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भारत में इस साल सबसे कमजोर मानसून का अनुमान, 'अल नीनो' बढ़ाएगा देश की मुसीबत

अल नीनो के कारण भारत में इस साल 11 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए सबसे कमजोर मानसून रहने का अनुमान है.

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सांकेतिक तस्वीर. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : May 29, 2026 at 8:54 PM IST

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नई दिल्लीः देश में इस साल खेती-किसानी, पानी की उपलब्धता और आम जनता की जेब पर भारी असर पड़ने की आशंका है. मौसम वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि तेजी से बदल रही 'अल नीनो' (El Niño) की स्थितियों के कारण भारत में इस साल पिछले 11 वर्षों का रिकॉर्ड टूट सकता है और अब तक का सबसे कमजोर मानसून देखने को मिल सकता है.

भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और रिसर्च संस्था 'क्लाइमेट ट्रेंड्स' के नए आंकड़ों के मुताबिक, इस साल सूखे या बेहद कम बारिश होने की आशंका 60 प्रतिशत तक है, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा और पूरी अर्थव्यवस्था के सामने एक बड़ा संकट खड़ा हो गया है.

क्या कहते हैं मौसम विभाग के आंकड़े

मौसम विभाग (IMD) के पूर्वानुमानों के अनुसार, साल 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के दौरान देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) की तुलना में केवल 90 प्रतिशत तक ही बारिश होने की संभावना है. यह आंकड़ा सूखे वाले साल के बेहद करीब माना जाता है.

वहीं, अमेरिका की 'राष्ट्रीय महासागरीय और वायुमंडलीय प्रशासन' (NOAA) के मुताबिक, मई से जुलाई के बीच अल नीनो की स्थिति उभरने की 82 प्रतिशत संभावना है, जो सर्दियों तक बढ़कर 96 प्रतिशत हो जाएगी. यह स्थिति साल 1950 के बाद दुनिया में आए चार बड़े 'सुपर अल नीनो' (जैसे 1997-98 और 2015-16) जैसी ही खतरनाक हो सकती है.

Forecast probability
मौसम विभाग का पूर्वानुमान. (IMD)

ब्रेक-मानसून ने बढ़ायी चिंता

यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड के एमेरिटस प्रोफेसर और आईआईटी कानपुर के विजिटिंग प्रोफेसर रघु मुर्तुगुड्डे ने इस पर बड़ी चिंता जताते हुए कहा, "मानसून का कुल आंकड़ा उतना महत्वपूर्ण नहीं है, जितना बारिश का हर जगह सही तरीके से होना (वितरण) जरूरी है. मौसम के मॉडल कोई अच्छी तस्वीर नहीं दिखा रहे हैं. इस साल देश में टुकड़ों-टुकड़ों में (कम-ज्यादा) बारिश देखने को मिलेगी और मानसून के बीच में लंबे समय तक सूखा रहने (ब्रेक-मानसून) जैसी स्थितियां बनेंगी."

उन्होंने मानसून में देरी होने और उत्तर-पश्चिम भारत में पाकिस्तान से आने वाली गर्म हवाओं के कारण अत्यधिक उमस भरी भीषण गर्मी (Humid Heatwaves) चलने की भी चेतावनी दी है.

आधी से ज्यादा खेती पर संकट

इस मानसूनी उतार-चढ़ाव का सबसे सीधा और बड़ा झटका देश के कृषि क्षेत्र को लगेगा. 'सेंटर फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर' के कार्यकारी निदेशक डॉ. जी. वी. रामंजनेयुलु और फ्लेम यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर डॉ. अंजल प्रकाश ने बताया कि भारत की लगभग 52 प्रतिशत खेती योग्य जमीन आज भी पूरी तरह सिर्फ बारिश पर ही निर्भर है. फसलों के उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा मानसून पर टिका है.

विशेषज्ञों के अनुसार, एक हफ्ते से ज्यादा सूखा रहने पर मिट्टी फसलों को सहारा नहीं दे पाती. कम बारिश से भूजल रीचार्ज नहीं होगा और जलाशयों में पानी घटने से चावल जैसी फसलों की पैदावार, बिजली उत्पादन और ग्रामीण इलाकों की आजीविका बुरी तरह प्रभावित होगी.

EL NINO CONDITIONS
बीकानेर में 26 मई को एक महिला वर्कर चिलचिलाती धूप में पानी लेकर जाती हुई. (ANI)

ईंधन की महंगाई और मौसम की मार

'क्लाइमेट ट्रेंड्स' की संस्थापक और निदेशक आरती खोसला ने सचेत किया है कि कम बारिश, भीषण गर्मी और वैश्विक स्तर पर ईंधन (फ्यूल) व खादों (Fertilisers) की बढ़ती कीमतें मिलकर भारत के लिए एक 'बड़ा बहुआयामी संकट' पैदा कर सकती हैं.

हालांकि, सीजन के आखिरी हफ्तों में हिंद महासागर में 'पॉजिटिव इंडियन ओशन डिपोल' (IOD) बनने की उम्मीद है, जो सूखे के असर को थोड़ा कम कर सकता है. लेकिन यह एक ताकतवर अल नीनो के असर को पूरी तरह खत्म करने के लिए काफी नहीं होगा.

EL NINO CONDITIONS
नई दिल्ली में चिलचिलाती गर्मी के बीच कर्तव्य पथ लॉन पर टहलते लोग. यह तस्वीर 26 अप्रैल, 2026 की है. (ANI)

2027 हो सकता है सबसे गर्म साल

स्काईमेट वेदर (Skymet Weather) के अध्यक्ष जीपी शर्मा ने बताया कि इंसानी गतिविधियों से पैदा होने वाली अतिरिक्त गर्मी का लगभग 90 प्रतिशत हिस्सा हमारे महासागर खुद सोख रहे हैं. समुद्र का पानी तापमान को बहुत लंबे समय तक बनाए रखता है. इसलिए, अल नीनो चाहे कितना भी मजबूत या कमजोर हो, इसकी मौजूदगी वैश्विक तापमान को बहुत बढ़ा देती है.

वैज्ञानिकों का अनुमान है कि इन्हीं वजहों से साल 2026 इतिहास के सबसे गर्म सालों में शामिल हो सकता है, जबकि अगला साल यानी 2027 रिकॉर्ड पर अब तक के सबसे गर्म वर्ष (2024) को भी पीछे छोड़ सकता है.

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