गतिरोध के बाद लद्दाख निकायों के साथ बातचीत फिर से शुरू करेगा गृह मंत्रालय, हितधारकों ने कहा, 'बहुत देर हो चुकी है'
एचपीसी मेंबर और लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन छेरिंग दोरजे लारकुक ने कहा कि वे केंद्र के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं.

Published : January 9, 2026 at 2:57 PM IST
श्रीनगर: लद्दाख पर गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति (एचपीसी) ने इस महीने के आखिरी हफ्ते में यहां के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत फिर से शुरू करने का फैसला किया है.
लद्दाख में सितंबर में हुई झड़पों में चार लोगों की मौत और 90 लोगों के घायल होने के बाद यह पहली बार है, जब फिर से लद्दाख पर बातचीत शुरू करने का फैसला हुआ है. गृह मंत्रालय की तरफ से लद्दाख केंद्रशासित प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी को भेजे गए एक एक आधिकारिक पत्र में कहा गया है कि एचपीसी बैठक जनवरी 2026 के आखिरी में होगी.
आधिकारिक पत्र में अनुरोध किया गया है कि एचपीसी के मेंबर से उनकी सुविधा के हिसाब से तारीखें तय करने के लिए सलाह लिया जाए और मंत्रालय को सूचित किया जाए.
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय की नेतृत्व में गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति 2023 में बनाई गई थी, जिसका मकसद लद्दाख की दो खास बॉडीज, लेह एपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) के नेताओं के साथ बातचीत करना था. पिछली गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय समिति मई 2025 में हुई थी, जबकि अक्टूबर में होने वाली एक और बैठक नहीं हो सकी क्योंकि लद्दाख की बॉडीज ने हत्याओं की ज्यूडिशियल जांच समेत अपनी मांगें पूरी होने तक मीटिंग में शामिल होने से मना कर दिया था.
एचपीसी मेंबर और लेह एपेक्स बॉडी के चेयरमैन छेरिंग दोरजे लारकुक ने कहा कि वे केंद्र के साथ बातचीत करने के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने बैठक को 'बहुत देर हो चुकी' बताया और कहा कि 'केंद्र अपने प्रतिबद्धता को पूरा नहीं कर रहा है'.
छेरिंग दोरजे लारकुक ने ईटीवी भारत को बताया कि, बातचीत पहले हो जाना चाहिए था. अक्टूबर 2025 में गृह मंत्रालय की सब-कमेटी के साथ उनकी बातचीत के दौरान, उन्हें मांगों का एक प्रपोजल जमा करने के लिए कहा गया था ताकि वे 2 से 3 दिनों में एचपीसी बुला सकें. लेकिन दो महीने से ज्यादा समय बीत चुका है और उन्होंने अभी तक एचपीसी मीटिंग की तारीख तय नहीं की है."
उनके मुताबिक, प्रस्ताव में मांगों में राज्य का दर्जा, लद्दाख के लिए छठी अनुसूची में शामिल करना और इलाके में हिंसा के दौरान गिरफ्तार लोगों को आम माफी शामिल है. इसमें जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई भी शामिल है, जिन पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है. वे फिलहाल जोधपुर जेल में बंद हैं. हिरासत को चुनौती देने वाली उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हो रही है.
दोरजे ने कहा कि, मामले में अब तक 80 लोगों को जमानत पर रिहा किया गया है. लेकिन वे सभी बेगुनाह लोग हैं और उन पर बेबुनियाद आधार पर केस किया गया है. उन्हें आम माफी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि, उस दौरान कई लोगों को सड़कों से उठाया गया था और वे भीड़ का हिस्सा नहीं थे. ये सभी केस वापस ले लेने चाहिए.
KDA को प्रतिनिधित्व करने एचपीसी मेंबर सज्जाद कारगली ने कहा कि वे सेंटर से बात करने के लिए तैयार हैं और सोनम वांगचुक की गिरफ्तारी और अशांति के दौरान प्रभावित लोकल लोगों को मुआवजा देने के बारे में बात करेंगे.
यह 'वॉइस ऑफ बुद्धिस्ट लद्दाख' (VOB) नाम के एक नए बने ग्रुप के सामने आने के बीच हुआ है, जो लेह के बौद्धों को रिप्रेजेंट करने का दावा कर रहा है और राज्य की मांग का विरोध कर रहा है. उन्होंने मांग की कि लद्दाख पर एक टेरिटोरियल काउंसिल राज करे, जिसके पास नौकरियों और डेमोग्राफिक्स के लिए कानून बनाने की पावर हो और उन्होंने एचपीसी में प्रतिनिधित्व मांगा है. हालांकि, दोरजे ने VOB को एक ‘खुद को ग्रुप’ बताया, जिसमें सार्वजनिक प्रतिनिधित्व की कमी है.
उन्होंने कहा कि, "एलबीए को लोगों ने चुना है. कल कोई भी आकर HPC में शामिल होना चाह सकता है. उनके सोशल मीडिया पर कमेंट्स पढ़ें और आपको पता चल जाएगा कि वे कहां आ गए हैं."
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