'बिहार से 6 महीने में 100 लड़कियां गायब..' NHRC पहुंचा मामला
मानवाधिकार अधिवक्ता सुबोध झा का आरोप है कि पिछले 6 महीने में बिहार के सीमावर्ती जिलों से 100 लड़कियां गायब हुईं. पढ़ें

Published : December 1, 2025 at 3:18 PM IST
मुजफ्फरपुर: बिहार के बॉर्डर इलाकों से लड़कियों के लापता होने का मामला सामने आया है. मानवाधिकार मामले के अधिवक्ता सुबोध झा का दावा है कि पिछले 6 महीने में 100 लड़कियां लापता हुईं. सुबोध झा ने राज्य और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में इसको लेकर याचिका दर्ज की है.
'100 लड़कियां गायब': सुबोध झा ने बताया कि अपने देश के अलावा नेपाल, चीन, ब्राजील, सऊदी अरब में करोड़ों रुपये में लड़कियों को बेचा जा रहा है. उन्होंने प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 6 माह में मोतिहारी से 100 लड़कियां गायब हुईं है. पूरे बिहार में यह आंकड़ा हजारों हो सकता है.
गायब लड़कियों के आंकड़ें: सुबोध झा के अनुसार जुलाई महीने में रक्सौल से 10, रामगढ़वा से 3, आदापुर से 4, अगस्त महीने में रक्सौल के भेलाही, कौड़ीहार सहित अन्य जगहों से कुल 18, सितंबर महीने में एक विवाहिता सहित 17, अक्टूबर में 15 और नवंबर में 15, कुल 83 लड़कियां गायब हुईं है.
"उत्तर बिहार में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करों का गैंग सक्रिय है. इस पूरे मामले को लेकर मानवाधिकार आयोग में गए हैं. मोतिहारी से सटे नेपाल के बॉर्डर से लड़कियों की तस्करी हो रही है. " -सुबोध कुमार झा, अधिवक्ता
5 साल से रिसर्च कर रहे अधिवक्ता: अधिवक्ता ने एक दैनिक अखबार में प्रकाशित खबर का हवाला देते हुए याचिका दायर की है. उन्होंने कहा कि पिछले 5 साल से वे इस मामले में पर रिसर्च कर रहे हैं. कई बार केंद्र सरकार को इस बारे में लिख चुके हैं कि देश की एजेंसी के माध्यम से इसकी जांच करायी जाए, लेकिन अब तक कोई फैसला नहीं लिया गया.
रिटायर्ड जज से जांच की मांग: अधिवक्ता सुबोध ने कहा कि बिहार पुलिस से यह मामला संभलने वाला नहीं है. हमने आयोग से मांग की है कि रिटायर्ड जज की निगरानी में इस पूरे मामले की जांच करायी जाए. आयोग ने याचिका को स्वीकार कर लिया है. एक सप्ताह में इस मामले में आगे की कार्यवाही शुरू हो जाएगी.

'नेपाल के रास्ते तस्करी': अधिवक्ता ने दावा किया कि सीमा क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय मानव तस्कर लड़कियों को बहला-फुसलाकर नेपाल के रास्ते विदेशों तक पहुंचा देते हैं. इन लड़कियों का इस्तेमाल नशा तस्करी, फर्जी शादी, बच्चा पैदा कराने, जेनरेशन चेंज, बॉडी पार्ट्स की खरीद-फरोख्त, सेक्स ट्रैफिकिंग जैसे गंभीर और अमानवीय गतिविधियों में किया जा रहा है.
'कई देशों से जुड़ें हैं तार': उन्होंने यह भी बताया कि तस्करी का नेटवर्क नेपाल, चीन, ब्राज़ील, सऊदी अरब, गल्फ देशों और अर्जेंटीना तक फैला हुआ है. हाल ही में रेस्क्यू की गई पीड़िताओं में एक ही परिवार की चार बेटियां भी शामिल थीं, जबकि कई लड़कियां अब भी लापता हैं. इससे बॉर्डर के गांवों में दहशत व्याप्त है.
क्या बोले मुजफ्फरपुर ग्रामीण एसपी? : इस मामले पर मुजफ्फरपुर ग्रामीण एसपी राजेश सिंह ने कहा कि, ''बिहार के सीमावर्ती इलाकों में लड़कियों के गायब होने के मामले में हम लगातार कार्रवाई करते है. ऐसे मामले को पुलिस गंभीरता से लेती है. सूचना पर जानकारी मुख्यालय तक भेजी जाती है, जहां से लगातार मॉनिटरिंग भी की जाती है."
तस्करी के कई मामले सामने आ चुके है : लड़कियों की तस्करी के मामले पहले भी उजागर होते रहे हैं. पुलिस ने मामले में सख्त कार्रवाई भी की है. मामले में मानव तस्करों को जेल भी भेजा गया है. यह नेटवर्क बिहार के नेपाल तक फैला हुआ है. आइये नजर डालते हैं मानव तस्करी के मामलों पर.
02 मई 2025, मोतिहारी : इसी साल मई महीने में बिहार के वैशाली जिले से मानव तस्करी का मामला सामने आया था. इलाके की एक किशोरी (16 वर्ष) को तस्कर नेपाल ले जा रहे थे. पूछताछ के बाद मोतिहारी के बलथर थाना क्षेत्र में भारत-नेपाल बॉर्डर पर एसएसबी की टीम ने तस्कर के साथ लड़की को पकड़ा था. एसएसबी 47वीं बटालियन के अधिकारी ने बताया था कि जांच के बाद लड़की को मोतिहारी बालिका सुधार गृह भेज दिया गया.
21 जुलाई 2025, मोतिहारी : पूर्वी चंपारण में एसएसबी की टीम ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था. तस्करों के पास से एक किशोरी को बरामद किया था. पहले इस गिरोह के लोग लड़कियों को अपने प्रेम जाल में फंसाते थे, और फिर उन्हें मानव तस्करों को हाथों बेच देते थे.
13 अगस्त 2025, मोतिहारी : इसी तरह का मोतिहारी से मानव तस्करी का एक और मामला सामने आया था. जब गुप्त सूचना पर SSB 47वीं बटालियन द्वारा तीन तस्करों को गिरफ्तार किया गया था. टीम ने इन तस्करों के पास से एक नाबालिग को रेस्क्यू किया था. एसएसबी इंस्पेक्टर विकास कुमार ने बताया था कि तस्कर लड़की को नेपाल (बीरगंज) ले जा रहे थे.
18 अगस्त 2025, मोतिहारी : मोतिहारी के रक्सौल बॉर्डर पर एसएसबी टीन ने चार मानव तस्करों को एक लड़की के साथ पकड़ा था. लड़की को शादी का झांसा देकर नेपाल ले जाया जा रहा था. लड़की सीतामढ़ी जिले की बेलसंड की रहने वाली थी. SSB की टीम ने गिरफ्तार मानव तस्करों को हरैया थाना पुलिस को सौंप दिया था. जिसके बाद पुलिस आरोपियों का नेटवर्क खंगाल में जुट गई.
27 अगस्त 2025, मोतिहारी : मोतिहारी के रक्सौल भारत-नेपाल मैत्री पुल के पास एसएसबी जवानों ने एक लड़की और लड़के को शक के आधार पर हिरासत में लिया. पूछताछ में पता चला कि युवक सीतामढ़ी की लड़की को प्रेम जाल में फंसा कर नेपाल ले जा रहा था, जहां उसे बेचने की तैयारी थी. लड़का मोतिहारी का रहने वाला था.
भारत में लड़कियों की तस्करी की खौफनाक सच्चाई : एनसीआरबी यानी राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड्स ब्यूरो 2022 के आंकड़ों के मुताबिक़, देश में औसतन 6 केस दर्ज हो रहे हैं. रोजाना 345 लड़कियां गायब होती है. देश में 2020 से 2022 के बीच 16,585 शिकार लोगों में महिलाओं की संख्या 10,453 रहीं.
क्या कहते हैं मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स के आंकड़ें?: केन्द्र सरकार के आंकड़ों के अनुसार, बिहार से साल 2019 में 9839 लड़कियां और 4213 महिलाएं गायब हुईं. साल 2021 में 9808 लड़कियां और 5061 महिलाएं तस्करी का शिकार हुईं. जबकि साल 2022 में 5,204 लड़किया गायब हुईं. NCRB 2022 के आंकड़ों के अनुसार, बिहार मानव तस्करी में देश में तीसरे स्थान (260 मामले) पर था.
क्या कहते हैं अधिकारी? : एडीजी कमजोर वर्ग अमित कुमार जैन ने ईटीवी भारत से जानकारी साझा करते हुए बताया कि नया सवेरा अभियान के तहत पिछले कुछ महीनों में नाबालिग बच्चों, महिलाओं को तस्करों के चंगुल से मुक्त कराया गया है.
''अगस्त महीने में बिहार पुलिस ने नया सवेरा अभियान चलाकर 1016 नाबालिग बच्चों-बच्चियों और महिलाओं को मुक्त कराया. संगठित गिरोह का भी खुलासा हुआ. इस दौरान 197 पुरुष और 53 महिला तस्कर भी पकड़े गए. सभी के नेटवर्क को खंगाला जा रहा है." - अमित कुमार जैन, कमजोर वर्ग एडीजी
मानव तस्करी पर कैसे लगे रोक? : बिहार पुलिस का मानना है कि जब तक लोगों में जागरूकता नहीं आएगी, तब तक मानव तस्करी के मामलों पर पूरी तरह रोक लगाना संभव नहीं है. अमित कुमार जैन के अनुसार, राज्य में 855 थानों में महिला हेल्प डेस्क लोगों की मदद कर रही है. लेकिन इस कोशिश में सामाजिक संगठन और आम नागरिक को भी मिलकर काम करना होगा.
बिहार पुलिस का 'ऑपरेशन नया सवेरा' : बिहार पुलिस ने मानव तस्करी के खिलाफ 31 जुलाई से 14 अगस्त तक ऑपरेशन नया सवेरा अभियान लांच किया था. इसका मकसद मानव तस्करी और देह व्यापार को रोकना है. पुलिस कमजोर वर्ग के अभियान के तहत जिला स्तर पर कार्यबल का गठन किया गया. सीमावर्ती जिलों में एसएसबी की मदद की मदद ली जाती है. वहीं AHTTF यानी मानव तस्करी विरोधी कार्यबल का गठन किया गया है, जो गुप्त सूचना पर रेड और बचाव अभियान संचालित करते हैं.
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