ऑस्ट्रेलिया में पत्नी और बेटियां, डेढ़ साल से घर में अकेले बंद पड़े थे करनाल के डॉक्टर हरिकृष्ण, गंदगी के बीच चमड़ी से चिपक गए थे कपड़े
करनाल में 60 साल तक जरूरतमंदों की मुफ्त में सेवा करने वाले होम्योपैथिक डॉक्टर हरिकृष्ण आज नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं.

Published : February 25, 2026 at 5:53 PM IST
करनालः हरियाणा सहित भारत के अलग-अलग राज्यों से हर साल हजारों-हजार की संख्या में युवा विदेश जाते हैं. कुछ लोग अभी विदेश जाने का प्रयास कर रहे हैं. वो विदेश में जाकर अच्छा पैसा कमाना चाहते हैं, लेकिन वहां की चकाचौंध भरी जिंदगी को छोड़कर वापस अपने वतन नहीं आना चाहते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे भी हैं जो विदेश जाने के बाद अपने माता-पिता की भारत में सुध भी नहीं लेते.
82 साल के हो चुके हैं डॉ. हरिकृष्णः विदेशों में रहने वाले युवा अपनी जिंदगी तो काफी ऐशो-आराम में जीते हैं, लेकिन उनके बुजुर्ग माता-पिता उनसे बात करने के लिए और उनसे मिलने के लिए तड़पते रहते हैं. ऐसे ही एक दुख भरी सच्ची घटना करनाल से सामने आई है, जहां 82 वर्षीय बुजुर्ग डॉ. हरिकृष्ण अपने घर पर बहुत ही बुरी स्थिति में मिले हैं. उनको एक वृद्ध आश्रम के द्वारा रेस्क्यू किया गया है. उम्र और खराब सेहत के कारण बोलने में भी उन्हें दिक्कत होती है.
6 दिन पहले आश्रम के लोगों ने बाहर निकालाः डॉ. हरिकृष्ण की दो बेटियां हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में रहती है और वहां पर वेल सेटल हैं और उनकी पत्नी भी बीएसएनल में अच्छे पद से रिटायर होकर विदेश में ही रह रही है. लेकिन डॉक्टर पिछले 26 सालों से भारत में रह रहे हैं, उनकी हालत अब ऐसी हो चुकी है कि वे चलने फिरने में भी असमर्थ हैं. इनको 6 दिन पहले अपना आशियाना आश्रम के द्वारा वहां से निकाल कर अब आश्रम में लाया गया है, और अब काफी अच्छे तरीके से रखा जा रहा है.

26 साल से परिवार से अलग रह रहे हैंः डॉ. हरिकृष्ण ने बातचीत में कहा कि उनके परिवार में उनकी दो बेटी और पत्नी है, जो बीते कई सालों से ऑस्ट्रेलिया में रह रही हैं. उनकी दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है. पत्नी और दोनों बेटियां कई सालों से ऑस्ट्रेलिया में हैं. वे खुद होम्योपैथिक डॉक्टर हैं. अब उनकी उम्र 82 साल हो चुकी है. वे 26 सालों से बेटियों और पत्नी से अलग अकेले यहां रह रहे हैं. अब तो परिवार के कोई अन्य सदस्य भी मिलने नहीं आते हैं.

बीते डेढ़ साल से घर में थे बंद : अपना आशियाना आश्रम की सदस्य अनु मदान ने बताया कि "उनको सूचना मिली थी कि ये बुजुर्ग अपने घर में बीते डेढ़ साल से बंद हैं. जब इन्होंने वहां पर जाकर देखा तो उनकी स्थिति बहुत ही ज्यादा खराब थी. उनके शरीर पर कपड़े भी सड़ कर चमड़ी से चिपक गए थे.

अपने जमाने के वर्ल्ड क्लास डॉक्टर थेः अनु मदान ने कहा कि डॉ. हरिकृष्ण की गिनती भारत ही नहीं इंटरनेशनल लेवल पर अपने जमाने के बड़े होम्योपैथिक डॉक्टरों में होती रही है. इसके अलावा लाखों की संख्या में जरूरतमंदों का वे निःशुल्क इलाज कर चुके हैं. इसके अलावा सामाजिक संगठनों का भी सहयोग करते रहे हैं. पहले जहां डॉ. हरिकृष्ण नस देकर ही लोगों की बीमारी बता देते थे, लेकिन अब खुद वे बीमारी और लाचारी से जूझ रहे हैं.

बेटियों के आने की उम्मीद: अनु मदान ने बताया कि विदेशों में रह रही उनकी पत्नी और दोनों बेटियों से अभी संपर्क नहीं हो पाया है. बच्चों और परिवार के सदस्यों को चाहिए कि वे अपने बुजुर्ग का इस उम्र में ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि हमें उम्मीद है मीडिया में पिता की हालात की खबर आने के बाद शायद उनकी बेटियां या पत्नी डॉ. हरिकृष्ण से मिलने आ जाएं.
बीते कई सालों से एक ही कपड़े में थेः अपना आशियाना आश्रम के अंशुल ग्रोवर ने बताया कि काफी खराब हालात में डॉ. हरिकृष्ण को बाहर निकाला गया है. भगवान ऐसा किसी के साथ ना करे. उन्होंने बीते कई सालों से अपने कपड़े तक भी नहीं बदले हैं और ना ही खाने के लिए उनके पास कुछ अच्छी चीज थी. हालात ऐसे थे कि गंदगी के ऊपर ही वे बैठे रहते थे.

घर के अंदर कीड़े पड़ने जैसे भी हालात थेः डॉ. हरिकृष्ण के पास बदबू फैली हुई थी. गंदगी पड़ी हुई थी. कीड़े पड़ने जैसे भी हालात थे. अंशुल ग्रोवर ने कहा कि इस उम्र में किसी भी परिवार के सदस्यों को अपने से दूर नहीं करना चाहिए, क्योंकि वो उनको जन्म देकर पढ़ा-लिखा कर काबिल बना देते हैं. लेकिन जिस उम्र में उनको अपने परिवार की और बच्चों की जरूरत होती है, उस उम्र में ही उनको अलग-थलग छोड़ दिया जाता है.
अपने परिवार का सहारा बनेः डॉ. हरिकृष्ण की इस स्थिति से उन लाखों लोगों को भी सबक लेना चाहिए जो अपने बुजुर्ग माता-पिता को छोड़कर विदेश में रह रहे हैं और पीछे से उनका हाल-चाल भी नहीं जानते. डॉ. हरिकृष्ण का मामला बताता है कि हम भले ही कितने भी मॉर्डन हो जाए लेकिन ज़मीन से जुड़े अपने संस्कारों को ना भूलें और कभी अपने परिवार से इस कदर की दूरी ना बनाएं. याद रखें कि जैसा हम आज कर रहे हैं, भविष्य में हमारे साथ भी ऐसा हो सकता है.

