ईरान-US युद्ध का साइड इफेक्ट, हरियाणा के चावल निर्यातकों की परेशानी बढ़ी, देश-विदेश के पोर्ट्स में फंसा कार्गो शिपमेंट
इजराइल-ईरान युद्ध का वैश्विक असर पड़ना शुरू हो गया है. ईरान को भारत से बड़े पैमाने पर बासमती चावल का निर्यात प्रभावित हुआ है.

Published : March 2, 2026 at 8:37 PM IST
करनालः इजराइल-अमेरिका और ईरान युद्ध के कारण वैश्विक बाजार में बड़ी उथल-पुथल देखने को मिल रहा है. युद्धग्रस्त देशों के साथ युद्ध के केंद्र वाले इलाके से जल और वायु मार्ग से बड़ी संख्या में जरूरी सामग्री का आयात-निर्यात होता था. ताजा हालात में इन इलाकों से व्यापार पूरी तरह बंद है. इस ताजा उथल-पुथल का असर हरियाणा के चावल निर्यातकों खासकर बासमती निर्यातकों के कारोबार पर पड़ा है. फिलहाल देश और विदेश के विभिन्न बंदरगाहों पर चावल की खेप फंसी हुई है. साथ ही होने वाली पेमेंट भी फंस गई है.
करनाल से चावल की बड़ी खेप का होता है निर्यातः युद्ध के कारण हरियाणा के चावल निर्यातकों में भी चिंता दिखाई दे रही है क्योंकि हरियाणा से बड़े पैमाने पर ईरान बासमती चावल जाता है. करनाल से भी बड़ी खेप निर्यात की जाती है. युद्ध की वजह से धान का कटोरा नाम से पहचाने जाने वाले करनाल में चावल निर्यात पर काफी असर पड़ सकता है.
ईरान को हरियाणा से 50 फीसदी चावल का होता है निर्यातः करनाल राइस मिल एसोसिएशन के प्रधान सतीश गोयल ने बातचीत में कहा कि अगर बासमती के लिहाज से देखा जाए तो ईरान हमारे लिए एक बहुत महत्वपूर्ण देश है. हरियाणा से 40% से 50% चावल ईरान में एक्सपोर्ट किया जाता है.

भारत सरकार के साथ व्यापारियों की बैठक कलः उन्होंने कहा कि युद्ध के कारण गल्फ रीजन में व्यापार प्रभावित हुआ है. उन्होंने कहा कि राइस मिलर कारोबारी इस वक्त काफी चिंतित हैं, जिसको लेकर हम भारत सरकार के संपर्क में भी हैं. कल भी हमारी एक मीटिंग हैं, हम चाहते हैं कि हमारे ऊपर कोई अलग से चार्ज पोर्ट पर न लगे. किसी भी एक्सपोर्टर से अलग से कोई किराया नहीं लिया जाए. उन्होंने कहा भारत सरकार हमेशा से हमारे साथ खड़ी नजर आती है उन्हें उम्मीद है कि इस बार भी हर बार की तरह भारत सरकार उनका साथ देगी ताकि किसी को भी कोई दिक्कत परेशानी ना आए.

करनाल और कैथल से भारी मात्रा में चावल जाता है ईरानः सतीश गोयल ने कहा पूरे गल्फ को भारत से ही चावल निर्यात किया जाता है. उन्होंने कहा कि हम उम्मीद करेंगे कि जल्द ही सब कुछ ठीक होगा. हरियाणा में करनाल और कैथल, दो ऐसे जिले हैं जहां से सबसे ज्यादा चावल ईरान को चावल एक्सपोर्ट किया जाता है.


