हरियाणा के श्रम विभाग में 1500 करोड़ रुपए का घोटाला, खुद अनिल विज ने पकड़ा, CM से उच्चस्तरीय जांच की सिफारिश
हरियाणा के श्रम विभाग में कैबिनेट मंत्री अनिल विज की पैनी निगरानी के चलते 1500 करोड़ रुपए के घोटाले का पता चला है.

Published : December 29, 2025 at 6:17 PM IST
चंडीगढ़ : हरियाणा के श्रम मंत्री अनिल विज की सतर्क और पैनी निगरानी के चलते श्रम विभाग के अंतर्गत संचालित हरियाणा भवन एवं अन्य संनिर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड में लंबे समय से चली आ रही वर्कस्लिप (कार्य रसीद) से जुड़ी गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है. प्रारंभिक जांच में ये घोटाला लगभग 1500 करोड़ रूपए तक का होने की आशंका जताई जा रही है. मामले की गंभीरता को देखते हुए अनिल विज ने इस पूरे मामले की किसी प्रतिष्ठित जांच एजेंसी से गहन जांच कराने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है.
गड़बड़ियां सामने आई : पूरे मामले की जानकारी देते हुए श्रम मंत्री अनिल विज ने बताया कि हाल ही में उन्होंने बोर्ड की एक बैठक की अध्यक्षता की थी, जिसमें बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति में अनियमितताओं के साथ-साथ निर्माण श्रमिकों को दी जाने वाली योजनाओं के लाभ वितरण में भी गड़बड़ियां सामने आईं. इसके बाद उन्होंने तत्काल जांच के आदेश दिए.
वर्कस्लिपों का सत्यापन जारी : विज ने बताया कि प्रारंभिक तौर पर हिसार, कैथल, जींद, सिरसा, फरीदाबाद और भिवानी जिलों में जांच कराई गई, जहां बड़े पैमाने पर अनियमितताएं पाई गईं. इसके बाद राज्य के सभी जिलों के उपायुक्तों को निर्देश जारी कर जिला स्तरीय समितियों का गठन किया गया, जिनमें श्रम विभाग के अधिकारी सहित तीन अन्य अधिकारी शामिल किए गए. इन समितियों द्वारा अगस्त 2023 से मार्च 2025 के बीच जारी की गई ऑनलाइन वर्कस्लिपों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है. ये प्रक्रिया लगभग चार माह पूर्व शुरू की गई थी, जिसमें अब तक 13 जिलों में 100 प्रतिशत सत्यापन पूरा हो चुका है.
5,46,509 वर्कस्लिपें अवैध : श्रम मंत्री ने बताया कि इन 13 जिलों में करनाल, रेवाड़ी, नूंह (मेवात), महेंद्रगढ़, गुरुग्राम, झज्जर, पलवल, पानीपत, रोहतक, सोनीपत, पंचकूला, सिरसा और कैथल शामिल हैं. इन जिलों में कुल 5,99,758 वर्कस्लिपें जारी की गई थीं, जिनमें से केवल 53,249 वर्कस्लिपें वैध पाई गईं, जबकि 5,46,509 वर्कस्लिपें अवैध पाई गईं. इसी तरह कुल 2,21,517 श्रमिकों के पंजीकरण में से सत्यापन के बाद केवल 14,240 श्रमिक ही पात्र पाए गए, जबकि 1,93,756 पंजीकरण फर्जी पाए गए हैं.
अपात्र योजनाओं का लाभ उठा रहे : विज ने कहा कि ये स्पष्ट हो गया है कि कई स्थानों पर गांव के गांव फर्जी पंजीकरण कर वर्कस्लिपें बनाई गईं, ताकि अपात्र लोग सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकें. एक श्रमिक को विभिन्न योजनाओं के माध्यम से औसतन 2.5 लाख रूपए तक का लाभ दिया जाता है, जिससे सरकार को भारी वित्तीय क्षति होने की आशंका है. श्रम मंत्री ने कहा कि “जो पात्र नहीं हैं, वे योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं. ये सीधी-सीधी लूट है और सरकार को सैकड़ों करोड़ रुपये की आर्थिक हानि पहुंचाई जा रही है.”
नए आवेदन स्वीकार ना करने के निर्देश : उन्होंने बताया कि सत्यापन समितियों द्वारा कार्यस्थल की वास्तविकता, निर्माण कार्य में सहभागिता, नियोक्ता विवरण, स्थानीय जांच और क्षेत्र भ्रमण सहित सभी पहलुओं की जांच की जा रही है. जांच अवधि के दौरान आरटीएस की समय-सीमा रोकी गई, सरल केंद्रों को नए आवेदन स्वीकार ना करने के निर्देश दिए गए और सभी शिकायत निवारण प्लेटफार्मों को आवश्यक सूचनाएं जारी की गईं. अनिल विज ने स्पष्ट किया कि पहले से मंजूर की गई पेंशन योजनाओं को रोका नहीं गया है, जबकि मृत्यु, दुर्घटना एवं अंत्येष्टि सहायता जैसी योजनाओं का लाभ प्राथमिकता के आधार पर जारी किया जा रहा है.
"दोषियों के खिलाफ होगी कठोर कार्रवाई" : उन्होंने बताया कि हरियाणा में निर्माण श्रमिकों के लिए मातृत्व-पितृत्व लाभ, शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति, तकनीकी शिक्षा प्रतिपूर्ति, पेंशन, विवाह सहायता, चिकित्सा सहायता, आवास ऋण, दुर्घटना मुआवजा सहित अनेक कल्याणकारी योजनाएं संचालित हैं, जिनका उद्देश्य वास्तविक श्रमिकों का सशक्तिकरण है. इन योजनाओं का लाभ केवल उन्हीं श्रमिकों को मिलना चाहिए जो 90 दिनों के कार्य सत्यापन के बाद रजिस्टर्ड हो. श्रम मंत्री ने दोहराया कि भ्रष्टाचार पर किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.
इन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ : अनिल विज ने बताया कि हरियाणा में भवन निर्माण में लगे श्रमिकों को विभिन्न प्रकार की कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्रदान किया जाता है जिनमें मातृत्व लाभ 36 हजार रुपये, पितृत्व लाभ 21 हजार रुपये, पंजीकृत कामगार के बच्चों की शिक्षा हेतु दिए जाने वाले लाभों के अंतर्गत बच्चों की पहली कक्षा से उच्च शिक्षा तक की वार्षिक वित्तीय सहायता 8,000 रुपये से 20,000 रुपये तक, पंजीकृत कामगारों के मेधावी बच्चों के 10वीं/12वी की परीक्षा में 60 प्रतिशत से 90 प्रतिशत अंक प्राप्ति पर 21 हजार रुपये से 51 हजार रूपए छात्रवृत्ति, वास्तविक सरकारी खर्च के अनुसार कामगार के बच्चों को प्रोफेशनल और टेक्निकल कोर्स के लिए पूर्ण शैक्षणिक व्यय की प्रतिपूर्ति, कामगार के बच्चों को व्यवसायिक संस्थानों में हॉस्टल सुविधा हेतु 1 लाख 20 हजार रुपये तक सहायता राशि, पंजीकृत कामगार के बच्चों को व्यावसायिक कोर्स की कोचिंग हेतु 20 हजार रुपये से एक लाख रुपये तक सहायता राशि, पंजीकृत निर्माण कर्मकार की बेटी के लिए इलेक्ट्रिक स्कूटर की खरीद के लिए 50 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि और मुख्यमंत्री श्रम योगी प्रतिभावान योजना के तहत लैपटॉप के लिए 49 हजार रुपये की राशि दी जाती है. साइकिल की खरीद की अदायगी के लिए 5,000 रुपये, औजार के लिए अनुदान 8,000 रुपये, सिलाई मशीन के लिए 4,500 रुपये, मुख्यमंत्री महिला निर्माण श्रमिक सम्मान योजना के तहत 5,100 रुपये, कन्यादान योजना के तहत 3 बच्चों की शादी के लिए वित्तीय सहायता जिसमें बेटी के लिए 1,01,00 रुपये, महिला श्रमिक की स्वयं की शादी के लिए 50,000 रुपये की वित्तीय सहायता की राशि दी जाती है.
मकान के लिए ब्याज मुक्त ऋण : उन्होंने बताया कि मकान की खरीद/निर्माण हेतु ब्याज मुक्त ऋण 2 लाख रुपये तक और मुख्यमंत्री पंजीकरण प्रोत्साहन योजना के तहत 1,100 रुपये की राशि श्रमिकों को दी जाती है. उन्होंने कहा कि इन सुविधाओं को लेने के लिए श्रमिक बोर्ड में कामगारों को अपने आपको पंजीकृत करवाना होता है. उन्होंने बताया कि पंजीकरण करने के लिए श्रमिक का 90 दिन से ज्यादा कार्य करने का वेरीफिकेशन/सत्यापन किया जाता है और वेरीफिकेशन होने के बाद ही पंजीकरण किया जाता है
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