हिमाचल की स्मार्ट पंचायत, जिसकी अपनी वेबसाइट, जिम, सीसीटीवी, गेस्ट हाउस और बहुत कुछ
हिमाचल का थानेधार पंचायत विकास के मामले में बना उतर भारत का नंबर वन पंचायत. जानिए इस पंचायत की खासियत.

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : November 13, 2025 at 5:41 PM IST
|Updated : November 17, 2025 at 12:50 PM IST
शिमला: क्या आपने कभी ऐसी पंचायत देखी है कि जहां रात में सोलर लाइटों से सड़कें चमचमाती हो, हर मोड़ पर सुरक्षा के लिए सीसीटीवी कैमरे लगे हों, नियमित साफ-सफाई और डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन होता हो. गांव में युवाओं के लिए जिम, छात्रों के लिए लाइब्रेरी और पर्यटकों के लिए गेस्ट हाउस हो. इतना ही नहीं पंचायत का अपना वेबसाइट हो, जिसकी मदद से लोग मिनटों में अपनी जरुरी दस्तावेज ऑनलाइन बनवा सकें. ये सुनने में भले ही आपको सपने जैसा लगे, लेकिन इसे हकीकत में सच कर दिखाया है हिमाचल प्रदेश के एक पंचायत प्रधान ने, जो आज किसी पहचान के मोहताज नहीं है. आइए जानते हैं कि हिमाचल की ये कौन सी पंचायत है, जहां शहरों जैसी सुविधाएं मिल रही हैं.
सेब के बागानों से घिरी थानेधार पंचायत
ये कहानी है हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला से करीब 86 किलोमीटर दूर सेब के बागानों से घिरी थानेधार पंचायत की, जहां 1916 में सत्यानंद स्टोक्स ने पहला सेब का पौधा लगाया था. आज इस पंचायत ने विकास कार्यों के दम पर गांव की पारंपरिक छवि को बदल कर रख दिया है. सेब बागानों के बीच बसा यह इलाका न केवल हिमाचल बल्कि पूरा उत्तर भारत के लिए प्रेरणा बन चुका है. यहां विकास सरकारी योजनाओं से नहीं, बल्कि पंचायत प्रधान और लोगों की साझी सोच और जिम्मेदारी से उपजा है. जिसकी बदौलत इस पंचायत की तस्वीर पूरी तरह से बदल चुकी है.

थानेधार पंचायत में मिनी स्मार्ट सिटी जैसी सुविधा
थानेधार पंचायत में विकास का पैमान सड़क बनाने या हैंडपंप लगाने तक ही सीमित नहीं है. यह कहानी है 'स्मार्ट विजन' की. थानेधार पंचायत में जब रात होती है, गांव की सड़कें सोलर लाइटों से जगमगा उठती. इस गांव की निगरानी 28 सीसीटीवी कैमरे में की जाती है. जो यहां होने वाले हर हलचल पर पैनी नजर बनाए रखती है. यहां पंचायत भवन महज एक सरकारी दफ्तर नहीं, बल्कि एक आधुनिक सामुदायिक केंद्र है. इस पंचायत भवन में सिर्फ बैठकें नहीं, बल्कि फिटनेस, शिक्षा और डिजिटल ट्रेनिंग भी होती है. जहां एक तरफ युवा जिम में पसीना बहाते हैं, तो दूसरी तरफ लाइब्रेरी में छात्र प्रतियोगी परीक्षाओं की किताबें खंगाल रहे होते हैं.


उत्तर भारत की नंबर 1 पंचायत
थानेधार पंचायत, जिसे 'उत्तर भारत की नंबर 1 पंचायत' भी कहा जाता है. इसे राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ ग्राम पंचायत का पुरस्कार भी मिल चुका है. थानेधार, शिमला जिले की कुमारसैन तहसील के तहत आता है और नारकंडा ब्लॉक का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह क्षेत्र हिमालय की धौलाधार पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है, जहां की जलवायु सेब उत्पादन के लिए अत्यंत अनुकूल है. थानेधार पंचायत की आबादी लगभग 2034 है, जिसमें पुरुषों (1033) और महिलाओं (1001) का अनुपात लगभग समान है, जो एक स्वस्थ लिंगानुपात (Sex Ratio) को दर्शाता है.

'मेरा नहीं, हम सबका प्रयास है'
थानेधार पंचायत को मिनी स्मार्ट सिटी बनाने का श्रेय पंचायत प्रधान संदीप शरोल को जाता है. जिनके विजन और विकास कार्यों में दिलचस्पी ने आज इस पंचायत को पूरे भारत के मानचित्र पर ला दिया है. अपनी इस उपलब्धि पर थानेधार पंचायत संदीप शरोल कहते हैं, 'यह मेरा अकेले का प्रयास नहीं है, अपने सामूहिक सोच के लिए हमारी पूरी पंचायत जानी जाती है. हमारा मकसद सिर्फ विकास नहीं, बल्कि स्मार्ट और आत्मनिर्भर पंचायत बनाना था. 2021 में जब वे पंचायत प्रधान बने, तो हालात सामान्य नहीं थे. सड़कों पर कुछ स्ट्रीट लाइटें थीं, कचरे की समस्या गंभीर थी, युवाओं के लिए नशे और बेरोजगारी की चुनौती थी, लेकिन उन्होंने शुरुआत की कमियों को गिनने से नहीं, समाधान सोचने पर ध्यान दिया.'

पहला कदम, स्वच्छता क्रांति की ओर
थानेधार पंचायत प्रधान संदीप शरोल बताते हैं कि 2022 की ग्राम सभा में सबसे पहले मुद्दा उठा कचरा कहां जाए? पहले लोग कूड़ा नालों में या जंगलों में फेंक देते थे. इससे न केवल पर्यावरण प्रभावित होता था, बल्कि गांव की खूबसूरती भी बिगड़ती थी. हमारा पहला एजेंडा स्वच्छता था. हमने पंचायत फंड से खुद की गाड़ी खरीदी, ताकि कूड़ा उठाने के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े. पंचायत ने वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट लगाया. आज यह प्लांट हर घर से निकलने वाले कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित कर उसका ट्रीटमेंट करता है. प्लास्टिक का पुनर्चक्रण, जैविक कचरे से खाद और साफ-सुथरे वातावरण ने थानेधार को स्वच्छ पंचायत की मिसाल बना दिया.

नशे से दूर, फिटनेस की राह पर युवा
कहते हैं, किसी भी समाज का भविष्य उसके युवा तय करते हैं. थानेधार पंचायत ने इसे बखूबी समझा और पंचायत फंड से एक जिम खोला. संदीप शरोल बताते हैं, 'शुरू में बहुतों ने कहा कि गांव में जिम? यह तो शहरों की चीज है, प्रधान हंसते हुए बताते हैं, लेकिन आज 170 बच्चे वहां रजिस्टर हैं, जिनमें 25 महिलाएं और लड़कियां भी शामिल हैं. यह सिर्फ जिम नहीं, बल्कि नशा-मुक्त हिमाचल की एक जीवंत मिसाल बन गया है. मैं दावे के साथ कह सकता हूं, हमारे गांव के एक भी किशोर पर नशे की लत नहीं है. 2025 में पंचायत ने स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर का टूर्नामेंट भी आयोजित किया, जिसमें 32 टीमों ने भाग लिया. खेलों के माध्यम से युवाओं में अनुशासन और स्वास्थ्य दोनों को प्राथमिकता दी जा रही है.'

पंचायत का खुद का गेस्ट हाउस
थानेधार पंचायत ने विकास को सिर्फ योजनाओं तक सीमित नहीं रखा. यहां पंचायत ने चार कमरों का एक गेस्ट हाउस तैयार कराया. थानेधार पंचायत प्रधान का कहना है, 'गांव में आने वाले पर्यटकों, अधिकारियों और मेहमानों के ठहरने के लिए यह अब सबसे पसंदीदा जगह बन चुका है. पिछले 8 से 9 महीने में इस गेस्ट हाउस से करीब 80–85 हजार रुपये की आमदनी हुई है. प्रधान बताते हैं कि अब हमें हर चीज के लिए सरकार पर निर्भर नहीं रहना पड़ता, हम अपनी आय खुद बना रहे हैं.'

डिजिटल पंचायत, ई-गवर्नेंस की ओर
थानेधार पंचायत ने करीब दो साल पहले अपनी वेबसाइट बनाई. यह वेबसाइट किसी प्राइवेट फर्म की तरह नहीं, बल्कि पारदर्शी शासन की खिड़की है. यहां से लोग जन्म, मृत्यु, चरित्र प्रमाण पत्र और निवास प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं. प्रधान संदीप बताते हैं, 'हमने वेबसाइट में अलग से यह फीचर जोड़ा, ताकि लोग बार-बार पंचायत दफ्तर के चक्कर न काटें, अब तक पंचायत 80 से 90 प्रमाणपत्र ऑनलाइन जारी कर चुकी है. यह कदम हिमाचल की ग्राम पंचायत में डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का सशक्त उदाहरण है'.

राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान
थानेधार पंचायत के इन प्रयासों को देश ने भी सलाम किया. 11 दिसंबर 2024 को पंचायत को राष्ट्रपति के हाथों ‘सामाजिक रूप से सुरक्षित गांव’ का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला. साथ ही दीन दयाल उपाध्याय पंचायत सशक्तिकरण पुरस्कार (DDUPSP) से और भारत सरकार द्वारा दिए जाने वाले राष्ट्रीय पंचायत पुरस्कारों (National Panchayat Awards) के तहत सम्मानित किया गया है. यह सम्मान सिर्फ पंचायत भवन की दीवार पर नहीं टंगा है. यह हर उस नागरिक के दिल में दर्ज है, जिसने इस बदलाव में अपना योगदान दिया.

CCTV से लेकर स्ट्रीट लाइट तक
थानेधार पंचायत की सड़कों पर आज हर मोड़ रोशन है. 2021 में जहां महज 60 स्ट्रीट लाइटें थीं. वहीं, आज यह संख्या 550 तक पहुंच चुकी है. हर गली, हर सड़क पर रोशनी है. यह न सिर्फ सुविधा है, बल्कि सुरक्षा का प्रतीक भी. इसके साथ ही पंचायत ने 28 CCTV कैमरे लगाए हैं, जिससे हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है. प्रधान बताते हैं कि 'हमारे CCTV ने कई छोटी घटनाओं को रोकने में मदद की है. अब लोग खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं.'

गांव के विकास से ग्रामीणों में खुशी
स्थानीय लोगों का कहना है कि 'पहले रात को बाहर निकलना मुश्किल होता था, क्योंकि गांव में अंधेरा होता था. अब तो हर तरफ सोलर लाइट जलती है, जो हमें बहुत सुरक्षा देती है. पेंशन सीधे बैंक खाते में आती है और पंचायत भवन में स्वास्थ्य शिविर लगते रहते हैं. प्रधान ने हमें वह सम्मान दिया है जिसकी हम उम्मीद करते थे. 28 कैमरों की वजह से अब चोरी का डर नहीं लगता. यह एक शहर जैसी सुविधा है, लेकिन हमारे अपने गांव में'.

वहीं, युवाओं का कहना है कि 'हमारा भविष्य यहीं बन रहा है. जिम ने हमें शारीरिक रूप से मजबूत बनाया है और लाइब्रेरी ने मानसिक रूप से. हमें शिमला या चंडीगढ़ के महंगे कोचिंग सेंटर जाने की जरूरत नहीं पड़ी. पंचायत की वेबसाइट पर हम अपने जरूरी दस्तावेजों की प्रक्रिया देख लेते हैं, जिससे समय बचता है. यह पंचायत हमारे सपनों का समर्थन करती है'.
महिलाओं का कहना है, 'स्वच्छता और सुरक्षा हमारे लिए सर्वोच्च है. पंचायत ने सार्वजनिक शौचालय बनाए और घर-घर से कूड़ा उठाना शुरू किया. अपशिष्ट प्रबंधन संयंत्र के कारण गांव बहुत साफ रहता है. सीसीटीवी कैमरों की उपस्थिति ने हमें रात में भी सुरक्षित महसूस कराया है. हम मानते हैं कि यह पंचायत केवल विकास नहीं कर रही, बल्कि सामुदायिक भावना को भी मजबूत कर रही है.

आगे की योजना, पार्किंग और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स
थानेधार पंचायत अब अगले बड़े प्रोजेक्ट की तैयारी में है. यहां पार्किंग और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स बनने जा रहा है. इससे दो फायदे होंगे. पंचायत को आय का नया स्रोत मिलेगा. गांव में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे. पंचायत प्रधान संदीप शरोल ने कहा, 'हम चाहते हैं कि थानेधार सिर्फ सफाई या सुरक्षा से नहीं, बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता के लिए भी जाना जाए. जहां इतिहास ने सेब लगाया, वहां अब नवाचार खिल रहा है. थानेधार की पहचान सदियों से सेब की धरती के रूप में रही है. 1916 में यहां सत्यानंद स्टोक्स ने पहला सेब का पौधा लगाया था, जिसने हिमाचल को 'एप्पल स्टेट' बनाया. आज वही धरती एक नई फसल उगा रही है. विकास, स्वच्छता और जागरूकता की फसल'.

बदलाव की असली कहानी
महात्मा गांधी जी का विचार था कि भारत का भविष्य उसके गांवों में बसता है. आज थानेधार पंचायत ने इसे सच कर दिखाया है. थानेधार पंचायत यह साबित करती है कि अगर सोच बड़ी हो तो संसाधनों की कमी मायने नहीं रखती. यहां लोग सिर्फ सरकारी मदद का इंतजार नहीं करते, बल्कि खुद बदलाव की मिसाल पेश करते हैं. हर काम में 'हम' का भाव झलकता है. चाहे वह कचरा प्रबंधन हो, डिजिटल सेवा या जिम. प्रधान कहते हैं कि 'हमारा उद्देश्य है कि हर पंचायत थानेधार की तरह आत्मनिर्भर बने, क्योंकि जब गांव बदलेंगे, तभी हिमाचल बदलेगा'.
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