'मिनी कश्मीर' बना हिमाचल का पालमपुर, पर्यटकों के लिए खुला देश का दूसरा ट्यूलिप गार्डन
हिमाचल में पालमपुर की वादियां रंग-बिरंगे ट्यूलिप्स से महक रही हैं, इस बार 50 हजार बल्ब खिला रहे हैं रंग.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : February 12, 2026 at 1:50 PM IST
धर्मशाला: हिमाचल की खूबसूरत वादियों के तो सभी लोग कायल हैं, लेकिन अब हिमाचल रंग-बिरंगे फूलों के लिए भी मशहूर हो रहा है. धौलाधार की वादियों में खूबसूरत रंग-बिरंगे फूलों के साथ सीएसआईआर-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान (CSIR-IHBT) पालमपुर का ट्यूलिप गार्डन देश-विदेश में अपनी खास पहचान बना चुका है. ये ट्यूलिप गार्डन अब दर्शकों के लिए खोल दिया गया है, ताकी लोग अब पालमपुर में ही ट्यूलिप गार्डन देखने का आनंद ले सके. बुधवार, 11 फरवरी से ट्यूलिप गार्डन को दर्शकों के लिए खोला गया है.
पर्यटन को बढ़ावा दे रहा ट्यूलिप गार्डन
CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि कश्मीर के बाद देश का दूसरा और हिमाचल प्रदेश का पहला ट्यूलिप गार्डन कुछ साल पहले कांगड़ा जिले के पालमपुर में हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान में स्थापित किया गया था. इसमें ट्यूलिप की विभिन्न प्रजातियों को लगाया जाता है. ये गार्डन हिमाचल प्रदेश के प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटन को बढ़ावा देता है. पालमपुर स्थित आईएचबीटी संस्थान, केंद्र सरकार और CSIR द्वारा 2022 में शुरू किए गए फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत फूलोत्पादन को प्रोत्साहित कर रहा है. इससे ज्यादा से ज्यादा किसानों को जोड़ कर उनकी आय को दोगुना करने की योजना पर काम किया जा रहा है.

"ट्यूलिप गार्डन को दर्शकों के लिए खोल दिया गया है. इस बार ट्यूलिप की 6 किस्मों के 50000 बल्ब (पौधे) लगाए गए हैं. पिछले साल लगभग 1 लाख लोग इसको देखने आए थे और इस बार इससे ज्यादा लोगों के आने की संभावना है." - डॉ. भव्य भार्गव, प्रधान वैज्ञानिक, CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर

इस देश में होती है सबसे ज्यादा ट्यूलिप फूलों की पैदावार
प्रधान वैज्ञानिक डॉ. भव्य भार्गव ने बताया कि हॉलैंड ट्यूलिप फूलों की सबसे ज्यादा पैदावार करने वाला देश है. हॉलैंड में तैयार किए जा रहे बल्ब ही बाकि देशों द्वारा आयात किए जाते हैं. भारत में भी हॉलैंड से ही ट्यूलिप के बल्ब मंगवाए जाते रहे हैं, लेकिन अब आईएचबीटी के वैज्ञानिकों के प्रयासों ने देश में फूलों की खेती में एक बड़े बदलाव का संकेत दिया है. अब नए रंग-बिरंगे फूलों के साथ ट्यूलिप गार्डन एक बार फिर लोगों को आकर्षित करने को तैयार है. बीते साल लाखों की संख्या में लोग CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर में ट्यूलिप गार्डन देखने पहुंचे थे. इस बार यहां पहुंचने वाले लोगों का आंकड़ा एक लाख से अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है. आईएचबीटी संस्थान ने ट्यूलिप बल्ब प्रोडक्शन पर काम किया है, जिसके बेहतरीन परिणाम आ रहे हैं.

"संस्थान में ट्यूलिप के ऊपर काफी शोध कार्य किए जा रहे हैं. जिससे कम समय में ट्यूलिप के फूल तैयार हो सके और किसानों की हम सशक्त कर सकें. ट्यूलिप बल्ब को आयात किया जाता है. इस आयात को कम करने के लिए संस्थान द्वारा काफी कार्य किया जा रहा है. हमने 5 साल में 23 लाख ट्यूलिप बल्ब तैयार करने का लक्ष्य रखा है, जिसके लिए संस्थान प्रयासरत है." - डॉ. भव्य भार्गव, प्रधान वैज्ञानिक, CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर

बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर CSIR-IHBT
CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के निदेशक सुदेश कुमार यादव ने बताया कि संस्थान ने जब से ट्यूलिप गार्डन को शुरू किया है, तब लेकर पिछले साल तक करीब 4 लाख से ज्यादा दर्शक इसे देखने के लिए आ चुके हैं. वहीं, इस बार भी दर्शकों का आंकड़ा एक लाख से ज्यादा रहने की संभावना है. फ्लोरीकल्चर मिशन के तहत संस्थान का यह कदम इस क्षेत्र के बहुत ही लाभकारी रहा है. डॉ. सुदेश कुमार यादव ने कहा कि ये ट्यूलिप गार्डन न सिर्फ पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करेगा, बल्कि जो विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में संभावनाएं हैं उन्हें भी एक्सप्लोर करने की एक नई दिशा प्रदान करेगा. उन्होंने बताया कि संस्थान कुछ कंपनियों के साथ मिलकर बल्ब प्रोडक्शन पर काम कर रहा. साथ ही ऑफ सीजन में ट्यूलिप लेने की कोशिश की जा रही और इस क्षेत्र विभिन्न प्रयोग किए जा रहे हैं.

दिल्ली में भी खुला ट्यूलिप गार्डन
"इस साल दिल्ली सीएसआईआर मुख्यालय में भी 1000 से ज्यादा ट्यूलिप लगाए गए हैं. वो भी आम जनता के लिए खोला गया है. वहीं, नई दिल्ली नगर निगम ने ट्यूलिप को लेकर हिमालय जैव संपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर के साथ एग्रीमेंट किया है. जिसके तहत वहां पर संस्थान द्वारा इस साल 22 हजार ट्यूलिप बल्ब दिए गए हैं." - डॉ. सुदेश कुमार यादव, निदेशक, CSIR-हिमालय जैवसंपदा प्रौद्योगिकी संस्थान पालमपुर

