दुश्मनों के लिए कितना खतरनाक है जेवलिन वेपन सिस्टम? जानें इसकी 'फायर-एंड-फॉरगेट' टेक्नोलॉजी के बारे में
जेवलिन सिस्टम मध्यम दूरी की एक आधुनिक और फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल प्रणाली है.

Published : August 31, 2026 at 5:07 PM IST
हैदराबाद: भारत ने भारतीय सेना की युद्ध क्षमता बढ़ाने के लिए अमेरिका से जेवलिन टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए समझौता किया है. जेवलिन सिस्टम मध्यम दूरी की एक आधुनिक और 'फायर-एंड-फॉरगेट एंटी-टैंक' गाइडेड मिसाइल प्रणाली है. आइए जानते हैं कि, जेवलिन वेपन सिस्टम (JAVELIN WEAPON SYSTEM) दुश्मनों के खिलाफ कैसे काम करता है.
जेवलिन सिस्टम का इस्तेमाल अमेरिकी सेना, अमेरिकी मरीन कॉर्प्स और कई अन्य देशों की सेनाएं करती हैं. इसे बख्तरबंद वाहनों और मजबूत किलेबंदी वाली जगहों समेत कई तरह के लक्ष्यों के खिलाफ इस्तेमाल करने के लिए बनाया गया है.
जेवलिन वेपन सिस्टम क्या है?
दुनिया का सबसे अच्छा शोल्डर-फायर्ड एंटी-आर्मर सिस्टम, जेवलिन दुश्मन से लड़ाई करता है. लॉन्च के बाद जेवलिन अपने आप टारगेट तक पहुंच जाता है, जिससे गनर कवर ले सकता है और काउंटरफायर से बच सकता है. इतना ही नहीं जेवलिन वेपन सिस्टम, सैनिक या मरीन फायरिंग के तुरंत बाद अपनी जगह बदल सकते हैं, या किसी दूसरे खतरे से निपटने के लिए रीलोड कर सकते हैं. आर्च्ड टॉप-अटैक प्रोफाइल का इस्तेमाल करके, जेवलिन बेहतर दृश्यता के साथ अपने टारगेट को निशाना बनाकर हमला करता है, जहां आर्मर सबसे कमजोर होता है.
जेवलिन का इतिहास
FGM-148 जेवलिन की अवधारणा (कॉन्सेप्ट) सबसे पहले कोल्ड वॉर के दौरान आया था. इसे DARPA के 'टैंक ब्रेकर' प्रोग्राम के तहत डिजाइन किया गया था. अमेरिकी सैनिक को अपने M47 ड्रैगन एंटी-टैंक मिसाइल सिस्टम के बदलने की जरूरत थी, जो मानक के हिसाब से काम नहीं कर रहा था. आखिरकार सर्विस ने मार्टिन मैरिएटा और टेक्सास इंस्ट्रूमेंट्स के जॉइंट वेंचर को इस पर काम करने का कॉन्ट्रैक्ट दिया. जेवलिन की पहली टेस्ट फ्लाइट अप्रैल 1991 में हुई, जिसके बाद मार्च 1993 में पहले लॉन्चर का टेस्ट हुआ. ये दोनों टेस्ट सफल रहे. 1994 में इसके कम उत्पादन के लिए अनुमति मिलने के बाद, यूएस आर्मी के सैनिकों के साथ जेवलिन की पहली तैनाती 1996 में हुई.
जेवलिन कैसे काम करता है
फायर करने के लिए, गनर चुने हुए टारगेट पर कर्सर रखता है. फिर जेवलिन कमांड लॉन्च यूनिट मिसाइल को लॉन्च से पहले लॉक-ऑन सिग्नल भेजता है. अपने सॉफ्ट लॉन्च डिजाइन के साथ, जेवलिन को बिल्डिंग या बंकर के अंदर से सुरक्षित रूप से फायर किया जा सकता है.
रेथियॉन, लॉकहीड मार्टिन जेवलिन जॉइंट वेंचर द्वारा इसका विकास और उत्पाद किया गया. जेवलिन का इस्तेमाल अमेरिकी सैनिक और अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के लिए ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के मुख्य हथियार के तौर पर किया जाता है. बहुत खतरनाक मीडियम-रेंज वाला जेवलिन 1994 से फुल-रेट प्रोडक्शन में है.
"फायर-एंड-फॉरगेट" टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके, यह हथियार बिना किसी बाहरी कमांड, कंट्रोल या टारगेट डेज़िग्नेशन के खुद ही टारगेट तक पहुंच जाता है, जिससे सैनिक और उसका यह सिस्टम तेजी से दूसरे टारगेट पर हमला कर सकते हैं, कवर ले सकते हैं या अपनी जगह बदल सकते हैं.
जेवलिन को इस्तेमाल करने वाला सैनिक न सिर्फ खुद को दुश्मनों से काफी हद तक सुरक्षित रख सकता है, बल्कि वह एक लो सिग्नेचर, मिनिमम स्मोक मोटर का इस्तेमाल करके टॉप-अटैक टारगेट एंगेजमेंट ट्रैजेक्टरी का इस्तेमाल कर सकता है जो दुश्मन द्वारा पता लगाने की संभावना को कम करता है. एक इन्फ्रारेड सीकर दिन और रात, सभी मौसम में सैन्य अभियान में मदद करता है, जो एडवांस्ड सिग्नल प्रोसेसिंग और ट्रैकिंग और गाइडेंस एल्गोरिदम के साथ मिलकर, आज के युद्ध के माहौल के लिए हाई सटीकता और सटीक जुड़ाव के साथ-साथ मजबूत काउंटर-मेजर रेजिस्टेंस भी देता है.
जंग में अपनी सटीकता और ताकत को सिद्ध किया जेवलिन
जेवलिन एक क्लोज कॉम्बैट और एंटी-आर्मर वेपन सिस्टम है जिसका इस्तेमाल अफगानिस्तान, इराक और रूस-यूक्रेन युद्ध में मिलिट्री ऑपरेशन में किया गया है. 1996 में इसके आने के बाद से, जेवलिन का इस्तेमाल अमेरिकी और कोएलिशन फोर्स (गठबंधन बलों) ने 5,000 से ज़्यादा मुठभेड़ों में किया है. चल रहे युद्ध में रूसी टैंकों को खत्म करने के इसके ट्रैक रिकॉर्ड को देखते हुए, इसके ऑपरेटरों ने जेवलिन को "सेंट जेवलिन, प्रोटेक्टर ऑफ यूक्रेन" उपनाम दिया है.
20 साल से ज्यादा के प्रदर्शन के बाद, जैवलिन यूएस मिलिट्री और 25 से ज़्यादा सहयोगी देशों के साथ सेवाओं में है. इस दौरान, 50,000 से ज्यादा मिसाइलें बनाई गई हैं.
अमेरिकी फौज और यूएस मरीन कॉर्प्स के लिए ब्रिगेड कॉम्बैट टीम का मुख्य हथियार
- 25 से ज्यादा देशों में सेवाओं में है.
- 2050 तक यूएस मिलिट्री ऑपरेशनल इन्वेंट्री में होने की उम्मीद है.
- 55,000 राउंड बनाए गए
- 10,000 सीएलयू बनाए गए
- यूक्रेन से पहले 5000 कॉम्बैट फायरिंग
- 23 साल का जंगी प्रदर्शन
- 99 प्रतिशत ऑपरेशनल रेडीनेस रेट
- 94 प्रतिशत एंगेजमेंट सक्सेस रेट
अटैक मोड
- यह सबसे कमजोर पॉइंट को निशाना बनाता है.
- गुफाओं, बंकरों या सॉफ्ट टारगेट पर हमले करने में सक्षम
- रेट ऑफ फायर: 2-प्रति-मिनट प्रति CLU (कमांड लॉन्च यूनिट)
- फायर-एंड-फॉरगेट: सेल्फ-गाइडेड राउंड तेजी से रीलोड करने और तुरंत अपनी पोजिशन बनाने की सुविधा देता है.
जेवलिन की क्षमता
जेवलिन की फायर-एंड-फॉरगेट क्षमता ऑपरेटर को फायरिंग के तुरंत बाद दूसरी जगह जाने में मदद करके दुश्मनों से बचे रहने की काफी हद तक गारंटी देता है.
जेवलिन एक सिंगल मैन-पोर्टेबल फायर-एंड-फॉरगेट मीडियम-रेंज एंटीटैंक वेपन सिस्टम है जिसे सभी जाने-पहचाने और प्रोजेक्टेड थ्रेट आर्मर को हराने के लिए डिजाइन किया गया है. जेवलिन एक वर्सेटाइल, वन-मैन-पोर्टेबल और प्लेटफॉर्म-एम्प्लॉयड प्रिसिजन वेपन सिस्टम है.
टॉप या डायरेक्ट अटैक मोड में फायर किया जा सकता है
- रेंज: ज्यादातर ऑपरेट करने लायक स्थिति में 65 से 4000 मीटर
- मौसम: साफ से खराब
- लो सिग्नेचर मिसाइल लॉन्च: पकड़े जाने, दिखने या पहचान में आने की सबसे कम संभावना होती है.
- वातावरण: सभी बैटलफील्ड रुकावटें.
- क्लास रूम ट्रेनिंग: सिर्फ 72 घंटे लगते हैं.
- एक जेवलिन मिसाइल की कीमत
- लॉन्चर और मिसाइल समेत एक जेवलिन सिस्टम की कीमत 178,000 यूएस डॉलर है. रिप्लेसमेंट मिसाइल की कीमत लगभग 78,000 डॉलर है.
वॉरहेड: टैंडम-शेप चार्ज मल्टी-पर्पस
वजन: 25 lb (11.8 kg) मिसाइल
15.4 lb (7.0 kg) CLU
34 lb (15.5 kg) राउंड
लंबाई: 42.6 in (108.2 cm) मिसाइल
47.2 in (119.8 cm) लॉन्च टब
डायमीटर: 5.0 in (12.7 cm) मिसाइल
5.6 in (14.2 cm) लॉन्च ट्यूब
स्टोरेज: टेम्परेचर -46°C से +71°C के बीच मेंटेन किया जाता है
जैवलिन सिस्टम भारत के लिए कैसे मददगार साबित होग
जैवलिन कई खास तरीकों से भारत के आधुनिकीकरण के लक्ष्यों को मजबूत करता है. सैनिकों के लिए बचे रहने की क्षमता. जेवलिन सीधे तौर पर भारत की सैन्य मजबूती संबंधी जरूरतों से जुड़ा है. फायर-एंड-फॉरगेट सीकर ऑपरेटर को फायर करने और तुरंत दूसरी जगह बदलने की सुविधा देता है. सॉफ्ट-लॉन्च क्षमता इसे बंद जगहों के अंदर से इस्तेमाल करने लायक बनाती है, जो एक बड़ा सामरिक लाभ है.
पहली-स्ट्राइक की सटीकता
DSCA बार-बार कहता है कि इस डील में शामिल सिस्टम भारत की 'पहली स्ट्राइक की सटीकता' को बढ़ाएंगे. यह जैवलिन और एक्सकैलिबर दोनों पार्ट्स पर लागू होता है.
जेवलिन के साथ परस्पर संचालन क्षमता
भारत की सेना पिछले कुछ सालों में ज्यादा अमेरिकी सिस्टम खरीद रही है, और जैवलिन की खरीद जॉइंट ट्रेनिंग या ऑपरेशन के लिए अनुकूलता की एक और परत को जोड़ती है.
भारत के बड़े रणनीतिक लक्ष्यों के लिए समर्थन
मंजूरी में कहा गया है कि यह बिक्री भारत की मारक क्षमता और गतिशीलता के चल रहे आधुनिकीकरण के हिसाब से, रोकथाम और होमलैंड डिफेंस को मजबूत करने की कोशिशों में मदद करती है.
अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि, यह समझौता दिखाता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी लगातार "और प्रगाढ़, अधिक ठोस और अधिक महत्वपूर्ण" होती जा रही है. अभी यह जानकारी सामने नहीं आई है कि भारत कितनी जेवलिन टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल प्रणाली खरीद रहा है और इस खरीद की कुल लागत कितनी है. अमेरिका ने कहा है कि वह भारतीय सेना द्वारा अमेरिकी विदेशी सैन्य बिक्री प्रक्रिया के तहत जेवलिन टैंक रोधी निर्देशित मिसाइल प्रणाली खरीदने के लिए सुरुचि पत्र (एलओए) पर हस्ताक्षर किए जाने का स्वागत करता है.
अमेरिका के एक बयान में कहा गया है कि यह 'महत्वपूर्ण उपलब्धि'अमेरिकी और भारतीय सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को दर्शाती है और भविष्य में दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग का रास्ता खोलेगी.
गोर ने कहा, "जेवलिन समझौता भारतीय सेना के लिए अमेरिका के मजबूत समर्थन को दर्शाता है और हमारे रक्षा उद्योगों के लिए साथ मिलकर काम करने के नए अवसर पैदा करता है." अमेरिकी बयान के अनुसार उन्होंने कहा, "हम भविष्य में ऐसे सहयोग की बहुत संभावनाएं देखते हैं, जिससे दोनों देशों के रक्षा औद्योगिक आधार मजबूत होंगे."
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