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दुनिया में कौन सा देश सबसे ज्यादा जिम्मेदार? भारत 16वें पर क्यों, अमेरिका-चीन जैसे सुपर पावर देशों की रैंकिंग खराब

गुड गर्वनेंस, सामाजिक कल्याण, अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के आधार पर Responsible Nation Index 2026 जारी किया गया है. जिसमें चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं.

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रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स 2026 में सिंगापुर नंबर वन. (Photo Credit; ETV Bharat Archive)
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By ETV Bharat Hindi Team

Published : January 27, 2026 at 3:08 PM IST

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Updated : January 29, 2026 at 11:41 AM IST

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हैदराबाद: अभी तक देशों की तुलना उनकी डिफेंस पावर और GDP (बजट) के आधार पर की जाती रही है. जिसमें अमेरिका, चीन, रूस टॉप पर रहते हैं. लेकिन, हाल ही में एक नया इंडेक्स जारी हुआ है, जिसमें गुड गर्वनेंस, सामाजिक कल्याण, अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी के आधार पर देशों की रैंकिंग की गई है.

रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स 2026 (Responsible Nation Index) यानी जिम्मेदार राष्ट्र सूचकांक के पहले एडिशन में सुपर पावर के रूप में विख्यात अमेरिका, चीन, रूस को पछाड़कर सिंगापुर टॉप पर है. जबकि, भारत को 16वां स्थान मिला है.

इंडेक्स, वर्ल्ड इंटेलेक्चुअल फाउंडेशन (WIF) की पहल है और यह 3 वर्षों तक चले गहन अकादमिक और नीति-आधारित अध्ययन का नतीजा है. आईए रिपोर्ट में समझते हैं कि सिंगापुर में आखिर ऐसा क्या है जो वह दुनिया का सबसे ज्यादा जिम्मेदार देश बन गया है. साथ ही भारत में क्या कमी है जो वह टॉप-10 में भी शामिल नहीं हो पाया.

रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स 2026 के टॉप रैंकर्स.
रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स 2026 के टॉप रैंकर्स. (Photo Credit; ETV Bharat)

सिंगापुर पहले नंबर पर क्यों: दरअसल, सिंगापुर एक उत्कृष्ट बुनियादी ढांचे और उच्च सार्वजनिक सेवाएं अपने नागरिकों को देने वाला देश है. यही कारण है कि एशिया में सिंगापुर को रहने के लिए सर्वश्रेष्ठ शहर के रूप में माना जाता है. क्योंकि, यहां अपराध दर दुनिया में सबसे कम है और लोगों को उच्च गुणवत्ता वाला जीवन मिलता है. प्रति व्यक्ति जीडीपी के आधार पर सिंगापुर को विश्व स्तर पर सबसे धनी देशों में से एक माना जाता है.

RNI रैंकिंग में सिंगापुर के पहले पायदान पर आने में उसकी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा एवं नागरिक सशक्तिकरण रहा है. सिंगापुर ग्रीन प्लान 2030 के अंतर्गत स्पष्ट लक्ष्य, नीतियां और 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन का लक्ष्य इसमें काफी मददगार साबित हुआ है. इसके साथ ही संयुक्त राष्ट्र शांति रक्षा, आसियान सहयोग एवं जलवायु कूटनीति में सक्रिय भूमिका ने भी सिंगापुर को पहले पायदान पर पहुंचा दिया.

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भारत 16वें नंबर पर क्यों: संयुक्त राष्ट्र शांतिर क्षा और वैश्विक कूटनीति में अच्छे योगदान के साथ अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन, वैश्विक जैव ईंधन गठबंधन और वैक्सीन मैत्री जैसी पहलों ने भारत के बाहरी उत्तरदायित्व को बढ़ावा दिया है. इसके अलावा गरीबी उन्मूलन, स्वच्छता और ऊर्जा के नवीनीकरण से भी भारत को अच्छे स्कोर मिले. लेकिन, पर्यावरणीय संकेतक (वायु गुणवत्ता, उत्सर्जन, अपशिष्ट प्रबंधन) ने स्कोर को कम कर दिया. स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच, लैंगिक समानता और न्याय वितरण जैसे सामाजिक पहलु राज्यों में असमान बने हुए हैं, जिसके चलते रैंकिंग 16वें पायदान पर रही.

भारत और सिंगापुर की GDP कितनी: अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के अनुसार, 2026 तक भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) 4.51 हजार अरब अमेरिकी डॉलर होगा. वहीं सिंगापुर GDP 606.23 अरब अमेरिकी डॉलर होगी.

जरूरी नहीं कि ज्यादा GDP वाले देश लोगों के प्रति जिम्मेदार हों: आरएनआई के नतीजों से पता चलता है कि ज्यादा जीडीपी या आर्थिक रूप से ताकतवर होने का मतलब ये नहीं कि वह देश जिम्मेदारी से काम करेगा. यही कारण है कि इंडेक्‍स में चीन को 68वां और अमेरिका को 66वां स्थान मिला है.

रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स का क्या है आधार.
रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स का क्या है आधार. (Photo Credit; ETV Bharat)

किसी देश की सफलता को कैसे मापा जाए: WIF ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि, वास्तव में कई विकासशील देश पर्यावरण नैतिकता, लैंगिक समानता और सामाजिक न्याय जैसे क्षेत्रों में अमीर देशों से बेहतर प्रदर्शन करते हैं. लेकिन, जलवायु जिम्मेदारी, न्यायिक स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जुड़ाव के मामलों में असामनता दिखी है. यह राष्ट्रवाद के असमान नैतिक परिदृश्य को उजागर करता है. राष्ट्रीय सफलता को केवल इस आधार पर नहीं मापा जाना चाहिए कि राष्ट्र क्या हासिल करते हैं, बल्कि इस आधार पर भी मापा जाना चाहिए कि वे इसे कितनी जिम्मेदारी से हासिल करते हैं.

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इंडेक्स के लाने का क्या उद्देश्य: RNI लाने का उद्देश्य देशों को आंकने के पारंपरिक नजरिए में बदलाव लाना है. इंडेक्स की धारणा यह है कि जिम्मेदारी के बिना शक्ति किसी देश में स्थायी समृद्धि नहीं ला सकती. देश की प्रगति को केवल आर्थिक या सैन्य ताकत से नहीं, बल्कि इस बात से भी मापा जाना चाहिए कि वह अपनी ताकत का उपयोग कितनी निष्पक्षता, नैतिकता और सतत तरीके से करता है.

इंडेक्स की लॉन्चिंग पर पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद ने कहा था कि यह फ्रेमवर्क जिम्मेदार राष्ट्र की स्पष्ट परिभाषा पेश करता है. यह इंडेक्स एक अभिनव अकादमिक पहल है, जो यह तय करता है कि जिम्मेदार राष्ट्र किसे कहा जाए.

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RNI की रैंकिंग का आधार क्या है: रेस्पॉन्सिबल नेशन इंडेक्स ने देशों की रैंकिंग बनाने में वर्ल्ड बैंक, संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियों और वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय स्रोतों के आंकड़ों का इस्तेमाल किया है. जिसमें 3 मुख्य बातों को आधार बनाया गया.

पहला, 'आंतरिक जिम्मेदारी' जो लोगों की गरिमा, कल्याण और सशक्तीकरण के प्रति देश के कर्तव्यों को देखती है. दूसरा, पर्यावरण जिम्मेदारी जो पारिस्थितिकी संरक्षण और ठोस विकास के प्रति देश की प्रतिबद्धता का आकलन करती है. तीसरा, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का व्यवहार और योगदान कैसा है? उस पर केंद्रित है. आरएनआई सात आयामों पर राष्ट्रों का मूल्यांकन करता है.

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Last Updated : January 29, 2026 at 11:41 AM IST