बिहार में दोनों चरणों में हुए 66.90% मतदान, ये वोटर साबित होंगे निर्णायक
इस बार के मतदान में महिलाओं की जबरदस्त हिस्सेदारी की चर्चा है. विधानसभा चुनाव 2020 में महिलाओं का वोटिंग परसेंट कितना था.

Published : November 11, 2025 at 8:58 PM IST
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के पहले और दूसरे चरण के मतदान प्रतिशत ने सभी पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए. दोनों फेज को मिलाकर देखें तो इस चुनाव में 66.90 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया है जो 1951 से अब तक हुए सभी चुनावों में सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत है. दोनों फेज को मिलाकर कुल 3.7 करोड़ मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया है.
बिहार के मतदाताओं ने इतिहास रच दिया: बिहार विधानसभा चुनाव पर मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा "...आज, मतदाताओं ने भी स्वतंत्र भारत में इतिहास रच दिया है. बिहार के मतदाताओं ने 1951 से अब तक हुए सभी चुनावों में सबसे ज़्यादा, लगभग 66.9 प्रतिशत मतदान किया. उन्होंने कहा कि, महिलाओं ने चुनाव आयोग में अपना पूरा विश्वास जताया है
#WATCH | Delhi | On Bihar Polls, CEC Gyanesh Kumar says, "... Today, voters have also made history in independent India today. They cast the highest percentage of votes in all elections held since 1951, at approximately 66.9%. Women have expressed their complete faith in the… https://t.co/C9qPzyTnwG pic.twitter.com/4iVdwfNn9M
— ANI (@ANI) November 11, 2025
दूसरे फेज के लिए बिहार के 20 जिलों के 122 विधानसभा सीटों पर बंपर वोटिंग हुई है. चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 68.80 प्रतिशत वोट पड़े. कुल मिलाकर दूसरे चरण के मतदान में मतदाताओं ने सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. 6 नवंबर को पहले चरण में 121 सीटों पर रिकॉर्ड 65 प्रतिशत से अधिक वोटिंग हुई थी. हालांकि, इस बढ़े हुए मतदान के पीछे की असली कहानी तब सामने आती है, जब हम महिला और पुरुष मतदान के आंकड़ों का अलग-अलग विश्लेषण करते हैं.

महिला मतदान की मजबूत उपस्थिति: रिपोर्ट के मुताबिक, पहले चरण की वोटिंग में महिला मतदान 69.04 प्रतिशत और पुरुष मतदान 61.56 फीसद रहा है. यह 7.5 प्रतिशत का अंतर बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण रुझान को दर्शाता है. बिहार में पिछले तीन चुनावों में महिला मतदान पुरुषों से 3 फीसदी से 7 प्रतिशत तक अधिक रहा है.
महिलाओं की मजबूत स्थिति ने बदले समीकरण: राज्य की 243 सीटों में से लगभग 167 सीटों पर महिलाओं का टर्नआउट पुरुषों के मुकाबले अधिक रहा. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इन सीटों पर महिला मतदाताओं ने कई जगह निर्णायक भूमिका निभाई.

बिहार विधानसभा 2020 के आंकड़े: बिहार विधानसभा चुनाव 2020 में महिलाओं ने मतदान में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई थी. आंकड़ों के मुताबिक, महिलाओं का मतदान प्रतिशत 59.6 प्रतिशत रहा. यह पुरुषों के 54.7 फीसदी से करीब 5 प्रतिशत ज्यादा था. यह लगातार तीसरा चुनाव था जब महिला मतदाता मतदान में पुरुषों से आगे रहीं. विधानसभा चुनाव में कुल 57.05 फीसदी मतदान हुआ था.

बिहार में महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक सक्रियता: बिहार की महिलाओं ने पिछले एक दशक में चुनावी राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. पंचायतों में 50 फीसदी आरक्षण के बाद महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी लगातार बढ़ी है. 2020 के विधानसभा चुनाव ने यह दिखाया कि महिला वोट अब बिहार की राजनीति का निर्णायक फैक्टर बन चुका है.

नीतीश कुमार के कार्यकाल में क्या परिवर्तन आया?: साल 2005 अक्टूबर में जब नीतीश कुमार ने चुनाव जीता था, उस समय महिला मतदान पुरुषों से 2.6 फीसदी कम था. हालांकि, नीतीश के शासनकाल में कानून व्यवस्था में सुधार और महिला-केंद्रित योजनाओं ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया. साइकिल वितरण, नौकरियों में आरक्षण, पोषण योजनाएं, जीविका दीदी कार्यक्रम, स्थानीय निकायों में आरक्षण और शराबंदी जैसी पहलों ने महिलाओं को चुनावी प्रक्रिया में अधिक सक्रिय भागीदार बनाया.

साल 2010 में महिला मतदान पुरुषों से 3.35 प्रतिशत ज्यादा था. वहीं, 2015 में यह अंतर बढ़कर 7.2 प्रतिशत हो गया. साल 2020 कोरोना के समय हुए मतदान में इसमें गिरावट आई थी. हालांकि, तब भी महिलाओं ने पुरुषों के मुकाबले 5.3 फीसदी मतदान किया. अब 2025 के पहले चरण में यह अंतर 7.5 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो एक महत्वपूर्ण उछाल को दर्शाता है.
बिहार के मतदान पर प्रवासन का प्रभाव: महिला मतदान में वृद्धि का एक महत्वपूर्ण कारण पुरुषों का काम के लिए प्रवास भी है. कई पुरुष रोजगार के लिए दूसरे राज्यों में जाते हैं और वोट डालने के लिए वापस आने का खर्च वहन नहीं कर पाते. पुरुषों की अनुपस्थिति में महिलाएं घर का प्रबंधन करती हैं और सभी निर्णय लेती हैं, जिससे उनकी राजनीतिक जागरूकता और भागीदारी बढ़ी है.

राजनीतिक प्रभाव: JDU और NDA को फायदा: उच्च महिला मतदान NDA और खासतौर पर जनता दल यूनािटेड ( JDU) के लिए लाभकारी रहा है. NDA ने 2010 और 2020 में पुरुषों की तुलना में अधिक महिला मतदान के आधार पर जीत हासिल की. JDU की सफलता दर उन सीटों पर 70 प्रतिशत से 90 फीसदी रही है, जहां महिलाओं का मतदान प्रतिशत पुरुषों से अधिक रहा.
2020 में जिन 167 सीटों पर महिलाओं ने पुरुषों से अधिक मतदान किया, उनमें से 99 सीटें NDA ने जीती थी. इसके उलट, जिन 76 सीटों पर पुरुषों का मतदान अधिक था, वहां महागठबंधन ने 49 सीटें जीतीं. 2020 में महिलाओं ने NDA की नजदीकी जीत में अहम भूमिका निभाई. NDA को महिलाओं में 1 फीसदी की बढ़त मिली थी, जबकि महागठबंधन को पुरुषों में 2 फीसदी की बढ़त थी.

2025 का चुनाव बताएगा किस गठबंधन को मिलेगा अधिक लाभ: बिहार में महिला मतदान की बढ़ती प्रवृत्ति राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है. महिला सशक्तीकरण योजनाओं, बेहतर कानून व्यवस्था और महिलाओं की बढ़ती राजनीतिक जागरूकता ने उन्हें निर्णायक मतदाता समूह बना दिया है. 2025 के चुनाव परिणाम यह तय करेंगे कि क्या यह प्रवृत्ति जारी रहती है और किस गठबंधन को इसका अधिकतम लाभ मिलता है.
महिला मतदाताओं की बढ़ती भागीदारी न केवल लोकतंत्र के लिए एक बेहतर संकेत है, बल्कि यह बिहार के सामाजिक-राजनीतिक परिदृश्य में आए सकारात्मक बदलाव को भी दर्शाता है.
''इस चुनाव में एक बार फिर से नीतीश कुमार का जादू मतदाताओं के सिर पर चढ़कर बोला. 2005 के बाद महिला मतदाता नीतीश कुमार का वोट बैंक रही है और इस बार लगभग डेढ़ करोड़ महिलाओं को ₹10000 खाता में दिए जाने का फायदा फिर से नीतीश कुमार को मिलता हुआ दिख रहा है. युवाओं ने भी इस बार चुनाव में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया क्योंकि उन्हें इस बार लग रहा है कि सरकार जिसकी भी बने अब रोजगार और नौकरी ही मुद्दे बनने जा रहे हैं. बिहार में चुनाव के बाद फिर से वैकेंसी आएगी और उनको बिहार में नौकरी मिल सकती है यही कारण है कि युवाओं एवं खासकर महिलाओं ने इस चुनाव में बढ़कर हिस्सा लिया और यही चुनाव परिणाम को निर्णायक बनाएगा.''- सुनील पांडेय,वरिष्ठ पत्रकार
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