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हरिद्वार बाघ शिकार मामला: खोजी कुत्ते भी ना ढूंढ सके लापता बाघिन, पग चिह्नों से मिली महकमे को राहत

हरिद्वार में दो बाघों के शिकार मामले 4 आरोपी हो चुके गिरफ्तार, अभी भी बाघिन लापता, फुटप्रिंट मिलने से जगी उम्मीद तो सवाल भी बरकरार

Haridwar Tiger Hunting Case
कहां गई बाघिन (फाइल फोटो- ETV Bharat)
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By ETV Bharat Uttarakhand Team

Published : May 24, 2026 at 9:27 PM IST

7 Min Read
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नवीन उनियाल, देहरादून: हरिद्वार फॉरेस्ट डिवीजन में दो बाघों की मौत के बाद वन महकमे के पास सबसे बड़ा टास्क जहां अपराधियों को पकड़ना था, तो इससे भी बड़ी चिंता उस बाघिन को लेकर थी, जो इस घटना के बाद से ही लापता है. माना जा रहा है कि भैंस के शिकार के दौरान अपने बच्चों के साथ यह बाघिन भी मौजूद थी, लेकिन तब से अब तक एक हफ्ते में इसे कहीं भी नहीं देखा गया है.

हरिद्वार वन प्रभाग के श्यामपुर रेंज में दो बाघों की मौत के बाद वन विभाग की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है, एक तरफ विभाग शिकार के आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश में जुटा है, तो दूसरी ओर उस बाघिन की तलाश सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है, जो इस पूरी घटना के बाद से लापता बताई जा रही है.

बाघिन की तलाश बनी बड़ी चुनौती (वीडियो सोर्स- ETV Bharat)

माना जा रहा है कि मारी गई भैंस का शिकार इसी बाघिन ने अपने दो शावकों के साथ किया था, लेकिन घटना के करीब एक हफ्ते बाद भी बाघिन का कोई स्पष्ट सुराग नहीं मिल पाया है. यही वजह है कि वन विभाग से लेकर मुख्यालय तक इस मामले को लेकर बेचैनी बनी हुई है. श्यामपुर रेंज में इन दिनों वन विभाग की गतिविधियां तेज हो गई हैं.

जंगलों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है. खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है और वन विभाग का पूरा अमला इलाके में तैनात है. इसके अलावा Wildlife Crime Control Bureau यानी डब्ल्यूसीसीबी की टीम भी जांच में जुट चुकी है. मामला शेड्यूल 1 श्रेणी के वन्यजीव के शिकार से जुड़ा होने के कारण विभाग इस मामले को बेहद गंभीरता से ले रहा है.

Haridwar Tiger Hunting Case
इस जगह बाघों का शिकार (फाइल फोटो- Forest Department)

बाघों को मारने के मामले में अब तक 4 आरोपी गिरफ्तार: अब तक वन विभाग इस मामले में चार लोगों को गिरफ्तार कर चुका है, लेकिन मुख्य आरोपी अभी भी फरार बताया जा रहा है. सबसे बड़ी बात यह है कि जिस हथियार से मृत बाघों के पंजे काटे गए, वो हथियार अब तक बरामद नहीं हो पाया है. इससे जांच एजेंसियों की चिंता और बढ़ गई है.

बाघिन की तलाश लगातार जारी: वन विभाग की शुरुआती जांच में माना जा रहा है कि एक भैंस का शिकार बाघिन और उसके दो शावकों ने मिलकर किया था. बाद में शिकारियों ने उसी मृत भैंस के मांस में जहर मिलाकर बाघों को निशाना बनाया.

इसके बाद दो कम उम्र के बाघों के शव अलग-अलग स्थानों से बरामद हुए, लेकिन उनकी मां कही जाने वाली बाघिन तब से गायब है. यही बात पूरे मामले को और ज्यादा रहस्यमयी बना रही है. वन विभाग का कहना है कि बाघिन की तलाश लगातार जारी है.

शिकार से जुड़े सबूतों को इकट्ठा करने के दौरान खोजी कुत्तों की मदद से भी बाघिन को खोजने का प्रयास किया गया. इसके अलावा पूरे इलाके में करीब 15 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं. ताकि, बाघिन की मूवमेंट रिकॉर्ड हो सके, लेकिन हैरानी की बात ये है कि एक हफ्ता बीतने के बाद भी बाघिन किसी भी कैमरे में कैद नहीं हुई है.

Haridwar Tiger Hunting Case
प्रमुख वन सरंक्षक हॉफ आरके मिश्रा का बयान (फोटो- ETV Bharat GFX)

बाघ के मिले पग चिह्न, लेकिन सवाल बरकरार: हालांकि, वन विभाग को कुछ राहत उस समय मिली, जब इसी क्षेत्र में बाघ के पग चिह्न मिलने का दावा किया गया. अधिकारियों का कहना है कि जंगल में मिले पग मार्क इस बात का संकेत हो सकते हैं कि बाघिन अभी जीवित है, लेकिन इसके बावजूद कई सवाल लगातार खड़े हो रहे हैं.

माना जा रहा है कि यदि भैंस का शिकार बाघिन ने अपने शावकों के साथ किया था, तो संभव है कि उसने भी उस मांस को खाया हो. ऐसे में यदि शिकार में जहर का इस्तेमाल किया गया था, तो बाघिन के प्रभावित होने की आशंका भी बनी रहती है. यही वजह है कि उसके सुरक्षित होने को लेकर संशय बना हुआ है.

Haridwar Tiger Hunting Case
बाघ के शिकार के मामले में गिरफ्तार वन गुर्जर (फाइल फोटो- Forest Department)

अपने छोटे बच्चों को लंबे समय तक अकेला नहीं छोड़ती बाघिन: एक और बड़ा सवाल ये भी उठ रहा है कि कोई भी बाघिन अपने छोटे बच्चों को लंबे समय तक अकेला छोड़कर नहीं जाती. खासतौर पर तब जब शावक पूरी तरह आत्मनिर्भर न हुए हों.

जानकारों का कहना है कि यदि शावक लंबे समय तक मां से दूर रहते हैं, तो जंगल में उनकी आवाज और गतिविधियां साफ दिखाई देती हैं, लेकिन यहां स्थिति इसके उलट नजर आ रही है. न तो बाघिन दिखाई दे रही है और न ही उसके शावकों की कोई स्पष्ट गतिविधि सामने आई है.

क्या छोटे शावक अकेले इतना बड़ा शिकार कर सकते थे? हालांकि, वन विभाग की इस दलील पर भी सवाल उठ रहे हैं. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि मृत बाघों की उम्र काफी कम थी और उनके दांत भी पूरी तरह विकसित नहीं हुए थे.

ऐसे में विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि क्या इतने छोटे शावक अकेले इतनी बड़ी भैंस का शिकार कर सकते थे. यदि शावकों की उम्र दो वर्ष से कम थी, तो फिर उनकी मां उन्हें छोड़कर इतनी जल्दी कैसे अलग हो गई?

वन विभाग फिलहाल पग मार्क के आधार पर बाघिन के जीवित होने की संभावना जता रहा है, लेकिन जैसे-जैसे समय बीत रहा है, वैसे-वैसे संदेह भी गहराता जा रहा है. सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि बाघिन जंगल में मौजूद है और उसके पग चिह्न भी मिल रहे हैं, तो फिर वो किसी भी कैमरा ट्रैप में रिकॉर्ड क्यों नहीं हो रही?

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बाघों के शिकार के बाद वन महकमे में मचा हड़कंप (फाइल फोटो- Forest Department)

बाघिन की सुरक्षा और उसके अस्तित्व से जुड़ा है सवाल: वन विभाग के लिए यह मामला केवल शिकार की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि अब यह बाघिन की सुरक्षा और उसके अस्तित्व से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है. जंगल में लगातार सर्च अभियान चल रहा है, लेकिन अभी तक कोई ठोस सफलता हाथ नहीं लगी है.

फिलहाल, पूरा वन महकमा इस बाघिन को लेकर चिंतित है. आने वाले दिनों में जांच किस दिशा में जाती है और बाघिन सुरक्षित मिलती है या नहीं, इस पर सबकी नजर बनी हुई है, लेकिन इतना जरूर है कि दो बाघों की मौत के बाद पैदा हुआ यह मामला अब वन विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन चुका है और इसकी गुत्थी सुलझाना आसान नहीं होगा.

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