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आखिर क्यों आईआईटी काउंसिल ने एमटेक और पीएचडी कोर्सों में बदलाव का दिया निर्देश, IIT ISM धनबाद ने डीन ने बताई ये वजह

IIT ISM धनबाद के डीन ने एमटेक और पीएचडी कोर्सों में बदलाव की जरूरत और उद्देश्य को लेकर ईटीवी भारत से खास बातचीत की.

IIT ISM Dhanbad
आईआईटी आईएसएम धनबाद. (फोटो-ईटीवी भारत)
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By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : January 9, 2026 at 5:11 PM IST

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धनबाद: एमटेक और पीएचडी कोर्स में सीटें खाली रह जाने पर आईआईटी काउंसिल ने इन कोर्सों में बदलाव के निर्देश दिए हैं. काउंसिल ने देशभर के 23 आईआईटी संस्थानों को कोर्स में बदलाव कर रिपोर्ट करने को कहा है. इस संबंध में ईटीवी भारत ने आईआईटी आईएसएम धनबाद के डीन प्रोफेसर डॉ. एमके सिंह से खास बातचीत की. जिसमें उन्होंने कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है.

एमटेक कोर्सों में बदलाव की जरूरत क्यों?

आईआईटी आईएसएम के डीन डॉ. एमके सिंह ने बताया कि आईआईटी काउंसिल ने एमटेक कोर्स में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं. काउंसिल ने सभी आईआईटी संस्थानों को इंडस्ट्री इंटर्न प्रोग्राम को मुख्य रूप से शामिल करने के लिए कहा है. उन्होंने बताया कि धनबाद आईआईटी आईएसएम में पहले से ही रिसर्च इंटर्न की व्यवस्था है. इंडस्ट्री में वैसे छात्र रिसर्च इंटर्न से लिंक कर काम भी करते हैं, पर एक्सक्लुसिवली इंडस्ट्रीज इंटर्न को भी इस कोर्स करिकुलम को अपग्रेड की प्रक्रिया चल रही है, जिसे अगले सीनेट में शामिल कर लिया जाएगा.

आईआईटी आईएसएम धनबाद के डीन प्रोफेसर डॉ. एमके सिंह से बात करते ईटीवी भारत संवाददाता नरेंद्र कुमार. (वीडियो-ईटीवी भारत)

एमटेक कोर्सों में बदलाव का उद्देश्य

इस सवाल पर आईआईटी आईएसएम के डीन ने बताया कि आईआईटी काउंसिल ने देश के सभी 23 आईआईटी को इंडस्ट्री करिकुलम (पाठ्यक्रम) को बढ़ावा देने का निर्देश जारी किया है, ताकि भारत के विकास में छात्र अपना योगदान दे पाएं. इसके लिए कोर्सों में बदलाव की जरूरत है. छात्र जब एमटेक की पढ़ाई कर संस्थानों से निकले तो इंडस्ट्रीज, रिसर्च या फिर सोसाइटी में और भारत नव निर्माण की दिशा में योगदान दे सकें.

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आईआईटी आईएसएम धनबाद के कैंपस में छात्र. (फोटो-ईटीवी भारत)

एमटेक की पढ़ाई के लिए छात्रों में कैसे जगे रुचि?

आईआईटी आईएसएम के डीन डॉ. एमके सिंह ने बताया कि धनबाद आईआईटी आईएसएम में वर्तमान में 8 प्वाइंट होल्डर को बीटेक से सीधे पीएचडी में प्रवेश दे रहे हैं. अगर वह पीजी और पीएचडी में कन्वर्ट करना चाहते हैं, तो उन्हें इसके लिए भी व्यवस्था है. जो छात्र सीधे बीटेक से पीएचडी में नामांकन ले चुके हैं,वह अगर एमटेक का प्रोग्राम करना चाहते हैं तो भी यह संभव है. एनईपी के निर्देश और छात्रों के हित का ख्याल रखते एमटेक कोर्स में हर तरह के बदलाव किए गए हैं.

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धनबाद का भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान. (फोटो-ईटीवी भारत)

एमटेक में सीटें क्यों रह जाती हैं खाली?

आईआईटी आईएसएम धनबाद के डीन ने बताया कि बीटेक के बाद छात्रों को जॉब के अवसर मिल जाते हैं. रिसर्च, इंडस्ट्रीज या स्टार्टअप इको सिस्टम में उन्हें तुरंत जॉब मिल जाता है. छात्र अपने स्टार्टअप में चले जा रहे हैं. यही वजह है कि वर्तमान में देश की सभी आईआईटी में 65 से 70 फीसदी ही एमटेक की सीटें भर पाती हैं और शेष 30 से 35 फीसदी सीटें खाली रह जाती हैं.

एमटेक के लिए छात्र क्यों करते हैं विदेशों का रूख?

बीटेक के बाद एमटेक करने के बाद कई छात्र विदेशों का रूख करते हैं, इस सवाल पर धनबाद आईआईटी आईएसएम के डीन ने बताया कि विदेशों में जाकर एमटेक करना एक धारणा बन गई है. यह छात्रों की रुचि पर भी निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि विदेशों में भारत से अच्छी पढ़ाई होती है यह महज एक अवधारणा है, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. भारत के भी आईआईटी संस्थानों में बेहतर पढ़ाई की व्यवस्था है.

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आईआईटी आईएसएम धनबाद के कैंपस में छात्र. (फोटो-ईटीवी भारत)

क्या कोर्सों में बदलाव से एमटेक की सीटें भर पाएंगी?

इस सवाल पर आईआईटी आईएसएम के डीन ने कहा कि अब हम छात्रों के लिए एकेडमिक फ्रीडम और फ्लेक्सिबिलिटी लेकर आ रहे हैं, जो छात्रों को काफी पसंद आएगा और उनमें एमटेक करने की रुचि जगेगी. ऐसे में उम्मीद है कि आनेवाले दिनों में सभी आईआईटी संस्थानों में एमटेक प्रोग्राम की सभी सीटें भर जाएंगी.

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