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फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का भारत दौरा; डिफेंस डील से पहले जानिए दोनों देशों के बीच कैसे रहे हैं संबंध, कब-कब हुआ बड़ा समझौता?

नीदरलैंड-जर्मनी के बाद भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है फ्रांस, 1971 की जंग में भी दिया था साथ.

भारत-फ्रांस का रिश्ता काफी मजबूत.
भारत-फ्रांस का रिश्ता काफी मजबूत. (Photo Credit; Getty Images)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : February 17, 2026 at 4:55 PM IST

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Updated : February 18, 2026 at 11:58 AM IST

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हैदराबाद : फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों तीन दिवसीय भारत दौरे पर हैं. पहले दिन पीएम मोदी से हुई द्विपक्षीय वार्ता में रक्षा, सैन्य, स्पेस समेत कई बिंदुओं पर चर्चा हुई. दूसरे दिन भी वार्ता जारी है. दोनों देशों में कई बड़ी ट्रेड डील होने जा रही है. यह पहला मौका नहीं है जब रक्षा पर दोनों देशों के बीच इस तरह की डील होगी. ऐसा पहले भी कई बार हो चुका है. देश की आजादी के बाद से ही दोनों देशों के रिश्ते काफी मधुर रहे हैं.

यूरोपियन यूनियन में नीदरलैंड और जर्मनी के बाद फ्रांस भारत का तीसरा सबसे बड़ा ट्रेडिंग पार्टनर है. साल 2024-25 में फ्रांस को भारत ने 70,882.68 करोड़ रुपये के सामानों का एक्सपोर्ट किया था. दोनों देशों के बीच यह द्विपक्षीय व्यापार कई साल पुराना है.

27 जनवरी 2026 को इंडिया-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर साइन होने के बाद फ्रांस के साथ भारत का रिश्ता और मजबूत होने की उम्मीद है. इस रिपोर्ट में हम दोनों देशों के रिश्तों के बारे में बताएंगे. उनकी उपलब्धियों के बारे में जानेंगे. यह भी जानेंगे कि कब-कब फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति भारत आ चुके हैं?.

भारत-फ्रांस के रिश्ते की बड़ी उपलब्धियां : साल 1947 में आजादी के बाद भारत ने फ्रांस के साथ डिप्लोमैटिक रिश्ते बनाए. तब से उनके बीच करीबी और दोस्ताना रिश्ते रहे हैं. 1960 के दशक में फ्रांस ने भारत को श्रीहरिकोटा लांच साइट बनाने में मदद की. इसके बाद लिक्विड इंजन डेवलपमेंट और पेलोड की होस्टिंग में मदद की. भारत और फ्रांस का स्पेस के क्षेत्र में ISRO और फ्रेंच स्पेस एजेंसी सेंटर नेशनल डी एट्यूड्स स्पैटियल्स (CNES) के बीच 50 साल से ज्यादा समय से सहयोग का एक शानदार इतिहास रहा है.

1965 में फ्रांस उन पहले पश्चिमी देशों में से एक था जिसने 1965 की लड़ाई के लिए भारत और पाकिस्तान पर लगे हथियारों के बैन को हटा दिया था. साल 1971 की लड़ाई के दौरान फ्रांस ने भारत की चिंताओं को सही ठहराया था. 1976 में इंडिया-फ्रांस जॉइंट कमिटी फॉर इकोनॉमिक एंड टेक्निकल कोऑपरेशन (JCETC) बनाई गई. साल 1998 में 26 जनवरी को शुरू हुई फ्रांस के साथ स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप भारत के लिए किसी पश्चिमी देश के साथ पहली और यूरोपियन यूनियन के बाहर फ्रांस के लिए पहली पार्टनरशिप थी.

न्यूक्लियर टेस्ट का भी किया सपोर्ट : फ्रांस ने दूसरे पश्चिमी देशों के बैन के बावजूद भारत के न्यूक्लियर टेस्ट का भी सपोर्ट किया था. स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप में दोनों देशों का मुख्य विजन था कि एक मजबूत और बेहतर बाइलेटरल कोऑपरेशन के जरिए अपनी-अपनी स्ट्रेटेजिक ऑटोनॉमी को बढ़ाया जाए. साल 2000 में भारत में फ्रेंच कंपनियों और फ्रांस में भारतीय कंपनियों के लिए एक फास्ट-ट्रैक सिस्टम शुरू करने के लिए एक जॉइंट अनाउंसमेंट साइन किया गया.

फ्रांस से भारत को मिले 36 राफेल : साल 2008 में सिविल न्यूक्लियर कोऑपरेशन एग्रीमेंट पर साइन हुए. यह ग्लोबल न्यूक्लियर ट्रेड में भारत के फिर से जुड़ने की दिशा में एक अहम कदम था. साल 2015 में राफेल फाइटर जेट के लिए इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट को फाइनल किया गया. साल 2022 में फ्रांस द्वारा 2022 तक भारत को 36 राफेल विमानों की डिलीवरी दी गई. साल 2025 में डिफेंस पार्टनरशिप में अहम कामयाबियों में P-75 स्कॉर्पीन प्रोजेक्ट भी शामिल है. इसकी आखिरी और छठी सबमरीन जनवरी में इंडियन नेवी में शामिल की गई.

साल 2026 में 12 फरवरी को इंडियन डिफेंस एक्विजिशन काउंसिल (DAC) ने इंडियन एयर फोर्स (IAF) के लिए 30 अरब की लागत से 114 राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने को मंजूरी मिली.

साल 2024-25 में फ्रांस को भेजे गए थे ये सामान : मिनरल फ्यूल, मिनरल ऑयल और उनके डिस्टिलेशन के प्रोडक्ट (बिटुमिनस सब्सटेंस मिनरल वैक्स) साल 2024 से 25 के दौरान भारत से फ्रांस भेजे गए थे. इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इक्विपमेंट और उनके पार्ट्स भी भेजे गए थे. इनमें साउंड रिकॉर्डर और रिप्रोड्यूसर, टेलीविजन इमेज और साउंड रिकॉर्डर और रिप्रोड्यूसर और पार्ट्स शामिल थे, एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट और उनके पार्ट्स भी भेजे गए थे.

फ्रांस से भारत ने मंगाए थे ये सामान : साल 2024-2025 में फ्रांस से भारत ने एयरक्राफ्ट, स्पेसक्राफ्ट और उसके पार्ट्स मंगाए थे. न्यूक्लियर रिएक्टर, बॉयलर, मशीनरी और मैकेनिकल अप्लायंसेज, उसके पार्ट्स भी वहां से मंगाए गए थे. इलेक्ट्रिकल मशीनरी और इक्विपमेंट और उसके पार्ट्स भी आए थे. टेलीविजन इमेज और साउंड रिकॉर्डर, ऑप्टिकल, फोटोग्राफिक सिनेमैटोग्राफिक मेजरिंग, चेकिंग प्रिसिजन, मेडिकल या सर्जिकल इंस्ट्रूमेंट आदि भी मंगाए गए थे.

भारत में फ्रांस का कितना है इन्वेस्टमेंट? : फ्रांस भारत के लिए FDI (Foreign Direct Investment ) का एक बड़ा सोर्स बनकर उभरा है. भारत में पहले से ही 1 हजार से ज्यादा फ्रेंच कंपनियां मौजूद हैं. डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड (DPIIT) के डेटा के मुताबिक अप्रैल 2000 से मार्च 2025 तक फ्रांस ने कुल 9 अरब 79 करोड़ का निवेश किया है. यह भारत में कुल FDI इनफ्लो का 1.61% है.

इस दौरान फ्रांस से टॉप 5 FDI इक्विटी इनफ्लो में हिस्सा अप्रैल 2000 मार्च 2025 तक इस तरह रहा. सर्विस सेक्टर (17.68%), सीमेंट और जिप्सम प्रोडक्ट (8.33%), एयर ट्रांसपोर्ट (एयर फ्रेट सहित) (6.81%), अलग-अलग इंडस्ट्री (6.67%), पेट्रोलियम और नेचुरल गैस (6.34%).

दोनों देशों के बीच रक्षा संबंध : SIPRI के अनुसार साल 2020-24 में अब तक फ्रेंच हथियारों के एक्सपोर्ट का सबसे बड़ा हिस्सा इंडिया (28 परसेंट) को गया है. यह यूरोपियन देशों को मिले कुल हिस्से (15 परसेंट) से लगभग दोगुना था.

फ्रांस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या : फ्रांस में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों की संख्या लगभग 10000 होने का अनुमान है. 2030 तक उम्मीद है कि ये संख्या करीब 30 हजार हो जाएगी. हर साल फ्रांस आने वाले भारतीय छात्रों में से ज्यादातर वहां बिजनेस मैनेजमेंट की पढ़ाई के लिए जाते हैं. नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के साथ भारत में भी फ्रेंच यूनिवर्सिटी कैंपस को महत्व दिया जाता है.

फ्रांस में काफी भारतीय प्रवासी : फ्रांस की मुख्य भूमि और उसके विदेशी इलाकों में भारतीय प्रवासियों की संख्या काफी ज्यादा है. यह संख्या एक लाख 19 हजार हो सकती है. ये पुडुचेरी, कराईकल, यनम, माहे और चंद्रनगर, तमिलनाडु, गुजरात और पंजाब राज्यों से हैं. वहीं फ्रेंच ओवरसीज टेरिटरीज में इंडियन मूल की अनुमानित आबादी 350,000 से ज्यादा है. फ्रांस में 50 से ज्यादा इंडियन कम्युनिटी ऑर्गनाइजेशन एक्टिव हैं.

भारत में कब-कब आए हैं फ्रांस के राष्ट्रपति? : साल 2006 में 19 फरवरी को फ्रांस के तत्कालीन प्रेसिडेंट जैक्स शिराक भारत आए थे. इस मौके पर भारत में बाइलेटरल कोऑपरेशन के कई क्षेत्रों पर दोनों देशों के बीच बातचीत हुई थी. इसमें इकोनॉमिक और कमर्शियल लिंक, डिफेंस, सिविल न्यूक्लियर एनर्जी, स्पेस, सिविल एविएशन आदि शामिल थे. UN रिफॉर्म्स और डेवलपमेंट की फाइनेंसिंग से जुड़े कई मुद्दों पर भी बात हुई थी.

साल 2010 में आए थे निकोलस सरकोजी : साल 2010 में 4 दिसंबर को फ्रांस के तत्कालीन प्रेसिडेंट निकोलस सरकोजी भारत आए थे. उन्होंने UNSC मेंबरशिप और सिविलियन न्यूक्लियर डील के लिए भारत की कोशिश का सपोर्ट किया था. सरकोजी के दौरे के दौरान फ्रांस की बड़ी न्यूक्लियर कंपनी अरेवा और भारतीय कंपनी NPCIL (न्यूक्लियर पावर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड) ने महाराष्ट्र के जैतापुर में छह में से पहले दो रिएक्टर बनाने के लिए लगभग 7 अरब के न्यूक्लियर रिएक्टर और सर्विस के लिए समझौते पर साइन किए थे.

साल 2013 में आए थे फ्रांस्वा ओलांद : साल 2013 में 14-15 फरवरी के बीच फ्रांस के तत्कालीन राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद भी भारत आए थे. ओलांद और भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने लगभग 9 अरब की शॉर्ट रेंज सरफेस-टू-एयर मिसाइल डील पर बातचीत पूरी की थी. हालांकि बातचीत के बावजूद फ्रांस ने राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए भारत के लिए चर्चित 12 अरब की डील पर साइन नहीं किए.

साल 2016 में 24 से 26 जनवरी तक भी फ्रांस्वा ओलांद भारत दौर पर आए थे. वह स्टेट विजिट और भारत के रिपब्लिक डे 2016 के चीफ गेस्ट थे.

भारत-फ्रांस में हुए अहम समझौतों के बारे में जानिए : 36 राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने पर भारत और फ्रांस के बीच MOU हुआ था. प्रेसिडेंट मैक्रों के दौरे के दौरान, भारत और फ्रांस ने डिफेंस, स्पेस एक्सप्लोरेशन, साइंस और टेक्नोलॉजी, हेल्थ और कई दूसरे सेक्टर में एग्रीमेंट साइन किए. भारत और फ्रांस ने मिलिट्री हार्डवेयर के को-डिजाइन और को-डेवलपमेंट और स्पेस कोऑपरेशन के लिए डिफेंस इंडस्ट्रियल पार्टनरशिप का रोडमैप अपनाया. भारत और फ्रांस साउथवेस्ट इंडियन ओशन में अपने कोऑपरेशन को बढ़ाने पर सहमत हुए.

साल 2018 में भी इमैनुएल मैक्रों 9-12 मार्च तक भारत दौरे पर रहे थे. बातचीत के बाद 14 इंटर-गवर्नमेंटल एग्रीमेंट साइन किए गए. इसमें संबंधित आर्म्ड फोर्सेज के बीच आपसी लॉजिस्टिक्स सपोर्ट देने का एग्रीमेंट भी शामिल था. इसके बाद साल 2024 में भी इमैनुएल मैक्रों भारत के गणतंत्र दिवस परेड में बतौर अतिथि शामिल हुए थे.

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Last Updated : February 18, 2026 at 11:58 AM IST