ETV Bharat / bharat

झारखंड में HIV का बदलता चेहरा, 13 केंद्रों पर मरीजों की जांच से हुए चौंकाने वाले खुलासे

झारखंड में एचआईवी एड्स की चुनौती बढ़ती जा रही है. इस रिपोर्ट में जानिए 13 केंद्रों पर मरीजों की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं.

HIV IN JHARKHAND
डिजाइन इमेज (ETV Bharat)
author img

By ETV Bharat Jharkhand Team

Published : March 3, 2026 at 5:57 PM IST

9 Min Read
Choose ETV Bharat

रिपोर्ट: नरेंद्र निषाद

धनबाद: झारखंड में एचआईवी संक्रमण एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है. हाल के वर्षों में राज्य में नए मामलों की संख्या और मौतों में वृद्धि देखी गई है, खासकर कोयला खनन वाले क्षेत्रों जैसे धनबाद में. एक हालिया अध्ययन में धनबाद सहित 13 एआरटी केंद्रों में पिछले एक साल में सामने आए 645 नए एचआईवी पॉजिटिव मामलों का विस्तृत विश्लेषण किया गया, जिसमें प्रवास, असुरक्षित यौन व्यवहार और चिकित्सा प्रक्रियाओं में लापरवाही जैसे कारक प्रमुख रूप से उभरे हैं. यह अध्ययन नेशनल एड्स कंट्रोल ऑर्गनाइजेशन (NACO) की स्वीकृति से किया गया और इसकी रिपोर्ट NACO को सौंपी गई है.

645 नए मामलों का विश्लेषण

रिसर्च टीम के नेतृत्व में डॉ. ऋषभ राणा (शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज, धनबाद) ने बताया कि अध्ययन का उद्देश्य नए संक्रमणों के कारणों, संक्रमितों की जीवनशैली और जोखिम कारकों को समझना था. अध्ययन में शामिल 645 मरीजों में 236 महिलाएं, 404 पुरुष और 5 ट्रांसजेंडर थे. इनसे उनकी दिनचर्या, प्रवास इतिहास, यौन व्यवहार और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच की जानकारी एकत्र की गई.

डॉ ऋषभ राणा, प्रिंसिपल इन्वेस्टिगेटर, टीम लीडर (ETV Bharat)

प्रवास (Migration) का बड़ा रोल: लगभग 60 प्रतिशत मरीज पिछले 12 महीनों में तीन महीने से अधिक समय तक घर से बाहर, दूसरे राज्यों में मजदूरी कर रहे थे. झारखंड जैसे राज्य में मजदूरों का पलायन आम है, और यह संक्रमण का प्रमुख माध्यम बन रहा है. बाहर के राज्यों में असुरक्षित यौन संबंध या साझा सुइयों का उपयोग संक्रमण फैला सकता है.

यौन व्यवहार से जुड़े जोखिम: 21 प्रतिशत मरीजों ने मल्टीपल सेक्स पार्टनर या MSM (Men who have Sex with Men) व्यवहार की जानकारी दी. शोधकर्ताओं के अनुसार, MSM मामलों की यह संख्या अपेक्षा से अधिक थी, जो राज्य में छिपे जोखिमों को दर्शाती है.

असुरक्षित चिकित्सा प्रक्रियाएं: कुछ मरीजों ने दावा किया कि उन्होंने कभी असुरक्षित यौन संबंध नहीं बनाए और न ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन लिया, फिर भी वे पॉजिटिव पाए गए. जांच में पता चला कि वे दांत निकलवाने या छोटे-मोटे इलाज के लिए झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाते थे, जहां असुरक्षित उपकरणों और संक्रमण नियंत्रण की कमी थी. हालांकि, असुरक्षित रक्त चढ़ाने के मामले कम थे.

13 एआरटी केंद्रों पर आधारित था, जिनमें शामिल हैं:

HIV IN JHARKHAND
इन 13 केंद्रों पर हुई जांच (ETV Bharat)

रिसर्च टीम में PSM विभाग के एचओडी डॉ. रवि रंजन झा, डॉ. तान्या तनवीर और मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. उमेश कुमार ओझा शामिल थे.

धनबाद में 3200 HIV मरीज, 55 मौतें

धनबाद में कुल 3200 एचआईवी संक्रमित मरीज हैं, जिनमें से 1500 का इलाज एसएनएमएमसीएच (शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल) के एआरटी सेंटर में चल रहा है. अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक 55 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की मौत हो चुकी है. एसएनएमएमसीएच के सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. प्रदीप कुमार राय ने बताया कि मौतों का मुख्य कारण पहले टीबी और निमोनिया होता था, लेकिन अब किडनी संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं. किडनी फेलियर में एचआईवी दवाएं रोकनी पड़ती हैं, जिससे स्थिति बिगड़ जाती है. ऐसे मरीजों को रांची के रिम्स रेफर किया जाता है.

HIV IN JHARKHAND
HIV की जांच और उपचार सुविधाएं (ETV Bharat)

डॉ. रोहित गौतम (जिला आरसीएच पदाधिकारी) ने कहा कि कोयलांचल क्षेत्र में ट्रक चालकों और बाहरी मजदूरों के कारण संक्रमण फैलने का खतरा अधिक है. बस स्टैंड, भीड़भाड़ वाले इलाकों और जेलों में विशेष शिविर लगाए जाते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में एएनएम जागरूकता अभियान चला रही हैं.

झारखंड में कुल एचआईवी संक्रमितों की संख्या और राष्ट्रीय संदर्भ

NACO के हालिया अनुमानों (2023-2025) के अनुसार, झारखंड में एचआईवी प्रसार दर राष्ट्रीय औसत से कम है. 2023 में राज्य में अनुमानित 23,794 PLHIV (People Living with HIV) थे, जबकि 2024 में यह संख्या स्थिर या थोड़ी कम रही. राष्ट्रीय स्तर पर 2024 में 25.61 लाख PLHIV हैं, वयस्क प्रसार दर 0.20% है. झारखंड में प्रसार दर 0.07-0.09% के आसपास है, जो कम है, लेकिन प्रवास और खनन क्षेत्रों में स्थानीय क्लस्टर चिंता का विषय हैं.

HIV IN JHARKHAND
एचआईवी के लिए जागरूकता और रोकथाम अभियान (ETV Bharat)

राष्ट्रीय स्तर पर नए संक्रमण 44% और मौतें 79% घटी हैं (2010 से), लेकिन झारखंड में कमी धीमी है. 2025 में झारखंड में अप्रैल से अक्टूबर तक 1,139 नए मामले सामने आए.

धनबाद में एचआईवी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे कई कार्यक्रम

धनबाद में एचआईवी नियंत्रण और रोकथाम के लिए कई सक्रिय कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, जो मुख्य रूप से राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (NACO) के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम (NACP) के तहत संचालित होते हैं. धनबाद जिले में शहीद निर्मल महतो मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (SNMMCH) में एक एंटीरेट्रोवाइरल थेरेपी (ART) सेंटर कार्यरत है, जहां संक्रमित मरीजों को मुफ्त जांच, काउंसलिंग और जीवनरक्षक दवाइयों का वितरण किया जाता है. इसके अलावा, जिले में इंटीग्रेटेड काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर्स (ICTC) भी मौजूद हैं, जहां गोपनीय जांच और प्री/पोस्ट-टेस्ट काउंसलिंग उपलब्ध है.

जागरूकता और रोकथाम के प्रमुख प्रयास

जिला स्वास्थ्य विभाग और आरसीएच (रिप्रोडक्टिव एंड चाइल्ड हेल्थ) टीम के माध्यम से विभिन्न स्तरों पर जागरूकता अभियान चलाए जाते हैं. विशेष रूप से:

  • कोयलांचल क्षेत्र में ट्रक ड्राइवरों, प्रवासी मजदूरों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों (जैसे बस स्टैंड, जेल आदि) पर विशेष जांच शिविर लगाए जाते हैं.
  • ग्रामीण इलाकों में एएनएम (ऑक्जिलरी नर्स मिडवाइफ) के जरिए घर-घर जागरूकता फैलाई जाती है.
  • उच्च जोखिम वाले समूहों (जैसे इंजेक्शन ड्रग यूजर्स, सेक्स वर्कर्स) के लिए लक्षित हस्तक्षेप कार्यक्रम चलते हैं.
  • संक्रमण के मुख्य मार्गों—असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त/इंजेक्शन और मां से बच्चे में, के बारे में शिक्षा दी जाती है.

जांच और उपचार की सुविधाएं

यदि किसी को संदेह हो, तो वे तुरंत ICTC में जांच करा सकते हैं, जो पूरी तरह गोपनीय होती है. पॉजिटिव पाए जाने पर मरीज को ART सेंटर रेफर किया जाता है. नियमित दवा सेवन से मरीज सामान्य जीवन जी सकते हैं, कई मरीज 20-25 वर्षों से दवा ले रहे हैं और 70 वर्ष की उम्र पार कर चुके हैं.

हालांकि, चुनौतियां बनी हुई हैं. अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 तक धनबाद में 55 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की मौत हुई, जिनमें टीबी, निमोनिया के अलावा किडनी संबंधी जटिलताएं प्रमुख कारण रहीं. ऐसे मामलों में मरीजों को रांची के RIMS रेफर किया जाता है.

जिला आरसीएच पदाधिकारी डॉ. रोहित गौतम ने लोगों से अपील की है कि यदि किसी व्यक्ति को यह शंका हो कि वह एचआईवी से संक्रमित हो सकता है, तो उसे बिना देर किए जांच करा लेनी चाहिए. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह जांच पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है और मरीज की पहचान कभी सार्वजनिक नहीं की जाती. साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि आजकल एचआईवी के नियंत्रण के लिए बहुत प्रभावी दवाएं उपलब्ध हैं. इन दवाओं का नियमित और सही तरीके से सेवन करने पर संक्रमित व्यक्ति सामान्य जीवन जी सकता है और लंबी उम्र तक स्वस्थ रह सकता है.

एसएनएमएमसीएच के एआरटी सेंटर के वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रदीप कुमार राय ने बताया कि एचआईवी संक्रमण की पहचान के लिए विभिन्न तरीकों का इस्तेमाल किया जाता है. उदाहरण के लिए, यदि कोई मरीज लंबे समय से लगातार खांसी या बुखार से पीड़ित है, तो उसे आईसीटीसी केंद्र में जांच के लिए भेजा जाता है. यदि जांच रिपोर्ट पॉजिटिव निकलती है, तो मरीज को एआरटी सेंटर रेफर कर दिया जाता है, जहां उसकी विस्तृत जांच और मूल्यांकन किया जाता है.

डॉ. राय ने आगे कहा कि पहले एचआईवी से प्रभावित मरीजों में मौत का प्रमुख कारण टीबी और निमोनिया जैसी बीमारियां हुआ करती थीं, लेकिन अब हाल के वर्षों में किडनी संबंधी जटिलताएं अधिक दिखाई दे रही हैं. किडनी की समस्या होने पर एचआईवी की दवाओं को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ता है, जिससे मरीज की हालत और बिगड़ जाती है. इस स्थिति से निपटने के लिए ऐसे मरीजों को रांची के रिम्स अस्पताल में विशेषज्ञ चिकित्सकों के पास रेफर किया जा रहा है. उन्होंने यह भी जानकारी दी कि धनबाद में अप्रैल 2024 से फरवरी 2025 के बीच कुल 55 एचआईवी पॉजिटिव मरीजों की मृत्यु हो चुकी है, जो एक गंभीर चिंता का विषय है.

झारखंड और राष्ट्रीय संदर्भ

झारखंड में 2025-26 के वित्तीय वर्ष में (अप्रैल से अक्टूबर तक) 1,139 नए मामले सामने आए हैं, जिसमें धनबाद का योगदान उल्लेखनीय है. राष्ट्रीय स्तर पर NACO के 2025 अनुमान के अनुसार, भारत में एचआईवी प्रसार दर 0.20% है और नई संक्रमणों में कमी आई है, लेकिन झारखंड जैसे राज्यों में जागरूकता और पहुंच बढ़ाने की जरूरत है. NACP के तहत मृत्यु दर में कमी आई है, पर स्थानीय स्तर पर सह-संक्रमण (जैसे TB-HIV) चुनौती बनी हुई है.

डॉक्टरों की अपील है कि घबराएं नहीं समय पर जांच और नियमित उपचार से एचआईवी को नियंत्रित किया जा सकता है. जागरूकता, सुरक्षित व्यवहार और दवा का पालन ही इस बीमारी से लड़ने का सबसे मजबूत हथियार है. यदि संदेह हो, तो निकटतम ICTC या ART सेंटर से संपर्क करें.

ये भी पढ़ें:

चाईबासा सदर अस्पताल के 'संक्रमित खून' ने उजाड़ा परिवार, पति-पत्नी समेत बच्चा हुआ एचआईवी पॉजिटिव!

थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला, सरकार ने गठित की 6 सदस्यीय जांच समिति