लगी है.

इसी क्रम में एक युवा प्रवासी जोड़े के लिए यह एक सामान्य दिन की तरह शुरू हुआ क्योंकि वे इस महीने सऊदी अरब से बाहर छुट्टियों के लिए अपनी यात्रा की योजना बनाकर खुश थे. वहीं, एक अन्य प्रवासी ने भारत में अपनी मां से मिलने के लिए छुट्टी के लिए आवेदन किया था क्योंकि वह लाइलाज बीमारी से जूझ रही है.

इन सबके बीच ईरान में संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के हवाई हमलों के बाद दुबई के सबसे व्यस्त हवाई अड्डों सहित कई हवाई अड्डों के बंद होने के बाद उनके जैसे प्रवासी खाड़ी देशों में फंस गए हैं. तेहरान ने खाड़ी में अमेरिकी सहयोगियों पर बमबारी करके संघर्ष को बढ़ा दिया है.

बता दें कि, विदेश में रोजगार की वजह से करीब 90 लाख से अधिक भारतीयों ने मध्य पूर्व को अपना घर बना लिया है. यहां से नौकरी करने गए लोगों में इंजीनियर, डॉक्टर और अन्य व्यवसायों में काम करते हैं. ईरान से जंग के बीच भारत ने अपने नागरिकों को अनावश्यक यात्रा से बचने और खाड़ी में सतर्क रहने की सलाह दी है. इस पर मुदासिर अहमद ने कहा कि उन्होंने अपनी यात्रा योजना को रिशेड्यूल किया है.

मुदासिर अहमद ने ईटीवी भारत को फोन पर बताया कि, जब एडवाइजरी जारी की गई तो वह टिकट बुक करने से बस एक क्लिक दूर थे. उन्होंने कहा, "हम सुरक्षित हैं और सामुदायिक समूहों में एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं. लेकिन हमलों के कारण दहशत फैल गई है और आवाजाही सीमित हो गई है... स्थिति तनावपूर्ण है." उन्होंने कहा कि, उनके जैसे कई लोग प्रतिबंधों के कारण देश नहीं छोड़ सकते और उन्हें य अंदर से चिंतित कर रहा है.

विदेश मंत्रालय ने ईरान और खाड़ी के घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की है, और 'सभी पक्षों से संयम बरतने, तनाव बढ़ने से बचने और नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने' का आग्रह किया है. संयुक्त अरब अमीरात में, एक भारतीय प्रवासी जो स्कूल में पढ़ाकर अपना गुजारा चलाते हैं और दुबई हवाई अड्डे के आसपास रहते है.

उनका कहना है कि उनके बच्चे दूर से आसमान में धुआं भरते हुए देखकर डर के मारे चिल्लाने लगे. मध्य पूर्व में पिछला दशक बिताने वाले एक व्यवसायी ने कहा, "विस्फोट के बाद भावनाएं बदल गई हैं.. मैं यहां एक शरणार्थी की तरह महसूस करता हूं."

एक बाहर से आए शख्स ने बताया कि वह पास में ही काम कर रहा था, तभी सऊदी अरामको की एक जगह पर ड्रोन से हमला हुआ. सऊदी अरब के खास रिफाइनिंग हब में से एक, रास तनुरा पर हमले से ऊर्जा में रुकावट और बढ़ गई है. उन्होंने आगे कहा कि, यह एक जोरदार धमाका था और हमने इसे दूर से सुना. इसके तुरंत बाद, आसमान धुएं से भर गया, जिससे लोगों में घबराहट और बढ़ गई."

कई लोगों ने इस जंग से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए और असुरक्षा की भावना में आकर सोशल मीडिया का सहारा लिया है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लोगों को सुरक्षित निकालने का आग्रह किया है. ईरान में फंसे कई भारतीय छात्रों ने सोशल मीडिया पर भावनात्मक वीडियो साझा किए क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा का डर है.

ईरान में, जहां जम्मू-कश्मीर के अधिकांश 600 से 700 भारतीय छात्र अभी फंसे हुए हैं, वे वहां से निकलने की मांग कर रहे हैं क्योंकि विस्फोटों के बीच डर और बढ़ गया है. संसद सदस्य आगा रुहुल्ला ने कहा कि वे विदेश मंत्रालय के संपर्क में हैं. उन्हें बताया गया है कि हवाई क्षेत्र और सीमाएं फिर से खुलने पर निकासी शुरू हो जाएगी. ईरान ने अपना हवाई क्षेत्र बंद कर दिया है और इराक, आर्मेनिया और अजरबैजान के साथ सीमाएं बंद कर दी हैं.

उन्होंने कहा, "तब तक, जब भी संभव हो, सभी छात्रों को निकासी के लिए क़ोम शहर में इकट्ठा होना चाहिए." ऑल इंडिया मेडिकल स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ मोहम्मद मोमिन खान ने कहा, भारतीय दूतावास द्वारा किया गया स्थानांतरण मंगलवार सुबह शुरू होगा.

उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से तेहरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में बहुमत वाले ईरान के विश्वविद्यालयों में फंसे छात्रों को मंगलवार सुबह से सुरक्षित स्थानांतरण के निर्देश दिए गए हैं.

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