बैंक की नौकरी छोड़ शुरू किया मशरूम उत्पादन, हो रही लाखों की कमाई, मैकेनिकल इंजीनियर ने रची सफलता की नई कहानी
सरकारी सहायता और उद्यान विभाग की मदद से प्रणव धर ने शुरू किया मशरूम उत्पादन, स्थानीय लोगों को दे रहे रोजगार. विपिन कुमार की रिपोर्ट

By ETV Bharat Himachal Pradesh Team
Published : August 23, 2026 at 9:20 PM IST
धर्मशाला: हिमाचल प्रदेश में मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए उद्यान विभाग की योजनाएं युवाओं और किसानों के लिए स्वरोजगार के नए अवसर खोल रही हैं. कांगड़ा जिले के प्रणव धर ने भी सरकारी सहायता का लाभ उठाकर मशरूम उत्पादन की दिशा में कदम बढ़ाया है. प्रणव धर ने उद्यान विभाग के सहयोग से मशरूम ग्रोइंग यूनिट स्थापित की है. यह परियोजना वित्तीय वर्ष 2026-27 मे एकीकृत बागवानी विकास मिशन के तहत स्वीकृत हुई है.
उद्यान विभाग से मिली इतनी वित्तीय सहायता
जिला कांगड़ा की तहसील नगरोटा बगवां के समलोटी गांव के प्रणव धर ने इस परियोजना के जरिए पारंपरिक खेती के साथ एक आधुनिक और लाभकारी कृषि व्यवसाय को अपनाया है. परियोजना की कुल लागत 60 से 70 लाख रुपए है, जबकि उद्यान विभाग की ओर से 15 लाख रुपए की सहायता प्रदान की गई है. मशरूम उत्पादन कम भूमि में बेहतर आय की संभावना वाला व्यवसाय माना जाता है और हिमाचल की जलवायु भी इसके लिए अनुकूल परिस्थितियां उपलब्ध कराती है.
ऐसे शुरू किया मशरूम उत्पादन
प्रणव धर ने बताया कि मशरूम उत्पादन का विचार उन्हें अपने परिचितों से मिला, जिन्होंने हरियाणा में बड़े स्तर पर मशरूम फार्म संचालित किए हैं. इसके बाद उन्होंने इस क्षेत्र में संभावनाओं को समझा और उद्यान विभाग की योजनाओं की जानकारी लेकर अपना प्रोजेक्ट तैयार किया. सरकारी योजनाओं के जरिए मिलने वाली आर्थिक सहायता ने परियोजना को धरातल पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ऐसे प्रयास न केवल किसानों की आय बढ़ाने में सहायक हैं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं. सामलोटी के प्रणव धर की पहल यह दर्शाती है कि आधुनिक कृषि तकनीक, सरकारी सहायता और उद्यमशीलता के मेल से ग्रामीण क्षेत्रों में सफल व्यवसाय खड़े किए जा सकते हैं.

बैंक की नौकरी छोड़ बने मशरूम उत्पादक
"मैंने प्रदेश सरकार के उद्यान विभाग की मदद से ये मशरूम ग्रोइंग यूनिट स्थापित किया है. मुझे मशरूम फार्मिंग का आइडिया मेरे कुछ दोस्तों से मिला, जो हरियाणा में बड़े स्तर पर मशरूम का फार्म चला रहे हैं. उन्होंने मुझे सुझाव दिया कि हिमाचल प्रदेश में भी इस काम की अच्छी संभावनाएं हैं. इसके बाद मैंने उद्यान विभाग से संपर्क किया और विभाग के सहयोग से लगभग छह महीने पहले इस फार्म की शुरुआत की. फार्म शुरू करने से पहले मैं बैंक में पीओ के पद पर काम करता था. मैंने दिल्ली से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की है, लेकिन मेरा मन था कि अपने गांव और अपने घर के पास रहकर ही कुछ ऐसा काम किया जाए, जिससे खुद के लिए रोजगार के साथ-साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार मिल सके. इसी सोच के साथ मैंने मशरूम फार्मिंग को अपना व्यवसाय बनाया." - प्रणव धर, मशरूम उत्पादक

पूरे साल में 50 टन से ज्यादा का उत्पादन
प्रणव धर ने बताया कि उनके फार्म में तीन कमरे हैं. एक कमरे में करीब 1600 से 2 हजार मशरूम बैग लगाए जा सकते हैं. एक कमरे से करीब साढ़े तीन टन तक मशरूम का उत्पादन हो जाता है. इस तरह पूरे साल में उनकी कुल उत्पादन क्षमता करीब 50 टन से ज्यादा है. इस फार्म में स्थानीय लोगों को रोजगार भी दिया गया है. यहां करीब 8 से 10 कर्मचारी काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं. इससे उन्हें अपने ही गांव के पास रोजगार का अवसर मिल रहा है. प्रवण ने कहा कि उनका मानना है कि अगर युवा सही जानकारी, तकनीक और सरकारी विभागों के सहयोग के साथ कृषि एवं बागवानी से जुड़े व्यवसाय शुरू करें, तो अपने घर और गांव में रहकर भी अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं और दूसरों को रोजगार दे सकते हैं.
6 महीने में 40 लाख रुपए का राजस्व
प्रवण धर ने बताया पिछले 6 महीनों में उन्हें फार्म से करीब 40 लाख रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है. कर्मचारियों की सैलरी और अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें करीब 20 प्रतिशत का लाभ प्राप्त हुआ है. यानी अब तक करीब 8 से 9 लाख रुपए का मुनाफा हो चुका है. उन्होंने बताया कि उनका मशरूम फार्म पूरे साल चलता है, क्योंकि यह वातानुकूलित है. यहां तापमान और नमी को नियंत्रित करने के लिए आधुनिक मशीनों और तकनीक का इस्तेमाल किया गया है. मशरूम की ग्रोथ और उत्पादन को बेहतर बनाए रखने के लिए जरूरी तकनीकी सुविधाएं भी यहां उपलब्ध हैं.

"मशरूम उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए बागवानी विभाग की विभिन्न योजनाएं, किसानों-बागवानों को लाभ मिल रहा है. बागवानी विभाग, हिमाचल प्रदेश सरकार द्वारा प्रदेश में मशरूम की खेती को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही हैं. इनमें मुख्य रूप से हिमाचल विकास योजना और एमआईटी-एच योजना के जरिए किसानों-बागवानों को मशरूम उत्पादन के लिए इकाइयां स्थापित करने के लिए सहायता प्रदान की जा रही है." - अलक्ष पठानिया, उप निदेशक, बागवानी विभाग कांगड़ा
कांगड़ा के 211 बागवान लाभान्वित
अलक्ष पठानिया ने बताया कि हिमाचल प्रदेश का वातावरण मशरूम उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल है. सामान्य परिस्थितियों में यहां सितंबर से अप्रैल तक मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है. विभाग द्वारा स्माॅल स्केल मशरूम यूनिट स्थापित करने के लिए प्रति इकाई एक लाख रुपए तक की सब्सिडी प्रदान की जा रही है. इसके अलावा बड़े स्तर पर उत्पादन इकाइयां स्थापित करने के लिए भी विभागीय योजनाओं के तहत सहायता उपलब्ध करवाई जा रही है. जिला कांगड़ा में इन योजनाओं के जरिए अब तक करीब 211 बागवान लाभान्वित हो चुके हैं. इनमें करीब 164 स्माॅल स्केल मशरूम यूनिट स्थापित हो चुकी हैं, जबकि करीब 42 उत्पादन इकाइयां भी स्थापित की गई हैं. इसके अलावा जिले में मशरूम उत्पादन के लिए तीन कंपोस्ट यूनिट भी स्थापित की गई हैं.
नई तकनीक से पूरे साल मशरूम उत्पादन
उप निदेशक अलक्ष पठानिया ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में मशरूम उत्पादन केवल 6 महीने तक ही किया जा सकता है, लेकिन अब जिले में कंट्रोल्ड एटमॉस्फियर तकनीक पर आधारित आधुनिक मशरूम उत्पादन इकाइयां स्थापित की जा रही हैं. इन इकाइयों में तापमान और वातावरण को नियंत्रित करके पूरे साल मशरूम का उत्पादन किया जा सकता है. ऑफ सीजन में मशरूम की बाजार में बेहतर कीमत मिलने के कारण बागवानों को इससे अतिरिक्त आय भी प्राप्त हो रही है. इससे स्थानीय लोगों को प्रत्यक्ष रूप से पूरे साल रोजगार उपलब्ध हो रहा है. ये इकाई स्वरोजगार के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन का भी बेहतर माध्यम बन रही है.

मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का अच्छा विकल्प
मशरूम की खेती कम भूमि और अपेक्षाकृत कम लागत में शुरू की जा सकती है. विभाग के अनुसार 10-10 फीट के कमरे में छोटे स्तर पर मशरूम उत्पादन शुरू करने में करीब 9 से 10 हजार रुपए की लागत आती है और उचित प्रबंधन के साथ ढाई से तीन महीने में करीब 25 से 30 हजार रुपए का शुद्ध लाभ प्राप्त किया जा सकता है. ऐसे में सीमित संसाधनों वाले युवाओं और बागवानों के लिए मशरूम उत्पादन स्वरोजगार का एक अच्छा विकल्प बन सकता है. अलक्ष पठानिया ने बताया कि बागवानी विभाग द्वारा मशरूम उत्पादन के इच्छुक किसानों-बागवानों को प्रशिक्षण की सुविधा भी उपलब्ध करवाई जा रही है, जिसके आधार पर बागवान अपनी मशरूम उत्पादन इकाई स्थापित करने के बाद विभाग की योजनाओं के तहत सब्सिडी के लिए आवेदन कर सकते हैं. मशरूम उत्पादन न केवल किसानों-बागवानों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि पूरे साल रोजगार के अवसर सृजित करने की भी क्षमता रखता है.

प्रवण धर को दी गई 25 प्रतिशत सब्सिडी
डीसी कांगड़ा हेमराज बैरवा ने बताया कि कांगड़ा जिले में बागवानी विभाग के जरिए विभिन्न योजनाओं के तहत किसानों को दी जा रही सहायता के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे हैं. इसका एक प्रेरणादायक उदाहरण नगरोटा बगवां के सबलोटी गांव के किसान प्रणव धर हैं. मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के बाद बैंकिंग क्षेत्र में कार्यरत रहे प्रणव धर को मशरूम उत्पादन के क्षेत्र में स्वरोजगार की प्रेरणा मिली. उन्होंने बागवानी विभाग की योजना का लाभ लेते हुए मशरूम यूनिट स्थापित की. विभाग की ओर से उन्हें करीब 25 प्रतिशत सब्सिडी प्रदान की गई. आज उनकी यूनिट में सालाना करीब 80 लाख रुपये का मशरूम उत्पादन हो रहा है और इससे उन्हें प्रतिवर्ष करीब 15 से 20 लाख रुपये की आय प्राप्त हो रही है.

"प्रणव धर का उदाहरण दर्शाता है कि सरकारी योजनाओं का सही उपयोग कर युवा कृषि एवं बागवानी के क्षेत्र में सफल उद्यमी बन सकते हैं. जिले में करीब 211 ऐसे किसान हैं, जिन्होंने स्माॅल स्केल मशरूम यूनिट स्थापित कर विभाग की सब्सिडी का लाभ लिया है और सफलतापूर्वक मशरूम उत्पादन कर रहे हैं. जिले के युवाओं से अपील की कि वे भी आगे आएं और मशरूम उत्पादन जैसी स्वरोजगार गतिविधियों को अपनाएं. इससे न केवल परिवार की आय बढ़ाई जा सकती है, बल्कि प्रदेश की आर्थिकी और देश की आर्थिक उन्नति में भी महत्वपूर्ण योगदान दिया जा सकता है." - हेमराज बैरवा, डीसी कांगड़ा

