समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही को बंद करने का कैट का आदेश निरस्त
पहले कैट ने कार्यवाही को निरस्त करते हुए कहा था कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बिना प्रक्रिया के पालन किए ही कार्यवाही शुरू की थी.

Published : February 27, 2026 at 3:03 PM IST
नई दिल्ली: दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो अधिकारी समीर वानखेड़े के खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही को निरस्त करने के केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल (कैट) के आदेश को निरस्त कर दिया है. जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल की अध्यक्षता वाली बेंच ने कैंट के आदेश के खिलाफ केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए ये आदेश दिया.
दरअसल, कैट ने 19 जनवरी को अपने आदेश में समीर वानखेड़े के खिलाफ शुरू की गई अनुशासनात्मक कार्यवाही को निरस्त कर दिया था. कैट ने कहा था कि समीर वानखेड़े के खिलाफ बिना प्रक्रियाओं का पालन किए ही अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू की गई थी. वहीं 18 अगस्त, 2025 को समीर वानखेड़े के खिलाफ जारी आरोप पत्र प्रक्रियाओं का दुरुपयोग है. आरोप पत्र में जो तथ्य पेश किए गए हैं वो विभागीय अनुशासनात्मक कार्यवाही का आधार नहीं बन सकते हैं. केंद्र सरकार ने कैट के इसी आदेश को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी. केंद्र सरकार ने कहा था कि समीर वानखेड़े के खिलाफ दिया गया आरोप पत्र किसी प्रतिबंधित तथ्य के आधार पर नहीं जारी किया गया था, बल्कि समीर वानखेड़े की ओर से पेश उस कॉल रिकॉर्ड के आधार पर था जो उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में दाखिल की थी.
बता दें कि, समीर वानखेड़े उस समय सुर्खियों में आए थे जब एनसीबी मुंबई की टीम ने कुछ बॉलीवुड हस्तियों से पूछताछ की थी. समीर वानखेड़े ने शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान को क्रूज पर ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था. आर्यन खान को क्लीन चिट मिलने के बाद समीर वानखेड़े का ट्रांसफर कर दिया गया था. समीर वानखेड़े ने आर्यन खान ड्रग्स मामले से जुड़े वेब सीरीज 'द बैड्स ऑफ बॉलीवुड' में अपने चित्रण को लेकर नेटफ्लिक्स, शाहरुख खान और सीरीज के निर्माताओं के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी. इस याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा था कि इस याचिका पर सुनवाई के लिए ये उचित फोरम नहीं है. हाईकोर्ट ने सीरीज के निर्माताओं के खिलाफ दायर मानहानि याचिका को बॉम्बे की कोर्ट में दाखिल करने की अनुमति दे दी थी.
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