क्या भारत रेयर अर्थ मिनरल्स में चीन की मोनोपोली तोड़ पाएगा? पढ़िए REM कॉरिडोर बनाने से कितना कुछ बदलेगा
EV-इलेक्टॉनिक गैजेट्स बनाने में प्रयोग होने वाले REM को INDIA इम्पोर्ट करता है. 2023-24 में 2270 टन इम्पोर्ट हुआ, जिसमें चीन से सबसे ज्यादा रहा.

Published : February 4, 2026 at 9:45 AM IST
|Updated : February 4, 2026 at 10:27 AM IST
हैदराबाद: बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रेयर अर्थ मिनरल्स (REM) कॉरिडोर स्थापित करने का प्रस्ताव रखा है. ये कॉरिडोर नवंबर 2025 में घोषित 7,280 करोड़ रुपए की रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (REPM) स्कीम के तहत काम करेगा, जो स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देगा. इसके लिए सरकार ने 10 हजार करोड़ रुपए का बजट प्रस्तावित किया है.
कॉरिडोर ओडिशा, केरल, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में स्थापित किए जाएंगे, जिससे लाखों लोगों को रोजगार (Employment) के अवसर मिलेंगे. आईए समझते हैं, आखिर ये रेयर अर्थ मिनरल्स और रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट स्कीम क्या है? कैसे भारत इसके जरिए चीन को चुनौती देगा? REM और REPM का इस्तेमाल कहां-कहां होता है?
रेयर अर्थ मिनरल्स क्या हैं: सबसे पहले जानते हैं कि रेयर अर्थ मिनरल्स क्या हैं? दरअसल, रेयर अर्थ मिनरल्स 17 रासायनिक तत्वों का एक समूह है, जो हाईटेक इलेक्ट्रॉनिक्स, स्मार्टफोन, डिफेंस, ग्रीन एनर्जी (पवन टर्बाइन, इलेक्ट्रिक गाड़ियां) के लिए बहुत जरूरी हैं. ये तत्व कोस्टल रीजन यानी तटीय इलाकों में प्रचुर मात्रा में होते हैं, लेकिन इन्हें निकालना और शुद्ध करना काफी खर्चीला और मुश्किल होता है. फिलहाल, चीन इन खनिजों के उत्पादन और प्रोसेसिंग में 70%-90% हिस्सेदारी रखता है, जिसे अब भारत कम करना चाहता है.

रेल अर्थ कॉरिडोर क्यों बना रहा भारत: सरकार का कॉरिडोर बनाने के पीछे का उद्देश्य घरेलू इंटीग्रेटेड इकोसिस्टम बनाकर इलेक्ट्रिक वाहनों, रिन्यूएबल एनर्जी सिस्टम, इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और डिफेंस के लिए एक जरूरी इनपुट में आत्मनिर्भरता बढ़ाना है. साथ ही भारत को ग्लोबल REPM मार्केट में एक अहम खिलाड़ी के तौर पर स्थापित करना है.
यह आत्मनिर्भर भारत, मजबूत सप्लाई चेन और देश के लॉन्ग-टर्म नेट जीरो 2070 विजन सहित बड़े राष्ट्रीय उद्देश्यों को भी सपोर्ट करेगा. नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन के तहत, रेयर अर्थ मिनरल्स कॉरिडोर बनाने का मकसद चीन से आयात पर निर्भरता कम करके, सुरक्षित सप्लाई चेन सुनिश्चित करना है. दरअसल, चीन लगभग 44 मिलियन टन के साथ सबसे आगे है. माइनिंग में चीन का हिस्सा दुनिया में 68.6% है. जिससे खनन और रिफाइनिंग दोनों में उसका दबदबा है.
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जबकि, भारत में ग्लोबल रिजर्व का हिस्सा 6.27% है. लेकिन, माइनिंग में हिस्सा सिर्फ 0.83% तक सीमित है. कॉरिडोर के जरिए भारत स्वच्छ ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा जैसे क्षेत्रों को सपोर्ट करके महत्वपूर्ण खनिजों में भारत की स्थिति को मजबूत करना चाहता है. चीन की मोनोपोली (एकाधिकार) को चुनौती देने के लिए भारत अपने बजट में ये प्रस्ताव लेकर आया है.

कॉरिडोर भारत में बढ़ाएगा मैन्युफैक्चरिंग: कॉरिडोर तटीय (Costal Area) और अंदरूनी प्लेसर डिपॉजिट के साथ-साथ हार्ड रॉक इलाकों की व्यवस्थित खोज पर ध्यान केंद्रित करता है, ताकि मोनाजाइट और जेनोटाइम जैसे रेयर अर्थ तत्वों के घरेलू संसाधनों को बढ़ाया जा सके. इससे भारत अपने रिन्यूएबल एनर्जी लक्ष्यों को पूरा कर सकेगा और मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा.
रेयर अर्थ मिनरल्स कहां पाए जाते हैं: रेयर अर्थ मिनरल्स प्राकृतिक खनिज हैं, जिनमें रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) होते हैं, जो 17 धातुओं का एक समूह है. इनमें 15 लैंथेनाइड्स के साथ-साथ स्कैडियम और यट्रियम शामिल होते हैं. इनका उपयोग इलेक्ट्रॉनिक्स, रिन्यूएबल एनर्जी और डिफेंस प्रोडक्ट्स में होता है. ये सबसे ज्यादा चीन में पाए जाते हैं. इसके बाद क्रमशः संयुक्त राज्य अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, बर्मा, कनाडा, ग्रीनलैंड, भारत, मेडागास्कर, मलेशिया, नाइजीरिया, रूस, दक्षिण अफ्रीका, तंजानिया, थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार में पाए जाते हैं.
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रेयर अर्थ मिनरल्स का कहां-कहां होता है इस्तेमाल: रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) और रेयर मेटल्स, कांच, लाइट, मैग्नेट, बैटरी और कैटेलिटिक कन्वर्टर के लिए जरूरी चीजें हैं. इनका इस्तेमाल क्लीन एनर्जी (EVs, विंड टर्बाइन, सोलर पैनल), इलेक्ट्रॉनिक्स (स्मार्टफोन, सेमीकंडक्टर, डिस्प्ले), डिफेंस प्रोडक्ट्स (रडार, सोनार, गाइडेंस सिस्टम) और इंडस्ट्रियल एप्लीकेशन (मैग्नेट, कैटेलिस्ट, अलॉय) में होता है.
किस देश में सबसे ज्यादा रेयर अर्थ मिनरल्स: दुनिया में रेयर अर्थ मिनरल्स का सबसे ज्यादा भंडार चीन में है. चीन लगभग 44 मिलियन टन के साथ सबसे आगे है, जिससे खनन और रिफाइनिंग दोनों में उसका दबदबा है. यही कारण है कि चीन रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई में ग्लोबल सेंटर के रूप में स्थापित है. इसके बाद ब्राजील 21 मिलियन टन के साथ दूसरे स्थान पर है.

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भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स का कितना भंडार: भारत के पास 6.9 मिलियन टन है. ऑस्ट्रेलिया के पास 5.7 मिलियन टन है और यह चीन के बाहर कुछ प्रमुख उत्पादकों में से एक के रूप में उल्लेखनीय है, जिसमें लिनास जैसी कंपनियां वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने में मदद कर रही हैं. रूस के पास 3.8 मिलियन टन हैं.
रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग कहां होती सबसे ज्यादा: रेयर अर्थ एलिमेंट्स (REEs) की माइनिंग में भी चीन का दबदबा है. माइनिंग में चीन का हिस्सा 68.6% है. उसके बाद अमेरिका का 12.3% है. ये प्रतिशत उनके रिजर्व में संबंधित हिस्सेदारी (क्रमशः 40% और 1.64%) से कहीं ज्यादा है, जो बताता है कि इन दोनों देशों में माइनिंग के जरिए रेयर अर्थ मिनरल्स का इस्तेमाल उनके रिजर्व की तुलना में बहुत ज्यादा है. इसलिए, अमेरिका और चीन दोनों ही रेयर अर्थ मिनरल्स से भरपूर जमीनों पर अपना मालिकाना हक बढ़ाना चाहते हैं.
भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग कितनी: चीन और अमेरिका के बाद ब्राजील में रेयर अर्थ मिनरल्स की माइनिंग की गुंजाइश है, जिसका रिजर्व में 19% हिस्सा है. लेकिन, माइनिंग में सिर्फ 0.02% ही है. इसी तरह, ग्लोबल रिजर्व में भारत का हिस्सा 6.27% है लेकिन, माइनिंग में सिर्फ 0.83% तक सीमित है.
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भारत में रेयर अर्थ मिनरल्स का इम्पोर्ट कितना: पिछले पांच साल में भारत में रेयर अर्थ एलिमेंट्स का कुल इम्पोर्ट 2019 से लगभग 23% बढ़ा है. 2019–20 में जो 1,848 टन था वह 2023–24 में बढ़कर 2,270 टन हो गया. जिसमें स्कैंडियम और यट्रियम और रेयर अर्थ कंपाउंड्स शामिल हैं.
चीन भारत के लिए प्रमुख सप्लायर बना हुआ है. वित्त वर्ष 2023-24 में भारत ने 1,185 टन रेयर अर्थ मेटल्स इंपोर्ट किए हैं, जिसमें से 699 टन (59%) चीन से आए. दूसरे सप्लायर्स में हांगकांग (234 टन), जापान (192 टन) और मंगोलिया (60 टन) शामिल हैं.
चीन अभी दुनिया के लगभग 70% REE माइन प्रोडक्शन और ग्लोबल रिफाइनिंग कैपेसिटी के 85–90% हिस्से को कंट्रोल करता है. दरअसल, 2024 में चीन का रेयर अर्थ का घरेलू उत्पादन 2,70,000 टन था, जो 2023 में 2,55,000 टन से ज्यादा था. 2024 में भारत ने 460 टन रेयर अर्थ मैग्नेट, खासकर नियोडिमियम-आयरन-बोरॉन चीन से इम्पोर्ट किए.
सरकार के बयानों में दिखी आत्मनिर्भर बनने की सोच: रेयर अर्थ मिनरल्स को लेकर आत्मनिर्भर बनने की बात समय-समय पर केंद्र सरकार के मंत्री भी कहते रहे हैं. अक्टूबर में मीडिया के सामने वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि सरकार रेयर अर्थ मिनरल्स की सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए उपायों पर काम कर रही है. चिली और पेरू के साथ ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत चल रही है. इसके साथ ही घरेलू रीसाइक्लिंग और प्रोसेसिंग में स्टार्टअप्स को शामिल करने पर काम चल रहा है.
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