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देश में 37 करोड़ लोग नशे के आदी; हर साल 9 लाख की मौतें, नशे में डूब रहे ₹1.60 लाख करोड़

Drug Addiction India: देश की 147 करोड़ की जनसंख्या में से 25% लोग शराब, अफीम, चरस-गांजा, कोकीन का करते हैं नशा.

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मादक पदार्थों का नशा परिवार-समाज को दीमक की तरह खा रहा. (Photo Credit; Getty Images)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : June 19, 2026 at 2:31 PM IST

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Updated : June 19, 2026 at 3:32 PM IST

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हैदराबाद: Drug Addiction: कहते हैं नशा, नाश करता है, फिर वो चाहे धन-दौलत का हो, ताकत का हो या मादक पदार्थों का. किस्से कहानियों में भी इसे बड़ी शालीनता से उठाया गया है. खासकर मुंशी प्रेमचंद की कहानी 'नशा' में, जिसमें बताया गया है कि कैसे अहंकार, झूठी शान-शौकत इंसान को बर्बाद कर देती है. लेकिन, मादक पदार्थों का नशा कैसे परिवार-समाज को दीमक की तरह खा रहा है? इसकी बानगी पंजाब में दिखती है.

पंजाब के कपूरथला की एक महिला, रोते-बिलखते पुलिस वालों से मदद की गुहार लगाती है. कहती है, 'मेरे 4 बेटे पहले ही नशे के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं, पांचवा बेटा नशे की वजह से ही खाट पर लेटा मौत का इंतजार कर रहा है. नशे ने हमारा मोहल्ला बर्बाद कर दिया है, किसी मां का एक बेटा, किसी के दो और मेरे तो 4 बेटे नशे की भेंट चढ़ गए. आप नशे के सौदागरों पर लगाम लगाओ'. अप्रैल महीने में पुलिसवालों से फोन पर हुई बात के दो दिन बाद ही महिला के पांचवे बेटे की भी मौत हो गई.

दरअसल, उड़ता पंजाब का तमगा लिए राज्य की हकीकत किसी से छिपी नहीं है. NCRB के आंकड़ों के मुताबिक साल 2024 में पंजाब में 106 मौत सिर्फ ड्रग ओवरडोज के कारण हुई. वैसे ये सरकारी आंकड़ा है लेकिन, इसकी सच्चाई डरा रही है. इसके मुताबिक पंजाब में हर चौथे दिन एक शख्स ने नशे की ओवरडोज के चलते अपनी जान गंवाई. लेकिन ऐसा नहीं है कि जिंदगिया लीलता नशा सिर्फ पंजाब की समस्या है.

ये देश की ही नहीं, पूरी दुनिया की समस्या है. आज देश के हालात ये हैं कि 147 करोड़ की जनसंख्या में से 37 करोड़ यानी 25% लोग नशे के आदी हैं. ये 25% लोग अपने परिवार-घर को तो बर्बाद कर ही रहे हैं, देश की अर्थव्यवस्था को भी बिगाड़ रहे हैं. नशे के कारण देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) को सालाना लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए का नुकसान होता है.

यदि इसमें सामाजिक और स्वास्थ्य आर्थिक बोझ को शामिल किया जाए, तो यह नुकसान जीडीपी के 2.5% से अधिक तक पहुंच जाता है. जो 1.60 लाख करोड़ रुपए बैठता है. ETV Bharat अपने 'भारत अगेंस्ट ड्रग' (Bharat Against Drug) अभियान के जरिए बताएगा कि कैसे अफीम, चरस-गांजा, कोकीन धीरे-धीरे शरीर और समाज को विकलांग बना रहा है.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

देश में कितने लोग करते हैं नशा: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय की ओर से हाल ही में "भारत में नशीले पदार्थों के उपयोग की सीमा और पैटर्न पर राष्ट्रीय सर्वेक्षण" (2019) रिपोर्ट जारी की गई है. इसके अनुसार, देश में 37 करोड़ से अधिक लोग किसी न किसी प्रकार का नशा करते हैं. इसमें 10 से 75 वर्ष की आयु के बीच के 16 करोड़ लोग (14.6%) वर्तमान में शराब का सेवन करते हैं. लगभग 3.1 करोड़ लोग गांजे का नशा करते हैं.

कुल मिलाकर 2.06% लोग ओपिओइड (हेरोइन, स्मैक, ब्राउन शुगर) का सेवन करते हैं. 1.18 करोड़ लोग (1.08%) वर्तमान में सिडेटिव्स यानी शामक दवाओं (नॉन-मेडिकल उपयोग) का सेवन करते हैं. वयस्कों के 0.58% की तुलना में 1.7% बच्चे और किशोर इनहेलेंट (पेंट, थिनर, गोंद, मार्कर, और एरोसोल स्प्रे) का सेवन करते हैं. अनुमान है कि लगभग 8.5 लाख लोग इंजेक्शन के जरिए नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

दुनिया में नशा करने वाले कितने लोग: संयुक्त राष्ट्र के ड्रग्स और अपराध कार्यालय (United Nations Office on Drugs and Crime) के अनुसार, 2023 में 15 से 64 वर्ष की आयु के लगभग 31.6 करोड़ लोग शराब और तंबाकू के अलावा अन्य नशीले पदार्थों का सेवन करते हैं. यह आंकड़ा 2013 के आंकड़े से काफी अधिक है.

एजेंसी की वार्षिक 'विश्व ड्रग रिपोर्ट' (World Drug Report) में भांग (cannabis) को सबसे अधिक इस्तेमाल किया जाने वाला नशीला पदार्थ बताया गया है, जिसका दुनिया भर के करीब 24.4 करोड़ लोग सेवन करते हैं. इसके बाद ओपिओइड्स (61 मिलियन), एम्फैटेमिन (30.7 मिलियन), कोकीन (25 मिलियन) और MDMA (21 मिलियन) का स्थान आता है.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

भारत में हर साल नशा कितने लोगों की ले रहा जान: विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization, WHO) के अनुसार, शराब के सेवन से दुनियाभर में हर साल 26 लाख (2.6 मिलियन) लोगों की मौत होती है. इसमें भारत में शराब से होने वाली मौतों का अनुपात काफी अधिक है. इसके अलावा, विभिन्न स्वास्थ्य रिपोर्टों का अनुमान है कि भारत में धूम्रपान, शराब और अन्य नशों के दुष्प्रभावों से कुल मौतों का आंकड़ा सालाना 9 लाख के पार भी हो सकता है.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

WHO की 2024 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में हर एक लाख लोगों पर शराब से जुड़ी मौतों की संख्या 38.5 है. इसमें पुरुष और महिला दोनों शामिल हैं, जबकि चीन में यह संख्या 16.1 है. भारतीय पुरुषों के लिए यह संख्या तेजी से बढ़कर 63.0 हो गई, जबकि चीन में यह 29.6 थी. वहीं भारतीय महिलाओं के लिए यह आंकड़ा 13.5 है, जबकि चीन में यह 3.3 है. हालांकि, NCRB की 2024 की रिपोर्ट कुछ और ही आंकड़े बताती है. इसके अनुसार, 2024 में ड्रग्स के ओवरडोज से 978 लोगों की मौत हुई, जबकि 2023 में इसी वजह से 654 लोगों की जान गई थी.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

नशे से GDP को 2.5% से अधिक का नुकसान: नशा यानी मादक पदार्थों की लत जहां आपके शरीर को धीरे-धीरे दीमक की तरह चट कर रहा है, नशा देश की अर्थव्यवस्था को भी विकलांग बना रहा है. नशे के कारण देश की जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) को सालाना लगभग 1.5 लाख करोड़ रुपए का प्रत्यक्ष आर्थिक नुकसान होता है. यदि इसमें सभी प्रकार के नशीले पदार्थों के कुल सामाजिक और स्वास्थ्य आर्थिक बोझ को शामिल किया जाए, तो यह नुकसान जीडीपी के 2.5% से अधिक तक पहुंच जाता है. जो 1.60 लाख करोड़ रुपए बैठता है. यही नहीं, नशा परिवार की अर्थव्यवस्था भी चौपट कर रहा है. परिवार कर्ज के बोझ तले दबते चले जा रहे हैं.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

एक व्यक्ति कितना पैसा नशे पर खर्च करता: इंडियन काउंसिल फॉर सोशल साइंस रिसर्च (ICSSR) की 2019 में पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में की गई एक स्टडी में पाया गया कि नशा करने वाला एक व्यक्ति ड्रग्स पर रोजाना 2,000 रुपए खर्च करता है. यह स्टडी की गई थी. 2022 में जम्मू-कश्मीर प्रशासन के एक सर्वे में पाया गया कि 52,000 से ज्यादा लोग हेरोइन का इस्तेमाल करते हैं. इसके लिए एक व्यक्ति औसतन महीने में लगभग 88,000 रुपए खर्च करता था.

देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता.
देश के किस राज्य में कौन सा नशा सबसे ज्यादा किया जाता. (Photo Credit; ETV Bharat)

ड्रग्स देश की GDP को कितना नुकसान पहुंचा रहा: इंटरनेशनल जर्नल ऑफ ड्रग पॉलिसी के एक अध्ययन के अनुसार, शराब से होने वाली बीमारियों, समय से पहले होने वाली मौतों और दुर्घटनाओं के कारण भारत को हर साल जीडीपी का लगभग 1.45% नुकसान होता है. वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठव (WHO) की रिपोर्ट के मुताबिक, तंबाकू से होने वाली बीमारियों और असामयिक मौतों के कारण देश को सालाना जीडीपी का 1% नुकसान उठाना पड़ता है.

नशा 5 ट्रिलियन डॉलर इकोनॉमी बनने की राह में रोड़ा: इसके अलावा हेरोइन, गांजा, अफीम और सिंथेटिक ड्रग्स के कारण देश को सालाना 1.5 लाख करोड़ रुपए की आर्थिक चपत लगती है. कुल मिलाकर मादक पदार्थ देश को 1.6 लाख करोड़ रुपए का नुकसान पहुंचा रहे हैं. जो देश को 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की राह में एक बड़ा रोड़ा है.

अकेले तंबाकू से जुड़ी बीमारियों के इलाज पर होने वाला स्वास्थ्य खर्च, भारत में एक साल में निजी और सरकारी स्वास्थ्य पर होने वाले कुल खर्च का 5.3% है. यह सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली और अर्थव्यवस्था, दोनों पर एक भारी बोझ है.

नशे छोड़ने के लिए होने वाले ट्रीटमेंट पर कितना खर्च.
नशे छोड़ने के लिए होने वाले ट्रीटमेंट पर कितना खर्च. (Photo Credit; ETV Bharat)

नशा-मुक्ति के लिए सरकार कितना दे रही बजट: सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय ने 15 अगस्त 2020 को नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) की शुरुआत 272 ऐसे जिलों में की थी जो नशे की समस्या के लिहाज से सबसे ज्यादा संवेदनशील थे. अब इसे देश के सभी जिलों में बढ़ा दिया गया है. नशा मुक्त भारत अभियान (NMBA) के तहत, हर जिले के लिए 10 लाख रुपए जारी करने का प्रावधान है.

नशे की लत छुड़ाने में कितना आता है खर्च: भारत में नशा-मुक्ति इलाज का औसत खर्च लगभग 70,000 रुपए आता है. लेकिन, यह आंकड़ा अनुमानित है, अस्पताल, शहर और मरीज की खास मेडिकल जरूरतों के आधार पर इसमें काफी अंतर हो सकता है. किफायती रिहैबिलिटेशन में आमतौर पर प्रति माह 25,000 से 60,000 रुपए का खर्च आता है. मिड-रेंज रिहैबिलिटेशन में प्रति माह 60,000 से 1,50,000 रुपए का खर्च आता है. वहीं, लक्जरी रिहैबिलिटेशन में 20 लाख से 50 लाख रुपए या उससे भी ज्यादा खर्च हो सकता है.

नशामुक्ति के लिए सरकार कितना खर्च कर रही.
नशामुक्ति के लिए सरकार कितना खर्च कर रही. (Photo Credit; ETV Bharat)

नशा रोकने के लिए सरकार क्या कर रही: सरकार ने मादक पदार्थों की मांग कम करने के लिए राष्ट्रीय कार्य योजना NAPDDR लागू की है. इसके तहत सरकार इस समस्या को रोकने के लिए लगातार कार्रवाई कर रही है. देश के सभी जिलों में 10,000 से अधिक मास्टर स्वयंसेवकों के माध्यम से 'नशा मुक्त भारत अभियान' (NMBA) शुरू किया गया.

यह अभियान 14.79 करोड़ से अधिक लोगों तक पहुंचा है, जिसमें 4.96 करोड़ युवा और 2.97 करोड़ महिलाएं शामिल हैं. मदद चाहने वाले लोगों को प्राथमिक परामर्श और तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए नशा मुक्ति के लिए एक टोल-फ्री हेल्पलाइन, 14446 भी चलाई जाती है.

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Last Updated : June 19, 2026 at 3:32 PM IST