सैन्य साजो-सामान खरीदार से 100 देशों में हथियार एक्सपोर्ट करने वाली बड़ी ताकत कैसे बना भारत?
हमारा डिफेंस बजट कितना, कौन सा देश सबसे ताकतवर? पाक-बांग्लादेश की क्या है स्थिति, इन सवालों के जवाब पढ़िए इस रिपोर्ट में...

Published : January 20, 2026 at 10:35 AM IST
|Updated : January 20, 2026 at 11:29 AM IST
हैदराबाद (समन्वय पाण्डेय): एक जमाना था जब भारत को बंदूक की एक गोली के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहना पड़ता था. लेकिन, अब स्थिति ये है कि भारत खुद ही छोटे से लेकर बड़े तक हथियार बना रहा है और 100 से अधिक देशों को निर्यात (Export) भी कर रहा है. इसके साथ ही भारत की डिफेंस पावर का दुनिया में डंका भी बज रहा है.
ग्लोबल फायर पावर यानी GFP इंडेक्स के अनुसार भारत अमेरिका, रूस, चीन के बाद दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर रक्षा शक्ति के रूप में उभरकर सामने आया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि ऑपरेशन सिंदूर की भूमिका भारत की इस उपलब्धि में बड़ी रही है. इस ऑपरेशन के जरिए ड्रोन-रोधी कार्रवाइयों से देश ने अपनी रक्षा तैयारियों को पूरी दुनिया के सामने रखा.
इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों ने देश की आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम को और तेज किया. आईए ETV Bharat की रिपोर्ट में जानते हैं कि बार-बार आंख दिखाने वाला पाकिस्तान और अपनी अकड़ में बैठे बांग्लादेश की डिफेंस पावर कितनी है? साथ ही भारत चौथी सबसे बड़ी ताकत कैसे बना, कौन-कौन से हथियार बना रहा और एक्सपोर्ट कर रहा.

भारत का डिफेंस पावर कितना है: जीएफपी सूचकांक के अनुसार, भारत दुनिया की शीर्ष 5 सैन्य शक्तियों में से एक है. 2025 के लिए, वार्षिक जीएफपी समीक्षा में शामिल 145 देशों में से भारत चौथे स्थान पर है. देश का पावर इंडेक्स स्कोर 0.1184 है. यहां बता दें, इंडेक्स का 0.000 स्कोर सर्वश्रेष्ठ माना जाता है.
इस इंडेक्स के अनुसार टॉप-5 देश जिनकी सैन्य शक्ति सबसे अच्छी है उनमें अमेरिका, रूस, चीन, भारत और दक्षिण कोरिया क्रमशः शामिल हैं. इसमें पाकिस्तान की 12वीं और बांग्लादेश की 35वीं रैंक है, जो भारत के मुकाबले काफी कमजोर साबित हो रहे हैं.
पाकिस्तान-बांग्लादेश की सैन्य ताकत कितनी: भारत 0.1184 के पावरइंडेक्स के साथ वैश्विक स्तर पर चौथे स्थान पर है. जबकि, पाकिस्तान 12वें स्थान पर 0.2513 के स्कोर के साथ है. बांग्लादेश 0.6062 के स्कोर के साथ 35वें स्थान पर है. इंडेक्स के अनुसार ये स्कोर सबसे कमजोर श्रेणी में आता है. पावर इंडेक्स पाकिस्तान-बांग्लादेश के मुकाबले भारत की स्थिति को कहीं अधिक मजबूत समग्र और सैन्य प्रभावशील मानता है.

पाकिस्तान से 2 गुना जवान भारत के पास: भारत की विशाल जनसंख्या पाकिस्तान की तुलना में दोगुनी और बांग्लादेश की तुलना में आठ गुना अधिक है. सक्रिय सैनिकों की फोर्स की बात करें तो भारत के पास पाकिस्तान से दोगुने से अधिक और बांग्लादेश से लगभग 10 गुना अधिक जवान हैं.
भारत का रक्षा बजट पाकिस्तान-बांग्लादेश के मुकाबले कहीं ज्यादा: भारत का 75 अरब डॉलर (6.81 लाख करोड़ रुपए) का रक्षा बजट पाकिस्तान के 7.6 अरब डॉलर और बांग्लादेश के 4.4 अरब डॉलर के मुकाबले कहीं अधिक है. भारत के इस हैवी बजट से 2026 तक स्वदेशी मिसाइलों, आधुनिक पनडुब्बियां हथियार और अन्य उत्पाद देखने को मिलेंगे.

पिछले 5 साल के रक्षा बजट में दिखी लगातार बढ़ोतरी: रक्षा बजट में लगातार वृद्धि देखी गई है, जो 2013-14 में 2.53 लाख करोड़ रुपए से बढ़कर 2025-26 में 6.81 लाख करोड़ रुपए हो गया है. यह बढ़ोतरी भारत की सैन्य ताकत को मजबूत करती है. इन आंकड़ों के पीछे एक मजबूत, सुरक्षित और आत्मनिर्भर राष्ट्र निर्माण का दृष्टिकोण है. स्वदेशी प्लेटफार्मों, नई तकनीकों और डिफेंस कॉरिडोर का विकास बताता है कि सरकार डिफेंस सेक्टर की तैयारियों के लिए कितना गंभीर है.
रिकॉर्ड तोड़ रक्षा सौदे: वित्तीय वर्ष 2024-25 में रक्षा मंत्रालय ने रक्षा अनुबंधों पर हस्ताक्षर करने के मामले में अब तक का सबसे उच्च स्तर हासिल किया है. रक्षा मंत्रालय ने रिकॉर्ड 193 अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए, जिनका मूल्य लगभग 2,09,050 करोड़ (लगभग 25 अरब डॉलर) रहा. इनमें से 177 अनुबंध (92%) घरेलू उद्योग को दिए गए, जिनका मूल्य 1,68,922 करोड़ रुएए था. इनमें ये प्रमुख सौदे शामिल हैं.

- एलसीएच प्रचंड: HAL के साथ 156 लड़ाकू हेलीकॉप्टरों के लिए 62,700 करोड़ रुपए के दो अनुबंध मार्च 2025 में हुए.
- ब्रह्मोस मिसाइल: भारतीय नौसेना के लिए 19,518 करोड़ रुपए का एक बड़ा सौदा मार्च 2024 में हुआ.
- मिग-29 इंजन: आरडी-33 एयरो-इंजनों के लिए 5,249 करोड़ रुपए का अनुबंध हुआ.
- एएलएच ध्रुव: सेना और तटरक्षक बल के लिए 34 हेलीकॉप्टरों की खरीद 8,073 करोड़ रुपए में हुई.
HAL के साथ लड़ाकू विमान का करार: रक्षा मंत्रालय ने 25 सितंबर, 2025 को भारतीय वायु सेना के लिए 68 लड़ाकू विमानों और 29 टू-सीटर विमानों सहित 97 हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) एमके1ए और संबंधित उपकरणों की खरीद के लिए HAL के साथ 62,370 करोड़ रुपए से अधिक की लागत पर अनुबंध पर हस्ताक्षर किए. इन विमानों की डिलीवरी 2027-28 के दौरान शुरू होगी और छह वर्षों की अवधि में पूरी हो जाएगी.

फ्रांस से राफेल का सौदा: अप्रैल 2025 में भारत और फ्रांस की सरकारों ने भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल विमान (22 एकल-सीटर और 4 दो सीटों वाले) की खरीद के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए. इन विमानों की डिलीवरी 2030 तक पूरी हो जाएगी. चालक दल को फ्रांस-भारत में प्रशिक्षण दिया जाएगा.
SHAKTI सॉफ्टवेयर के लिए करार: भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से नौसेना के लिए आधुनिक गश्ती पोतों और कैडेट प्रशिक्षण जहाजों के लिए SHAKTI सॉफ्टवेयर, EON-51 (इलेक्ट्रो ऑप्टिकल फायर कंट्रोल सिस्टम) बनाने का करार हुआ है. साथ ही तटरक्षक बल के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियो और भारतीय सेना के लिए वायु रक्षा फायर कंट्रोल रडार को अपग्रेड करने के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए गए.

3 साल में डिफेंस प्रोडक्शन दोगुना करने का लक्ष्य: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचकर 1.51 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया. यह उपलब्धि पिछले वित्त वर्ष के 1.27 लाख करोड़ रुपए के उत्पादन की तुलना में 18% अधिक रहा. जो वित्त वर्ष 2019-20 के 79,071 करोड़ रुपए के आंकड़े से 90% अधिक है. अब 2029 तक भारत ने रक्षा क्षेत्र में प्रोडक्शन को 3 लाख करोड़ रुपए तक बढ़ाने का लक्ष्य निर्धारित किया है.
भारत का डिफेंस सेक्टर निर्यात कितना: वर्ष 2024-25 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर रिकॉर्ड 23,622 करोड़ रुपए (लगभग 2.76 अरब अमेरिकी डॉलर) के उच्च स्तर पर पहुंच गया है. जबकि, इससे पहले वित्त वर्ष 2023-24 में रक्षा निर्यात 21,083 करोड़ रुपए था. इस हिसाब से 2,539 करोड़ रुपए यानी 12.04% की बढ़ोतरी हुई है.

भारत कितने देशों को अपने डिफेंस प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट करता है: भारत अमेरिका, फ्रांस और अर्मेनिया सहित 100 से अधिक देशों को अपने डिफेंस प्रोडक्ट्स निर्यात करता है. अब सरकार ने लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपए का डिफेंस प्रोडक्शन करने और 50,000 करोड़ रुपए का एक्सपोर्ट करने का लक्ष्य रखा है. जिससे वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में भारत की भूमिका मजबूत होगी और आर्थिक विकास को बढ़ावा मिलेगा.
भारत में डिफेंस प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियां: भारत में प्रमुख रूप से डिफेंस प्रोडक्ट्स बनाने वाली कंपनियों में एचएएल, बीईएल, बीडीएल, मजगांव डॉक (एमडीएल) और कोचीन शिपयार्ड शामिल हैं. साथ ही लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी), भारत फोर्ज (कल्याणी समूह), टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और महिंद्रा डिफेंस सिस्टम्स विमान, इलेक्ट्रॉनिक्स, नौसैनिक पोत, मिसाइल, तोपखाना और बख्तरबंद वाहन बनाते हैं. मुनिशन्स इंडिया (एमआईएल) और अवानी (आर्मर्ड व्हीकल्स निगम) जैसी नई ओएफबी इकाइयां भी गोला-बारूद और वाहन उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं.

डिफेंस प्रोडक्शन में बढ़ोतरी के लिए सरकार ने नीतियों में किए कई बदलाव: डिफेंस प्रोडक्शन में बढ़ोतरी करने के लिए भारत सरकार ने कई नीतिगत बदलाव किए हैं. सबसे पहले स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए 5,500 से अधिक वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया गया है.
इसके साथ ही उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु के डिफेंस कॉरिडोर में निवेश के लिए 280 से अधिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं. इन पहलों का उद्देश्य सशस्त्र बलों को तकनीकी रूप से उन्नत, बहु-क्षेत्रीय एकीकृत अभियानों में सक्षम युद्ध-तैयार बल में परिवर्तित करना है.

राष्ट्रीय स्थल आधुनिक हथियारों से होंगे लैस: 2025 में, 'X' पर पोस्ट करके केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने लिखा था कि चाहे वह 'ऑपरेशन सिंदूर' के माध्यम से आतंकवादियों का खात्मा हो, 'मिशन सुदर्शन चक्र' के जरिए देश के बुनियादी ढांचे को सुरक्षित करने की योजना हो, या 'उच्च-शक्ति जनसांख्यिकी मिशन' के माध्यम से घुसपैठियों से मुक्त भारत बनाने का संकल्प हो, मोदी सरकार देश को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.
प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर 'मिशन सुदर्शन चक्र' की शुरुआत करके एक ऐतिहासिक घोषणा की है. इस मिशन के तहत, 2035 तक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय स्थलों को अत्याधुनिक तकनीक और शक्तिशाली हथियार प्रणालियों से लैस किया जाएगा. मिशन का उद्देश्य न केवल शत्रु हमलों को बेअसर करना है, बल्कि सुदर्शन चक्र की तरह ही प्रभावी जवाबी हमले करना भी है. यह कदम सुरक्षा को अभेद्य बनाने, शत्रुओं के खिलाफ हमले करने में एक मील का पत्थर साबित होगा.
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