ETV Bharat / bharat

महत्वपूर्ण खोज : IIT Jodhpur ने खोजा गंभीर संक्रमण का तोड़, यहां जानिए

आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं ने खोजा मानव शरीर का ऐसा प्रोटीन जो खतरनाक बैक्टीरियल बायोफिल्म को रोक सकता है.

IIT Jodhpur Research
आईआईटी जोधपुर के शोधकर्ताओं की बड़ी उपलब्धि (Source : IIT Jodhpur)
author img

By ETV Bharat Rajasthan Team

Published : February 23, 2026 at 5:59 PM IST

4 Min Read
Choose ETV Bharat

जोधपुर: आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल की है. उन्होंने पाया है कि मानव शरीर में स्वाभाविक रूप से मौजूद एक प्रोटीन बैक्टीरिया द्वारा बनने वाली खतरनाक और अत्यधिक प्रतिरोधक बायोफिल्म को बनने से रोक सकता है. बायोफिल्म लंबे समय तक चलने वाले संक्रमण और एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस (AMR) का एक प्रमुख कारण है.

यह मानव शरीर में गंभीर संक्रमणों के चलते पैदा होती है. यह संक्रमण सामान्यत कैथेटेर, कृ​​त्रिम वॉल्व, हड्डी के इंप्लांट और लंबे समय तक नहीं भरने वाले घाव में होता है. बायोफिल्म के चलते इन पर एंटीबायोटिक का असर कम होता है, जो धीरे-धीरे बेअसर हो जाता है. यह शोध विश्व की प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका प्रोसिडिंग ऑफ दी नेशनल एकेडमी ऑफ साइंस (PNAS) अमेरिका में प्रकाशित हुआ है.

डॉ. नेहा जैन ने क्या कहा, सुनिए... (Source : IIT Jodhpur)

डॉ. नेहा जैन ने बताया कि बायोफिल्म लंबे समय तक चलने वाले संक्रमणों के इलाज में सबसे बड़ी चुनौती है, क्योंकि यह बैक्टीरिया को एंटीबायोटिक और हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली से बचाती है. हमारे अध्ययन से पता चला है कि β2-माइक्रोग्लोब्यूलिन, जो मानव शरीर में स्वाभाविक रूप से पाया जाता है. कर्ली के निर्माण को रोककर बायोफिल्म बनने से रोक सकता है. यह बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनकी सुरक्षा संरचना को कमजोर करता है. इससे प्रतिरोध का खतरा कम होता है और शरीर की अपनी जैविक प्रणाली से प्रेरित नई चिकित्सा विकसित करने का रास्ता खुलता है.

पढ़ें : IIT Jodhpur ने नवाचार में रचा नया कीर्तिमान, वर्ष 2025 में रिकॉर्ड 86 आईपीआर दाखिल

संक्रमण की ढाल होती है बायोफिल्म : डॉ. नेहा जैन ने बताया कि जब हम बैक्टीरिया के बारे में सोचते हैं, तो अक्सर हमें वे अकेले तैरते हुए कोशिकाओं की तरह दिखाई देते हैं, लेकिन वास्तव में कई बैक्टीरिया आपस में जुड़कर एक मजबूत परत बना लेते हैं, जिसे बायोफिल्म कहा जाता है. यह बायोफिल्म एक तरह की सूक्ष्म 'ढाल' होती है, जो प्रोटीन, शर्करा और डीएनए से मिलकर बनती है. यह बैक्टीरिया को बाहरी हमलों से बचाती है. बायोफिल्म में मौजूद बैक्टीरिया सामान्य बैक्टीरिया की तुलना में 1,000 गुना अधिक एंटीबायोटिक प्रतिरोधी हो सकते हैं.

शोध में क्या नई खोज हुई ? : ई. कोलाई संक्रमण में बायोफिल्म बनने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रोटीन होता है, जिसे कर्ली (Curli) कहा जाता है. कर्ली एक ढांचे (Scaffold) की तरह काम करता है, जिससे बैक्टीरिया सतह पर चिपकते हैं और एक-दूसरे से जुड़ते हैं. आईआईटी जोधपुर की टीम ने पाया कि मानव शरीर में मौजूद β2-माइक्रोग्लोब्यूलिन (β2m) नामक प्रोटीन इस प्रक्रिया को रोक सकता है. यह प्रोटीन बैक्टीरिया को मारता नहीं है, बल्कि कर्ली के बनने की शुरुआती प्रक्रिया को ही रोक देता है. इससे बायोफिल्म बन ही नहीं पाती.

पढ़ें : IIT जोधपुर में समुद्र जल से सीधे हाइड्रोजन व बैटरी निर्माण की नई तकनीक विकसित

वैश्विक स्वास्थ्य के लिए नई दिशा : एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस आज दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है. पारंपरिक एंटीबायोटिक बैक्टीरिया को मारती हैं, लेकिन इससे समय के साथ प्रतिरोधी स्ट्रेन विकसित हो जाते हैं. बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनकी सुरक्षा ढाल को तोड़कर उन्हें कमजोर किया जाए. मानव शरीर में पहले से मौजूद अणुओं का उपयोग करके सुरक्षित और टिकाऊ उपचार विकसित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है.

इसलिए है यह शोध महत्वपूर्ण :

  • यह सीधे बैक्टीरिया को मारने के बजाय उनकी सुरक्षा ढाल को कमजोर करता है.
  • इससे बैक्टीरिया में प्रतिरोध (रेजिस्टेंस) विकसित होने की संभावना कम हो जाती है.
  • यह पारंपरिक एंटीबायोटिक से अलग और नया इलाज का रास्ता दिखाता है.
  • इसमें घाव भरने की क्षमता भी हो सकती है.