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आजादी की रक्षा के साथ देश की एकता, सुरक्षा और समृद्धि बनाए रखने की जरूरत : मोहन भागवत

आरएसएस प्रमुख ने कहा कि युवा की क्षमता के सही उपयोग से देश ‘विश्वगुरु’ बनेगा, वरना वे भविष्य में समाज पर बोझ बन सकते हैं.

RSS Chief Mohan Bhagwat hoisting the Tricolour at the RSS headquarters on the 80th Independence Day.
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत 80वें स्वतंत्रता दिवस पर आरएसएस मुख्यालय में तिरंगा फहराते हुए. (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : August 15, 2026 at 8:03 PM IST

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नागपुर : स्वतंत्रता दिवस पर शनिवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ मुख्यालय नागपुर में सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत द्वारा ध्वजारोहण किया गया. इस अवसर पर सरसंघचालक ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वर्षों के त्याग से मिली आजादी को बनाए रखना हमारी ज़िम्मेदारी है. 1857 से शुरू हुए स्वतंत्रता संग्राम में अनगिनत ज्ञात और अज्ञात स्वतंत्रता सेनानियों ने बलिदान दिए. मोहन भागवत ने कहा कि भारत को वर्षों के संघर्ष के बाद आजादी मिली है. इसलिए, यह हर भारतीय की ज़िम्मेदारी है कि वह उस आजादी को बनाए रखे जिसे बहुत बड़े त्याग से हासिल किया गया है.

उन्होंने साफ किया कि आजादी का मतलब सिर्फ बाहरी ताकत और ढांचे से मुक्ति नहीं है, बल्कि देश को खुशहाल, समृद्ध और सुरक्षित बनाना नागरिकों की जिम्मेदारी है.

आजादी बनाए रखना जिम्मेदारी - 1857 से शुरू हुए संघर्ष में कई लोगों ने अपनी जान की कुर्बानी दी. भारत को कई वर्षों के त्याग और बलिदान के बाद स्वतंत्रता मिली. इसलिए, आजादी को बनाए रखना और उसे सुरक्षित रूप से अगली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है; आजादी के बाद देश को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी हमारी है. उन्होंने कहा कि आजादी हासिल करना जितना जरूरी था, उतने ही सही तरीके से आजादी हासिल करना भी जरूरी था.

सावरकर के विचारों का जिक्र
इस दौरान भागवत ने विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद देश में जो कुछ भी अच्छा, महान और शुभ है, उसे साकार किया जाना चाहिए और इसे हकीकत में बदलना भारतीयों की जिम्मेदारी है, यही सावरकर का विचार है. आजादी कोई आखिरी मंजिल नहीं, बल्कि राष्ट्र-निर्माण की शुरुआत है; या फिर इसने उस खालीपन को भरा है?

तिरंगा सिर्फ एक झंडा नहीं, बल्कि मूल्यों का प्रतीक
डॉ. मोहन भागवत ने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज में तीनों रंगों का महत्व स्पष्ट है; केसरिया रंग कड़ी मेहनत, ज्ञान, त्याग और बलिदान का प्रतीक है. उन्होंने कहा कि सफेद रंग शांति और शीतलता का प्रतीक है, जबकि हरा रंग समृद्धि का प्रतीक है. इसलिए, उन्होंने कहा कि तिरंगा न केवल देश की पहचान का प्रतीक है, बल्कि राष्ट्र के मूल्यों की याद भी दिलाता है.

विविधता एकता की अभिव्यक्ति
देश में हर व्यक्ति के विचार, भूमिका और राय अलग-अलग हो सकते हैं. विविधता अकेले देश के लिए कोई बाधा नहीं है, बल्कि यह भारतीय समाज की एक अनूठी विशेषता है. भारत में कई भाषाएं, परंपराएं, विचारधाराएं और जीवन-शैली हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय समाज की ताकत अलग-अलग तरह के लोगों को अपनाकर आगे बढ़ना है.

धर्मचक्रतुन एकता का संदेश
उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के केंद्र में स्थित अशोक चक्र का विशेष रूप से उल्लेख किया. पहिए में कई तीलियां अलग-अलग दिशाओं में जाती हुई दिखाई देती हैं. बस बात यह है कि वे सभी एक ही केंद्र से निकलती हैं. अलग-अलग दिशाओं में जाना या आर्य चक्रों का एक ही सीमा में बने रहना—यह विविधता में एकता और व्यवस्थित सामाजिक जीवन का संदेश देता है. इसीलिए यह कहा गया था कि राष्ट्रीय ध्वज के बीच में धर्मचक्र को रखा जाना चाहिए.

देश से ये अपीलें की जाएंगी
यह भरोसा जताते हुए कि भारत आजाद है और हमेशा आजाद रहेगा, भागवत ने कहा कि देश को खुशहाल, समृद्ध और सुरक्षित बनाने की राह में कई रुकावटें आएंगी. ये ताकतें ही देश की तरक्की की नींव रखती हैं. इसलिए, उन्होंने कहा कि देश की आजादी की रक्षा के साथ-साथ, नागरिकों को देश की एकता, सुरक्षा और समृद्धि बनाए रखने के लिए सतर्क रहने की जरूरत है.

राष्ट्र-निर्माण एक सामूहिक जिम्मेदारी
आजादी के लिए लड़ने वालों के बलिदान से मिली आजादी के महत्व को आने वाली पीढ़ियों को समझाना और देश के भविष्य में सकारात्मक योगदान देना जरूरी है.मोहन भागवत के भाषण में यह संदेश दिया गया कि मतभेदों के बावजूद, समाज को राष्ट्रीय हित के मुद्दों पर एकजुट होने की भूमिका को स्वीकार करना चाहिए.

1857 में शुरू हुए संघर्ष से लेकर आज के स्वतंत्र भारत तक का सफर त्याग, बलिदान और संघर्ष का सफर है. इसलिए, मोहन भागवत का कहना है कि आजादी का जश्न मनाने के साथ-साथ, उस आजादी को और मजबूत, सुरक्षित और समृद्ध बनाने का संकल्प लेने की भी जरूरत है.

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