सूरत पुलिस की बड़ी कामयाबी : साइबर गिरोह का पर्दाफाश, 5 गिरफ्तार, राजस्थान से दुबई तक नेटवर्क
पुलिस ने आरोपियों के पास से 21 मोबाइल के अलावा कई सिम कार्ड व एटीएम व पासबुक बरामद की हैं.

Published : March 1, 2026 at 5:05 PM IST
सूरत: गुजरात के सूरत जिले की अलथान पुलिस ने एक बड़े साइबर गिरोह का पर्दाफाश किया है. यह गिरोह आम लोगों के नाम पर बैंक खाते खोलकर साइबर माफिया को डेटा सप्लाई करता था. सूरत से शुरू हुआ यह नेटवर्क राजस्थान के अजमेर और बॉर्डर पार दुबई तक फैला हुआ था. पुलिस ने इस मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है. पुलिस ने मौके से 21 मोबाइल फोन, 33 सिम कार्ड, 88 एटीएम कार्ड और 36 पासबुक समेत कीमती सामान जब्त किया है.
पुलिस के मुताबिक गिरफ्तार किए गए लोगों में एक क्यूआर कोड एक्सपर्ट, एक कपड़ा व्यापारी और एक ज्वैलर समेत 5 लोग शामिल हैं. आरोपियों के 35 अकाउंट में 11 करोड़ से अधिक के संदिग्ध ट्रांजैक्शन मिलने के बाद पुलिस ने जांच तेज कर दी है.
एटीएम कार्ड सुरक्षित रखने दो किताबों का इस्तेमाल
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि आरोपियों के पास से ‘साइकोलॉजी ऑफ मनी’ और ‘मैसेज ऑफ कल्चर इन द रामायण’ नाम की दो किताबें बरामद हुई हैं. आरोपी इन किताबों का इस्तेमाल ज्ञान हासिल करने के लिए नहीं, बल्कि इस्तेमाल किए गए या ब्लॉक किए गए एटीएम कार्ड को सुरक्षित रखने के लिए कर रहे थे. धार्मिक और आर्थिक ज्ञान देने वाली किताबों के अंदर कार्ड चिपकाने का यह तरीका देखकर पुलिस भी हैरान रह गई.

डमी पार्सल से पकड़े गए आरोपी
मुख्य मास्टरमाइंड भाविक उर्फ प्रिंस की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि बैंक का सामान (पासबुक,एटीएम, सिम कार्ड) कूरियर से सूरत से अजमेर भेजा जाता है. गिरोह को फंसाने के लिए पुलिस ने एक ‘डमी पार्सल’ तैयार करके अजमेर के एक पते पर भेजा. जैसे ही सुरेंद्र अजमेर में पार्सल लेने आया, सूरत पुलिस, जो नजर रखे हुए थी, ने उसे पकड़ लिया. उसके बाद उसके ठिकाने पर छापा मारा गया और एक और साथी गोविंद को भी गिरफ्तार कर लिया गया.
पुलिस की गिरफ्त में आए आरोपी
- भाविक उर्फ प्रिंस श्रीवास्तव (29): कतारगाम का रहने वाला, क्यूआर कोड एक्सपर्ट, डेटा ट्रांसफर का काम करता था.
- रवि गबानी (41): सिंगनपोर का हीरा कारीगर, अकाउंट किट मैनेज करता था.
- तरुण राठौड़ (44): कपड़ा व्यापारी, बैंक अकाउंट की व्यवस्था करता था.
- सुरेंद्र उर्फ बालकिशन (25): राजस्थान का रहने वाला है, अजमेर में पार्सल लेता था.
- गोविंद सिद्ध (21): अजमेर में किराए के मकान में साइबर कंट्रोल रूम चलाता था.
जांच में पता चला है कि सूरत की लाजपोर जेल में बंद रवि और तरुण जमीनी स्तर से अकाउंट इकट्ठा करते थे. इन अकाउंट की किट अजमेर भेजी जाती थी, जहां से दुबई में बैठे साइबर माफिया इन अकाउंट को ऑपरेट करते थे और करोड़ों रुपये कमाते थे.
ये भी पढ़ें- जामताड़ा गैंग से जुड़े तीन लोग गिरफ्तार, 227 क्रेडिट कार्ड जब्त, ₹92.53 लाख के ट्रांजैक्शन का पता चला

