तलाक के लिए पुरुषों के मुकाबले महिलाएं ज्यादा करती हैं पहल, जानिए-किस देश में नहीं टिकतीं शादियां, भारत में स्थिति कितनी खराब?
केरल में पति-पत्नी के रिश्तों में सबसे अधिक अड़चन, शहरों की तुलना में गांवों में रिलेशनशिप अब भी मजबूत.

Published : February 26, 2026 at 1:11 PM IST
|Updated : February 26, 2026 at 1:22 PM IST
रिपोर्ट : नरेंद्र चौधरी
हैदराबाद : पति-पत्नी का रिश्ता बहुत भरोसे वाला माना जाता है. अमूमन दोनों इस रिलेशनशिप को संजीदगी से जीते हैं, लेकिन कभी-कभी आपसी तकरार दोनों के बीच बड़ी खाई पैदा कर देती है. इसकी वजह से ये रिश्ते बिखर जाते हैं. दुनिया के कई देश इस संकट से जूझ रहे हैं. पति-पत्नी की लड़ाई घर की दहलीज लांघकर कोर्ट-कचहरी तक पहुंच रही है.
ताजा रिपोर्ट के अनुसार स्पेन में पति-पत्नी के रिश्ते सबसे ज्यादा खराब हैं. वहीं धार्मिक मान्यताओं को सहेज कर रखने वाले और रिश्तों की मर्यादा को खासा अहमियत देने वाले भारत की स्थिति काफी बेहतर है. वर्ल्ड ऑफ स्टेटिसटिक्स की रिपोर्ट ने दुनिया में पति-पत्नी में तलाक के प्रतिशत को लेकर एक आंकड़ा जारी किया है. इसमें भारत, बांग्लादेश और पाकिस्तान की स्थिति काफी बेहतर है. यानी इन देशों में तलाक लेने वालों का प्रतिशत काफी कम है. वहीं अमेरिकन सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन की रिपोर्ट के अनुसार तलाक के महिलाएं सबसे ज्यादा पहल करती हैं.
स्पेन में पति-पत्नी सबसे ज्यादा ले रहे तलाक : वर्ल्ड ऑफ स्टेटिसटिक्स की साल 2025 की रिपोर्ट के अनुसार स्पेन में पति-पत्नी के बीच सबसे ज्यादा झगड़े होते हैं. यहां पर 86% लोग तलाक ले लेते हैं. इसके बाद अलग-अलग रहना शुरू कर देते हैं. यह प्रतिशत पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में भी यहां 82,991 तलाक के केस सामने आए थे. स्पेन में लोग खुले विचारों के हैं. ज्यादातर पति-पत्नी नौकरीपेशा हैं. एक-दूसरे पर निर्भरता न होने के कारण वे जरा सी अनबन पर ही तलाक ले लेते हैं.
रूस-यूक्रेन और इटली की क्या है स्थिति? : दुनिया में स्पेन के बाद रूस तलाक लेने के मामले में दूसरे नंबर पर है. यहां पर 74% पति-पत्नी शादी के बाद तलाक ले लेते हैं. इसी तरह यूक्रेन में भी 71% पति-पत्नी के रिश्ते टूट जाते हैं. इटली में 69% पति-पत्नी तलाक ले लेते हैं. तलाक लेने वालों की संख्या के आधार पर रूस दुनिया में दूसरे, यूक्रेन तीसरे जबकि इटली चौथे स्थान पर है. इन देशों में भी तलाक के पीछे की कई वजहें हैं. मसलन विश्वास का अभाव, शक, लड़ाई-झगड़े आदि.
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फ्रांस-लग्जमबर्ग-पुर्तगाल भी पीछे नहीं : फ्रांस में तलाक लेने वालों की संख्या 55%, लग्जमबर्ग में 54% और पुर्तगाल में 50% है. ये दुनिया में सबसे ज्यादा तलाक लेने वालों की टॉप टेन देशों की सूची में शामिल हैं. फ्रांस में आम सहमति से तलाक एक सामान्य प्रक्रिया मानी जाती है. घरेलू हिंसा, मतभेद समेत अन्य कारणों से लोग तलाक लेते हैं. लग्जमबर्ग में पति-पत्नी आसानी से एक-दूसरे से तलाक ले सकते हैं. वहां के कानून में ऐसा प्रावधान किया गया है. पुर्तगाल में आपसी सहमति का अभाव समेत कई अन्य कारण तलाक की वजह बनते हैं.
अन्य देशों में कैसा है पति-पत्नी का रिलेशन? : कनाडा में तलाक के केस 48% हैं. इसी तरह दक्षिण कोरिया में 47%, यूनाइटेड स्टेटस (अमेरिका) में 45%, चीन में 45%, यूनाइटेड किंगडम में 41%, जर्मनी में 36%, जापान में 35%, कोलंबिया में 30%, इंडोनेशिया में 28%, इथियोपिया में 25%, तुर्की में 25%, थाइलैंड में 25%, ब्राजील में 21%, दक्षिण अफ्रीका में 17%, मैक्सिको में 17%, मिस्र में 17%, अल्जीरिया में 16%, इरान में 14% है. इन देशों में किसी न किसी वजहों से पति-पत्नी की लड़ाई तलाक तक पहुंच जाती है.
भारत समेत इन देशों में काफी कम तलाक : वियतनाम में हर साल 7% तलाक के केस सामने आते हैं. जबकि तंजानिया, सूडान, म्यांमार और नाइजीरिया में 3% केस सामने आते हैं. पति-पत्नी के रिश्तों में बिखराव के मामले में इन देशों की स्थिति अच्छी है. भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश में तलाक लेने वाले केवल 1% हैं. इन तीनों देशों की स्थिति दुनिया में काफी बेहतर है. यहां के लोग रिश्तों को आत्मीयता से निभाते हैं. एक-दूसरे की परेशानियों को भी समझते हैं.

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इंडिया में दर कम, लेकिन बढ़ रहा आंकड़ा : साल 2020 से 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार ग्लोबल स्टैंडर्ड के हिसाब से भारत में तलाक की दर कम है. यहां ज्यादातर मामलों में अभी शादी को जीवनभर का बंधन माना जाता है. लोग अपने हमसफर से रिश्तों को तोड़ने के खिलाफ ही रहते हैं. यहां हर 1000 लोगों पर सिर्फ 0.01 लोग तलाक लेते हैं. bhatlalawfirm.com के मुताबिक देश में तलाकशुदा लोगों की संख्या 13.6 लाख है. हालांकि यह आंकड़ा अब बढ़ने लगा है.
अब बारी-बारी से देश के 3 राज्यों की स्थिति के बारे में जानिए
केरल : LITEM के डेटा के अनुसार केरल (अब केरलम) को देश के सबसे पढ़े-लिखे और आगे रहने वाले राज्यों में से एक माना जाता है. इसके बावजूद यहां तलाक के मामले ज्यादा सामने आए हैं. साल 2023 में केरल में तलाक की दर 2.5% थी, यह देश के किसी राज्य में तलाक लेने वालों की सबसे ज्यादा संख्या में से एक है.
मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में भी लगातार पति-पत्नी में अलगाव की खबरें आती रहती हैं. शहर की तेज-तर्रार जिंदगी में दंपत्तियों का एक-दूसरे से तेजी से भरोसा उठ रहा है. पूरे महाराष्ट्र में तलाक की दर लगभग 1.7% है. यहां भी तलाक के ज्यादा मामले सामने आते रहते हैं.
दिल्ली : देश की राजधानी दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में भी युवा जोड़ों में तलाक के मामले बढ़े हैं. दिल्ली NCR में तलाक की दर लगभग 1.9% है. ये फैक्ट्स और आंकड़े बताते हैं कि शहरीकरण और आर्थिक विकास शादी की स्थिरता को बिगाड़ने वाले दो मुख्य कारण हैं.
ग्रामीण इलाकों में है रिश्तों की अहमियत : LITEM के डेटा के मुताबिक भारत में साल 2022 में शहर के लोगों की अपेक्षा ग्रामीण इलाकों में तलाक की दर कम थी. यहां पति-पत्नी एक-दूसरे को अहमियत देते हैं. परिवार को साथ लेकर भी चलते हैं. यही वजह है कि इन इलाकों में पारंपरिक मूल्यों पर कोई असर नहीं पड़ा है. रिश्ता निभाने में गांव के लोग आगे हैं. वहां का सामाजिक ताना-बाना भी ऐसा है कि अनबन होने पर परिवार-समाज के लोग पति-पत्नी में समझौता करा देते हैं.
किन वजहों से हो रहे तलाक?, आंकड़ों से जानिए : divorcelawyernewdelhi.com के अनुसार देश में साल 2000 से 2025 तक हुए तलाक के पीछे के अलग-अलग कारण रहे. पूरे देश में पति-पत्नी की आपसी सहमति से 2.5 से 3 लाख अर्जी कोर्ट में पहुंची. इसी तरह क्रूरता के आधार पर 1.8 से 2 लाख से ज्यादा जबकि विवाहेतर संबंध (पार्टनर के अलावा दूसरे से संबंध) की वजह से करीब 50 हजार से 60 हजार मामले तलाक के लिए पहुंचे.
तलाक के प्रमुख कारण : इसी तरह छोड़ देने पर या रिश्ता तोड़ देने के लगभग 40 हजार से 50 हजार केस, सबसे आम वजह घरेलू हिंसा और दहेज उत्पीड़न के कारण 1.2 लाख से ज्यादा केस, लगातार झगड़े के कारण करीब एक लाख केस, यौन समस्याएं और नपुंसकता की वजह से देश भर में अनुमानित 15 से 20 हजार केस, मानसिक बीमारी के कारण करीब 15 हजार केस, धार्मिक या सांस्कृतिक अंतर के कारण 5 से 10 हजार, शादी से पहले धोखाधड़ी या गलत जानकारी देने के कारण 8 हजार से 12 हजार केस तलाक के लिए पहुंचे.

कभी-कभी शादीशुदा जिंदगी में लोग ऐसी उम्मीदें पाल लेते हैं जिनका हकीकत से वास्ता नहीं होता है या उन्हें पूरे करने की क्षमता न के बराबर होती है. ऐसे हालात में तालमेल की कमी से भी रिश्ते टूट जाते हैं. वहीं दूसरी ओर अरेंज मैरिज करने वाले कुछ केस में पति-पत्नी में इमोशनल जुड़ाव की कमी रह जाती है. इससे भी टकराव बढ़ता है. कई बार करियर की प्राथमिकताएं भी पारंपरिक भूमिकाओं से टकरा जाती हैं. कई बार पति-पत्नी का त्याग कर देना, विवाह पूर्व धोखाधड़ी, धार्मिक असमानता भी तलाक की वजह बन जाती है.
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महिला या पुरुष, तलाक के लिए कौन सबसे ज्यादा करता है पहल? : अमेरिकन सोशियोलॉजिकल एसोसिएशन (ASA) की 110वीं सालाना मीटिंग में पेश की जाने वाली एक नई स्टडी के मुताबिक, पुरुषों के मुकाबले महिलाओं में तलाक की पहल करने की संभावना ज्यादा होती है. तलाक के लिए सबसे ज्यादा पहल करने वालों में महिलाओं की संख्या ज्यादा थी. रिपोर्ट के अनुसार 69% महिलाओं ने तलाक के लिए पहले ही पहल की. जबकि इस मामले में पुरुषों का प्रतिशत 31% था.
यानी पुरुष किसी न किसी तरह से रिश्तों को बचाना चाहते थे. वहीं बिना शादी वाले महिला-पुरुषों में ब्रेकअप के आंकड़ों में कोई खास अंतर नहीं था. यानी कि ऐसे मामलों में महिला-पुरुष दोनों लगभग बराबर ही पहल करते हैं. सोशल साइंटिस्ट पहले से ही यह तर्क देते रहे हैं कि ज्यादातर महिलाएं इसलिए तलाक लेने की शुरुआत करती हैं क्योंकि वे रिश्तों को लेकर ज्यादा संवेदनशील होती है. हालांकि स्टडी करने वाले रोसेनफेल्ड इसे जायज नहीं ठहराते हैं. उनका मानना है कि यह अगर सच होता तो महिलाएं शादियों और गैर शादी वाले रिश्तों को बराबर रेट पर ही तोड़ने की पहल करतीं.
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