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नई दिल्ली में 'इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026' का आगाज 16 से, जुटेंगे 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधि

ग्लोबल साउथ के पहले ग्लोबल AI समिट की मेज़बानी भारत करेगा, जिसमें ह्यूमन-सेंट्रिक और इनक्लूसिव AI पर फोकस किया जाएगा.

Global AI Summit
ग्लोबल AI समिट की जानकारी देते विशेषज्ञ. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 9, 2026 at 8:49 PM IST

7 Min Read
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सुरभि गुप्ता

नई दिल्लीः भारत 16 से 20 फरवरी 2026 तक नई दिल्ली में 'इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026' की मेजबानी करने के लिए तैयार है. यह एक ऐतिहासिक आयोजन है जो भारत को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के भविष्य पर होने वाली वैश्विक चर्चाओं के केंद्र में रखता है. यह 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देशों) में आयोजित होने वाला अब तक का पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन होगा.

इस शिखर सम्मेलन का उद्देश्य केवल सिद्धांतों पर बात करना नहीं, बल्कि इसके वास्तविक परिणामों पर ध्यान केंद्रित करना है. भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण "सर्वे भवंतु सुखिनः" और 'मानवता के लिए एआई' के वैश्विक आदर्श पर आधारित इस पांच दिवसीय कार्यक्रम में दुनिया भर के राष्ट्राध्यक्ष, मंत्री, उद्योग जगत के नेता और विशेषज्ञ शामिल होंगे.

सरकारी अनुमानों के अनुसार, इसमें 15-20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष, 50 से अधिक अंतरराष्ट्रीय मंत्री और 40 से ज्यादा वैश्विक व भारतीय सीईओ हिस्सा ले सकते हैं. इस सम्मेलन की प्रक्रिया में 100 से अधिक देश सक्रिय रूप से भाग ले रहे हैं, जो एआई के नियम तय करने में वैश्विक सहयोग की बढ़ती जरूरत को दर्शाता है.

'इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026' में तीन मुख्य सिद्धांत तय किए गए हैं, जिन्हें 'सूत्र' कहा गया है. ये सूत्र एआई पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग की नींव रखते हैं.

  • पहला सूत्र: लोग (People): यह सूत्र 'मानव-केंद्रित एआई' पर जोर देता है, जो लोगों के अधिकारों की रक्षा करे, भरोसा बढ़ाए और सेवाओं तक सबकी बराबर पहुंच सुनिश्चित करे. इसका मानना है कि तकनीक का उद्देश्य मानव कल्याण होना चाहिए और एआई को इंसानों की क्षमताओं को बढ़ाना चाहिए, न कि उन्हें हाशिए पर धकेलना.
  • दूसरा सूत्र: ग्रह (Planet): यह सूत्र पर्यावरण के अनुकूल एआई समाधानों पर केंद्रित है. इसका उद्देश्य ऊर्जा की कम खपत करने वाले कंप्यूटिंग सिस्टम विकसित करना और एआई का उपयोग जलवायु परिवर्तन से लड़ने और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में करना है. यह आज के समय में बहुत जरूरी है क्योंकि बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग से ऊर्जा की खपत और कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा है.
  • तीसरा सूत्र: प्रगति (Progress): यह सूत्र समावेशी आर्थिक विकास, नवाचार (Innovation) और क्षमता निर्माण पर आधारित है. इसका लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि एआई से होने वाली आर्थिक तरक्की का लाभ सभी देशों और समुदायों को मिले, विशेषकर विकासशील देशों को, जो प्रतिस्पर्धी एआई बाजार में पीछे छूट सकते हैं.

ये तीनों सूत्र मिलकर एक ऐसा ढांचा तैयार करते हैं जो जिम्मेदारी के साथ नवाचार को बढ़ावा देता है, ताकि तकनीकी प्रगति से दुनिया में असमानता न बढ़े.

मानव-केंद्रित विकास और स्थिरता

शिखर सम्मेलन से जुड़े परामर्श के दौरान CSIR-NIScPR की निदेशक डॉ. गीता वाणी रायसम ने कहा कि बिना मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के विकास कभी भी टिकाऊ नहीं हो सकता. उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऊर्जा सुरक्षा न केवल भारत के विकास के लिए बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण है. इसे मानव-केंद्रित सोच, स्थिरता और दीर्घकालिक ऊर्जा सुरक्षा के नजरिए से देखा जाना चाहिए.

डॉ. रायसम ने बताया कि इन चर्चाओं में भारत और विदेशों के विशेषज्ञ एक साथ आए हैं, जो मानवता की भलाई के लिए काम करने के भारत के पुराने दर्शन "वसुधैव कुटुंबकम" को दर्शाता है. उन्होंने कहा कि स्थिरता और विकास के प्रति भारत का नजरिया न केवल हमारे देश के लिए बल्कि पूरे ग्लोबल साउथ (विकासशील देशों) और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए भी बहुत प्रासंगिक है.

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ये परामर्श एक स्पष्ट रोडमैप तैयार करने में मदद करेंगे और ऐसी नीतियां बनाएंगे जो इंसान को विकास के केंद्र में रखें. शिखर सम्मेलन के तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों- लोग (People), ग्रह (Planet) और प्रगति (Progress) का जिक्र करते हुए डॉ. रायसम ने रेखांकित किया कि तकनीकी उन्नति के साथ-साथ समान प्रगति और धरती की सुरक्षा भी साथ-साथ चलनी चाहिए.

AI: संभावनाएं और चुनौतियां

भारतीय राष्ट्रीय विज्ञान अकादमी (INSA) के पूर्व अध्यक्ष प्रो. आशुतोष शर्मा ने कहा कि पिछले दशक में मानव जीवन में एआई का प्रवेश एक लंबी यात्रा की केवल शुरुआत है. उन्होंने बताया कि एआई अभी अपने शुरुआती दौर में है, फिर भी यह सोचने और काम करने की व्यक्तिगत मानवीय क्षमता को पीछे छोड़ रहा है. ऐसा इसलिए है क्योंकि एआई डेटा के विशाल और आपस में जुड़े भंडारों से सीखता है, जबकि इंसानी दिमाग आमतौर पर अकेले और सीमित दायरे में सीखता है.

प्रो. शर्मा ने कहा कि भारत की चुनौती दुनिया से अलग है. उम्रदराज होती आबादी वाले देशों के विपरीत, भारत को अपनी विशाल युवा आबादी के लिए अवसर पैदा करने के लिए AI का उपयोग करना चाहिए. विशेष रूप से उन समुदायों तक स्वास्थ्य सेवा, बीमारी की जांच, ऊर्जा और आवश्यक सेवाएं पहुंचाने के लिए, जहां पारंपरिक सिस्टम नहीं पहुंच पाते. इसके लिए पश्चिमी देशों के मॉडलों को आंख बंद करके अपनाने के बजाय स्थानीय संदर्भ, सांस्कृतिक संवेदनशीलता और भाषाई विविधता की आवश्यकता है.

टैलेंट और समावेश में भारत की ताकत

भारत का तेजी से बढ़ता एआई इकोसिस्टम इस शिखर सम्मेलन के एजेंडे का एक मुख्य स्तंभ है. एआई टैलेंट के वितरण पर नजर डालें, तो भारत विश्व स्तर पर एआई विशेषज्ञों की संख्या के मामले में अग्रणी देशों में से एक है. 2016 के बाद से भारत में एआई टैलेंट की एकाग्रता तीन गुना बढ़ गई है. इसके अलावा, स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स 2025 के अनुसार, एआई टैलेंट की ग्रोथ के मामले में भारत दुनिया भर में पहले या दूसरे स्थान पर रहा है.

'इंडिया-एआई फ्यूचर स्किल्स' जैसी पहलों के साथ-साथ एआई शोधकर्ताओं को मिल रहे विशेष सहयोग और वैश्विक स्टार्टअप एक्सीलेरेटर की मदद ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की साख बढ़ाई है. ये सभी प्रयास भारत को एआई के क्षेत्र में दुनिया का एक पसंदीदा और भरोसेमंद साझेदार बनाते हैं.

इसके अलावा, समावेश की दिशा में 'भाषिणी' (BHASHINI) जैसा प्लेटफॉर्म, जो 22 भारतीय भाषाओं (आवाज़) सहित कुल 36 से अधिक भाषाओं के डिजिटलीकरण में मदद करता है, और किसानों के लिए एआई सेवा 'किसान ई-मित्र', इसके बेहतरीन उदाहरण हैं. ये दिखाते हैं कि भारत ने अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर में एआई को इस तरह शामिल किया है जिससे देश के सभी क्षेत्रों और नागरिकों को समान रूप से एआई सेवाओं का लाभ मिल सके.

इस आयोजन का दूसरा मुख्य उद्देश्य 'इंडिया-एआई सेफ्टी इंस्टीट्यूट' के नेतृत्व में ऐसे नियम और नियामक ढांचे बनाना है, जिससे सुरक्षित और जवाबदेह एआई तैयार किया जा सके. यह संस्थान भरोसेमंद एआई प्रोजेक्ट्स की दिशा में काम कर रहा है, ताकि लोगों में एआई के प्रति विश्वास पैदा हो और वे एल्गोरिदम के पक्षपात जैसे जोखिमों से सुरक्षित रह सकें.

इस प्रकार, भारत में एआई नियमों, गवर्नेंस और सुरक्षा के लिए किया जा रहा कार्य न केवल भारतीय नागरिकों की जरूरतों को पूरा करेगा, बल्कि एआई रेगुलेशन और निगरानी पर चल रही वैश्विक चर्चाओं और रुझानों के साथ भी भारत को मजबूती से खड़ा करेगा.

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