India-EU ट्रेड डील...आपको कितना फायदा, क्या नुकसान, एक क्लिक में जानिए वो सबकुछ
2007 में शुरू हुई बातचीत को फाइनल होने में 19 साल क्यों लगे, क्या था रोड़ा? अब डील होने से अमेरिका पर क्या होगा असर?

Published : January 28, 2026 at 1:41 PM IST
|Updated : January 29, 2026 at 11:48 AM IST
हैदराबाद: भारत और यूरोपीय यूनियन (Europea Union) के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट हो गया है. इससे लगभग 1.9 अरब लोग प्रभावित होंगे, जिनमें भारत के 1.4 अरब और EU के 27 देशों के लगभग 50 करोड़ लोग शामिल हैं. करीब दो दशक से रुकी हुई बातचीत के बाद भारत और EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) को अंतिम रूप दे दिया गया है. जिसे मदर ऑफ ऑल डील्स माना जा रहा है.
भारत और EU के बीच हुए इस FTA में आम जनता को क्या फायदा होगा? एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट पर क्या असर होगा? क्या इस डील से किसी सेक्टर को नुकसान भी होगा? डील को लेकर 2007 में शुरू हुई बातचीत अब जाकर कैसे फाइनल हुई? आईए ETV Bharat के Exlainer में विस्तार से समझते हैं.

क्या है फ्री ट्रेड एग्रीमेंट FTA: सबसे पहले समझते हैं कि फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (Free Trade Agreement) है क्या? दरअसल, जब दो पार्टी या देशों के बीच आयात या निर्यात किया जाता है तो उसे ट्रेड कहते हैं. इसमें आयात और निर्यात पर टैरिफ (टैक्स) लगता है. लेकिन, जब ये टैरिफ कम या शून्य के साथ डील हो तो उसे फ्री ट्रेड डील कहेंगे. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच हुआ ये समझौता 1.9 अरब लोगों का एक इंटीग्रेटेड मार्केट बनाएगा.
भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच संबंध: भारत-यूरोपीय यूनियन की साझेदारी दशकों से विकसित हुई है, जिसकी शुरुआत राजनयिक संबंधों से हुई और यह एक बहुआयामी रणनीतिक गठबंधन में तब्दील हो गई है. इसमें राजनीतिक संवाद, आर्थिक सहयोग, सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन एवं प्रौद्योगिकी जैसी वैश्विक चुनौतियां शामिल हैं.
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INDIA-EU में राजनीतिक संबंध: 1960 के आसपास प्रारंभिक मान्यता से लेकर 21वीं सदी में वार्षिक शिखर सम्मेलनों और संयुक्त पहलों की स्थापना तक, व्यापार, निवेश और विकास में आपसी हितों को दर्शाते हुए संबंधों में विस्तार देखने को मिला. दोनों के बीच राजनीतिक संबंध 1960 के आरंभ से ही स्थापित हुए, जिसमें भारत उन पहले देशों में से एक था, जिसने 1962 में यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) के साथ संबंध स्थापित किए थे. भारत ने औपचारिक सहयोग की नींव रखी, जो 1993 के संयुक्त राजनीतिक वक्तव्य और 1994 के सहयोग समझौते में देखने को मिला. इसका उद्देश्य द्विपक्षीय राजनीतिक और आर्थिक संबंधों को मजबूत करना था.

India-EU संबंधों में कब क्या हुआ
- 1962- प्रारंभिक आर्थिक जुड़ाव: भारत ने यूरोपीय आर्थिक समुदाय (EEC) के साथ औपचारिक संबंध स्थापित किए.
- 1993-राजनीतिक आधार: राजनयिक जुड़ाव को गहरा करने वाले संयुक्त राजनीतिक वक्तव्य को अपनाया गया.
- 1994-संस्थागत सहयोग: भारत-यूरोपीय संघ सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर.
- 2000-शिखर सम्मेलन स्तर का संवाद: लिस्बन में पहला भारत और यूरोपीय यूनियन शिखर सम्मेलन, उच्च स्तरीय जुड़ाव के एक नए चरण का प्रतीक बना.
- 2004-रणनीतिक साझेदारी: हेग में हुए 5वें शिखर सम्मेलन में संबंधों को रणनीतिक साझेदारी के रूप में अपग्रेड किया गया.
- 2007-व्यापारिक संबंध: व्यापक व्यापार और निवेश समझौते (BTIA) के लिए वार्ता शुरू हुई.
- 2013-बातचीत बंद: ऑटोमोबाइल, शराब, स्पिरिट पर टैरिफ, भारतीय आईटी फर्मों के लिए डेटा सुरक्षा और सार्वजनिक खरीद पर मतभेदों के कारण भारत और EU के बीच बातचीत बंद हो गई.
- 2016 और 2020 के बीच वार्ताओं को पुनर्जीवित करने के प्रयासों के बावजूद, कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई.
- 2020- भविष्य का रोडमैप तैयार: भारत और यूरोपीय यूनियन ने वार्ताओं को फिर से शुरू करने में रुचि दिखाई. दोनों ने रणनीतिक साझेदारी को अपनाया और 2025 तक का रोडमैप तैयार किया.
- 2022- जून में, मुक्त व्यापार समझौते, निवेश संरक्षण समझौते और भौगोलिक संकेत (GI) पर समझौते के लिए वार्ताएं फिर से शुरू की गईं. भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच व्यापार और प्रौद्योगिकी (TTC) का शुभारंभ हुआ.
- 2025-नया रणनीतिक यूरोपीय यूनियन-भारत एजेंडा: भारत के साथ समृद्धि और सुरक्षा को मजबूत करने के लिए यूरोपीय यूनियन ने अक्टूबर 2025 में भारत एजेंडा पर निष्कर्षों को मंजूरी दी. इस एजेंडा का उद्देश्य समृद्धि और स्थिरता, प्रौद्योगिकी और नवाचार, सुरक्षा और रक्षा, कनेक्टिविटी और वैश्विक मुद्दों जैसे क्षेत्रों में संबंधों को गहरा करना रहा.
- 27 जनवरी 2026 को मुक्त व्यापार समझौते (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) पर बात बनी और डील पर हस्ताक्षर हुए.
भारत-EU के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का महत्व: अमेरिका द्वारा लगाए गए 50% तक के हाई टैरिफ ने वैश्विक बाजार को बुरी तरह से प्रभावित किया है. इसके चलते भारत-EU के बीच समझौते के लिए दबाव और भी बढ़ गया था. भारत के लिए, फ्री ट्रेड एग्रीमेंट, चीन पर अपनी निर्भरता कम करने, यूरोप में निर्यात बढ़ाने और अन्य देशों की बचाववादी नीतियों के प्रभाव को कम करने का एक रणनीतिक अवसर प्रदान करता है.

भारत-EU को इन क्षेत्रों में होगा लाभ: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत सीमा या आयात शुल्क या तो कम कर दिए जाते हैं या समाप्त कर दिए जाते हैं, जिससे बाजार तक पहुंच में आसानी होती है. पीटीआई के अनुसार, भारत-यूरोपीय यूनियन समझौते से दोनों पक्ष को प्रौद्योगिकी, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, वस्त्र, इस्पात, पेट्रोलियम उत्पाद और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में लाभ होने की उम्मीद है.
वस्त्र, चमड़ा और फार्मास्यूटिकल्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों की यूरोपीय यूनियन के बाजार में प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार हो सकता है, जबकि भारतीय सेवाओं, विशेष रूप से दूरसंचार, परिवहन और व्यावसायिक सेवाओं के निर्यात में भी वृद्धि होने की उम्मीद है.

FTA से यूरोपीय यूनियन को फायदा: थिंक टैंक जीटीआरआई के अनुसार, यूरोपीय यूनियन को भारत को विमान और पुर्जों, मशीनरी, हीरे और रसायनों के निर्यात में वृद्धि से लाभ होगा. बौद्धिक संपदा, आईटी, दूरसंचार और व्यावसायिक सेवाओं जैसी यूरोपीय सेवाओं को भी लाभ मिल सकता है.
भारत को EU से फ्री ट्रेड करने की जरूरत क्यों पड़ी: दरअसल, अमेरिका ने भारतीय वस्तुओं पर 25% टैरिफ लगाने के साथ ही रूस से तेल खरीदने के लिए 25% और टैरिफ लगा दिया. इससे टोटल टैरिफ 50% हो गया, जिसने भारत के निर्यात पर बुरा असर डाला. इसके अलावा राजनीतिक कारणों तथा इतने व्यापक समझौते को अंतिम रूप देने की जटिलताओं के कारण व्यापार हस्तांतरण समझौते (Business Transfer Agreement, BTA) को अंतिम रूप देने में हुई देरी से भारत के निर्यात पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा. इसके चलते यूरोपीय यूनियन के साथ भारत को डील जल्द से जल्द फाइनल करना पड़ा.

मदर ऑफ ऑल डील्स' के फायदे
- डील से भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाजारों में अपने उत्पादों की पहुंच बढ़ाने का अवसर मिलेगा, जिससे निर्यात प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी. इनमें टेक्सटाइल्स, लेदर, डायमंड और ज्वेलरी, इंजीनियरिंग सामान और प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स जैसे सेक्टर शामिल हैं.
- समझौते का सबसे आकर्षक पहलू यूरोपीय कारों पर आयात शुल्क में कटौती माना जा रहा है. यूरोपीयन कारों पर भारत में 70% से 110% तक इंपोर्ट ड्यूटी लगती है. लेकिन, इस डील से 15,000 यूरो (16.5 लाख) से अधिक कीमत वाली यूरोपीय यूनियन में निर्मित कारों पर अधिकतम शुल्क तुरंत 40% तक कम हो सकता है. जो आगे जाकर घटकर 10% तक रह जाएगा.
- भारत-ईयू समझौता सेमीकंडक्टर, ग्रीन एनर्जी और डिफेंस सेक्टर में यूरोप की विनिर्माण इकाइयों को भारत में स्थापित करने का अवसर भी देंगी.
- फ्री ट्रेड डील से यूरोपीय यूनियन में निर्मित कारों के साथ वाइन और स्पिरिट्स जैसी वस्तुओं पर भारत में लगने वाला आयात शुल्क भी कम हो जाएगा, जिससे वे भारतीय बाजार में इन प्रोड्क्स के तेजी पकड़ने का अनुमान है.
फ्री ट्रेड डील से आम आदमी को क्या फायदा: फ्री ट्रेड डील का सीधा फायदा भारत और ईयू के व्यापारियों को मिलने वाला है. दरअसल, जीरो या कम टैक्स होने की वजह से उन्हें सस्ते में सामान मिलेगा. जिसका फायदा आम आदमी को भी मिलेगा. उसे विदेशी सामान सस्ते में मिलेगा. यूरोपीय यूनियन में 27 देश शामिल हैं, इस हिसाब से भारत का इन सभी देशों के साथ FTA हुआ है.

यूरोपीय यूनियन में कौन-कौन से देश शामिल: ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, बुल्गारिया, क्रोएशिया, साइप्रस, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, एस्टोनिया, फिनलैंड, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हंगरी, आयरलैंड, इटली, लातविया, लिथुआनिया, लक्ज़मबर्ग, माल्टा, नीदरलैंड, पोलैंड, पुर्तगाल, रोमानिया, स्लोवाकिया, स्लोवेनिया, स्पेन, स्वीडन.
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भारत का अब तक किन देशों से हुआ समझौता: ईयू की वेबसाइट के अनुसार, साल 2000 से 2025 के बीच, भारत ने 33 देशों के साथ 15 नए व्यापार समझौते और सात देशों के साथ तीन मुक्त व्यापार समझौते किए. इनमें 2011 से पहले हस्ताक्षरित 7 व्यापार समझौते शामिल हैं, जो मुख्य रूप से दक्षिण-पूर्व और पूर्वी एशियाई देशों के साथ किए गए थे. कुछ प्रमुख समझौते इस प्रकार से हैं...
- इंडिया-श्रीलंका फ्री ट्रेड एग्रीमेंट
- साउथ एशियन फ्री ट्रेड एरिया (SAFTA)
- इंडिया नेपाल ट्रीटी ऑफ ट्रेड
- इंडिया भूटान एग्रीमेंट ऑन ट्रेड, कॉमर्स एंड ट्रांसिट
- इंडिया थाईलैंड एफटीए- Early Harvest Scheme (EHS)
- इंडिया-जापान CEPA
- इंडिया-मलेशिया CECA
- इंडिया-UAE CEPA
भारत-यूरोपीय यूनियन FTA से सस्ता होगा खाने का तेल: भारत-EU फ्री ट्रेड एग्रीमेंट में कई उत्पादों पर टैक्स (टैरिफ) कम या खत्म करने का वादा किया गया है. डील के मुताबिक यूरोप से भारत आने वाले फ्रूट जूस, प्रोसेस्ड फूड, ऑलिव ऑयल, मार्जरीन और अन्य वेजिटेबल ऑयल पर टैरिफ घटेगा या खत्म होगा. इससे ये इंपोर्टेड खाने-पीने की चीजें भारत में सस्ती हो जाएंगी. यूरोपीय ब्रांड के कपड़े और फैशन प्रोडक्ट्स भी सस्ते होंगे.
यूरोपीय ब्रांड की शराब 110% तक होगी सस्ती: अभी तक भारत में यूरोपीय ब्रांड की शराब और स्पिरिट्स पर 150% तक टैक्स लगता था. लेकिन, अब इस डील के बाद यह घटकर 40% तक हो जाएगी. इससे भारत में विदेशी शराब सस्ती हो जाएगी. इससे भारत के लिक्कर मार्केट (liquor market) को बड़ा फायदा मिलेगा.
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96.6% सामानों पर कट होगा टैरिफ: फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के तहत भारत ने 96.6% यूरोपीय सामानों पर टैक्स हटाने या कम करने का वादा किया है. इससे यूरोप की कंपनियों को हर साल करीब 4 यूरो अरब टैक्स की बचत होगी. इस डील से यूरोपीय यूनियन को उम्मीद है कि 2032 तक उसका भारत में एक्सपोर्ट दोगुना हो जाएगा.
भारत यूरोप को क्या-क्या करता है एक्सपोर्ट
- पेट्रोलियम उत्पाद (डीजल, ATF)
- स्मार्टफोन और इलेक्ट्रॉनिक्स
- कपड़ा और गारमेंट्स
- केमिकल, स्टील, मशीनरी
- फार्मा, ज्वेलरी, ऑटो पार्ट्स
फ्री ट्रेड डील से भारतीय कार कंपनियां चिंतित: फ्री ट्रेड डील से जहां पूरा उद्योग जगत खुश है वहीं भारत की कार कंपनियां चिंता में आ गई है. हालांकि, EV कारों को इस डील से किनारे रखा गया है. लेकिन, डील के मुताबिक यूरोप से भारत आने वाली कंपनियों पर टैरिफ 150% से घटाकर 40% तक कर दिया गया है जो भविष्य में 10% ही रह जाएगा.
इसको देखते हुए देश की नामी ऑटोमोबाइल कंपनियों मारुति सुजुकी, महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंदई मोटर्स इंडिया के शेयर में मंगलवार को गिरावट देखने को मिली. महिंद्रा एंड महिंद्रा के शेयर में 5.1% की गिरावट हुई. मारुति सुजुकी के शेयर 3 फीसदी तक गिरकर 15013 रुपये के स्तर पर पहुंच गए. हुंडई के शेयर भी 3% गिरकर 2193 रुपए के स्तर पर आ गए.
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विदेश में नौकरी के खुलेंगे दरवाजे: फ्री ट्रेड डील के जरिए भारत ने IT, प्रोफेशनल सर्विसेज, एजुकेशन, फाइनेंस, टूरिज्म, कंस्ट्रक्शन और बिज़नेस सर्विसेज जैसे सेक्टर में यूरोप से बड़े स्तर पर मार्केट एक्सेस हासिल किया है. यूरोपीय यूनियन ने भारत को 144 से ज्यादा सेक्टर और सब-सेक्टर में सेवाएं देने का अधिकार दिया है. इससे भारतीय कंपनियों और प्रोफेशनल्स को यूरोप में सीधे रोजगार के अवसर मिलेंगे. साथ ही भारतीय छात्रों के लिए यूरोप में पढ़ाई के मौके बढ़ेंगे, नौकरी करने की संभावनाएं मजबूत होंगी, यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ेगा.
आयुर्वेद डॉक्टरों के लिए यूरोप में खुला रास्ता: कई मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फ्री ट्रेड डील से भारतीय पारंपरिक चिकित्सा, जैसे आयुर्वेद, योग, यूनानी के प्रैक्टिशनर्स को भी यूरोप में काम करने का मौका मिलेगा. खासकर उन देशों में जहां ये पद्धतियां अभी स्थापित नहीं हैं. इससे भारत के पारंपरिक ज्ञान को ग्लोबल मार्केट मिलेगा.
अमेरिकी दबाव ने India-EU व्यापार समझौते को दी गति दी: नई दिल्ली में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में बोलते हुए, भारतीय नेता ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था में उथल-पुथल के समय यूरोपीय यूनियन के साथ साझेदारी "अंतर्राष्ट्रीय प्रणाली में स्थिरता को मजबूत करेगी".
भारत और यूरोपीय यूनियन दोनों को भारी शुल्क लगाकर निशाना बना रहा है, जिससे स्थापित व्यापार प्रवाह बाधित हो रहा है और प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं वैकल्पिक साझेदारियों की तलाश करने के लिए मजबूर हो रही हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा शुल्क और ग्रीनलैंड को लेकर अपनाई गई कठोर नीतियों के बाद भारत-यूरोपीय यूनियन समझौते की बातचीत को नई गति मिली है.
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