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हिमाचल में छठी कक्षा की किताब में किन्नौर जिला ट्रांसजेंडर, जिला मंडी मार्केट, यहां देखिए ये कारनामा

HPBOSE एक बार फिर से सवालों के घेरे में हैं. दरअसल, छठी क्लास में पढ़ाए जाने वाली किताब में गलतियों की भरमार है.

हिमाचल बोर्ड के स्कूल की किताब में त्रुटियां
हिमाचल बोर्ड के स्कूल की किताब में त्रुटियां (ETV Bharat)
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By ETV Bharat Himachal Pradesh Team

Published : May 5, 2026 at 9:30 PM IST

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Updated : May 5, 2026 at 10:26 PM IST

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शिमला: राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर साक्षरता को लेकर हिमाचल का नाम चमकते अक्षरों में लिया जाता है, लेकिन यहां के शिक्षा मंदिरों में एक ऐसी किताब छपकर आई है, जिससे राज्य की सारी उपलब्धियों पर पानी फिरता नजर आ रहा है. वास्तव में छठी कक्षा की किताब में ऐसी अक्षम्य त्रुटियां छपी हैं, जिसे केवल और केवल शर्मनाक कहा जा सकता है. एआई और चैट जीपीटी के इस युग में मुद्रित शब्द को लेकर इतनी बड़ी लापरवाही सामने आई है.

हुआ यूं है कि हिमाचल की लोक संस्कृति और योग पुस्तक के अंग्रेजी संस्करण में जिला किन्नौर को ट्रांसजेंडर छाप दिया गया है. यही नहीं, मंडी जिला को मार्केट लिखा गया है. स्पष्ट है कि किसी ऐप का प्रयोग किया गया है, जिसने किन्नौर को किन्नर समझ लिया और उसका अनुवाद ट्रांसजेंडर कर दिया. इसी तरह मंडी शब्द को बाजार समझकर मार्केट लिख दिया गया.

किताब में किन्नौर जिला को ट्रांसजेंडर और मंडी जिला को मार्केट लिखा गया
किताब में किन्नौर जिला को ट्रांसजेंडर और मंडी जिला को मार्केट लिखा गया (ETV Bharat)

पीड़ाजनक दुख इस बात का है कि किताब छप गई और बाजार में आ गई, लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी के कान पर जूं तक नहीं रेंगी. हिमाचल के विख्यात शब्द शिल्पी, कवि-संपादक स्व. मधुकर भारती कहा करते थे-मुद्रित शब्द पर संकट की बात करने वालों को ये समझना चाहिए कि किताबें छपना कभी बंद नहीं होंगी और शब्द मुद्रित होकर अपनी शाश्वत सत्ता का परिचय देते रहेंगे. लेकिन यहां हिमाचल के शिक्षा विभाग में ऐसी किताब छपी है, जिसने मुद्रित शब्द (प्रिंटिड वर्ड) को गंभीर लापरवाही के कारण जगहंसाई का पात्र बना दिया है.

हिमाचल की लोक संस्कृति और योग पुस्तक
हिमाचल की लोक संस्कृति और योग पुस्तक (ETV Bharat)

दरअसल, छठी कक्षा की पुस्तक “हिमाचल की लोक संस्कृति और योग” के अंग्रेजी माध्यम संस्करण में ऐसी गंभीर त्रुटियां सामने आई हैं, जिन्होंने पूरे शिक्षा तंत्र को कठघरे में खड़ा कर दिया है. इस पुस्तक में जनजातीय जिले 'किन्नौर' का अनुवाद 'ट्रांसजेंडर (किन्नर)' के रूप में किया गया है. यह केवल एक शब्द का हेरफेर नहीं है, बल्कि एक पूरे जिले की पहचान और गरिमा पर चोट है. शिक्षा बोर्ड की इस पुस्तक को देखकर ऐसा लगता है जैसे इसे बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप या विशेषज्ञ की जांच के या पुराने AI टूल से अनुवाद कर बाजार में उतार दिया गया हो.

किन्नौर बना ट्रांसजेंडर: पुस्तक के पृष्ठ संख्या 16 और 37 पर जिला किन्नौर का अनुवाद 'ट्रांसजेंडर' कर दिया गया है.

जिलों का गठन या मजाक?

पृष्ठ 16 पर जिलों के गठन को लेकर पूछे गए एक प्रश्न के विकल्पों में बिलासपुर, कांगड़ा, कुल्लू और डलहौजी के साथ-साथ 'ट्रांसजेंडर' शब्द लिखा गया है. जबकि इसी पुस्तक के हिंदी संस्करण में वहां 'किन्नौर' शब्द का सही उल्लेख है. वहीं, आंकड़ों की गलतियां तो और भी भयानक हैं. पृष्ठ 17 पर वर्ष 1972 को '19712' छाप दिया गया है. क्या शिक्षा विभाग यह मान चुका है कि बच्चे यह रट लेंगे कि हिमाचल का इतिहास 19 हजार साल आगे पहुंच गया है?

HPBOSE की छठी क्लास की किताब में गलतियों का भरमार
HPBOSE की छठी क्लास की किताब में गलतियों का भरमार (ETV Bharat)

पोर्टमोर स्कूल की प्रिंसिपल ने कहा- "यह एक बिग एरर है"

राजधानी शिमला के प्रतिष्ठित गवर्नमेंट मॉडल गर्ल्स सीनियर सेकेंडरी स्कूल, पोर्टमोर की प्रिंसिपल राखी पंडित ने इस मामले पर गहरा रोष व्यक्त किया है. उन्होंने इसे विभागीय लापरवाही का चरम स्तर बताया. प्रिंसिपल राखी पंडित ने कहा, 'यह केवल एक सामान्य प्रिंटिंग एरर नहीं है, बल्कि यह एक 'बिग एरर' (बड़ी त्रुटि) है. शिक्षा क्षेत्र में शब्दों का चयन बहुत सोच-समझकर किया जाता है. जब बच्चे के हाथ में ऐसी पुस्तक जाती है, तो वह गलत जानकारी को ही सत्य मान लेता है. किन्नौर को 'ट्रांसजेंडर' लिखना और ऐतिहासिक वर्षों को गलत छापना विभाग की साख पर बड़ा सवाल है'.

भाषाविद नवनीत शर्मा ने इस मामले पर कहा, 'किसी जनजातीय जिले के नाम को 'ट्रांसजेंडर' लिख देना टाइपिंग की गलती तो है ही, जब आप अनुवाद के लिए केवल तकनीक (Google Translate या AI) पर निर्भर हो जाते हैं और उसमें मानवीय दिमाग का इस्तेमाल नहीं करते, तो ऐसे ही 'हास्यास्पद' और 'अपमानजनक' परिणाम सामने आते हैं. यह भूगोल और इतिहास दोनों का अपमान है'.

किन्नौर जिला अपनी विशिष्ट संस्कृति और परंपराओं के लिए जाना जाता है. किन्नौर निवासी पायल नेगी जो HPU से MBA कर रही है. उनका कहना है कि 'किन्नौर' शब्द की अपनी एक गरिमा है. इसे 'किन्नर' (ट्रांसजेंडर) शब्द के साथ गलत तरीके से जोड़कर पेश करना न केवल गलत है, बल्कि संवेदनशील समुदाय की भावनाओं को आहत करने वाला है. पूर्व में भी इस तरह के शब्दों के गलत प्रयोग पर प्रदेश में भारी विरोध हो चुका है.

छठी की किताब में गलतियों की भरमार
छठी की किताब में गलतियों की भरमार (ETV Bharat)

हिमाचल प्रदेश को 'शिक्षा का हब' कहा जाता है, लेकिन अगर सरकारी पुस्तकों का स्तर यह रहा तो आने वाली पीढ़ी को हम क्या सिखाएंगे? 1972 को 19712 पढ़ाना और किन्नौर को ट्रांसजेंडर बताना कोई छोटी चूक नहीं है. यह प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के चेहरे पर वो कालिख है, जिसे केवल 'भूल सुधार' का नोटिस चिपकाकर नहीं धोया जा सकता. सरकार और शिक्षा विभाग को इस 'मुंहतोड़ जवाब' की जरूरत है ताकि भविष्य में बच्चों के ज्ञान के साथ ऐसा खिलवाड़ न हो.

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Last Updated : May 5, 2026 at 10:26 PM IST