इंडिया की 'बिल्डर नेवी'; दुनिया में धाक जमाने की तैयारी, 60 से अधिक जंगी जहाजों का चल रहा निर्माण, क्या अमेरिका-चीन भी रह जाएंगे पीछे?
विशाखापट्टनम में दुनिया के 74 देश कर रहे अभ्यास, नेवी में सैनिकों की संख्या के लिहाज से ग्लोबल रैंकिंग में चौथे नंबर पर है भारत.

Published : February 22, 2026 at 2:16 PM IST
हैदराबाद : देश का 95% से अधिक व्यापार समुद्री रास्ते से होता है. इसकी सुरक्षा के लिए भारतीय नौसेना (Indian Navy) का शक्तिशाली बने रहना बेहद जरूरी है. सरकार का भी इस पर फोकस है. कई मोर्चे पर नौसेना ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है. दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब दिया है. मौजूदा समय नेवी के पास एक से बढ़कर एक विध्वंसक युद्धपोत हैं.
समय-समय पर अभ्यास के जरिए इनकी क्षमता को भी परखा जाता है. आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम में 15 फरवरी से इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) और मिलन (MILAN) एक्सरसाइज कराई जा रही है. यह कार्यक्रम 25 फरवरी तक चलता रहेगा. हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) भी कार्यक्रम का हिस्सा है. अभ्यास में US और रूस समेत 74 देशों की नेवी हिस्सा ले रहीं हैं.
18 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने आईएनएस सुमेधा में सवार होकर भारतीय जंगी जहाजों के बेड़े का निरीक्षण किया था. भारतीय नौसेना के युद्धपोत और सैनिक भारत की 7500 किमी से अधिक लंबी तटरेखा की निगरानी करते हैं. सैनिकों की संख्या के लिहाज से भारतीय नौसेना दुनिया में चौथे स्थान पर है. भारत सरकार के अनुसार विजन 2047 के तहत इंडियन नेवी बिल्डर्स नेवी बनने की राह पर है. यानी नौसेना पूरी तरह आत्मनिर्भरता की ओर है.
भारतीय नौसेना का इतिहास क्या है?, उपलब्धियां और चुनौतियां क्या हैं?, दुनिया की टॉप 10 नेवी कौन सी हैं, कितने युद्धपोत है?. ईटीवी भारत की इस Analysis में इन सभी सवालों के जवाब जानेंगे. ये जानकारियां indiannavy.gov.in, Maritime Heritage-Join Indian Navy, Government of India, प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो (PIB), mod.gov.in, globalfirepower.com, Global Naval Powers Ranking आदि से मिले डेटा पर आधारित होंगी.
पहले विशाखापट्टनम में हो रहे अभ्यास के बारे में जानिए : विशाखापट्टनम में हो रहे इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू और मिलन 2026 में अमेरिका, रूस समेत 74 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रहीं हैं. INS सुदर्शनी ने ओमान और थाईलैंड का गुडविल विजिट किया. 18 फरवरी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने युद्धपोतों की क्षमता को परखा. दुनिया के सबसे बड़े मल्टीलैटरल नौसैनिक अभ्यासों में से एक मिलन में भारतीय नौसेना ने अपनी क्षमताओं का बेहतरीन प्रदर्शन किया. जवानों ने हेलीकॉप्टर से करतब दिखाए. भारतीय नौसेना ने 15 फरवरी को पूर्वी नौसेना कमान में मिलन गांव का उद्घाटन भी किया.
भारतीय नौसेना ने कब किया था पहला अभ्यास? : साल 2025 में पीआईबी की ओर से जारी प्रेस रिलीज के अनुसार भारत की अंतरराष्ट्रीय नौसेना समीक्षा (आईएफआर) की परंपरा साल 2001 में शुरू हुई थी. पहला कार्यक्रम मुंबई में हुआ था. इसमें 20 देशों की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया था. इसके बाद दूसरा कार्यक्रम साल 2016 में हुआ था. इस दौरान इस कार्यक्रम को नई बुलंदी मिली. दुनियाभर की नौसेनाओं ने इसमें भागीदारी की.
इसी प्रकार साल 1995 में अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के पोर्ट ब्लेयर (अब विजयपुरम) में मिलन अभ्यास की शुरुआत हुई थी. उस दौरान महज 9 देशों की नौसेनाओं ने इसमें हिस्सा लिया था. इसमें इंडोनेशिया, सिंगापुर, श्रीलंका और थाईलैंड आदि देश शामिल थे. यह अभ्यास 2001, 2005, 2016 और 2020 को छोड़कर द्विवार्षिक रूप से आयोजित किया जाता रहा है. साल 2024 तक यह अभ्यास बड़े कार्यक्रम में तब्दील हो गया. यह दुनियाभर की नौसेनाओं को कनेक्ट करता है.

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भारतीय नौसेना का इतिहास : ईस्ट इंडिया कंपनी 31 दिसंबर 1600 को इंग्लैंड में बनी. लगभग 1740 में फ्रांसीसी भारतीय समुद्री सीमा में पहुंचे. मॉरिशस, सूरत, पांडिचेरी में बेस बनाया. इसके बाद कराईकल, माहे, चंद्रनगर आदि जगहों तक फैल गए. शिवाजी महाराज ने विजयदुर्ग, सिंधुदुर्ग जैसे किले बनवाए. इसके अलावा 500 से अधिक जहाजों की नेवी बनवाई. पुर्तगालियों के खिलाफ सुरक्षा को काफी मजूबत किया. इसके बाद 1680 में उनकी मौत के बाद इस व्यवस्था में गिरावट आ गई.
ईस्ट इंडिया कंपनी की नेवी 1 मई 1830 को क्राउन के अंडर आ गई. इसका नाम बदलकर इंडियन नेवी कर दिया गया. 1858 में यह 'हर मैजेस्टी' (महामहिम/महारानी) की इंडियन नेवी बन गई. इसके बाद 1863 में बॉम्बे और बंगाल मरीन में बंट गई. फिर 1892 में यह रॉयल इंडियन मरीन बन गई. आजादी के दौरान रॉयल इंडियन नेवी को भारत और पाकिस्तान के बीच बांट दिया गया. भारत ने दो-तिहाई हिस्सा अपने पास रखा. 26 जनवरी 1950 को इसका नाम बदलकर फिर से इंडियन नेवी कर दिया गया. 1958 में 22 अप्रैल को वाइस एडमिरल आरडी. कटारी पहले भारतीय नौसेना प्रमुख बने.
1971 के युद्ध में भारतीय नौसेना की भूमिका : 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ लड़ाई में भारतीय नौसेना ने अहम भूमिका निभाई थी. नौसेना ने पाकिस्तान के पूर्वी और पश्चिमी तटों पर नाकेबंदी कर दी थी. इससे उसकी सप्लाई लाइनें ठप हो गईं थीं. रियर एडमिरल कृष्णन के नेतृत्व में ईस्टर्न फ्लीट ने बंदरगाहों पर हमला किया. इससे कराची नेवल बेस को भारी नुकसान हुआ. नौसेना ने शरणार्थियों को निकालने और सैनिकों की लाने-जाने में अहम रोल अदा किया. इस युद्ध में भारत की निर्णायक जीत हुई थी.
दूसरे विश्व युद्ध (1939-1945) के दौरान रॉयल इंडियन मरीन ने अपनी भूमिका अदा की थी. उस दौरान 8 से अधिक युद्धपोत थे. इसके जरिए मित्र देशों को उनके ऑपरेशन में मदद पहुंचाई जाती थी. देश की आजादी के समय नेवी में 32 जहाज थे. इसके अलावा 11 हजार सैनिकों की तैनाती थी.
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कब मनाया गया पहला नेवी डे और नेवी वीक? : रॉयल इंडियन नेवी ने 1 दिसंबर 1945 को बॉम्बे (अब मुंबई) और कराची में नौसेना दिवस मनाया था. इसके बाद 1972 तक नेवी डे 15 दिसंबर तक मनाया जाता रहा. नेवी वीक भी इसी तारीख के आसपास मनाया जाता था. 1972 में इसे 4 दिसंबर कर दिया गया. अब हर साल 1 से 7 दिसंबर तक नेवी वीक मनाया जाता है.
साल 2000 के बाद भारतीय नेवी की उपलब्धियां
स्वदेशीकरण अभियान (2015–2030) : युद्धपोत प्रणालियों और उपकरणों में आत्मनिर्भरता के लिए भारतीय नौसेना ने स्वदेशीकरण योजना (INIP) की शुरुआत की.
फ्लीट अवार्ड्स (2017) : आईएनएस सतपुरा ने पूर्वी नौसेना कमान का प्रदर्शन कर 'सर्वश्रेष्ठ जहाज' ट्रॉफी जीती.
इंटरनेशनल ट्रेनिंग (2019) : INS द्रोणाचार्य में गनरी इंस्ट्रक्टर कोर्स ने 8 दूसरे देशों के नाविकों को ट्रेनिंग दी. इससे भारत की नौसेना की कूटनीति मजबूत हुई.
ऑपरेशन समुद्र सेतु (2020) : भारतीय नौसेना ने COVID-19 के दौरान INS जलाश्व, ऐरावत, शार्दुल और मगर जैसे जहाजों का उपयोग करके 23 हजार की दूरी तय करके 3992 नागरिकों को निकाला.
ऑपरेशन सागर बंधु (2025) : 2025 में आए चक्रवात दितवाह के दौरान श्रीलंका में कनेक्टिविटी ठीक करने के लिए 2500 से ज्यादा लोगों को निकाला गया. 1,058 टन राहत सामग्री पहुंचाई गई, जबकि IAF ने विदेशी नागरिकों समेत 264 बचे हुए लोगों को निकाला.
सम्मान (2025) : नेवल अलंकरण समारोह में 51 कर्मियों को वीरता और विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया.
ग्लोबल कमांड रोल (2026) : नेवी ने कंबाइंड टास्क फोर्स 154 की कमान संभाली. इससे मल्टीनेशनल मैरीटाइम सिक्योरिटी में भारत की लीडरशिप का पता चला.
नेवी में कितने सैनिक तैनात, कितने की है जरूरत? : रक्षा विभाग की वेबसाइट के अनुसार भारतीय नेवी में मौजूदा समय करीब एक लाख कर्मी-अधिकारी तैनात हैं. इनमें 69,000 यूनिफॉर्म वाले स्टाफ शामिल हैं. हालांकि करीब 21% अफसर, 18% नाविक और लगभग 18 % सिविलियन स्टाफ (असैन्य कर्मचारी/नागरिक कर्मचारी) की जरूरत है. इसके अलावा मेंटेनेंस और तकनीकी कर्मचारियों की भी कमी है.
नेवी इकोनॉमिक जोन, मछली पालन, गहरे समुद्र के हितों और बंदरगाहों की सुरक्षा करती है. ये सभी कार्य नई दिल्ली के नेवी हेडक्वार्टर की निगरानी में किए जाते हैं. पश्चिमी नौसेना कमान का मुख्यालय मुंबई में है. पूर्वी नौसेना कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में है. जबकि दक्षिणी नौसेना कमान का मुख्यालय कोच्चि में है.

विश्व में भारतीय नौसेना की रैंकिंग : वर्ल्ड डायरेक्टरी ऑफ मॉडर्न मिलिट्री वॉरशिप्स (WDMMW) और ग्लोबल फायरपावर (GFP) जैसी डिफेंस डायरेक्टरी की साल 2025-26 की रिपोर्ट के अनुसार इंडियन नेवी की कुल फ्लीट टनेज (टन भार) 593,603 है. इसके आधार पर भारतीय नेवी दुनिया में चौथे स्थान पर है. इसके अलावा फ्लीट साइज के मामले में 5th रैंक पर है. भारत विश्व के टॉप 10 देशों में स्थान बनाए हुए हैं.
हालांकि अभी भी यह US, चीन, रूस, जापान और यूके से पीछे है. इंडियन नेवी खुद को लड़ाई के लिए तैयार, एकजुट और आत्मनिर्भर थ्री-डायमेंशनल फोर्स बताती है. यह समुद्र की सतह के ऊपर और नीचे काम करने में सक्षम है.
साल 2025 तक नौसेना एयरक्राफ्ट कैरियर, डिस्ट्रॉयर, फ्रिगेट, सबमरीन और मॉडर्न वॉरशिप के साथ काफी मजबूत है. ये भारत के समुद्री दबदबे को सुरक्षित करने में सहायक हैं. कई युद्धपोतों में 80% तक स्वदेशी सामानों का इस्तेमाल किया गया है. INS विक्रांत, INS अरिहंत और कोलकाता-क्लास डिस्ट्रॉयर अपनी ताकत के लिए जाने जाते हैं. न्यूक्लियर डिटरेंस (परमाणु निवारण) के भी काम आते हैं. ये समुद्र में भारत की रक्षा रणनीति की रीढ़ हैं.
ग्लोबल फायर पावर डॉट कॉम के अनुसार भारत के पास 2 विमान वाहक (Aircraft Carrier) हैं. यहां से लड़ाकू विमान उड़ान भर सकते हैं. विमान वाहक चलते-फिरते हवाई अड्डे का एक रूप है. इसमें देश की रैंकिंग 3 है. नौसेना में आधिकारिक रूप से एक भी हेलीकॉप्टर वाहक (Helicopter Carriers) नहीं है. इसमें देश की रैंकिंग 145 है. नौसेना में 18 पनडुब्बियां हैं. इसमें देश की रैंक 7 है. इसी तरह विध्वंसकों (Destroyers) की संख्या 13 है. इसके आधार पर रैंकिंग 5 है. फ्रिगेट (मध्यम आकार का तेज गति वाला बहुमुखी युद्धपोत) की संख्या 18 है. इनमें देश की रैंकिंग 3 है.
कोरवेट्स की संख्या 21 है. इनमें भारत की रैंकिंग 5 है. ये छोटे, तेज और अत्यधिक फुर्तीले युद्धपोत होते हैं. गश्ती पोतों की संख्या 146 है. इनमें नौसेना की रैंकिंग 7 है. देश में कोई माइन युद्ध पोत नहीं है. इसमें भारत की रैंकिंग 145 है. माइन युद्ध पोत (Mine Countermeasure Vessels - MCMV) विशेष नौसैनिक जहाज होते हैं. ये समुद्र के नीचे बारूदी सुरंगों का पता लगाते हैं. आगे के लिए रास्ता साफ करते हैं.
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आगामी वर्षों में बढ़ेगी नेवी की ताकत : भारत सरकार के इंडियन नेवी विजन 2047 के अनुसार इंडियन नेवी की ताकत स्वदेशीकरण, मॉड्यूलर शिपबिल्डिंग, एडवांस्ड एविएशन और न्यूक्लियर सबमरीन प्रोग्राम के जरिए बढ़ेगी. नेवी सतह, सतह के नीचे और हवा, तीनों क्षेत्रों में अपनी बादशाहत कामय रखने पर जोर देती है. शिपबिल्डिंग, एविएशन और टेक्नोलॉजी में नेवी आत्मनिर्भरता की ओर आगे बढ़ रही है. अपनी क्षमताओं को बढ़ाकर भारत यूएस और चीन को भी पीछे छोड़ सकता है.
भारत खरीदने वाली नेवी से अब बिल्डर नेवी बन चुका है. भारतीय शिपयार्ड में 60 से ज्यादा जंगी जहाज (warship) बन रहे हैं. इनमें 51 बड़े जहाज शामिल हैं. इनकी कीमत लगभग 90,000 करोड़ है. साल 2014 से भारतीय शिपयार्ड ने 40 से ज्यादा स्वदेशी वॉरशिप और सबमरीन डिलीवर की हैं. साल 2025 में 100वां और 101वां स्वदेशी वॉरशिप (INS माहे, INS उदयगिरी और INS हिमगिरी) भी नौसेना का हिस्सा बने.
पनडुब्बी रोधी युद्धपोत नेवी में शामिल, कई जहाज लांच : नौसेना में 8 पनडुब्बी रोधी युद्धपोत (ASW SWC) शामिल किए जा रहे हैं. जहाज यार्ड 3034 (अजय) को साल 2025 में 21 जुलाई को कोलकाता में लांच किया गया था. इस जहाज को गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (GRSE) की ओर से बनाया गया है. यह स्वदेशी है. मेसर्स एलएंडटी, कट्टुपल्ली (चेन्नई) में निर्माणाधीन तीन कैडेट प्रशिक्षण जहाजों में से पहला यार्ड 18003 (कृष्णा) हाल ही में 16 फरवरी को लांच किया गया.
इसी तरह आईएनएस अर्नाला (जून 2025), आईएनएस एंड्रोथ (अक्टूबर 2025) और आईएनएस माहे (24 नवंबर 2025) भी नेवी में शामिल हो चुके हैं. आईएनएस एंड्रोथ वॉरशिप को 80% से अधिक स्वदेशी सामानों से तैयार किया गया है. आईएनएस संध्याक (2024), आईएनएस निर्देशक (2024), आईएनएस इक्षक (2025), आईएनएस संशोधनक निर्माणाधीन हैं. प्रोजेक्ट-75 सबमरीन के तहत INS वाग्शीर जनवरी 2025 में नेवी में शामिल किया गया.
बढ़ेगी इंडियन नेवी की ताकत, स्वदेशी पर जोर : देश में नियमित तौर पर नौसेना के बेड़े में स्वदेशी वॉरशिप्स शामिल हो रहे हैं. साल 2025 में करीब हर 40 दिन में किसी न किसी जंगी जहाज को नेवी में स्थान दिया गया. अहम बात ये है कि साल 2030 तक नौसेना में सभी फ्रिगेट (मध्यम आकार का तेज और बहुउद्देश्यीय युद्धपोत) शामिल कर लिए जाएंगे. इसके अलावा वर्तमान समय में चल रहे सभी सबमरीन प्रोजेक्ट भी पूरे हो जाएंगे.
सरकार का लक्ष्य है कि साल 2047 तक नेवी में 200 से ज्यादा शिप फ्लीट (युद्धपोतों, पनडुब्बियों और सहायक जहाजों का एक प्रमुख परिचालन समूह) हो. यह पूरी तरह से स्वदेशी हो. ऐसे होने पर समुद्र में भारतीय नौसेना की ताकत और बढ़ जाएगी.
अब दुनिया की टॉप 10 नेवी और उनकी खासियत के बारे में जानेंगे
संयुक्त राज्य नौसेना (USN) : यूएस (अमेरिका) की नेवी की वैश्विक पहुंच सबसे ज्यादा है. 11 न्यूक्लियर पावर वाले एयरक्राफ्ट कैरियर हैं. बेजोड़ कैरियर स्ट्राइक ग्रुप है. एडवांस्ड न्यूक्लियर सबमरीन (परमाणु पनडुब्बी), ग्लोबल लॉजिस्टिक्स है. यानी माल को पहुंचाने का जरिया भी हैं. इस देश की नेवी वैश्विक रैंकिंग में नंबर 1 है.

पीपुल्स लिबरेशन आर्मी नेवी (चीन) : PLAN नेवी का तेजी से विस्तार हो रहा है. जहाजों की संख्या (841) के हिसाब से यह सबसे बड़ा बेड़ा है. एंटी-एक्सेस/एरिया डिनायल (A2/AD) पर चीन की नेवी का ज्यादा ध्यान है. A2/AD एक सैन्य रणनीति है. यह दुश्मन को किसी क्षेत्र में प्रवेश से रोकता है. नेवी में कई विध्वंसक हैं. ग्लोबल रैंकिंग में यह दूसरे स्थान पर है.
रूसी नौसेना (VMF) : रूसी नौसेना में न्यूक्लियर सबमरीन हैं. यह दुनिया में तीसरे स्थान पर है. किरोव-क्लास बैटलक्रूजर के अलावा मजबूत मिसाइल हथियार हैं. आर्कटिक महासागर में ऑपरेशन और स्ट्रेटेजिक रोकथाम (दुश्मनों के खिलाफ समुद्री क्षमता) पर ज्यादा जोर दिया जाता है.
जापान समुद्री आत्मरक्षा बल (जेएमएसडीएफ) : बहुत एडवांस्ड डिस्ट्रॉयर (एजिस प्रणाली से लैस). मजबूत एंटी-सबमरीन वॉरफेयर (ASW), हेलीकॉप्टर कैरियर, कटिंग-एज टेक के साथ रीजनल डिफेंस पर फोकस. जापान की नेवी वैश्विक रैंकिंग में चौथे स्थान पर है.
भारतीय नौसेना : ब्लू वॉटर कैपेबिलिटी बढ़ाने पर फोकस है. यानी अपने देश के तटों से बहुत दूर गहरे महासागरों में लंबे समय तक युद्ध करने या अभियान चलाने में सक्षम है. एयरक्राफ्ट कैरियर में INS विक्रांत है. न्यूक्लियर पावर्ड सबमरीन है. हिंद महासागर में मजबूत मौजूदगी है. मिसाइल भी हैं. भारत की नेवी दुनिया में पांचवें स्थान पर है.
रॉयल नेवी (यूनाइटेड किंगडम) : दो मॉडर्न एयरक्राफ्ट कैरियर (क्वीन एलिजाबेथ-क्लास), न्यूक्लियर सबमरीन फ्लीट, ग्लोबल एक्सपेडिशनरी कैपेबिलिटी, एडवांस्ड टाइप 45 डिस्ट्रॉयर. इस देश की नेवी छठवें स्थान पर है.
फ्रांसीसी नौसेना (मरीन नेशनेल) : न्यूक्लियर पावर वाला एयरक्राफ्ट कैरियर चार्ल्स डी गॉल, मजबूत सबमरीन फ्लीट, एडवांस्ड मल्टी-रोल फ्रिगेट, अफ्रीका और इंडो-पैसिफिक में एक्सपेडिशनरी ऑपरेशन. फ्रांस की नौसेना दुनिया में सातवें स्थान पर है.
दक्षिण कोरियाई नौसेना (ROKN) : एडवांस्ड डिस्ट्रॉयर (सेजोंग द ग्रेट-क्लास), मजबूत कोस्टल डिफेंस, सबमरीन मॉडर्नाइजेशन, नॉर्थ कोरिया के खिलाफ रीजनल डिटरेंस (क्षेत्रीय निवारण). दक्षिण कोरियाई नौसेना आठवें स्थान पर है.
इतालवी नौसेना (मरीना मिलिटारे) : इटली की नौ सेना को मरीना मिलिटारे के नाम से भी जाना जाता है. इस नेवी के पास एम्फीबियस असॉल्ट शिप, एयरक्राफ्ट कैरियर कैवूर, नेवी की भूमध्यसागरीय मौजूदगी काफी मजबूत है. बेड़े में एडवांस्ड फ्रिगेट और सबमरीन भी हैं. यह नौवें स्थान पर है.
तुर्की नौसेना बल : स्वदेशी जहाज बनाने के साथ बेड़े का विस्तार, एम्फीबियस असॉल्ट शिप अनादोलु बेड़े में शामिल है. भूमध्य सागर और काला सागर में नेवी की मजबूत क्षेत्रीय मौजूदगी है. यह दुनिया में नौवें स्थान पर है.
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चीन की नौसेना (PLA) की खास बातें : english.scio.gov.cn के अनुसार चीन के नेशनल डिफेंस मिनिस्ट्री ने साल 2025 में अप्रैल महीने में नेवी की 76वीं वर्षगांठ मनाई थी. इसमें 30 से ज्यादा युद्धपोतों का जनता के सामने प्रदर्शन किया गया था. इसमें टाइप 075 एम्फीबियस असॉल्ट शिप, टाइप 071 ट्रांसपोर्ट डॉक्स और टाइप 054A/056A गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट शामिल रहे.
साल 2025 में ही चीनी नौसेना ने अपना चौथा टाइप 075 एम्फीबियस असॉल्ट शिप (CNS हुबेई) को बेड़े में शामिल किया. चीन ने नवंबर 2025 में समुद्री ट्रायल के लिए अपना पहला टाइप 076 एम्फीबियस असॉल्ट शिप (PLANS सिचुआन) भी लांच किया था. कई जंगी जहाज ट्रायल पर हैं.
पाकिस्तान की नौसेना : पाकिस्तान नेवी की ऑफिशियल साइट (paknavy.gov.pk) के अनुसार पाक नौसेना के बेड़े में 4 F-22P मल्टी-मिशन फ्रिगेट (PNS जुल्फिकार, PNS शमशीर, PNS सैफ, PNS असलत) जैस युद्धपोत हैं. नेवल सिस्टम्स डायरेक्टरेट (depo.gov.pk) के मुताबिक फ्लीट में आधुनिक जहाज, कन्वेंशनल सबमरीन, माइन काउंटरमेजर वेसल (MCMVs), देश में बनी मिसाइल बोट, फास्ट पेट्रोल क्राफ्ट और मिडगेट सबमरीन शामिल हैं.
साल 2023 में जुलाई में बेड़े में 2 टाइप 054A/P फ्रिगेट (PNS शाहजहां और PNS टीपू सुल्तान) शामिल किए गए. इनमें आधुनिक हथियार और सेंसर लगे हैं.

दुनिया के किन देशों तक है इंडियन नेवी की पहुंच? : प्रेस इंफार्मेशन ब्यूरो के मुताबिक भारतीय नौसेना दक्षिण पूर्व एशिया में थाईलैंड और फिलीपींस में भी ट्रेनिंग की वजह से तैनात रहती है. इसी तरह श्रीलंका के भी कई पोर्ट पर जाती है. INS विक्रांत, INS उदयगिरी, INS सह्याद्री आदि युद्धपोत वहां जाते हैं. मानवीय सहायता मिशन (ऑपरेशन सागर बंधु) में भी हिस्सा लेते हैं.
INS सावित्री वॉरशिप मॉरिशस में पोर्ट पर जा चुका है. इसी तरह INS सह्याद्री मलेशिया का भी दौरा कर चुका है. क्षेत्रीय मौजूदगी के लिए साउथ चाइना सी में भी तैनाती रह चुकी है. इंडियन नेवी वहां सैन्य अभ्यास में भी हिस्सा ले चुकी है. INS त्रिकंद इटली और साइप्रस में भी जा चुका है.
इंडियन नेवी की क्या हैं चुनौतियां? : इंडियन नेवी के अनुसार भारतीय नौसेना बढ़ते मैरीटाइम सिक्योरिटी (समुद्री सुरक्षा) खतरे का सामान कर रही है. साइबर, स्पेस और हाइब्रिड वॉरफेयर समेत मल्टी-डोमेन और ग्रे-जोन की भी चुनौतियां हैं. इन्हें इंडियन मैरीटाइम डॉक्ट्रिन 2025 में हाईलाइट किया गया है. इसकी वजह से नौसेना को और मजबूत करने की जरूरत है.
ऑफिसर्स, सेलर्स और सिविलियन कर्मचारियों की कमी से मेंटेनेंस और ऑपरेशनल क्षमता पर असर पड़ रहा है. नेवी की ऑफिशियल मैनपावर रिपोर्ट में इस बार में जानकारी दी गई है.
हर साल नेवी पर कितने करोड़ खर्च करती है सरकार? : यूनियन बजट 2026–27 में रक्षा मंत्रालय को कुल 7.85 लाख करोड़ रुपये मिले. यह अब तक का सबसे ज्यादा बजट है. इनमें से बड़ा हिस्सा इंडियन नेवी के लिए रखा गया है. नेवी का हिस्सा सालाना लगभग 53,000 से 55,000 करोड़ रहता है. ये रकम आत्मनिर्भर भारत के तहत वॉरशिप कंस्ट्रक्शन, एयरक्राफ्ट खरीद और स्वदेशीकरण प्रोजेक्ट्स पर खर्च की जाती है. साल 2024-25 में रक्षा मंत्रालय को 6,21,941 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे.
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