बंगाल के शांतिपुर में मूर्तियों में तोड़फोड़, CCTV फुटेज से हुई आरोपियों की पहचान
पश्चिम बंगाल के शांतिपुर में देवी-देवताओं की मूर्तियों में तोड़फोड़ की घटना के सिलसिले में पुलिस ने दो आरोपियों पर केस दर्ज किया है.

Published : January 7, 2026 at 10:09 PM IST
शांतिपुर (पश्चिम बंगाल): नदिया जिले में कई देवी-देवताओं की मूर्तियों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई है. यह घटना सोमवार रात जिले के शांतिपुर थाना क्षेत्र में सर्बानंदीपारा के लोकनाथ मंदिर के सामने हुई. आरोप है कि एक मूर्तिकार की लगभग 60-70 मूर्तियों को तोड़ दिया गया. पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.
पुलिस और स्थानीय सूत्रों के मुताबिक, शांतिपुर में आगमेश्वरी स्टेट इलाके के सर्बानंदीपारा में एक लोकनाथ मंदिर है. जयंत दास और उनके बेटे पलाश दास मंदिर के सामने मूर्तियां बनाते हैं. वे करीब 30 वर्षों से यह काम कर रहे हैं. सरस्वती पूजा पास आने पर, वे आजकल सरस्वती की मूर्तियां बना रहे थे. साथ ही काली माता की मूर्तियां भी बना रहे थे.
पलाश दास ने कहा, "सोमवार रात को, इलाके रहने वाले अमित डे मेरी दुकान पर आए. मैं अपने घर पर पूजा के लिए मूर्ति सजा रहा था. वह आए और पूछा, 'इतनी रात को क्या कर रहे हो?' मैंने उन्हें बताया कि मेरे घर पर पूजा है, इसलिए मैं मूर्ति सजा रहा था. मैंने उन्हें आने के लिए आमंत्रित भी किया. अमित उस समय नशे में थे, इसलिए मैंने ज्यादा कुछ नहीं कहा."
इसके बाद पलाश घर चला गया. मंगलवार सुबह जब वह उठा तो देखा कि उसकी कई मूर्तियों को तोड़ दिया गया. इससे हंगामा मच गया. सीसीटीवी फुटेज देखी गई, जिससे पता चला कि अमित डे और असित डे इस तोड़फोड़ में शामिल थे.
स्थानीय निवासी स्वपन देबनाथ ने कहा कि अमित इलाके में शराबी के तौर पर जाना जाता है और उस पर पहले भी कई आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लग चुका है. हालांकि, उसका भाई असित ऐसा नहीं है. उन्होंने सवाल किया कि उन दोनों ने यह काम क्यों किया. स्वपन देबनाथ ने इस घटना को बहुत दुर्भाग्यपूर्ण बताया.
आरोपियों की गिरफ्तारी में देरी
शांतिपुर पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई गई है. मिट्टी की मूर्तियां बनाने वाले पलाश दास ने बताया कि पुलिस आई और पूरी घटना की जांच की. उन्होंने CCTV फुटेज भी ली. हालांकि, घटना के 24 घंटे बाद भी आरोपी अमित और असित को गिरफ्तार नहीं किया गया है.
इस बारे में रानाघाट के SP आशीष मौर्य ने कहा, "शिकायत पहले ही दर्ज कर ली गई है. पुलिस ने जांच शुरू कर दी है. दो लोगों की पहचान हो गई है, लेकिन वे फरार हैं. पुलिस उनकी तलाश कर रही है."
मूर्ति तोड़ने पर राजनीतिक विवाद
वहीं, इस घटना से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. भाजपा ने इस घटना को सनातन धर्म पर हमला बताया. बंगाल भाजपा के प्रभारी अमित मालवीय ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, "ममता के जंगल राज में सनातन धर्म पर एक और क्रूर हमला!" उन्होंने दावा किया कि बंगाल में पहले भी ऐसी घटनाएं हो चुकी हैं.
उन्होंने आरोप लगाया कि यह सब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्य की सत्तारूढ़ पार्टी तृणमूल कांग्रेस के समर्थन से हो रहा है. उन्होंने दावा किया कि टीएमसी वोट बैंक की राजनीति के लिए ऐसा कर रही है. अमित मालवीय ने आगे लिखा, "2026 में न्याय स्थापित होगा. सनातन धर्म फिर से उठेगा. ममता के अतिवादी साम्राज्य का पतन तय है."
इस बीच, सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस ने कहा कि इस घटना के सिलसिले में अमित डे और असित डे नाम के दो लोगों के खिलाफ पहले ही FIR दर्ज कर ली गई है. उन्होंने दावा किया कि यह घटना दुकान मालिक के साथ आपसी झगड़े या गुस्से का नतीजा थी. पुलिस जल्द ही इस मामले के बारे में मीडिया को पूरी जानकारी देगी.
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