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IIT जोधपुर में समुद्र जल से सीधे हाइड्रोजन व बैटरी निर्माण की नई तकनीक विकसित

स्वच्छ हाइड्रोजन एवं अगली पीढ़ी की जिंक बैटरियों के लिए IIT जोधपुर के शोधकर्ताओं ने विकसित की क्रांतिकारी तकनीक. जानिए क्या है खास...

IIT Jodhpur Researchers
डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता अपनी टीम के साथ (Source : IIT Jodhpur)
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By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : December 9, 2025 at 4:14 PM IST

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जोधपुर: भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान जोधपुर (IIT Jodhpur) के केमिकल इंजीनियरिंग विभाग के इलेक्ट्रोकेमिकल एनर्जी कन्वर्जन एंड स्टोरेज (E2CS) प्रयोगशाला में सहायक प्रोफेसर डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता के नेतृत्व में शोधकर्ताओं ने सतत प्रौद्योगिकी के दो प्रमुख क्षेत्रों- समुद्री जल से सीधे हाइड्रोजन उत्पादन तथा अगली पीढ़ी की जलीय जिंक-आयन बैटरियों की नई तनकनीक विकसित की है.

दोनों तकनीक का प्रयोगशाला में ट्रॉयल पूरा कर अब सामान्य उपयोग के लिए अग्रसर की तैयारी है. यह नवाचार आने वाले समय में नवीकरणीय ऊर्जा, जल संकट और जलवायु परिवर्तन से जुड़े वैश्विक चुनौतियों को दूर करने में सहायक सिद्ध हो सकते हैं. डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता ने बताया कि समुद्री जल से सीधे हाइड्रोजन उत्पादन, सस्ते ग्रीन हाइड्रोजन की दिशा में सबसे बड़ा कदम है. हमारा उद्देश्य ऐसे पदार्थ एवं इंटरफेस विकसित करना है जो वैज्ञानिक दृष्टि से उन्नत हो और वास्तविक उपयोग के लिए व्यावहारिक भी हो. हमारी टीम ऐसे स्केलेबल इलेक्ट्रोड एवं मजबूत कैटलिस्ट विकसित कर रही है, जो तटीय एवं जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों के लिए स्वच्छ ऊर्जा समाधान उपलब्ध कराएंगे.

डॉ. प्रशांत कुमार गुप्ता ने क्या कहा, सुनिए... (Source : IIT Jodhpur)

समुद्री जल से सीधे हाइड्रोजन का निर्माण : डॉ. गुप्ता की टीम ऐसे उन्नत इलेक्ट्रोकैटलिस्ट विकसित कर रही है, जो सीधे समुद्री जल का उपयोग कर हाइड्रोजन उत्पादन संभव बनाते हैं. इस प्रक्रिया में जल शुद्धिकरण की आवश्यकता समाप्त होती है, साथ ही औद्योगिक अपशिष्ट उपचार से जुड़ी चुनौतियां भी कम होती हैं. यह तकनीक ऊर्जा-सघन एनोडिक प्रतिक्रियाओं के स्थान पर मूल्यवर्धित प्रतिक्रियाओं को सम्मिलित कर ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को 90 रुपये प्रति किलोग्राम से नीचे लाने की क्षमता रखती है.

विद्युत अपघटन (इलेक्ट्रोलिसिस) के माध्यम से पारंपरिक रूप से हाइड्रोजन उत्पादन के लिए अत्यंत शुद्ध जल की आवश्यकता होती है. लगभग 1 किलोग्राम हाइड्रोजन के उत्पादन में 30 लीटर शुद्ध पानी. जबकि डॉ. गुप्ता की टीम का मॉडल तटीय एवं शुष्क क्षेत्रों की इन चुनौतियों का हल बन सकता है.

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बैटरी की जिंक-आयन तकनीक : डॉ. गुप्ता ने बताया कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है. ऐसे में सुरक्षित, किफायती एवं टिकाऊ ऊर्जा भंडारण की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है. वर्तमान में प्रचलित लिथियम-आयन बैटरियां महंगी हैं और उनसे संसाधन उपलब्धता एवं सुरक्षा संबंधी समस्याएं जुड़ी हैं. वहीं, लेड-एसिड बैटरियां पर्यावरणीय दृष्टि से हानिकारक एवं सीमित क्षमता वाली हैं.

E2CS लैब जलीय जिंक-आयन बैटरियों पर व्यापक शोध कर रही है. जिंक उच्च ऊर्जा घनत्व, प्रचुर उपलब्धता, सुरक्षा और कम लागत का विकल्प प्रदान करता है. टीम बेहतर दक्ष कैथोड सामग्री, और इलेक्ट्रोलाइट एडिटिव विकसित कर रही है, जिनसे एनोड पर जंग एवं परत बनने की समस्या दूर हो सके. इस तकनीक से बैटरी की क्षमता लंबे चक्र तक बनाए रखना संभव होगा.

जिंक-एयर बैटरी तकनीक : डॉ. गुप्ता ने बताया कि जिंक आधारित बैटरियां भविष्य में बड़े पैमाने पर किफायती ऊर्जा भंडारण का आधार बन सकती हैं. एनोड से जुड़ी प्रमुख चुनौतियों को हल कर तथा टिकाऊ इलेक्ट्रोलाइट प्रणाली विकसित कर हम प्रयोगशाला से व्यावहारिक उपयोग की दिशा में काम कर रहे हैं. हम पर्यावरणीय ऑक्सीजन का उपयोग करने वाली हाइब्रिड जिंक-एयर बैटरियों पर भी कार्य कर रहे हैं, जो अत्यधिक ऊर्जा घनत्व प्रदान कर हल्के एवं पोर्टेबल उपकरणों में उपयोगी हो सकती हैं.