वैष्णव ने एआई शिखर सम्मेलन के पहले दिन हुई अव्यवस्था के लिए माफी मांगी
एआई सम्मेलन के पहले दिन दिखी अव्यवस्था. स्टॉल वालों को जाने से रोका गया. मंत्री ने मांगी माफी.

By PTI
Published : February 17, 2026 at 6:50 PM IST
नई दिल्ली : सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने "इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट" के पहले दिन लंबी कतारों और भारी भीड़ से उपस्थित लोगों को हुई असुविधा के लिए मंगलवार को माफी मांगी और कहा कि सम्मेलन का संचालन सुचारू रूप से करने के लिए आयोजक लगातार काम कर रहे हैं. वैष्णव ने कहा कि शिखर सम्मेलन आयोजक लोगों की बात सुनने को तैयार हैं और मुद्दों के तुरंत समाधान के लिए एक "वॉर रूम" बनाया गया है.
मंत्री ने कहा, "आपकी जो भी प्रतिक्रिया है, कृपया हमारे साथ साझा करें। हम खुले विचारों वाले हैं. हमने एक ‘वॉर रूम’ बनाया है...कोई भी समस्या हो, कृपया हमें बताएं। हम निश्चित रूप से इसे आसान बनाने और आप सभी के लिए इसे और अधिक सुविधाजनक बनाने के प्रयास करेंगे."
वैष्णव ने कहा, "अगर कल किसी को कोई समस्या हुई हो, तो उसके लिए मैं माफी मांगता हूं। हम कड़ी मेहनत कर रहे हैं. दुनिया के सबसे बड़े एआई शिखर सम्मेलन को आयोजित करने के लिए पूरा दल दिन-रात काम कर रहा है. हम यह सुनिश्चित करने के लिए सभी प्रयास करेंगे कि यह सम्मेलन आप सभी के लिए आनंददायक हो."
पहले दिन सम्मेलन में स्टार्टअप संस्थापक, वैश्विक प्रौद्योगिकी प्रतिनिधि और अंतरराष्ट्रीय मेहमानों सहित हजारों लोग शामिल हुए. लेकिन भारी भीड़ के कारण लोगों को काफी परेशानी हुई। लंबी कतारें लगीं, सुरक्षा जांच में देरी हुई, और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आने से पहले कुछ स्टॉल को अस्थायी रूप से खाली करना पड़ा."
अफरा-तफरी की स्थिति के बीच कुछ लोगों ने सामान गुम होने या चोरी हो जाने की सूचना दी. नियो सेपियन के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) धनंजय यादव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर कहा, "दोपहर 12 बजे सुरक्षा कर्मी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दो बजे आने की सूचना के बाद इलाके को ‘सैनिटाइज’ करने और घेरने आए। मैंने उन्हें बताया कि हम नियो सेपियन में भारत का पहला पेटेंट वाला एआई वियरेबल बना रहे हैं और इसे दिखाने का अवसर चाहिए."
उन्होंने बताया कि एक अधिकारी ने दूसरों से कहा कि उसे वहीं रहने दिया जाए, लेकिन तभी दूसरा समूह आया और उन्हें और उसकी टीम को तुरंत वहां से चले जाने का आदेश दिया. उन्होंने पूछा, "क्या हमें अपने वियरेबल ले जाने चाहिए?"
उन्होंने कहा, "बाकी लोग तो लैपटॉप भी छोड़ रहे हैं, यहां इसका ध्यान रखा जाएगा. उन पर भरोसा करते हुए मैं चला गया. मैं उम्मीद कर रहा था कि वियरेबल सुरक्षित रहेंगे और शायद अगर मेरी किस्मत अच्छी रही, तो यह प्रधानमंत्री मोदी की नजर में भी आ जाए."
उन्होंने यह भी बताया कि सोमवार को गेट 12 बजे से छह बजे तक बंद रहे. यादव ने बताया कि बाद में, उन्हें और उनकी टीम को पता चला कि वियरेबल चोरी हो गए हैं.
उन्होंने लिखा, "सोचिए तो सही: हमने हवाई यात्रा, रहने का इंतजाम, सामान ले जाने की व्यवस्था और यहां तक कि स्टॉल तक के लिए खर्च किया है. लेकिन हमारे वियरेबल एक उच्च सुरक्षा वाले क्षेत्र में गायब हो गए. अगर सिर्फ सुरक्षा कर्मी और अधिकारी ही वहां पहुंच सकते थे, तो ऐसा कैसे हुआ? यह बहुत ही निराशाजनक है."
रेस्किल के संस्थापक पुनित जैन ने कहा, "क्या यह वही एआई सम्मेलन है जो अपने ही निर्माताओं को नजरअंदाज कर देता है?" उन्होंने लिखा, "प्रदर्शक, प्रतिनिधि और स्टार्टअप के संस्थापक बाहर ही रह गए. पानी की व्यवस्था नहीं थी, कोई स्पष्ट जानकारी नहीं थी. मीडिया में उत्सव दिखाया गया, लेकिन हकीकत में स्थिति अराजक थी. अगर पहुंच केवल चुनिंदा महत्त्वपूर्ण मेहमानों तक सीमित थी, तो इसे पहले ही बता देना चाहिए था. पूरे पारिस्थितिकी तंत्र को जुटाकर फिर उन्हें बाहर निकालना सही नहीं है। इसी तरह हम भारत के एआई भविष्य का निर्माण नहीं कर सकते."
ये भी पढ़ें : AI डॉक्टरों की जगह लेने के लिए नहीं, सपोर्ट करने के लिए किया गया डिजाइन: अनुप्रिया पटेल

